साइबर हमले


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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अनुसार, 4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों की मतगणना के दिन चुनाव आयोग के मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (ECINET) और परिणाम पोर्टल पर 68 लाख से अधिक साइबर हमले (malicious hits) दर्ज किए गए थे, जिन्हें सुरक्षा प्रणालियों द्वारा सफलतापूर्वक विफल कर दिया गया। 
चुनाव आयोग के आधिकारिक बयानों के अनुसार इस घटना का मुख्य विवरण निम्नलिखित है:-

## साइबर हमलों का मुख्य विवरण

* हमलों की संख्या: मतगणना के एकल दिन में 68 लाख से अधिक संदिग्ध और दुर्भावनापूर्ण साइबर हमले रिकॉर्ड किए गए। 
* हमलों का स्रोत: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अनुसार, ये साइबर हमले भारत और विदेशों (अंतरराष्ट्रीय स्तर) दोनों जगहों से उत्पन्न हुए थे। [3] 
* मुख्य निशाना: हैकर्स का मुख्य उद्देश्य भारत निर्वाचन आयोग के महत्वपूर्ण चुनावी प्लेटफॉर्म और विशेष रूप से लाइव रिजल्ट्स (मतगणना परिणाम) दिखाने वाले पोर्टल को प्रभावित करना था। 

## डेटा ट्रैफ़िक और सुरक्षा प्रबंधन

* रिकॉर्ड ट्रैफिक: मतगणना वाले दिन निर्वाचन आयोग के ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रति मिनट औसतन 3 करोड़ हिट्स का भारी ट्रैफिक आ रहा था। 

* सुरक्षा प्रोटोकॉल: आयोग की मजबूत साइबर सुरक्षा प्रणाली और फायरवॉल लॉग्स के कारण इन सभी 68 लाख हमलों को रीयल-टाइम में ट्रैक किया गया और बिना किसी व्यवधान के परिणामों की लाइव रिपोर्टिंग सुरक्षित रखी गई। 

यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सुरक्षा प्रणालियाँ हर एक छोटे-बड़े साइबर अटैक और हैकिंग के प्रयास का सटीक संख्यात्मक रिकॉर्ड रखती हैं। 
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साइबर अटैक या हैकिंग की कोशिशों का पूरा रिकॉर्ड (logs) होता है। जब भी कोई हैकर किसी वेबसाइट पर हमला करता है, तो वेबसाइट का सर्वर उस गतिविधि को कई जगह सुरक्षित कर लेता है।

वेबसाइट पर होने वाली इन कोशिशों का रिकॉर्ड यहाँ रखा जाता है:

* सर्वर लॉग (Server Logs): वेबसाइट का सर्वर हर आने वाले अनुरोध (request) का समय, आईपी एड्रेस (IP Address), और मांगी गई जानकारी दर्ज करता है।
* फायरवॉल लॉग (Firewall Logs): सुरक्षा प्रणाली (Firewall) ब्लॉक किए गए और संदिग्ध हमलों का पूरा रिकॉर्ड रखती है।
* एप्लिकेशन लॉग (Application Logs): वेबसाइट का सॉफ्टवेयर (जैसे वर्डप्रेस) गलत पासवर्ड डालने या डेटा चोरी की कोशिशों को नोट करता है।
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नहीं, इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट या सर्वर का 'हैकिंग' नहीं माना गया है, बल्कि तकनीकी भाषा में इसे 'डेटा प्रिंटिंग एरर' (फ़ोटो मिसमैच) और 'स्टॉक इमेज' का गलत इस्तेमाल पाया गया है। 

नवंबर 2025 में राहुल गांधी ने अपनी 'The H-Files' प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरियाणा चुनाव की वोटर लिस्ट में [ब्राजील की एक महिला (लारिसा नेरी)](https://www.thehindu.com.en2hi.search.translate.goog/news/national/rahul-gandhis-presser-puts-spotlight-on-brazilian-woman-internet-abuzz-with-her-reaction/article70249908.ece) की फोटो अलग-अलग नामों (जैसे सीमा, स्वीटी, सरस्वती) के साथ 22 बार छपने का मुद्दा उठाया था। इस अजीबोगरीब गड़बड़ी के पीछे की वास्तविक सच्चाई जांच में इस प्रकार सामने आई: 

## 1. विदेशी महिला की फोटो वोटर लिस्ट में कैसे आई?

* फ्री स्टॉक इमेज: वास्तव में वह फोटो एक ब्राजीलियाई ब्यूटीशियन की थी, जिसे 2017 में एक फोटोग्राफर ने Unsplash और Pexels जैसी फ्री इमेज वेबसाइटों पर अपलोड किया था, जहाँ से कोई भी इसे मुफ्त में डाउनलोड कर सकता है। 

* सिस्टम डिफ़ॉल्ट/टेस्टिंग एरर: वोटर लिस्ट के सॉफ्टवेयर या डेटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा टेस्टिंग के दौरान या खाली फोटो स्लॉट को भरने के लिए इंटरनेट से उठाई गई इस 'डिफ़ॉल्ट इमेज' का बार-बार इस्तेमाल हो गया। [4, 6] 

## 2. ग्राउंड रियलिटी (ग्राउंड चेक में क्या मिला?)

* वास्तविक महिलाएं मौजूद थीं: मीडिया हाउसों 

ने जब जमीनी स्तर पर उन गांवों का दौरा किया जहाँ ये 22 वोटर कार्ड रजिस्टर्ड थे, तो पाया कि पिंकी और मुनीष देवी नाम की वास्तविक भारतीय महिलाएं वहाँ रहती हैं। 

* गलत फोटो प्रिंटिंग: उन स्थानीय महिला मतदाताओं ने बताया कि उनके वोटर आईडी पर नाम, पता और पति का नाम बिल्कुल सही था, लेकिन केवल फोटो की जगह उस विदेशी महिला की फोटो प्रिंट हो गई थी। उन्होंने मतदान के दिन अपने आधार कार्ड का उपयोग करके वैध तरीके से वोट डाला था। 

## 3. चुनाव आयोग (ECI) का रुख

* हैक की संभावना से इनकार: भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट के मुख्य डेटाबेस में कोई बाहरी हैकिंग या बदलाव नहीं हुआ है। 

* मैन्युअल डेटा एंट्री की कमी: आयोग ने इसे डेटा ऑपरेटरों की प्रिंटिंग और वेरिफिकेशन स्तर की गलती माना, न कि किसी सोची-समझी डिजिटल हैकिंग या 'वोट चोरी' की साजिश। 

निष्कर्ष: यद्यपि यह वोटर लिस्ट प्रबंधन में चुनाव आयोग की एक गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही (लापरवाह प्रिंटिंग) थी, जो वास्तव में नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन इसे वेबसाइट हैक करके डेटा बदलने की घटना नहीं माना गया है। [2, 9] 


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