देश की कॉलर ऊँची करते मोदीजी, पग पग में कांटे बिछाता विपक्ष, देश सब देख रहा है - अरविन्द सिसोदिया

देश की कॉलर ऊँची करते मोदीजी, पग पग में कांटे बिछाता विपक्ष, सबक सिखाएगा जनमत - अरविन्द सिसोदिया 

कोटा 19 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया नें कहा कि " देश इस समय केंद्र सरकार की सर्वोच्चता और विपक्ष की सर्वोच्च गिरावट के दौर से गुजर रहा है।  जब विपक्ष विदेशी षड्यंन्त्रों को कवर फायर देनें का राष्ट्र विरोधी कृत्य कर रहा है, तो देशवासियों को भी देश की कालर ऊँची करने वाली प्रधानमंत्री मोदीजी की सरकार के पक्ष में खुल कर साथ खडे होना चाहिए। "

उन्होंने कहा कि " आज का भारत वैश्विक पटल पर एक नई करवट ले रहा है, जहाँ देश का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय और सामरिक मोर्चों पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, देशहित की तराजू पर  मौजूदा सरकार की तुलना पूर्ववर्ती सरकारों से की जाए, तो कई ऐसे ठोस पहलू सामने आते हैं जहाँ भारत ने अभूतपूर्व ऊंचाइयों को छुआ है और देश के मान सम्मान में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। " 

अंतरराष्ट्रीय मंच पर बुलंद होता भारत का इक़बाल

सिसोदिया नें कहा कि " वैश्विक कूटनीति के मामले में भारत आज किसी महाशक्ति के पीछे चलने वाला देश नहीं, बल्कि एजेंडा तय करने वाला राष्ट्र बन चुका है। अब भारत 'गुटनिरपेक्ष' नीति और उसके अंतरराष्ट्रीय दबावों की हिचकिचाहट से ऊपर उठ कर स्वविवेक की नीति अपना चुका है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 'देशहित सर्वोपरि' की स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकटों के दौरान देखने को मिला, जहाँ पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बावजूद भारत ने अपने आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए रूस से किफायती तेल खरीदना जारी रखा। जी 20 शिखर सम्मेलन की ऐतिहासिक और सफल अध्यक्षता ने भारत को 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की बुलंद आवाज के रूप में स्थापित किया। इसके अलावा, कोरोना संकट के दौरान दुनिया के 100 से अधिक देशों को 'वैक्सीन मैत्री' के तहत मदद पहुंचाकर भारत ने जो सॉफ्ट पावर हासिल की, उसने वैश्विक स्तर पर हर भारतीय की कॉलर ऊँची कर दी है। आज दुनिया के बड़े से बड़े मंच पर भारत की उपस्थिति के बिना वैश्विक फैसले अधूरे माने जाते हैं।"

सामरिक सुरक्षा: रक्षात्मक से आक्रामक रुख का सफर

सिसोदिया नें कहा कि " सामरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भारत ने अपनी पुरानी 'रणनीतिक संयम' की नीति को तिलांजलि देकर 'दबंग कूटनीति' और 'त्वरित कार्रवाई' का रास्ता चुना है। अतीत में सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों पर भारत केवल राजनयिक विरोध दर्ज कराकर रह जाता था, लेकिन उरी और पुलवामा हमलों के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि नया भारत घर में घुसकर मारना जानता है। दशकों से नासूर बने जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाकर राज्य को पूरी तरह मुख्यधारा में शामिल करना एक ऐसा सामरिक निर्णय था, जिसे कभी असंभव माना जाता था। आज चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सड़कों, सुरंगों और हवाई पट्टियों का जो अभूतपूर्व बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हुआ है, उसने भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। सबसे बड़ा बदलाव रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता  के रूप में आया है; जो भारत कभी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक था, वह आज तेजस लड़ाकू विमान, ब्रह्मोस मिसाइल और आईएनएस विक्रांत जैसे स्वदेशी युद्धपोतों का निर्माण कर दुनिया को हथियार निर्यात कर रहा है।

