मोदीजी ने भारत में नया सवेरा ला दिया, नारीशक्ति को देवी दुर्गा बना दिया"— अरविन्द सिसोदिया

आलेख 

मोदीजी के प्रधानमंत्री के रूप में बारह वर्ष पूर्ण करने के अवसर पर
"मोदीजी ने भारत में नया सवेरा ला दिया, नारीशक्ति को देवी दुर्गा बना दिया"

— अरविन्द सिसोदिया
भारत की संस्कृति में नारी को सदा शक्ति, सृजन और संस्कार का प्रतीक माना गया है। सनातन संस्कृति में भगवान शिव को अर्धनारीश्वर स्वरूप में स्वीकार कर नारीशक्ति को बराबरी का दर्जा दिया गया है। सनातन संस्कृति में देवी दुर्गा, देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती महिला स्वरूप होकर समाज का आधारभूत अस्तित्व हैँ। यह विश्व की किसी भी अन्य संस्कृति और सभ्यता में देखने को नहीं मिलता। इसी सम्मान को प्रधानमंत्री मोदीजी ने सबसे अधिक बढ़ाया और महिलाओं को नई गरिमा प्रदान की है।

अवसर में महिलाओं को प्राथमिकता 

इतिहास गवाह है कि जब-जब महिलाओं को अवसर, सम्मान और अधिकार मिले हैं, तब-तब राष्ट्र और समाज ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को केवल एक सरकारी योजना या राजनीतिक नारा नहीं माना गया, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया। यही कारण है कि आज देश में यह भावना प्रबल हुई है कि “मोदीजी ने भारत में नया सवेरा ला दिया, नारीशक्ति को देवी दुर्गा बना दिया।”

वीमेन लीड डेवलपमेंट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “वीमेन डेवलपमेंट ” की पारंपरिक सोच से आगे बढ़ते हुए “वीमेन लीड डेवलपमेंट ” अर्थात “महिला-नेतृत्व वाले विकास” की अवधारणा को राष्ट्रीय नीति का केंद्र बनाया। यह सोच केवल महिलाओं को लाभार्थी मानने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें विकास की निर्णायक शक्ति बनाने की दिशा में परिवर्तित हुई।

राजनीतिक सशक्तिकरण

राजनीतिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के रूप में सामने आया। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला यह कानून दशकों से लंबित था, जिसे मोदी सरकार ने साकार कर इतिहास रच दिया। यह केवल कानून नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को सम्मान देने वाला स्वर्णिम अध्याय है। आने वाले समय में यह निर्णय देश की राजनीति और नीति-निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करेगा।

महिलाओं को आत्मनिर्भरता

आर्थिक क्षेत्र में भी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हुए। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने लाखों महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने और स्वरोजगार अपनाने का अवसर दिया। आज गांवों और कस्बों की महिलाएं सिलाई, डेयरी, हस्तशिल्प, दुकान, सेवा उद्योग और छोटे उद्यमों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह उल्लेखनीय है कि मुद्रा योजना के अधिकांश लाभार्थी महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने परिवार और समाज की आर्थिक स्थिति बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

महिलाओं को कौशल में बढ़ावा

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए “लखपति दीदी” योजना ने नई आशा जगाई है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कौशल, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य करोड़ों महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाकर गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसी प्रकार “ड्रोन दीदी योजना” ने यह संदेश दिया है कि भारतीय महिलाएं अब केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक तकनीक और कृषि नवाचारों में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।

महिला समस्याओं का निदान

महिलाओं के सम्मान और जीवन को सरल बनाने के लिए भी अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए। तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति प्रदान की गई। वहीं उज्ज्वला योजना ने करोड़ों गरीब माताओं-बहनों को धुएं से भरे चूल्हों से मुक्ति दिलाई। यह योजना केवल गैस कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सुविधा से जुड़ी एक सामाजिक क्रांति बन गई।

स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत करोड़ों शौचालयों का निर्माण महिलाओं के लिए सुरक्षा, गोपनीयता और गरिमा का आधार बना। गांवों की महिलाओं को खुले में शौच जैसी पीड़ा से मुक्ति मिली, जो वास्तव में उनके सम्मान की रक्षा का बड़ा कदम था।
संपत्ति में सहभागिता

प्रधानमंत्री आवास योजना ने भी महिलाओं को संपत्ति का अधिकार देकर उनके सामाजिक और आर्थिक आत्मविश्वास को मजबूत किया। लाखों घरों की रजिस्ट्री महिलाओं के नाम पर या संयुक्त रूप से की गई, जिससे वे केवल गृहिणी नहीं, बल्कि संपत्ति की स्वामिनी भी बनीं। यह परिवर्तन भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति को नई मजबूती देने वाला सिद्ध हुआ।

महिला उत्पीड़न से मुक्ति और सुरक्षा की सर्वोच्चता

महिलाओं की सामाजिक और कानूनी सुरक्षा के क्षेत्र में भी मोदी सरकार ने निर्णायक फैसले लिए। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्ति दिलाना एक ऐतिहासिक सामाजिक सुधार माना गया। सदियों से पीड़ा झेल रही लाखों महिलाओं को न्याय और सम्मान मिला। इसी प्रकार कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करना महिलाओं के स्वास्थ्य और मातृत्व सम्मान के प्रति संवेदनशीलता का बड़ा उदाहरण है।

बेटी बचाओ के परिणाम आए

बेटियों के सुरक्षित भविष्य और शिक्षा के लिए “सुकन्या समृद्धि योजना” ने करोड़ों परिवारों में नई आशा जगाई। इस योजना ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान को आर्थिक मजबूती प्रदान की और बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में समाज को प्रेरित किया।

महिलाओं को बराबरी का दर्जा

रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है। आज भारतीय बेटियां सैनिक स्कूलों और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश ले रही हैं, लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं और सेना में स्थायी कमीशन प्राप्त कर देश की सुरक्षा में अग्रिम भूमिका निभा रही हैं। यह परिवर्तन केवल अवसर का नहीं, बल्कि भारतीय नारी शक्ति के आत्मविश्वास और सामर्थ्य का प्रतीक है।

सशक्त महिला, सशक्त समाज

आज भारत की महिलाएं राजनीति, विज्ञान, शिक्षा, व्यापार, सेना, खेल, अंतरिक्ष और तकनीक हर क्षेत्र में अपनी नई पहचान बना रही हैं। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया, बल्कि इसके पीछे वह दृष्टि और नीतियां हैं जिन्होंने महिलाओं को “सशक्त नागरिक” के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया।

निस्संदेह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व को नई दिशा मिली है। भारतीय नारी अब केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी आधारशिला बनकर उभर रही है। यही कारण है कि आज करोड़ों लोग विश्वास के साथ कहते हैं — “मोदीजी ने भारत में नया सवेरा ला दिया, महिलाओं को देवी दुर्गा बना दिया।”

— अरविन्द सिसोदिया
राधाकृष्ण मंदिर रोड, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन
पिनकोड – 324002



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