माननीय प्रधानमंत्री महोदय

सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय
भारत सरकार, नई दिल्ली।

विषय : राष्ट्रहित में आंतरिक सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा हेतु आवश्यक सुधारों के संबंध में।

महोदय,

सादर निवेदन है कि राष्ट्रहित, आंतरिक सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती के दृष्टिगत निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीर समीक्षा एवं आवश्यक कार्यवाही अपेक्षित है।

1. सरकार की इंटेलिजेंस एवं आंतरिक सुरक्षा क्षमता में वृद्धि आवश्यक

- राष्ट्रहित चिंतक सरकारों के विरुद्ध संचालित होने वाले संभावित संगठित षड्यंत्रों, उनके वित्तीय स्रोतों, डिजिटल नेटवर्क, विदेशी संपर्कों तथा संसाधनों की समय रहते पहचान करने में वर्तमान सुरक्षा एवं खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता की व्यापक समीक्षा आवश्यक प्रतीत होती है।
- विभिन्न आंदोलनों के दौरान कथित रूप से बड़ी संख्या में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, संगठित डिजिटल प्रचार, समन्वित अभियान, विदेशी प्रभाव, वित्तीय सहायता, डिजिटल एप्स एवं संसाधनों के उपयोग जैसे विषयों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
- यदि किसी भी प्रकार से भारत-विरोधी तत्व, विदेशी हित समूह अथवा तथाकथित "डीप स्टेट" जैसी बाहरी या आंतरिक शक्तियाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हों, तो उनकी पहचान एवं निराकरण हेतु सुरक्षा तंत्र को और अधिक सक्षम बनाया जाना चाहिए।
- सोशल मीडिया पर व्यापक स्तर पर फैलाई जाने वाली भ्रामक एवं झूठी सूचनाओं के पीछे कार्यरत संगठित तंत्र तथा आवश्यकता होने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही पाई जाए तो कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- मेरा पूर्व से ही आग्रह रहा है कि यदि सोशल मीडिया कंपनियों एवं डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में यह राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

2. अराजकतावादी प्रवृत्तियों पर कठोर एवं निष्पक्ष नियंत्रण आवश्यक

- जिन आंदोलनों अथवा सार्वजनिक प्रदर्शनों में प्रधानमंत्री अथवा अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के विरुद्ध हिंसा के लिए उकसाने वाले कथन, अशोभनीय भाषा अथवा लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ हो, उन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
- यदि किसी आंदोलन में बाहरी व्यक्तियों, छात्र संगठनों, अन्य संगठनों अथवा किसी भी वर्ग की सहभागिता, वित्तीय सहायता अथवा सुनियोजित भीड़ जुटाने के आरोप सामने आए हों, तो उनकी भी तथ्यपरक जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
- इस संपूर्ण तंत्र में यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक अथवा सुरक्षा संबंधी लापरवाही अथवा अयोग्यता पाई जाए, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

3. लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं संविधान-विरोधी गतिविधियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी प्रावधान

- यदि कोई व्यक्ति या संगठन सार्वजनिक रूप से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने, संसद की वैधानिक भूमिका को अस्वीकार करने अथवा असंवैधानिक माध्यमों से शासन व्यवस्था को प्रभावित करने हेतु लोगों को प्रेरित या उकसाता है, तो ऐसे मामलों में वर्तमान कानूनों की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार अधिक प्रभावी वैधानिक प्रावधान किए जाने चाहिए।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए संविधान-विरोधी एवं हिंसा के लिए उकसाने वाली गतिविधियों के विरुद्ध स्पष्ट, कठोर एवं न्यायसंगत आचार संहिता बनाई जानी चाहिए।

