माननीय जिला कलेक्टर महोदय, स्वामित्व योजना
माननीय जिला कलेक्टर महोदय,
जिला - गुना
जिला कलेक्ट्रेट परिसर, गुना।
विषय - 1.स्व भूपेंद्र सिंह सिसोदिया पुत्र स्व समंदर सिंह जी के प्लाट क्रमांक- 32 रकबा 2175 वर्ग मीटर, आबादी खसरा नंबर 273 रकबा 1.076 हैक्टर, ग्राम - मोड़का, ग्राम पंचायत - सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना मप्र स्थित पुस्तेनी आवासीय परिसर के स्वामित्व सर्वेक्षण में तैयार किए गये खसरे में त्रुटि सुधार कर सभी उत्तराधिकारीयों के नाम दर्ज किए जानें के संदर्भ में।
2. त्रुटि सुधार निर्णय होनें तक उपरोक्त संपत्ति के सभी आठ सह स्वामियों के हितों की रक्षा करने हेतु वर्तमान आदेश को स्थगित कर,किसी भी प्रकार के क्रय विक्रय एवं किसी भी प्रकार के हस्तानांतरण रोक एवं यथास्थिति बनाये रखने के संदर्भ में।
संदर्भ - स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ -3/2020-21जिसका अंतिम प्रकाशन 02/05/2023 को हुआ है के संदर्भ में।
वादी
अरविन्द सिंह सिसोदिया पुत्र भूपेंद्र सिंह सिसोदिया
जाति राजपूत आयु 69 वर्ष
निवासी ग्राम मोड़का जिला गुना
हाल निवास - बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड़, डडवाड़ा,
कोटा जंक्शन राज पिनकोड - 324002
मोबाईल - 9414180151
प्रतिवादी
1- पटवारी ग्राम मोड़का
2- सचिव ग्राम पंचायत सूजाखेड़ी
3- सरपंच ग्राम पंचायत सूजाखेड़ी
1- माननीय न्यायालय नायब तहसीलदार वृत्त फतेहगढ़, तहसील बमोरी जिला गुना।
2- माननीय न्यायालय तहसीलदार बमोरी, जिला गुना मप्र
3. श्रीमती कमला देवी धर्मपत्नी स्व भूपेंद्रसिंह,आयु 90 वर्ष
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना)
पता - कस्तूरबा नगर, ए बी रोड़,गुना मप्र
मोबाईल - 9826250651
4- द्वितीय पुत्र स्व हेमंत सिंह पुत्र स्व भूपेंद्रसिंह के उत्तराधिकारी गण
4 क-श्रीमती साधना सिंह पत्नि स्व हेमन्त सिंह
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना)
मोबाईल 9340169068
4 ख- रणविजय सिंह पुत्र स्व हेमन्त सिंह
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना)
मोबाईल - 9131350478
पता- भोपाल
4 ग- विजेन्द्र सिंह पुत्र स्व हेमन्त सिंह
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना)
मोबाईल - 94240 55161, 6260880272 पता- भोपाल
5- तृतीय पुत्र विश्वजीत सिंह पुत्र स्व भूपेंद्रसिंह आयु 63 वर्ष
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना)
कस्तूरबा नगर, ए बी रोड़,गुना मप्र
मोबाईल - 9425380831
6- चतुर्थ पुत्र सत्यजीत सिंह पुत्र स्व भूपेंद्र सिंह आयु 60 वर्ष
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना )
पता - कस्तूरबा नगर, ए बी रोड़,गुना मप्र
मोबाईल - 9826280096
7-पंचम पुत्र प्रशांत सिंह पुत्र स्व भूपेंद्र सिंह, आयु 58 वर्ष
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना)
पता - धरनावदा हॉउस, हाट रोड़, गुना मप्र
मोबाईल - 9827087809
8-षष्टम पुत्र सिद्धार्थ सिंह पुत्र स्व भूपेंद्र सिंह, आयु 56 वर्ष
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना)
पता - कस्तूरबा नगर, ए बी रोड़,गुना
मोबाईल - 9575624722 / 9425361121
