कांग्रेस खुद की गलती, निर्वाचन आयोग और सरकार के गले में नहीं डाल सकती - अरविन्द सिसोदिया
कांग्रेस खुद की गलती, निर्वाचन आयोग और सरकार के गले में नहीं डाल सकती - अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 10 जून। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में नामांकन फार्म की जाँच में, संलग्न शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप के बाद निर्वाचन अधिकारी द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिये जाने पर कांग्रेस के द्वारा फैलाये जा रहे झूठ पर, राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि " कांग्रेस झूठ के नैरेटिव फैलाने के बजाय अपनी गलती और कांग्रेस पार्टी के आंतरिक षड्यंत्रों को स्वीकार करे। "
सिसोदिया नें कहा कि " मध्यप्रदेश कांग्रेस के अंदर राज्यसभा प्रत्याशी को लेकर रहा असंतोष ही सुश्री नटराजन के नामांकन पत्र में त्रुटि का कारण बना है। जिसके चलते नामांकन रद्द हुआ। कांग्रेस को झूठे आधारों पर धरना प्रदर्शन के बजाय, अपने नामांकन पत्र भरने वाली टीम की गलती स्वीकार करनी चाहिए।"
सिसोदिया ने कहा कि, “शपथपत्र प्रारूप में बहुत स्पष्टता से आपराधिक प्रकरणों की जानकारी मांगी जाती है, जिसमें पुलिस में दर्ज अथवा अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी देना अनिवार्य होता है। नटराजन का प्रकरण आपराधिक प्रकृति के रूप में अदालत में सूचीबद्ध है, जिसे छुपाया गया।वहीं जानकारी देनें का यह कानून भी न्यायालय के दिशा-निर्देशों पर आधारित है। इसलिए रिटर्निंग ऑफिसर पर किसी भी तरह का आरोप बेतुका है।”
सिसोदिया नें कहा कि " कांग्रेस को अपने चुनाव मैनेजमेंट, विधि अधिकारी और आपसी संगठन फूट को चुनाव आयोग के माथे मड़ने के बजाय स्वयं की गलती स्वीकार करनी चाहिए। चुनाव आयोग पर जबरिया दबाव बनाना गलत, संविधान और लोकतंत्र विरोधी है। "
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी
राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल, कोटा।
9414180151
========
"MP राज्यसभा: Form-26 में हैदराबाद केस न बताने पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द"
MP में 3-0 BJP, कांग्रेस की रणनीतिक चूक..
मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र 9 जून सोमवार शाम स्क्रूटनी में रद्द कर दिया गया।रिटर्निंग अधिकारी ने भाजपा की आपत्ति स्वीकार करते हुए कहा कि प्रत्याशी ने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म-26 में आवश्यक जानकारी पूरी नहीं दी।
भाजपा प्रत्याशी Mahesh Kewat ने हैदराबाद के एक न्यायिक प्रकरण को कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा छुपाने को लेकर आपति दर्ज कराई थी।जिसके अनुसार 20 अगस्त 2025 को फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट,हैदराबाद में भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(मानहानि) 61(अपराधिक षड्यंत्र)351(2) (अपराधिक धमकी)सहित कुछ धाराओं में निजी परिवाद दायर हुआ।ये BNS की नई धाराएँ हैं,IPC नहीं17 सितंबर 2025 को न्यायालय ने संज्ञान लेकर समन जारी किया और 24 अक्टूबर को प्रत्याशी की ओर से विधिवत उत्तर प्रस्तुत किया गया।
निर्वाचन कानून में स्थिति स्पष्ट है।
फॉर्म-26 की प्रविष्टि 5(ii) के अनुसार प्रत्येक प्रत्याशी को उन सभी लंबित प्रकरणों का विवरण देना होता है जिनमें न्यायालय ने संज्ञान ले लिया हो,चाहे आरोप तय हुए हों या नहीं।उच्चतम न्यायालय ने 2019 के एक निर्णय में इसी प्रावधान को दोहराया है।वहीं कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 2024 में स्पष्ट किया कि यदि संज्ञान नहीं लिया गया है तो केवल प्राथमिकी का उल्लेख अनिवार्य नहीं है।
कांग्रेस के विवेक तन्खा का तर्क हे कि ये "सिविल नोटिस है 10 करोड़ मुआवजा को लेकर यह आपराधिक नहीं"
विधि विशेषज्ञों में मत विभाजन है।एक वर्ग का मानना है कि संज्ञान के बाद जानकारी न देना धारा125ए के अंतर्गत गंभीर चूक है,अतः नामांकन निरस्तीकरण विधिसम्मत है।
दूसरा पक्ष कहता है कि प्रकरण की प्रकृति आपराधिक या सिविल अभी तथ्यात्मक विवाद का विषय है,जिसका निस्तारण चुनाव याचिका में होना चाहिए,न कि नामांकन स्तर पर।
इस पूरे प्रकरण में गंभीर प्रश्न यह है कि जब प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व श्री दिग्विजय सिंह,श्री कमलनाथ,श्री उमंग सिंघार और जीतू पटवारी नामांकन के समय उपस्थित थे,तो विधिक जांच में यह चूक कैसे रह गई।क्या यह केवल प्रक्रियात्मक भूल थी या जानबूझकर जानकारी रोकी गई, इससे बड़ा प्रश्न Meenakshi Natarajan पर हे जो तीन लोकसभा चुनाव (2009,2014,2019) लड़ चुकीं,(2009में उन्होंने 9 बार के भाजपा सांसद लक्ष्मीनारायण पांडे को हराकर चौंका दिया था 2014-2919 में भाजपा के सुधीर गुप्ता से हार गई) जो खुद तेलंगाना कि प्रभारी हैं टीम राहुल की अहम सदस्य हैं उनसे गलती कैसे हो गई
निश्चित रूप से कांग्रेस इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकती है,तब तक यह मामला संविधान पारदर्शिता और राजनीतिक उत्तरदायित्व पर एक गंभीर बहस का विषय बना रहेगा।
"क्या कांग्रेस नेतृत्व आंतरिक विधिक जांच पर जवाब देगा?"
#MeenakshiNatarajan #RajyaSabha2026 #MadhyaPradesh #ElectionLaw #CongressVsBJP
BJP Madhya Pradesh Indian National Congress - Madhya Pradesh Rahul Gandhi Press Information Bureau - PIB, Government of India
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें