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तुष्टिकरण का खेल खत्म, मोदीजी ने दिलाया वन्देमातरम को न्याय - अरविन्द सिसोदिया

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कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीती में हमेशा वन्देमातरम से अन्याय किया - अरविन्द सिसोदिया  तुष्टिकरण का खेल खत्म, मोदीजी ने दिलाया वन्देमातरम को न्याय - अरविन्द सिसोदिया  तुष्टिकरण से आजाद हुआ वन्देमातरम 'वंदे मातरम्' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की चेतना, स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा और देश की अखंडता का सबसे बड़ा उद्घोष है। भारत के नौजवानों की ऊर्जा रहा है। यह वह मंत्र था जिसे गाते हुए हंसते-हंसते हजारों क्रांतिकारियों ने फांसी के फंदे को चूम लिया। करोड़ों स्वतंत्रता सेनानियों के कृतित्व और व्यक्तित्व को राष्ट्रवाद से सिंचित किया।लेकिन दुर्भाग्यवश, जिस गीत ने पूरे देश को बिना किसी भेदभाव के एकता के सूत्र में पिरोया, उसे आजादी के बाद की राजनीति में कांग्रेस पार्टी और उसके सर्वेसर्वा जवाहरलाल नेहरू जी नें तुष्टिकरण की बलि चढ़ा दिया गया। वह तो संविधान सभा के अध्यक्ष ड़ा राजेंद्र प्रसाद जी का साहस था जो उन्होंने वन्देमातरम को राष्ट्रगान के बराबर कर दर्जा देकर राष्ट्रगीत बनवा दिया। कांग्रेस ने सत्ता और वोटबैंक के लालच में इस गौरवमयी गीत के साथ जो समझौता किया, उस...

कविता - फिर से कहता हूँ, मोदी जी, आपका कोटि-कोटि बंदन है।

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कविता - फिर से कहता हूँ, मोदी जी, कोटि-कोटि अभिनंदन है फिर से कहता हूँ, मोदी जी, आपका कोटि-कोटि बंदन है। जिस "वन्दे मातरम्" पर था तुष्टिकरण का पहरा , उसकी आजादी पर आपका अभिनंदन है। ====1==== याद करो वे अमर कहानी, जब हँसकर फाँसी चूमी थी। "वन्दे मातरम्" कहते-कहते, वीरों ने जीवन बलिदानों को सोंपी थी। ====2==== सीने पर गोलियाँ खाकर भी, जयघोष नहीं रुक पाया था। भारत माँ की जय बोल-बोल कर , हर बलिदानी गर्व से मुस्काया था। ====3==== जब-जब रण में शंख बजे, जब-जब सीमाएँ ललकार उठीं। "वन्दे मातरम्" के स्वर से ही, भारत की सेनाओं के अपनी धार तेज करी । ====4==== यह केवल दो शब्द नहीं, यह राष्ट्र-प्राण का नारा है। इसमें भगतसिंह का रक्त बसा, इसमें आज़ाद का हमारा है। ====5==== इसमें मंगल की हुंकारें, इसमें बिस्मिल का बलिदान। इसमें लाखों माताओं के, अश्रु, तपस्या और सम्मान। ====6==== दशकों तक जो मौन रहा, वह स्वाभिमान आज जागा है। भारत माता के मस्तक पर, फिर स्वाभिमान का मुकुट सजा है। ====7==== इसलिए फिर कहता हूँ, कोटि-कोटि अभिनंदन है। जिस "वन्दे मातरम्" पर पह...

