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सपा सरकारों में घोटाले....

उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (SP) की सरकारों के दौरान लगभग 5 से 7 बड़े घोटालों के गंभीर आरोप सामने आए थे। इन विवादों और घोटालों की आंच में 2 प्रमुख कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त किया गया था, जबकि राजनीतिक उठापटक और प्रशासनिक फेरबदल के तहत समय-समय पर अन्य कई मंत्रियों को भी हटाया गया। [1, 2, 3, 4]  सपा सरकारों के दौरान सामने आए प्रमुख घोटालों और उन पर हुए इस्तीफों/बर्खास्तगी का विवरण नीचे दिया गया है: [5]  ## प्रमुख घोटाले व वित्तीय अनियमितताएं *  * अवैध रेत खनन घोटाला (Sand Mining Scam): अखिलेश सरकार (2012-2017) के दौरान हमीरपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में अवैध ई-टेंडरिंग और नियमों को ताक पर रखकर खनन पट्टे बांटने के गंभीर आरोप लगे, जिसकी जांच बाद में सीबीआई (CBI) को सौंपी गई। [3, 6, 7]  * गोमती रिवरफ्रंट घोटाला (Gomti Riverfront Project): लखनऊ में गोमती नदी के सुंदरीकरण प्रोजेक्ट के बजट में भारी वित्तीय अनियमितताओं और फंड की हेराफेरी के आरोप लगे। [3]  * खाद्यान्न घोटाला (Food Grain Scam): मुलायम सिंह यादव...

सामाजिक जीवन में गिरते मूल्य और बढ़ते अपराध : केवल कानून नहीं, समग्र प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंतन आवश्यक— अरविन्द सिसोदिया

सामाजिक जीवन में गिरते मूल्य और बढ़ते अपराध : केवल कानून नहीं, समग्र प्रशासनिक व्यवस्था पर चिंतन आवश्यक — अरविन्द सिसोदिया कोटा, 1 जुलाई। देश में पारिवारिक और सामाजिक अपराधों की बढ़ती घटनाएँ केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं हैं, बल्कि यह समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और मानसिक स्वास्थ्य में आई गिरावट का संकेत भी हैं। संपत्ति विवादों में पिता की हत्या, दादा की हत्या, पति द्वारा पत्नी और बच्चों की हत्या, महिलाओं एवं बुजुर्गों पर अत्याचार जैसी घटनाएँ यह बताती हैं कि समाज के भीतर संवाद, संयम, सहिष्णुता और संतोष जैसे जीवन-मूल्य कमजोर पड़ रहे हैं। भारत का संविधान लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित करता है। लोकतंत्र और चुनी हुई सरकारों का दायित्व केवल शासन चलाना, कर वसूलना, सड़कें बनाना और कानून लागू करना भर नहीं है। उनका व्यापक दायित्व ऐसी सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करना भी है, जिसमें नागरिक सुरक्षित हों, अनुशासित हों, समन्वय की भावना हो, परस्पर विश्वास बना रहे, परिवार मजबूत हों, समाज संतुष्ट रहे और प्रत्येक व्यक्ति सम्मानपूर्वक, सुखपूर्वक तथा शांति से जीवन जी सके। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ...

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने परिसीमन पर अपनी स्टडी रिपोर्ट उत्तर दक्षिण का समाधान प्रस्तुत करती है

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने परिसीमन पर अपनी स्टडी रिपोर्ट में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 824 करने का एक संभावित गणितीय मॉडल पेश किया है।  इस "लक्षित परिसीमन" के तहत सभी सीटों के बजाय केवल 170 चुनिंदा सीटों को कई हिस्सों में बांटकर नई सीटें बनाने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें और गणितीय मॉडल: सीटों का विभाजन: रिपोर्ट के अनुसार, कुल 170 सीटों को विभाजित किया जाएगा। इनमें से 59 सीटों को दो हिस्सों में और 111 सीटों को तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव है।सीटों की कुल संख्या: इस विभाजन प्रक्रिया के बाद देश में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 824 हो जाएगी। राज्यों के अनुपात में संतुलन: जनसंख्या के आधार पर राज्यों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन न आए, इसके लिए लक्षित मानदंडों का इस्तेमाल कर सभी बड़े राज्यों की सीटों का वर्तमान अनुपात बनाए रखने की सिफारिश की गई है। क्षेत्रीय असर: उदाहरण के लिए, इस मॉडल के लागू होने से राजस्थान की वर्तमान 25 लोकसभा सीटों के ढांचे में बदलाव होगा और इनकी संख्या बढ़कर 38 तक हो सकती है।यह एक सैद्धांतिक कार्य-पत्र...

यमुना जल समझौता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बड़ी उपलब्धि – अरविंद सिसोदिया

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यमुना जल समझौता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बड़ी उपलब्धि – अरविंद सिसोदिया कोटा, 30 जून। भारतीय जनता पार्टी कोटा संभाग के मीडिया संयोजक अरविंद सिसोदिया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मध्यस्थता में राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए यमुना जल समझौते का स्वागत करते हुए इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि 32 वर्षों से लंबित यह समझौता राजस्थान के पेयजल संकटग्रस्त क्षेत्रों, विशेषकर शेखावाटी, के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। सिसोदिया ने कहा कि 29 जून 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की उपस्थिति में हुए समझौते से 1994 के अपर यमुना नदी बोर्ड समझौते को प्रभावी रूप से लागू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। जो कि राजस्थान के लिए विशेष लाभकारी है। उन्होंने बताया कि लगभग 34,102 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत हथनीकुंड बैराज से यमुना जल को लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुं...

बाबर की मजार पर भारत के तीन प्रधानमंत्री

अफगानिस्तान के काबुल में स्थित मुगल सम्राट बाबर की मजार पर भारत के तीन प्रधानमंत्री जा चुके हैं। इनमें जवाहरलाल नेहरू (19 सितंबर 1959), इंदिरा गांधी (1968) और मनमोहन सिंह (अगस्त 2005) शामिल हैं।  ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भों के अनुसार इन दौरों का विवरण इस प्रकार है: * जवाहरलाल नेहरू: भारत के पहले प्रधानमंत्री, 19 सितंबर 1959 को अपनी अफगानिस्तान यात्रा के दौरान काबुल गए थे और बाबर के मकबरे पर श्रद्धांजलि अर्पित की थी।  * इंदिरा गांधी: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1968 में (कुछ स्रोतों के अनुसार 1969 में) अपनी यात्रा के दौरान बाबर की मजार का दौरा किया था। * मनमोहन सिंह: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अगस्त 2005 में अपनी अफगानिस्तान यात्रा के दौरान बाबर के मकबरे पर गए थे। ============ नहीं, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और आधिकारिक यात्राओं के दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान के किसी भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति द्वारा काबुल में बाबर की मजार (बाबर के बाग) का दौरा करने का कोई आधिकारिक प्रमाण या विवरण नहीं मिलता है। आमतौर पर पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्षों और राजनेताओं की अफगानिस्तान यात्र...