4. राष्ट्रहित सर्वोपरि — प्रभावी प्रतिउत्तर एवं सूचना प्रबंधन आवश्यक

- शासन तंत्र में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी एवं संबंधित संस्थाओं को अपनी कार्यक्षमता, उत्तरदायित्व तथा समन्वय क्षमता में निरंतर वृद्धि करनी चाहिए। जहाँ आवश्यक हो, वहाँ जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।
- राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में किसी भी संभावित खतरे अथवा उभरती हुई चुनौती को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित करना शासन व्यवस्था का मूल दायित्व है।
- हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री एवं भारत सरकार के विरुद्ध व्यापक स्तर पर भ्रामक एवं असत्य सूचनाओं का प्रसार देखने को मिला। ऐसे मामलों में सरकार एवं संबंधित संस्थाओं की ओर से त्वरित, तथ्याधारित एवं प्रभावी प्रतिउत्तर प्रणाली विकसित की जानी चाहिए।
- केवल औपचारिक प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं होती; इसके लिए सशक्त तथ्य-आधारित जनसंचार तंत्र, प्रशिक्षित मीडिया प्रबंधन तथा त्वरित सूचना प्रसारण व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।
- सूचना एवं प्रसारण व्यवस्था की कार्यक्षमता की भी वस्तुनिष्ठ समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएँ।
- संसद एवं सार्वजनिक मंचों पर ऐतिहासिक तथ्यों, राष्ट्रीय विरासत तथा भ्रामक प्रचार का तथ्यपरक उत्तर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

5. अनुशासित भारत ही सुरक्षित, सुखी एवं समृद्ध भारत का आधार

- सरकार को स्पष्ट रूप से यह संदेश देना चाहिए कि लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ अनुशासन, संवैधानिक मर्यादा एवं विधि का पालन प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्य है।
- समय, परिस्थिति एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकताओं के अनुरूप आंतरिक सुरक्षा, प्रतिरक्षा तथा विधि-व्यवस्था संबंधी उपायों को समय-समय पर और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

अतः विनम्र निवेदन है कि उपर्युक्त बिंदुओं पर उच्चस्तरीय समीक्षा कर आवश्यक नीतिगत एवं प्रशासनिक निर्णय लिए जाएँ, जिससे भारत की आंतरिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा राष्ट्रीय एकता और अधिक सुदृढ़ हो सके। सादर।

भवदीय,

अरविन्द सिंह सिसोदिया
कवि, लेखक, विश्लेषक, स्वतंत्र पत्रकार

मोबाइल : 9414180151

प्रतिलिपि (आवश्यक कार्यवाही हेतु):

1. माननीय केंद्रीय गृह मंत्री, भारत सरकार।
2. माननीय केंद्रीय रक्षा मंत्री, भारत सरकार।
3. माननीय केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार।


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सेवा में,
माननीय राष्ट्रपति महोदया/महोदय
भारत गणराज्य
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।

विषय: राष्ट्रहित में आंतरिक सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की सुरक्षा हेतु आवश्यक सुधारों के संबंध में।

आदरणीया ,

सादर निवेदन है कि राष्ट्रहित, आंतरिक सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती के दृष्टिगत निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीर समीक्षा एवं आवश्यक कार्यवाही अपेक्षित है।

1. सरकार की इंटेलिजेंस एवं आंतरिक सुरक्षा क्षमता में वृद्धि आवश्यक

- राष्ट्रहित चिंतक सरकारों के विरुद्ध संचालित होने वाले संभावित संगठित षड्यंत्रों, उनके वित्तीय स्रोतों, डिजिटल नेटवर्क, विदेशी संपर्कों तथा संसाधनों की समय रहते पहचान करने में वर्तमान सुरक्षा एवं खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता की व्यापक समीक्षा आवश्यक प्रतीत होती है।
- विभिन्न आंदोलनों के दौरान कथित रूप से बड़ी संख्या में फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, संगठित डिजिटल प्रचार, समन्वित अभियान, विदेशी प्रभाव, वित्तीय सहायता, डिजिटल एप्स एवं संसाधनों के उपयोग जैसे विषयों की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
- यदि किसी भी प्रकार से भारत-विरोधी तत्व, विदेशी हित समूह अथवा तथाकथित "डीप स्टेट" जैसी बाहरी या आंतरिक शक्तियाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हों, तो उनकी पहचान एवं निराकरण हेतु सुरक्षा तंत्र को और अधिक सक्षम बनाया जाना चाहिए।
- सोशल मीडिया पर व्यापक स्तर पर फैलाई जाने वाली भ्रामक एवं झूठी सूचनाओं के पीछे कार्यरत संगठित तंत्र तथा आवश्यकता होने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही पाई जाए तो कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
- मेरा पूर्व से ही आग्रह रहा है कि यदि सोशल मीडिया कंपनियों एवं डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में यह राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