कविता : तुष्टिकरण का अंत

कविता : तुष्टिकरण का अंत सिंहासन की तुच्छ नीति का, आज कुहासा छँट गया, तुष्टिकरण का काल-अँधेरा, महाकाल से कट गया। कोटि-कोटि कंठों से गूँजा, वंदे मातरम का नारा, जाग उठा है सिंह सनातन, डोल उठा अंबर सारा। बाँट रहे थे जो भारत को, जाति-पाति के खानों में, थपकी देकर सुला रहे थे, राष्ट्रवाद को थानों में। उस कायरता की छाती पर, शौर्य-शंख अब बाजा है, सिंहासन पर बैठा देखो, न्याय-नीति का राजा है। झुकती थीं जो सत्ताएँ, केवल इक खास इशारे पर, छोड़ दिया था राष्ट्र-भाग्य को, राजनीति के धारे पर। उन बेड़ियों को काट फेंककर, भारत आज खड़ा हुआ, विश्व-मंच पर महाशक्ति बन, सबसे वीर बड़ा हुआ। कोटि-कोटि धन्यवाद उस नायक को, जिसने ठाना है, तुष्टिकरण की कब्र खोदकर, नया विहान लाना है। अब न झुकेगा, अब न रुकेगा, यह संकल्प हमारा है, मुक्त हुआ है देश भ्रम से, यह स्वतंत्र जयकारा है। वंदे मातरम! वंदे मातरम! ------------------------------

कांग्रेस बनाम हिंदुत्व

कांग्रेस सरकारों के दौरान मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर हिंदू विरोधी कृत्यों और तुष्टीकरण के आरोप लगाए जाते रहे हैं। आलोचकों और राजनीतिक दलों (विशेषकर भाजपा) द्वारा इन प्रधानमंत्रियों के काल के जिन प्रमुख कृत्यों का उल्लेख किया जाता है, उनका विवरण इस प्रकार है:  ## जवाहरलाल नेहरू का कार्यकाल (1947–1964) * सोमनाथ मंदिर का विरोध: वर्ष 1951 में गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार का नेहरू ने विरोध किया था तथा तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के वहां जाने पर भी आपत्ति जताई थी।  * हिंदू कोड बिल: नेहरू द्वारा लाए गए हिंदू विवाह और उत्तराधिकार कानूनों को पारंपरिक हिंदू मान्यताओं में हस्तक्षेप और केवल बहुसंख्यक समुदाय के पर्सनल लॉ को बदलने वाला माना गया।  ## इंदिरा गांधी का कार्यकाल (1966–1977, 1980–1984) * सांप्रदायिक संतुलन और नीतियां: आपातकाल के दौरान धार्मिक और वैचारिक संगठनों पर कार्रवाई तथा राजनीति में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की शुरुआत को लेकर उनकी नीतियों की आलोचना की जाती है।  ## मनमोहन सिंह का कार्यकाल ...

स्व-अर्जित संपत्ति एवं पैतृक संपत्ति

इस ऐतिहासिक फैसले का केस नंबर और पूरा कानूनी ब्यौरा निम्नलिखित है: ## केस का विवरण * केस का नाम: श्रीमती उषा एन. स्वामी बनाम श्री एम. वेंकटस्वामी और अन्य (Smt. Usha N. Swamy v. Sri M. Venkataswamy & Ors.) [1, 2]  * केस नंबर: आर.एफ.ए. नंबर 1568/2018 (RFA No. 1568 of 2018) [2]  * फैसले की तारीख: 16 जून, 2026 [3]  * पीठ (Bench): न्यायमूर्ति डी.के. सिंह और न्यायमूर्ति टी.एम. नदाफ की खंडपीठ  ------------------------------ ## मामले की पृष्ठभूमि (पूरा ब्यौरा)    1. विवाद की वजह: इस मामले में एक पोती (बेटी) ने अपने दादा की संपत्तियों में समान हिस्सेदारी (Partition Suit) का दावा करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उसका तर्क था कि चूंकि यह संपत्ति उसके पिता को दादा से मिली है, इसलिए हिंदू उत्तराधिकार कानून (संशोधन) 2005 के तहत उसे भी इसमें जन्मजात सहदायिक (Coparcener) अधिकार मिलना चाहिए।     2. सच्चाई क्या थी?: कानूनी जांच में यह सामने आया कि विवादित संपत्तियां मूल रूप से दादा की स्व-अर्जित (Self-Acquired) थीं, यानी उन्होंने इसे अपनी निजी कमाई से ...

युवा कौशल विकास में उद्योग निभा रहे हैं बड़ी भूमिका

विश्व युवा कौशल दिवस पर Samsung DOST ने दिखाई राह, युवाओं के कौशल विकास में उद्योग निभा रहे हैं बड़ी भूमिका Samsung DOST जैसे ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और स्टाइपेंड आधारित कार्यक्रम, स्किल इंडिया मिशन के तहत भारतीय युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का सबसे असरदार जरिया बन रहे हैं। यह मॉडल पारंपरिक क्लासरूम पढ़ाई और आज के बाजार की असली जरूरतों के बीच की दूरी को खत्म कर युवाओं के लिए नौकरी की राह खोलता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की इस साल की थीम "साझे भविष्य के लिए हुनर" है। भारत के लिए इसमें 'साझा' शब्द सबसे ज्यादा मायने रखता है और इस साझेपन का एक बड़ा हिस्सा कंपनियों की तरफ से आना चाहिए। Samsung DOST युवाओं को रिटेल क्षेत्र के लिए जरूरी कौशल और प्रैक्टिकल अनुभव देकर इस साझा जिम्मेदारी को वास्तविक करियर में बदलने में मदद कर रहा है। 15 जुलाई 2015 को दो बड़े लॉन्च एक ही दिन हुए थे। संयुक्त राष्ट्र ने अपना पहला 'विश्व युवा कौशल दिवस' मनाया और ठीक उसी दिन नई दिल्ली में भारत सरकार ने 'स्किल इंडिया मिशन' की शुरुआत की। ग्यारह साल बाद आज, ऐसा एक ही तारीख पर होना एक बड़ा सं...

कविता - जीवन मेला

कविता -जीवन मेला - अरविन्द सिसोदिया  तू आया अकेला, मैं आया अकेला, आओ मिलकर बना दें जीवन मेला। ऐसा मेला, जहाँ कोई न रहे अकेला, हर धड़कन में मिले अपनेपन का बसेरा। जन्म की पहली साँस अकेली होती है, अंतिम यात्रा भी तन्हाई ही होती है। बीच का यह जो अनमोल सफ़र मिला है, उसे प्रेम से सजाना ही जीवन की साधना है। चलो किसी की राह का दीप बन जाएँ, किसी की थकी पलकों का स्वप्न बन जाएँ। जो टूट गए हैं समय की आँधियों में, उनके विश्वास को फिर से जगाएँ। चलो किसी की पीड़ा का मरहम बनें, किसी सूनी साँझ का सरगम बनें। अपने सुख से पहले जो जग को हँसा दे, ऐसे जीवन का हम प्रतिरूप बनें। न कोई ऊँचा, न कोई नीचा, न अपना-पराया, न कोई अजनबी। बस एक ही परिचय हो सबका— हम सब एक ही सृष्टि की संतान हैं। धर्म यदि जोड़ता है तो धर्म महान है, प्रेम यदि बाँटता है तो वही पहचान है। जिस हृदय में सबके लिए स्थान बना रहे, वही ईश्वर का सच्चा धाम है। दौलत से नहीं, रिश्तों से घर बसते हैं, प्रेम से ही सूने आँगन हँसते हैं। जो बाँट सके अपने हिस्से की धूप को, वही जीवन का सच्चा धनवान है। यदि किसी की आँख का आँसू पोंछ सके, यदि किसी के अधरों पर म...

देशहित सबसे पहले, हर षड्यंत्र की परतें खोलें, देश का जनमत आपके साथ है — अरविन्द सिसोदिया

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प्रेस विज्ञप्ति देशहित सबसे पहले, हर षड्यंत्र की परतें खोलें, देश का जनमत आपके साथ है - अरविन्द सिसोदिया देशहित सबसे बड़ा, हर षड्यंत्र की परत खोलें कोटा, 28 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने हाल के कथित काकरोच आंदोलन की पृष्ठभूमि में देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि "यदि किसी छात्र आंदोलन की आड़ में विदेशी हस्तक्षेप, हिंसा, अराजकता अथवा राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के संकेत मिल रहे हैं, तो उसकी व्यापक और समयबद्ध जांच केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व है।" उन्होंने कहा कि  " भारत में यदि कोई नेपाल और बंगलादेश जैसी आराजकता उत्पन्न करना चाहता है तो उसे पूरी तरह से कुचलदेना पुलिस और सुरक्षाबलों का कर्तव्य है। इसमें कोई किन्तु परन्तु स्वीकार नहीं है। न ही किसी को इसमें अवरोध उत्पन्न करना चाहिए। "  उन्होंने कहा कि "राष्ट्र सर्वोपरि है। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से बड़ा कोई मु...

2900 क्रिमिनल जंतर मंतर में

Delhi Police Ai Surveillance Facial Recognition System Antar Mantar Protest Found 2,900 People With Criminal Records  जंतर-मंतर पर भीड़ के बीच थे 2900 क्रिमिनल, दिल्ली पुलिस ने चेहरा स्कैन करके AI से खोजा हाल ही में जब जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था, तब दिल्ली पुलिस ने भीड़ पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस स्मार्ट कैमरे लगाए थे। इन कैमरों को फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कहते हैं। इनके जरिए कई भीड़ में मौजूद कई आरोपियों की पहचान की जा सकी। 28 Jul 2026 दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वाले फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया था। पुलिस के अनुसार, इस सिस्टम ने आपराधिक रिकॉर्ड वाले लगभग 2,900 लोगों की पहचान की। इनमें हत्या, डकैती, रेप और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों के आरोपी भी शामिल थे। ऐसा प्रदर्शन वाली लोकेशन के आस-पास लगे फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों की मदद से किया गया। CNN-News18 के अनुसार, पुलिस ने बताया कि इस टेक्नोलॉजी ने प्रदर्शन में शामिल लोगों के चेहरों की तुलना पहले से मौजूद क्रिमिनल डेट...

पार्टी के आंदोलन में हुए उपद्रव पर पुलिस कार्यवाही

कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में हुए उपद्रव पर पुलिस कार्यवाही पर रोक के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विश्लेषण हर कोई अपने हिसाब से कर रहा है, कोई इसे कॉकरोचों के लिए बड़ी राहत बता रहा है तो कोई क्या बता रहा है!  ऐसे में मैंने भी फैसले के मुख्य बिंदुओं को सरसरी तौर पर देखा तो मुझे पत्रकारों के दावे से अलग कुछ नजर आया, मुझे लगता है कि ये क्षणिक राहत है अब सरकार चाह कर भी उपद्रवियों को नही बचा सकती है! फैसले पर मेरा ये विश्लेषण आपके साथ शेयर कर रहा हू ! पहले एक बार सरसरी तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते है!  कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई है!  1. 18 वर्ष से कम उम्र के गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने का निर्देश दिया और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए नोटिस जारी किए।  2. आपराधिक इतिहास वाले लोगों को छोड़कर अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। 3. डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखना: सभी राज्यों और पुलिस को सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, ब...

डिजिटल आत्मरक्षा Digital Self-Defense

स्थान - कोटा राजस्थान  दिनांक - 27/07/2026 सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री जी, भारत सरकार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली - 110011 विषय: 'डिजिटल इंडिया' की सुरक्षा हेतु कक्षा 6 से 12 तक के पाठ्यक्रम में 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल आत्मरक्षा' Cybersecurity and Digital Self-Defense  को अनिवार्य पाठ्यपुस्तक के रूप में सिलेबस में सम्मिलित करने के संबंध में। आदरणीय प्रधानमंत्री जी, सादर प्रणाम। हालही में जो एक सोसल मीडिया पार्टी का जन्म, पेपर लीक होना और फिर छात्र आंदोलन होना... यह कोई सामन्य घटनाक्रम नहीं है। बल्कि कुछ नजर नहीं आने वाले कई एप्स के जरिये खड़ा किया गया पूरा मूमेंट था और इसमें विदेशी धन व ज्ञान सहित विदेशी षड्यंत्र तक रहा है। विदेश में बैठे व्यक्ती विदेश में पेमेंट कर, भारत में आंदोलन रत लोगों को भोजन नास्ता करवा रहे थे ।  भारत में यूट्यूब,फेसबुक, एक्स, इस्ट्राग्राम और वाट्सअप इस तरह से काम कर रहे हैं जैसे उनका सम्राज्य हो, फेक न्यूजों की सुनामी आगई। इस डिजिटल विदेशी आक्रमण के सामने पूरा देश, समाज असहाय क्यों? यह आने वाले कल के युद्ध की नई तकन...

साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल नागरिकता' (Cyber Security & Digital Citizenship) तथा डिजिटल आत्मरक्षा "

प्रेस विज्ञप्ति कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल आत्मरक्षा ' विषय को  पाठ्यक्रम में अनिवार्यरूप से शामिल करने की मांग प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, डिजिटल इंडिया की सुरक्षा के लिए विद्यार्थियों को डिजिटल आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने पर जोर 26 जुलाई,कोटा। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं भाजपा के कोटा संभाग मीडिया संयोजक अरविन्द सिंह सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को प्रेषित मांगपत्र द्वारा " कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल नागरिकता' (Cyber Security & Digital Citizenship) एवं डिजिटल आत्मरक्षा " विषय को अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में शामिल करने की मांग की है। सिसोदिया नें कहा कि " हालही में जो एक सोसल मीडिया पार्टी का जन्म, पेपर लीक होना और फिर छात्र आंदोलन खड़ा किया जाना, यह कोई सामन्य घटनाक्रम नहीं है। बल्कि कुछ नजर नहीं आने वाले कई एप्स के जरिये खड़ा किया गया पूरा मूमेंट था और इसमें स्वदेशी डाटा संग्रह का इस्तेमाल कर, विदेशी धन...

देश जानना चाहता है है कौन थे ये लोग....

1. अभिजीत दिपके उर्फ ​​हेड कॉकरोच (HC) का NEET आंदोलन करने का क्या मकसद था? कोई किसी और के मकसद के लिए अपना पर्सनल टाइम और पैसा खर्च नहीं करता। 2. USA से उनके ट्रैवल और आंदोलन के लिए किसने फंड दिया? 3. उनके इंस्टा फॉलोअर्स कुछ ही दिनों में कुछ मिलियन कैसे हो गए, जबकि एक नॉर्मल इंस्टा/यूट्यूबर को इतने फॉलोअर्स पाने में कुछ साल लगातार मेहनत करनी पड़ती है? 4. उनके फॉलोअर्स ज़्यादातर पाकिस्तान, तुर्की, बांग्लादेश में क्यों हैं? 5. 5. CJP की तरफ से भविष्य में एग्जाम कैसे हैंडल किए जाएं, इस बारे में एक भी सुझाव/रिकमेंडेशन क्यों नहीं आई? 6. CJP ने एग्जाम पेपर लीक करने वाले एक भी असली गुनहगार का नाम लेकर उसे शर्मिंदा क्यों नहीं किया? 7. क्या किसी ने सुना है कि भारत के CJI ने अपने भाषण में असल में क्या कहा था कि कॉकरोच कौन हैं? मुझे बताएं कि उन्होंने Gen Z को एक बार भी कॉकरोच कहा था। 8. जावेद, जो “गरीब” “शांतिप्रिय” है, लगभग 2000 आंदोलनकारियों के ग्रुप को, दिन में 3 बार खाना कैसे खिलाता है, जिसका महीने का खर्च लगभग Rs 3 करोड़ है? काश मैं भी उतना ही गरीब होता जितना वह है! 9. ‘शांतिप्रिय’ जावेद ह...

