Diclofenac
हाँ, आपकी जानकारी बिल्कुल सही है।
गिद्धों की लगभग पूरी आबादी (तकरीबन 95% से अधिक) के विलुप्त होने का सबसे मुख्य कारण डाइक्लोफेनाक (Diclofenac) नामक दर्द निवारक दवा ही है।
इस पूरी त्रासदी की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार थी:
* दवा का उपयोग: यह दवा मवेशियों (गाय, भैंस) को दर्द, बुखार या सूजन से राहत देने के लिए पशु चिकित्सा में उपयोग की जाती थी।
* गिद्धों तक पहुंच: जब ऐसे मवेशियों की मृत्यु हो जाती थी और उनके शवों (कर्कश) को गिद्ध खाते थे, तो यह दवा उनके शरीर में पहुंच जाती थी।
* किडनी फेल होना और मौत: गिद्धों के शरीर में इस दवा को पचाने वाले एंजाइम नहीं होते हैं। इसके प्रभाव से कुछ ही दिनों में गिद्धों की किडनी फेल हो जाती है।
* विसेरल गाउट (Visceral Gout): किडनी खराब होने के कारण गिद्धों के शरीर में यूरिक एसिड जमा होने लगता है, जिसे विसेरल गाउट कहते हैं, और अंततः उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है। [
प्रतिबंध और वर्तमान स्थिति:
इस गंभीर खतरे को देखते हुए, भारत सरकार ने 2006 में पशुओं के इलाज में डाइक्लोफेनाक के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बजाय, गिद्धों के लिए सुरक्षित दवा मेलॉक्सिकैम (Meloxicam) का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
इस दर्द निवारक और अन्य विषाक्त पदार्थों के कारण हुए नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी भारतीय गिद्ध संकट के विकिपीडिया पेज पर पढ़ी जा सकती है।
क्या आप गिद्धों के संरक्षण से जुड़े किसी विशेष प्रोजेक्ट या डाइक्लोफेनाक के विकल्पों के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं?
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