कविता - मातृभूमि के मतवालों का, एक संदेशा आया है,

 - अरविन्द सिसोदिया 

मातृभूमि के मतवालों का, एक संदेशा आया है,

किसी फेर में मत रहना, आज़ादी को बलिदानों से पाया है।

लाखों वीरों ने शीश कटाए, तब भारत मुस्काया है,

करोड़ों माताओं ने अपने लालों को हँसकर गँवाया है।

रक्त की हर बूंद ने मिलकर यह स्वर्णिम इतिहास बनाया है,

किसी फेर में मत रहना, आज़ादी को बलिदानों से पाया है।


जलियाँवाला की धरती पूछे, कितना रक्त बहाया था,

फाँसी के फंदों पर वीरों ने हँसते-हँसते गीत सुनाया था।

सीने पर गोली खाकर भी जिसने वंदे मातरम् गाया था,

उस बलिदानी पीढ़ी ने ही स्वतंत्र भारत बनवाया था।


गद्दारों ने तब भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी,

अपनों के वेश में छिपकर भारत की जड़ें तोड़ी थीं।

आज भी उनके वंशज अवसर पाकर विष फैलाते हैं,

राष्ट्रभक्ति के दीप जलें तो अंधियारे घबराते हैं।


सावधान रहो भारतवासियो, षड्यंत्रों का जाल बिछा है,

सीमा पर दुश्मन खड़ा हुआ है, भीतर भी संकट खड़ा है।

जो भारत की एकता पर प्रहार करे, पहचानो उसको,

राष्ट्रहित से ऊपर खुद को रखे, तो जानो उसको।


मौत का भय सिर से छिटक दो, कोई नहीं टिक पाया है,

कालचक्र के आगे आखिर हर साम्राज्य झुक पाया है।

लेकिन जिसने राष्ट्रधर्म पर जीवन अर्पित कर डाला,

उसका नाम अमर होकर पीढ़ी-पीढ़ी में समाया है।


जब-जब सीमा ललकारेगी, रणभेरी बज जाएगी,

भारत माँ के वीर सपूतों की सेना उमड़ आएगी।

एक नहीं, सौ बार लड़ेंगे, यदि संकट फिर छाया है,

किसी फेर में मत रहना, आज़ादी को बलिदानों से पाया है।


जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को तोड़ना चाहेंगे,

वे इतिहास के कूड़ेदान में अपना नाम लिखाएंगे।

जो आतंक और हिंसा के बल पर भारत को झुकवाएंगे,

वे भारत की ज्वाला में स्वयं भस्म हो जाएंगे।


हम गौतम, गांधी के वंशज हैं, पर कमजोरी नहीं हमारी,

जब-जब शांति पर वार हुआ है, बनी प्रचंड तलवार हमारी।

हमने युद्ध नहीं माँगा है, पर युद्ध थोपने वालों सुन लो,

भारत के स्वाभिमान से टकराने वालों, यह भी सुन लो—


हर घर से अब भगत निकलेंगे, हर आँगन आज़ाद मिलेगा,

हर माँ की आँखों में फिर से राष्ट्रधर्म का नाद मिलेगा।

यदि मातृभूमि पुकार उठेगी, सब कुछ अर्पण कर जाएंगे,

भारत माँ के चरणों में अपना जीवन धर जाएंगे।


मातृभूमि के मतवालों का, एक संदेशा आया है,

सोए हुए स्वाभिमान को फिर जगाने का समय आया है।

राष्ट्र सर्वोपरि है, यह उद्घोष गगन तक छाया है,

किसी फेर में मत रहना, आज़ादी को बलिदानों से पाया है।


वन्दे मातरम्!

भारत माता की जय!

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