स्वामित्व -2

* पूर्व कब्जा, परंपरागत निवास या पुश्तैनी रूप से चले आ रहे अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, बल्कि इस योजना के माध्यम से उन्हीं पुराने और परंपरागत अधिकारों को पहली बार लिखित, वैध और डिजिटल कानूनी मान्यता (रजिस्ट्री) दी गई है।  - ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही पारंपरिक व्यवस्था को इस योजना के तहत किस प्रकार मजबूत किया गया है, इसे आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं:- ## 1. पुराने कब्जे को ही आधार माना गया है * इस योजना का मूल सिद्धांत ही यही है कि "जो जहां काबिज है, वही वहां का मालिक है"। * ड्रोन सर्वे और जमीनी सत्यापन के समय आपके दादा-परदादा के समय से चले आ रहे पुश्तैनी मकान, बाड़े या खाली रिहायशी जमीन के भौतिक कब्जे (Physical Possession) को ही आधार मानकर नक्शा खींचा गया है।  * किसी भी नागरिक को उसके पुराने कब्जे से बेदखल नहीं किया गया है।  ## 2. मौखिक या अनौपचारिक अधिकार अब "लिखित कानून" बन गए हैं * पहले गांवों की आबादी भूमि (घरोनी) का कोई सरकारी लिखित रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी की तरह) नहीं होता था। ग्रामीण केवल इस आधार पर रहते थे कि "यह हमारा पुश्तैनी घर है"।  * [स्...

उच्च शिक्षा के नाम पर बदचलनी का अंधापन

मेट्रो सिटी (महानगरों) में रह रहे जॉब वाले दम्पतियों के बच्चे कोई लेफ्टिस्ट बन रहे, कोई समलैंगिक बन रहे, कोई LGBT एक्टिविस्ट बन रहे… यह वो बच्चे हैं जो कॉलेज लाइफ़ में वोदका और चरस (चरस) का सेवन सीख चुके हैं… स्कूल बैग के अंदर वेप (ई सिगरेट) मिल रही है इनके… इन बच्चों का परिवार नामक संस्था में कोई विश्वास नहीं है… ना यह शादी करवाके परिवार बढ़ाएंगे,,, ना ही यह अपने बूढ़े मां बाप के पास रहेंगे… कॉलेज में ब्रेनवॉशड इन बच्चों की ही जिद्द और बदतमीजियो के कारण इनके मां बाप दूसरे रिश्तेदारों से भी कट चुके हैं… जब इनके बूढ़े मां बाप मरेंगे यह लेफ्टिस्ट संतानें उनका विधिवत संस्कार तक नहीं करेगी,, श्राद्ध तो दूर की बात। बड़े शहरों में पैसा कमाने में व्यस्त दंपति ने ये बच्चे पैदा अवश्य किए हैं, पर यह काम आएंगे कम्युनिस्ट लॉबी के… यह ताउम्र सिंगल रह जाएंगे और आंदोलनजीवियों द्वारा जंतर मंतर या दिल्ली में रखे धरने प्रदर्शनों में जाने के काम आएंगे… बीमार पड़े मां बाप के नहीं… आज जो 55-60 के हो चले हैं उन्हें कोई पानी पिलाने वाला नहीं होगा… ये जितने भी कम्युनिस्ट आज 60-70 वर्ष की उम्र वाले हैं इनके पा...

माननीय प्रधानमंत्री महोदय

सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार, नई दिल्ली। विषय : राष्ट्रहित में आंतरिक सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा हेतु आवश्यक सुधारों के संबंध में। महोदय, सादर निवेदन है कि राष्ट्रहित, आंतरिक सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती के दृष्टिगत निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीर समीक्षा एवं आवश्यक कार्यवाही अपेक्षित है। 1. सरकार की इंटेलिजेंस एवं आंतरिक सुरक्षा क्षमता में वृद्धि आवश्यक - राष्ट्रहित चिंतक सरकारों के विरुद्ध संचालित होने वाले संभावित संगठित षड्यंत्रों, उनके वित्तीय स्रोतों, डिजिटल नेटवर्क, विदेशी संपर्कों तथा संसाधनों की समय रहते पहचान करने में वर्तमान सुरक्षा एवं खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता की व्यापक समीक्षा आवश्यक प्रतीत होती है। - विभिन्न आंदोलनों के दौरान कथित रूप से बड़ी संख्या में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, संगठित डिजिटल प्रचार, समन्वित अभियान, विदेशी प्रभाव, वित्तीय सहायता, डिजिटल एप्स एवं संसाधनों के उपयोग जैसे विषयों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। - यदि किसी भी प्रकार से भ...