9-सप्तम पुत्री वसुंधरा सिंह पुत्री स्व भूपेंद्र सिंह,आयु 50 वर्ष
(मूल निवासी - ग्राम मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना)
पता - 38 सुरभी नगर, अयोध्या बाईपास,भोपाल
मोबाईल - 9826640674 / 9589088003
10-सर्वधारण
1. आवेदक अरविन्द सिंह सिसोदिया उर्फ अरविन्द सिसोदिया उर्फ अरविन्द सिंह पुत्र स्व भूपेंद्र सिंह, जाति राजपूत आयु 68 वर्ष,मूल निवासी मोड़का, तहसील बमौरी जिला गुना, हाल निवासी बेकरी के सामने राधा कृष्ण मंदिर रोड़, डडवारा कोटा जंक्शन,पिनकोड 324002।
आवेदक का आधारकार्ड संख्या 4799 3020 3092 है एवं मोबाईल 9414180151 है।
2. आवेदक, पिता स्व. भूपेंद्र सिंह सिसोदिया पुत्र समंदर सिंह एवं माता श्रीमती कमलादेवी पत्नी भूपेंद्र सिंह का प्रथम पुत्र होकर भूपेंद्र सिंह पुत्र समंदर सिंह के संयुक्त हिंदू परिवार का सदस्य एवं प्रथमश्रेणी का उत्तराधिकारी है।
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वाद अंतर्गत धारा 34 व 38 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम (Specific Relief Act) एवं आदेश 39 नियम 1 व 2 सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC)
विषय: स्वत्व घोषणा (Declaration of Title), स्वामित्व कार्ड निरस्तीकरण एवं स्थाई निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) बाबत।
वादीगण निम्नानुसार सविनय निवेदन करते हैं:
1. यह कि ग्राम मोड़का, पटवारी हल्का सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना मप्र स्थित आबादी भूमि पर वादीगण की दादी स्व. कंबर बाई उर्फ़ कमर बाई पत्नी समंदर सिंह 90 वर्ष पूर्व से अपने पुत्र स्व. भूपेंद्र सिंह (वादीगण व प्रतिवादी क्र. 2 व 3 के पिता तथा प्रतिवादी क्र.1 के पति) के साथ निवास करती चली आ रही थीं। उक्त संपूर्ण आवासीय भूमि पैतृक संपत्ति है। उपरोक्त आवासीय संपत्ति में पक्के निर्माण, कुआँ एवं ओपन स्पेश है जो संयुक्तरूप से काम आता है। उपरोक्त आवासीय परिसर के सभी पक्के निर्माणों पर, खाली जमीन पर, कुएं पर सभी आठ उत्तराधिकारीयों का सहस्वामित्व है। संयुक्त कब्जा है।
2. यह कि वादीगण व प्रतिवादी क्र. 2 व 3 के पिता श्री भूपेंद्र सिंह जी का देहावसान दिनांक 20 दिसंबर 2016 को हो गया था। उनकी मृत्यु के पश्चात उनके कुल 8 वैध कानूनी उत्तराधिकारी (पत्नी- प्रतिवादी क्र. 1, 6 पुत्र तथा 1 पुत्री) हुए, जो इस वाद के वादीगण एवं प्रतिवादी क्र. 2 व 3 हैं।
3. यह कि पिता स्व. भूपेंद्र सिंह जी की मृत्यु के पश्चात ग्राम की पैतृक कृषि भूमि का फोती नामांतरण (Mutation) एवं आधिकारिक पारिवारिक बंटवारा राजस्व न्यायालय द्वारा सभी 8 उत्तराधिकारियों के पक्ष में समान रूप से किया जा चुका है (राजस्व आदेश प्रति संलग्न है)। इस प्रकार कानूनन और व्यावहारिक रूप से सभी 8 उत्तराधिकारी संयुक्त रूप से पिता की समस्त संपत्ति के समान अधिकारी हैं।
4- स्वामित्व योजना मूलतः सर्वेक्षण था और उसके द्वारा आवासीय भूमि धारकों की यथास्थिति दस्ताबेजी करण था। यह स्वत्व के निर्धारण का अथवा विवाद की स्थिति में स्वत्व के निर्णय का अधिकार नहीं देता। विवाद है तो वहाँ विवाद भी दर्ज करने थे। संयुक्त परिवारों की संयुक्त स्थिति भी दर्ज करनी थी। किसीको भी मनमाने निर्णय का अधिकार नहीं था।
