'चोरों को बचाओ और निर्दोषों को फंसाओ'
प्रेस विज्ञप्ति
विपक्ष का 'चोरों को बचाओ और निर्दोषों को फंसाओ' अभियान राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित — अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 2 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने अयोध्या के राममंदिर चंदा चोरी प्रकरण में उत्तरप्रदेश सरकार एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास प्रबंधन द्वारा की जा रही कार्रवाई को " न्यायोचित एवं कानूनसम्मत बताते हुए विपक्ष द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार को बेबुनियाद और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। समान्यतौर पर भी कार्यवाही तो चोर के खिलाफ होती है, रिपोर्ट लिखाने वाले के खिलाफ नहीं होती । "
सिसोदिया ने कहा, "जो राजनीतिक दल कई दशकों तक हिंदू, हिंदुत्व और रामजन्मभूमि आंदोलन के विरोध में खड़े रहे, उन्हें बंगाल चुनाव के बाद, अचानक हिंदुत्व और रामलला के प्रति अत्यधिक आस्थावान दिखाई देना आश्चर्य और संदेह उत्पन्न करता है। वहीं वास्तविक आरोपित व्यक्तियों के बजाय निर्दोष लोगों को जबरन इस प्रकरण से जोड़ने का प्रयास भी यह प्रश्न खड़ा करता है कि आखिर विपक्ष किन लोगों को बचाना चाहता है और क्यों।"
उन्होंने कहा कि " इस पूरे प्रकरण को सबसे अधिक उछालने वाले वही राजनीतिक दल और उनके नेता हैं, जिनके विरुद्ध स्वयं भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति तथा अन्य आर्थिक अनियमितताओं के मामलों में जांच या न्यायिक प्रक्रियाएँ चल चुकी हैं तथा जिनमें कुछ नेता न्यायालयों से जमानत पर भी हैं। वहीं उत्तरप्रदेश के दो दलों नें तो राजनीतिक प्रभाव से सम्पन्नता की मीनारें ख़डी की हैँ। ऐसे दलों द्वारा ईमानदारी और नैतिकता का पाठ पढ़ाना जनता की समझ से परे है।"
सिसोदिया ने कहा कि " किसी भी आपराधिक प्रकरण में जांच एजेंसियों को साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करने का अवसर मिलना चाहिए। जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक बयानबाजी की सुनामी स्वयं सिद्ध करती है कि द्वेषता कितनी अधिक तीव्रता से काम कर रही है और उसका मूल मकसद जनभावनाओं को भड़काना और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि " विपक्ष का उद्देश्य इस प्रकरण के माध्यम से राम मंदिर की गरिमा, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वसनीयता पर अनावश्यक प्रश्नचिह्न खड़े करना है। वहीं विपक्ष का वास्तविक दोषियों के विरुद्ध कुछ न बोल कर, निर्दोषों को फंसाने की भारीभरकम अभियान, शुद्ध राजनीतिक स्वार्थ साधना मात्र है।
सिसोदिया ने कहा कि " यदि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए, लेकिन किसी निर्दोष को केवल राजनीतिक कारणों से आरोपित करना अथवा किसी दोषी को संरक्षण देना न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों—दोनों के विरुद्ध है।"
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि "निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के बाद पूरा सत्य सामने आएगा और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिलेगा। उन्होंने विपक्ष से आह्वान किया कि वह राम मंदिर जैसे राष्ट्र की आस्था से जुड़े विषय पर राजनीति करने के बजाय जांच प्रक्रिया का सम्मान करे तथा जनता को भ्रमित करने से बचे।"
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
9414180151
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