पारदर्शी शासन, डिजिटल क्रांति और बुनियादी विकास

सिसोदिया नें कहा कि " सामरिक और अंतरराष्ट्रीय मोर्चों से इतर, घरेलू मोर्चे पर शासन व्यवस्था का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस ऐतिहासिक बयान कि "केंद्र से 1 रुपया चलता है, तो जमीन पर 15 पैसे पहुंचते हैं" को, मोदी सरकार ने जनधन-आधार-मोबाइल, ट्रिनिटी के जरिए हमेशा के लिए दफन कर दिया। आज 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' के माध्यम से सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे गरीबों के बैंक खातों में पहुंच रहा है। यूपीआई  के रूप में भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा और सफल डिजिटल वित्तीय ढांचा खड़ा किया है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व पारदर्शिता दी है। इसके साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख का मुफ्त इलाज, जल जीवन मिशन से हर घर नल, और पीएम आवास योजना जैसी दूरगामी जनकल्याणकारी नीतियों ने देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया है। एक्सप्रेसवे, वंदे भारत ट्रेनों और रिकॉर्ड समय में बनते हवाई अड्डों ने देश के आर्थिक विकास को नई रफ्तार दी है।

 पग पग पर कांटे बिछाता विपक्ष: राजनीति बनाम राष्ट्रनीति

सिसोदिया नें कहा कि " मोदीजी के नेतृत्व में जहाँ एक तरफ वैश्विक और सामरिक स्तर पर देश की उपलब्धियां भारत का गौरव बढ़ा रही हैं, वहीं देश की आंतरिक राजनीति में विपक्ष की भूमिका पर लगातार गिरे हुए स्तर के नये नये कीर्तिमान स्थापित कर रही है। विपक्ष नें नेता लगातार राजनीतिक विरोध की सीमाएं लांघकर शत्रुतापूर्ण शब्दावली का उपयोग कर देश की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। " सिसोदिया नें कहा कि " चाहे वह सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक पर सेना से सबूत मांगने की बात हो, या फिर  चीन के पक्ष में कवर फायर जैसे बेबुनियाद बयानात हों, विदेशी धरती पर जाकर भारत के लोकतंत्र और संस्थाओं पर सवाल खड़े करने का मामला हो,  वोट चोरी और ईवीएम, अप्रकाशित पुस्तक के आधार पर, चढ़ावा चोरी के आधार पर अनावश्यक झूठे आरोपों को जबरदस्ती मढ़ने के अभियान हों। इन कदमों को देश की छवि धूमिल करने के प्रयास ही निरंतर विपक्ष नें किया है।"

सिसोदिया नें कहा कि " वैश्विक महामारी के समय स्वदेशी टीकों पर राजनीति करना और संसद के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय गतिरोध पैदा करना, विपक्ष की उस नीति को दर्शाता है जहाँ वे सरकार का विरोध करते-करते देश के कदमों में ही कांटे बिछाने लगते हैं। जनता को ही परोक्ष अपरोक्ष नुकसान पहुंचाने लगे। "

सिसोदिया नें कहा कि " पूरा विश्व भारत में हो रहे राष्ट्र निर्माण और ऐतिहासिक विकास और उन्नति को स्वीकार कर रहा है। वहीं विपक्षी दल महज सत्ता प्राप्ती के लिए देशहित को नुकसान पहुंचाने से नहीं चूक रहे हैं। उन्होंने कहा कि " राजनीति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन जब बात अंतरराष्ट्रीय मान और सामरिक सुरक्षा की हो, तो वहाँ विपक्ष से भी उसी परिपक्वता और एकजुटता की उम्मीद की जाती है जो देश की कॉलर को और ऊँचा कर सके।" 

भवदीय 

अरविन्द सिसोदिया 
9414180151 
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों से करने पर कई ऐसे प्रमुख क्षेत्र और नीतियां सामने आती हैं, जिन्हें देशहित और राष्ट्र निर्माण में अत्यधिक प्रभावी माना जाता है। समर्थक और राजनीतिक विश्लेषक निम्नलिखित मुख्य बातों के आधार पर उन्हें अधिक हितकारी और परिणामोन्मुखी साबित करते हैं:
## 1. कड़े और ऐतिहासिक राष्ट्रीय सुरक्षा निर्णय

* आतंकवाद पर कड़ा रुख: उरी और पुलवामा हमलों के बाद भारतीय सेना द्वारा की गई 'सर्जिकल स्ट्राइक' और 'बालाकोट एयरस्ट्राइक' ने भारत की रक्षा नीति को 'रक्षात्मक' से 'आक्रामक' बनाया। इससे वैश्विक स्तर पर यह संदेश गया कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
* अनुच्छेद 370 की समाप्ति: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटाकर राज्य को पूरी तरह से भारत की मुख्यधारा में शामिल करना एक ऐसा ऐतिहासिक कदम था, जिसे दशकों से अकल्पनीय माना जाता था। इससे वहां अलगाववाद और पथराव की घटनाओं में भारी कमी आई है। [1, 2] 
* उत्तर-पूर्व में शांति: दशकों पुरानी उग्रवादी समस्याओं को सुलझाने के लिए कई शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों में अभूतपूर्व स्थिरता आई।

## 2. डिजिटल क्रांति और पारदर्शी शासन (FinTech & Transparency)

* डीबीटी (Direct Benefit Transfer): पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कभी कहा था कि "केंद्र से 1 रुपया चलता है, तो जमीन पर 15 पैसे पहुंचते हैं।" मोदी सरकार ने जनधन-आधार-मोबाइल (JAM Trinity) के जरिए भ्रष्टाचार के इस जाल को तोड़ा। अब सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जाता है, जिससे अरबों रुपये की बिचौलियाखोरी रुकी।
* यूपीआई (UPI) और डिजिटल अर्थव्यवस्था: भारत आज डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित यूपीआई ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक के लिए वित्तीय लेनदेन को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है।

## 3. विश्व पटल पर भारत का बढ़ता कद (Global Diplomacy)

* स्वतंत्र विदेश नीति: अन्य पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में मौजूदा सरकार ने बिना किसी वैश्विक दबाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान) के देशहित को सर्वोपरि रखा। भारत ने पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस से किफायती तेल खरीदना जारी रखा।
* वैश्विक नेतृत्व: G20 शिखर सम्मेलन की सफल अध्यक्षता, 'वैश्विक दक्षिण' (Global South) की आवाज बनना और 'वैक्सीन मैत्री' के तहत कोरोना काल में दुनिया के 100 से अधिक देशों को मुफ्त वैक्सीन पहुंचाना भारत की सॉफ्ट पावर का प्रतीक बना।
* प्रवासी भारतीयों का जुड़ाव: दुनिया भर में फैले अनिवासी भारतीयों (NRIs) को देश के विकास और कूटनीति का एक सक्रिय हिस्सा बनाया गया।

## 4. बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का अभूतपूर्व विकास

* हाईवे और कनेक्टिविटी: पिछले एक दशक में राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways), वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों और नए हवाई अड्डों का निर्माण रिकॉर्ड गति से हुआ है।
* बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर: चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सड़कों, सुरंगों और पुलों का जाल बिछाया गया है, जिससे आपातकाल में भारतीय सेना की पहुंच बेहद तेज हो गई है।

## 5. आत्मनिर्भरता और घरेलू विनिर्माण (Make in India)

* रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: भारत पहले दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक था। अब रक्षा मंत्रालय की नीतियों के कारण भारत लड़ाकू विमान (तेजस), मिसाइलें (ब्रह्मोस) और युद्धपोत (आईएनएस विक्रांत) खुद बना रहा है और बड़े पैमाने पर निर्यात भी कर रहा है।
* मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग: भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश बन चुका है, जिससे लाखों रोजगार पैदा हुए हैं। [3] 

## 6. दूरगामी जनकल्याणकारी योजनाएं

* आयुष्मान भारत: दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना, जो गरीब परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज देती है।
* जल जीवन मिशन: करोड़ों ग्रामीण घरों तक सीधे पाइप से पीने का साफ पानी पहुंचाना।
* पीएम आवास और उज्ज्वला योजना: करोड़ों गरीबों को पक्के मकान और महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन देकर उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाना।

निष्कर्ष:
जहां पूर्व के प्रधानमंत्रियों ने अपने-अपने दौर की चुनौतियों के अनुसार देश को आगे बढ़ाया, वहीं पीएम मोदी के कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता 'त्वरित निर्णय लेने की क्षमता' (Decisive Leadership), 'शून्य भ्रष्टाचार नीति' (Zero Tolerance to Corruption) और 'वैश्विक आत्मविश्वास' रही है, जो देशहित में एक नया बेंचमार्क साबित हुई है।

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