4- उपरोक्त प्रकरण का मुख्य जालसाझ उपसरपंच सत्यजीत सिंह और ग्राम पटवारी है। जिन्होंने इसे प्रभावित किया है। माताजी श्रीमती कमलादेवी 90 वर्ष से अधिक आयु की घरेलू महिला हैँ, वे स्मृति भ्रम की भी रोगी है, इस आयु में उनकी मानसिक स्थिति ठीक भी नहीं है और वे इस सर्वेक्षण के बारे में पूरी तरह अनभिज्ञ हैँ।
4. यह कि हाल ही में भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश शासन द्वारा चलाई जा रही 'स्वामित्व योजना' के अंतर्गत उक्त आबादी भूमि/आवासीय मकान का सर्वे किया गया। परंतु प्रतिवादी क्र. 1, 2 व 3 ने दुर्भावनापूर्वक, कपटपूर्वक एवं वास्तविक तथ्यों को छुपाकर, सर्वे अधिकारियों को गलत जानकारी दी।
4- पूरी जानकारी छुपा कर गलत जानकारी देकर और अन्य पारिवारिक सदस्यों से इस सर्वेक्षण को पूरी तरह छुपा कर जो स्वामित्व योजना का सर्वेक्षण किया गया है वह पूरी तरह आपराधिक षड्यंत्र है, अन्य हिस्सेदारों का अधिकार हड़पने का षड्यंत्र है।
4- ग्राम पटवारी एवं ग्राम पंचायत को सभी उत्तराधिकारीयों को इस सर्वेक्षण के बारे में सूचना देनी चाहिए थी, सभी में मोबाईल नंबर ग्राम पटवारी के पास थे, वे बातचीत भी करते थे, मगर उन्होंने सर्वेक्षण के संदर्भ को छुपाया और अन्य उत्तराधिकारी एवं सह स्वामियों को क्षति कारित की है।
5. यह कि प्रतिवादीगण ने अन्य 5 वैध सह-उत्तराधिकारियों (वादीगण) के अधिकारों को दबाने के उद्देश्य से स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड में केवल अपने 3 नामों (प्रतिवादी क्र. 1, 2 व 3) को दर्ज करवाकर 'प्रॉपर्टी कार्ड' (स्वामित्व कार्ड) जारी करवा लिया है, जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी, शून्य एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
6. यह कि वादी की जानकारी में आते ही इस त्रुटि/धोखाधड़ी के विरुद्ध पूर्व में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी, किंतु उस पर आज दिनांक तक कोई वैधानिक कार्यवाही नहीं की गई है।
7. यह कि प्रतिवादी क्र. 1 से 3 अब उक्त अवैध रूप से बने प्रॉपर्टी कार्ड के आधार पर शासन से अपने पक्ष में अंतिम डीड/रजिस्ट्री (Conveyance Deed) निष्पादित कराने तथा पैतृक आवासीय संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने (बेचने या अन्य को हस्तांतरित करने) का प्रयास कर रहे हैं। यदि वे ऐसा करने में सफल रहे, तो वादीगण को अपूरणीय क्षति होगी।
8. यह कि वाद कारण (Cause of Action) तब उत्पन्न हुआ जब प्रतिवादीगण ने कपटपूर्वक केवल अपने नाम से कार्ड बनवाया और वर्तमान में भी जारी है, इसलिए यह वाद न्यायालय के क्षेत्राधिकार में है।
सहायता/अनुतोष की मांग (Relief Clicked):
अतः वादीगण प्रार्थना करते हैं कि श्रीमान जी न्याय हित में निम्न आदेश पारित करने की कृपा करें:
* (क) यह घोषित किया जावे कि विवादित आबादी भूमि/मकान पर सभी 8 उत्तराधिकारियों (वादीगण एवं प्रतिवादी क्र. 1 से 3) का समान संयुक्त मालिकाना हक है।
* (ख) प्रतिवादी क्र. 1 से 3 के नाम पर जारी किए गए स्वामित्व योजना के प्रॉपर्टी कार्ड को अवैध एवं शून्य (Null & Void) घोषित किया जावे तथा राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने का आदेश दिया जावे।
* (ग) प्रतिवादी क्र. 1 से 3 को स्थाई निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) के जरिए रोका जावे कि वे उक्त कार्ड के आधार पर कोई रजिस्ट्री न कराएं और न ही संपत्ति को किसी अन्य को बेचें।
* (घ) अन्य न्यायोचित सहायता जो न्यायालय उचित समझे, वादीगण को प्रदान की जावे।
स्थान: ....................
दिनांक: ....................
वादी (हस्ताक्षर)
अरविन्द सिंह सिसोदिया पुत्र भूपेंद्र सिंह सिसोदिया
जाति राजपूत आयु 69 वर्ष
निवासी ग्राम मोड़का जिला गुना
हाल निवास - बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड़, डडवाड़ा,
कोटा जंक्शन राज पिनकोड - 324002
मोबाईल - 9414180151
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## इसके साथ लगने वाला 'स्टे आवेदन' (Order 39 Rule 1 & 2 CPC):
वकील साहब मुख्य दावे के साथ एक अलग से "अस्थाई निषेधाज्ञा आवेदन" लगाएंगे, जिसमें कोर्ट से यह प्रार्थना की जाएगी कि: "जब तक इस मुख्य मुकदमे का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक प्रतिवादीगण के नाम पर मकान की रजिस्ट्री करने या उसे बेचने पर तत्काल अंतरिम रोक (Stay/Status Quo) लगाई जावे।"
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मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत तैयार किए गए 'अधिकार अभिलेख' (प्रॉपर्टी कार्ड) की रजिस्ट्री को रोकने के लिए आपको राजस्व विभाग (Revenue Department) और पंजीयन कार्यालय (Registration Office) में कानूनी तौर पर अपनी आपत्ति (Objection) दर्ज करानी होगी। सरकार ने इस योजना में रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाया है, इसलिए यदि आपको किसी संपत्ति के मालिकाना हक या सर्वे पर कोई आपत्ति है, तो आपको तुरंत कदम उठाने चाहिए।
रजिस्ट्री रोकने के सबसे प्रभावी और कानूनी तरीके निम्नलिखित हैं:
## 1. संपदा (SAMPADA) पोर्टल पर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करें
मध्यप्रदेश सरकार के नियमानुसार अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री रोकने या उस पर दावा ठोकने के लिए पंजीयन कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं है। आप घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
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* प्रक्रिया: मध्यप्रदेश पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग की आधिकारिक वेबसाइट MPIGR SAMPADA पर जाएं।
* जानकारी: आपत्ति दर्ज करने के लिए आपके पास उस संपत्ति की यूनीक आईडी (Unique ID) या पूर्व का रजिस्ट्री नंबर होना अनिवार्य है। केवल कॉलोनी या स्थान के नाम से आपत्ति स्वीकार नहीं होगी।
* शुल्क एवं दस्तावेज: इसके लिए लगभग ₹250 का ऑनलाइन शुल्क लगता है। आपको आपत्ति के समर्थन में अपने स्वामित्व या विवाद से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे।
* असर: ऑनलाइन आपत्ति दर्ज होते ही रिकॉर्ड सीधे सब-रजिस्ट्रार (Sub-Registrar) के सिस्टम में दिखने लगेगा। जब भी कोई उस संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पहुंचेगा, तो सिस्टम उसे ब्लॉक कर देगा।
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## 2. तहसीलदार या संबंधित राजस्व अधिकारी के पास लिखित आपत्ति
स्वामित्व योजना के तहत मध्यप्रदेश में रजिस्ट्री के अधिकार तहसीलदार और नायब तहसीलदार (उप-पंजीयक के रूप में) को दिए गए हैं।
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* प्रक्रिया: यदि आपके गांव या क्षेत्र में स्वामित्व योजना का सर्वे गलत हुआ है या आपके हक की जमीन किसी और के नाम पर दर्ज हो गई है, तो तुरंत संबंधित तहसीलदार न्यायालय (Tehsildar Court) में एक लिखित आवेदन प्रस्तुत करें। [3]
* कार्रवाई: आवेदन में स्पष्ट करें कि संपत्ति विवादित है और जब तक इसका सही निराकरण नहीं हो जाता, तब तक इसके 'अधिकार अभिलेख' का पंजीयन (रजिस्ट्री) रोका जाए।
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## 3. सिविल कोर्ट से स्टे ऑर्डर (Stay Order) लें
यदि मामला गंभीर है (जैसे पारिवारिक विवाद, पैतृक संपत्ति का गलत बंटवारा या धोखाधड़ी), तो सबसे मजबूत तरीका अदालत की शरण लेना है:
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* प्रक्रिया: आप अपने नजदीकी सिविल न्यायालय (Civil Court) में संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर एक दीवानी मुकदमा (Civil Suit) दायर करें।
* निषेधाज्ञा (Injunction): मुकदमे के साथ ही न्यायालय से अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Injunction - Stay Order) के लिए आवेदन करें।
* असर: यदि कोर्ट संपत्ति पर 'यथास्थिति' (Status Quo) या रजिस्ट्री पर रोक का आदेश जारी कर देता है, तो उसकी प्रमाणित प्रति तहसीलदार और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा कर दें। कोर्ट के आदेश के बाद कोई भी अधिकारी उस संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं कर सकेगा।
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## 4. दावा-आपत्ति (Objection Window) के दौरान शिकायत
यदि आपके क्षेत्र में स्वामित्व योजना का काम अभी चल रहा है और अंतिम अधिकार अभिलेख जारी नहीं हुआ है:
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* प्रक्रिया: ग्राम पंचायत स्तर पर जब प्रारंभिक सर्वे सूची (नक्शा और नाम) चस्पा की जाती है, तो सरकार दावा-आपत्ति के लिए समय देती है।
* कार्रवाई: आप तुरंत ग्राम पंचायत सचिव, पटवारी या जिला स्तरीय स्वामित्व योजना के नोडल अधिकारी को लिखित शिकायत देकर अपना नाम सुधरवा सकते हैं या रजिस्ट्री प्रक्रिया रुकवा सकते हैं।
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यदि आप इस संबंध में कोई कदम उठाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने नजदीकी तहसील कार्यालय में संपर्क करें या किसी स्थानीय सिविल वकील से कानूनी परामर्श लें ताकि आपके पास मौजूद दस्तावेजों के आधार पर सही कानूनी प्रारूप में आपत्ति दर्ज कराई जा सके।
यदि आप चाहें तो मुझे यह बता सकते हैं:
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* क्या जमीन का सर्वे किसी और के नाम पर गलत हो गया है या यह कोई पारिवारिक आपसी विवाद है?
* क्या आपके पास उस जमीन के पुराने कागजात या पट्टा उपलब्ध है?
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