2. अराजकतावादी प्रवृत्तियों पर कठोर एवं निष्पक्ष नियंत्रण आवश्यक

- जिन आंदोलनों अथवा सार्वजनिक प्रदर्शनों में प्रधानमंत्री अथवा अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के विरुद्ध हिंसा के लिए उकसाने वाले कथन, अशोभनीय भाषा अथवा लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ हो, उन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
- यदि किसी आंदोलन में बाहरी व्यक्तियों, छात्र संगठनों, अन्य संगठनों अथवा किसी भी वर्ग की सहभागिता, वित्तीय सहायता अथवा सुनियोजित भीड़ जुटाने के आरोप सामने आए हों, तो उनकी भी तथ्यपरक जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
- इस संपूर्ण तंत्र में यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक अथवा सुरक्षा संबंधी लापरवाही अथवा अयोग्यता पाई जाए, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

3. लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं संविधान-विरोधी गतिविधियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी प्रावधान

- यदि कोई व्यक्ति या संगठन सार्वजनिक रूप से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने, संसद की वैधानिक भूमिका को अस्वीकार करने अथवा असंवैधानिक माध्यमों से शासन व्यवस्था को प्रभावित करने हेतु लोगों को प्रेरित या उकसाता है, तो ऐसे मामलों में वर्तमान कानूनों की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार अधिक प्रभावी वैधानिक प्रावधान किए जाने चाहिए।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए संविधान-विरोधी एवं हिंसा के लिए उकसाने वाली गतिविधियों के विरुद्ध स्पष्ट, कठोर एवं न्यायसंगत आचार संहिता बनाई जानी चाहिए।

4. राष्ट्रहित सर्वोपरि — प्रभावी प्रतिउत्तर एवं सूचना प्रबंधन आवश्यक

- शासन तंत्र में कार्यरत प्रत्येक अधिकारी एवं संबंधित संस्थाओं को अपनी कार्यक्षमता, उत्तरदायित्व तथा समन्वय क्षमता में निरंतर वृद्धि करनी चाहिए। जहाँ आवश्यक हो, वहाँ जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए।
- राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में किसी भी संभावित खतरे अथवा उभरती हुई चुनौती को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित करना शासन व्यवस्था का मूल दायित्व है।
- हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री एवं भारत सरकार के विरुद्ध व्यापक स्तर पर भ्रामक एवं असत्य सूचनाओं का प्रसार देखने को मिला। ऐसे मामलों में सरकार एवं संबंधित संस्थाओं की ओर से त्वरित, तथ्याधारित एवं प्रभावी प्रतिउत्तर प्रणाली विकसित की जानी चाहिए।
- केवल औपचारिक प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं होती; इसके लिए सशक्त तथ्य-आधारित जनसंचार तंत्र, प्रशिक्षित मीडिया प्रबंधन तथा त्वरित सूचना प्रसारण व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।
- सूचना एवं प्रसारण व्यवस्था की कार्यक्षमता की भी वस्तुनिष्ठ समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएँ।
- संसद एवं सार्वजनिक मंचों पर ऐतिहासिक तथ्यों, राष्ट्रीय विरासत तथा भ्रामक प्रचार का तथ्यपरक उत्तर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

5. अनुशासित भारत ही सुरक्षित, सुखी एवं समृद्ध भारत का आधार

- सरकार को स्पष्ट रूप से यह संदेश देना चाहिए कि लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ अनुशासन, संवैधानिक मर्यादा एवं विधि का पालन प्रत्येक नागरिक के लिए अनिवार्य है।
- समय, परिस्थिति एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकताओं के अनुरूप आंतरिक सुरक्षा, प्रतिरक्षा तथा विधि-व्यवस्था संबंधी उपायों को समय-समय पर और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
    उपर्युक्त बिंदुओं पर उच्चस्तरीय समीक्षा कर आवश्यक नीतिगत एवं प्रशासनिक निर्णय लिए जाएँ, जिससे भारत की आंतरिक सुरक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा राष्ट्रीय एकता और अधिक सुदृढ़ हो सके।

अतः विनम्र निवेदन है कि राष्ट्रहित के इस विषय पर कृपया इस ज्ञापन को भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों को आवश्यक परीक्षण एवं कार्यवाही हेतु अग्रेषित करने की कृपा करें।


भवदीय,

अरविन्द सिंह सिसोदिया
कवि, लेखक, विश्लेषक, स्वतंत्र पत्रकार
मोबाइल : 9414180151

और प्रतिलिपि में लिख सकते हैं:-
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
माननीय केंद्रीय गृह मंत्री।
माननीय केंद्रीय रक्षा मंत्री।
माननीय केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री।




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