गुना–बमोरी–श्योपुर कलां–सवाई माधोपुर
गुना–बमोरी–श्योपुर कलां–सवाई माधोपुर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के सर्वेक्षण एवं निर्माण की मांग
सेवा में,
माननीय रेल मंत्री जी,
रेल मंत्रालय, भारत सरकार,
रेल भवन, नई दिल्ली – 110001
प्रति :-
1-माननीय श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया जी, केंद्रीय मंत्री एवं सांसद, गुना (म.प्र.)
2-अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली
3-माननीय मुख्यमंत्री महोदय , मध्यप्रदेश।
4-माननीय मुख्यमंत्री महोदय , राजस्थान।
विषय : मध्य प्रदेश एवं राजस्थान को जोड़ने वाली गुना–बमोरी–श्योपुर कलां–सवाई माधोपुर (लगभग 240–250 किमी) नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के प्रारंभिक इंजीनियरिंग एवं यातायात सर्वे (PETS) तथा निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान किए जाने बाबत।
महोदय,
हम मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के नागरिकों की ओर से आपके समक्ष एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी प्रभाव वाली रेलवे परियोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश का गुना, बमोरी, कराहल एवं श्योपुर क्षेत्र तथा राजस्थान का सवाई माधोपुर जिला आज भी प्रत्यक्ष रेल संपर्क से वंचित हैं। यह क्षेत्र आदिवासी, कृषि प्रधान एवं विकास की दृष्टि से पिछड़ा होने के बावजूद प्राकृतिक संसाधनों, कृषि उत्पादन एवं पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण है।
यदि गुना–बमोरी–श्योपुर कलां–सवाई माधोपुर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन का निर्माण किया जाता है तो यह केवल दो राज्यों को जोड़ने वाली रेल लाइन नहीं होगी, बल्कि मध्य भारत के विकास की नई धुरी सिद्ध होगी।
1- प्रस्तावित रेल मार्ग :- गुना जंक्शन → बमोरी → कराहल → सेसईपुरा (कूनो क्षेत्र) → श्योपुर कलां → सवाई माधोपुर जंक्शन
2-अनुमानित दूरी : 240–250 किलोमीटर
3- श्योपुर में यह रेलमार्ग भविष्य की ग्वालियर–श्योपुर–कोटा ब्रॉडगेज लाइन तथा प्रस्तावित झांसी–शिवपुरी–श्योपुर रेल परियोजना से जुड़कर एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन का स्वरूप ग्रहण करेगा।
4- उपेक्षित आदिवासी अंचल के विकास का नया सूर्योदय
यह प्रस्तावित रेल परियोजना केवल एक परिवहन सुविधा नहीं होगी, बल्कि मध्य प्रदेश के उपेक्षित एवं आदिवासी बहुल बमोरी, कराहल तथा श्योपुर क्षेत्र के समग्र विकास का आधार बनेगी। वर्षों से विकास की मुख्यधारा से वंचित इन अंचलों में यह रेल संपर्क नव विकास का नया सूर्योदय सिद्ध होगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, व्यापार, पर्यटन तथा आधारभूत संरचना के विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। यह परियोजना आदिवासी समाज के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के साथ-साथ क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
1. आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों का समग्र विकास
बमोरी, कराहल एवं श्योपुर जैसे आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों को पहली बार आधुनिक रेल संपर्क प्राप्त होगा। इससे—
क -शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच आसान होगी।
ख - युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ग - ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
घ - क्षेत्रीय असमानता कम होगी।
2. किसानों एवं कृषि क्षेत्र को अभूतपूर्व लाभ
यह सम्पूर्ण क्षेत्र धान, सरसों, धनिया, गेहूँ तथा अन्य कृषि उत्पादों का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है।
क - रेल संपर्क मिलने से—किसानों को देश की प्रमुख मंडियों तक कम लागत में परिवहन सुविधा मिलेगी।
ख - धनिया, सरसों एवं धान के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
ग - खाद, बीज एवं कृषि उपकरणों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
घ - कृषि आधारित उद्योग एवं कोल्ड स्टोरेज विकसित होंगे।
3. पर्यटन विकास की नई दिशा
क - यह रेलमार्ग देश के दो विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव पर्यटन स्थलों—
ख - कूनो राष्ट्रीय उद्यान (चीता परियोजना)
ग - रणथंभौर टाइगर रिजर्व
को सीधे जोड़ने वाला पहला प्रभावी पर्यटन कॉरिडोर बनेगा।
इससे—
- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में वृद्धि होगी।
- होटल, परिवहन एवं स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा।
- हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा।
4. व्यापार, उद्योग एवं माल परिवहन को नई गति
यह रेलमार्ग मध्य भारत के लिए एक महत्वपूर्ण माल परिवहन कॉरिडोर सिद्ध होगा।
इससे—
- महुआ, शहद, चिरौंजी एवं अन्य लघु वनोपज का विपणन आसान होगा।
- वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क एवं कृषि आधारित उद्योग विकसित होंगे।
- कोटा, गुना एवं ग्वालियर क्षेत्र के बीच औद्योगिक संपर्क मजबूत होगा।
- मालगाड़ियों के लिए एक नया एवं छोटा वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।
5- विशेष रूप से कोयला परिवहन (Coal Transportation) के लिए यह मार्ग अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। वर्तमान में लंबी दूरी तय करने के कारण समय एवं ईंधन की अधिक खपत होती है। इस रेलमार्ग के बनने से कोयला एवं अन्य भारी माल की ढुलाई अधिक कम दूरी, कम लागत एवं कम समय में संभव होगी, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन क्षमता एवं राजस्व दोनों में वृद्धि होगी।
6- कोटा जंक्शन पर भार कम होगा
वर्तमान में कोटा जंक्शन उत्तर एवं पश्चिम भारत का अत्यंत व्यस्त रेलवे जंक्शन है, जहाँ यात्री एवं मालगाड़ियों का भारी दबाव रहता है।
प्रस्तावित रेलमार्ग बनने से—
- कोटा जंक्शन पर परिचालन भार में उल्लेखनीय कमी आएगी।
- मालगाड़ियों एवं लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए नया वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।
- रेलवे संचालन अधिक सुगम एवं समयबद्ध होगा।
- भविष्य में बढ़ते रेल यातायात को संभालने में रेलवे को सुविधा मिलेगी।
7. जयपुर एवं जोधपुर की सीधी रेल पहुँच
यह रेलमार्ग सवाई माधोपुर जंक्शन से सीधे जुड़ने के कारण मध्य प्रदेश के बीना, अशोकनगर, गुना एवं श्योपुर क्षेत्र को—
- जयपुर,अजमेर,जोधपुर, बीकानेर, दिल्ली की दिशा में सीधा एवं अधिक सुविधाजनक रेल संपर्क प्रदान करेगा।
- वर्तमान में यात्रियों को अनावश्यक रूप से कोटा अथवा अन्य मार्गों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह नई रेल लाइन यात्रा दूरी एवं समय दोनों में कमी लाएगी।
8. राष्ट्रीय रेल नेटवर्क को मिलेगा नया वैकल्पिक मार्ग
यह परियोजना केवल एक क्षेत्रीय रेल लाइन नहीं होगी, बल्कि भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक रेल कॉरिडोर सिद्ध होगी।
इससे—
- गुना–कोटा रेलखंड एवं कोटा - सवाई माधोपुर रेल खंड पर दबाव कम होगा।
- भविष्य में देश की पश्चिमी सीमाओं तक पहुंच हेतु समरिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी पहुंच मार्ग भी सिद्ध होगा।
- आपातकालीन परिस्थितियों एवं रखरखाव कार्यों के दौरान रेल संचालन प्रभावित नहीं होगा।
- माल एवं यात्री दोनों प्रकार की ट्रेनों के संचालन में अधिक लचीलापन मिलेगा।
9- पर्यावरण एवं तकनीकी सुझाव
- चंबल नदी पर आधुनिक रेलवे पुल का निर्माण किया जाए।
- कूनो एवं रणथंभौर क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा हेतु आधुनिक अंडरपास एवं ओवरपास बनाए जाएँ।
- रेलमार्ग को पूर्ण विद्युतीकरण एवं भविष्य में दोहरीकरण योग्य बनाया जाए।
- आधुनिक सिग्नलिंग एवं उच्च गति संचालन के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित की जाए।
हमारी प्रमुख मांगें :-
हम भारत सरकार एवं रेल मंत्रालय से विनम्र निवेदन करते हैं कि—
1. गुना–बमोरी–श्योपुर कलां–सवाई माधोपुर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन का प्रारंभिक इंजीनियरिंग एवं यातायात सर्वे (PETS) तत्काल स्वीकृत किया जाए।
2. सर्वे रिपोर्ट के आधार पर परियोजना को रेल मंत्रालय की प्राथमिकता सूची में सम्मिलित किया जाए।
3. आगामी रेल बजट में इस परियोजना के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान किया जाए।
4. परियोजना के निर्माण हेतु प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति शीघ्र प्रदान की जाए।
5. इस परियोजना को मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के संयुक्त क्षेत्रीय विकास कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए।
यह रेल परियोजना केवल नई पटरियाँ बिछाने का कार्य नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के लाखों किसानों, आदिवासियों, विद्यार्थियों, व्यापारियों एवं युवाओं के भविष्य को नई दिशा देने वाली विकास यात्रा है।
इससे क्षेत्रीय संतुलित विकास, कृषि एवं उद्योग को नई गति, पर्यटन को बढ़ावा, माल परिवहन की लागत में कमी, कोयला परिवहन की दक्षता में वृद्धि, कोटा जंक्शन पर भार में कमी तथा जयपुर–जोधपुर की सीधी रेल पहुँच जैसी अनेक राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियाँ प्राप्त होंगी।
अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि जनहित एवं राष्ट्रहित को दृष्टिगत रखते हुए इस महत्वपूर्ण रेल परियोजना के सर्वेक्षण एवं निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ कराने की कृपा करें।
सधन्यवाद।
भवदीय
अरविन्द सिंह सिसोदिया
भाजपा मीडिया संयोजक, कोटा संभाग
(मूल निवासी – ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना, मध्य प्रदेश)
पता : बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड,
डड़वाड़ा, कोटा जंक्शन, राजस्थान – 324002
मोबाइल : 9414180151
प्रतिलिपि
1. अध्यक्ष, रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली
2. महाप्रबंधक, पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर
3. महाप्रबंधक, उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर
4. मंडल रेल प्रबंधक, भोपाल मंडल
5. मंडल रेल प्रबंधक, कोटा मंडल
6. संबंधित सांसद एवं विधायकगण
7. जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक संगठन
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सेवा में ,
माननीय रेल मंत्री जी,
रेल मंत्रालय, भारत सरकार,
रेल भवन, नई दिल्ली - 110001
प्रति,
माननीय ज्योतिरादित्य जी सिंधिया
केबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद गुना मप्र
विषय: मध्य प्रदेश और राजस्थान को जोड़ने वाली "गुना-बमोरी-श्योपुर कलां-सवाई माधोपुर" नई ब्रॉडगेज रेल लाइन (अनुमानित दूरी 240-250 किमी) के सर्वेक्षण एवं निर्माण की स्वीकृति के संबंध में।
महोदय,
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान मध्य प्रदेश के बेहद पिछड़े, आदिवासी बाहुल्य अंचल (गुना-बमोरी-श्योपुर) तथा राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित रेलवे कनेक्टिविटी की मांग की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
गुना से बमोरी और श्योपुर कलां होते हुए सवाई माधोपुर (राजस्थान) तक एक नई ब्रॉडगेज रेल लाइन का निर्माण जनहित, क्षेत्रीय विकास और पर्यटन की दृष्टि से एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। इस प्रस्तावित परियोजना का विस्तृत विवरण एवं औचित्य निम्नलिखित है:-
## 1. प्रस्तावित रेल मार्ग संरेखण (Proposed Alignment & Map)
यह नई स्वतंत्र रेल लाइन मध्य प्रदेश और राजस्थान के तीन प्रमुख रेलवे जंक्शन्स को आपस में जोड़ेगी:
* प्रारंभिक जंक्शन: [गुना जंक्शन]() (मध्य प्रदेश) - जहाँ से यह लाइन उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगी।
* प्रमुख मध्यवर्ती स्टेशन: बमोरी (तहसील मुख्यालय), कराहल (आदिवासी ब्लॉक) और [सेसईपुरा (कूनो क्षेत्र)।
* मध्यवर्ती जंक्शन: [श्योपुर कलां] - जहाँ यह निर्माणाधीन ग्वालियर-श्योपुर-कोटा ब्रॉडगेज लाइन तथा प्रस्तावित झाँसी-शिवपुरी-श्योपुर लाइन के साथ मिलकर एक बड़ा रेलवे हब बनेगा।
* अंतिम टर्मिनल जंक्शन: [सवाई माधोपुर जंक्शन (राजस्थान)] - जहाँ यह दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग से सीधे जुड़ जाएगी। यहाँ से जयपुर, अजमेर व जोधपुर और बीकानेर को भी रेल मार्ग है।
* कुल अनुमानित दूरी: लगभग 240 से 250 किलोमीटर (जिसमें गुना से श्योपुर खंड लगभग 165-175 किमी है)।
## 2. परियोजना की आवश्यकता और मुख्य औचित्य (Key Justifications)
* आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान: गुना का बमोरी ब्लॉक और श्योपुर का कराहल क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक रूप से देश के सबसे पिछड़े और सुदूर अंचलों में गिने जाते हैं। रेल सेवा उपलब्ध होने से इन क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि विपणन (Agricultural Marketing) को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
* विश्व स्तरीय पर्यटन कॉरिडोर (कूनो-रणथंभौर लिंक): यह रेल लाइन भारत के दो सबसे बड़े और विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव अभ्यारण्यों—कूनो नेशनल पार्क (चीता प्रोजेक्ट, म.प्र.) और रणथंभौर टाइगर रिजर्व (राजस्थान) को सीधे आपस में जोड़ेगी। इससे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
* वैकल्पिक और सुगम रेल मार्ग: इस लाइन के बनने से इंदौर, भोपाल और मालवा क्षेत्र से आने वाली ट्रेनें सीधे गुना, श्योपुर होते हुए जयपुर या दिल्ली रूट पर जा सकेंगी। इससे मौजूदा बीना-गुना-कोटा और मथुरा-पलवल रेलमार्गों पर यातायात का अत्यधिक दबाव कम होगा।
## 3. तकनीकी पहलू और सुझाव
* चंबल नदी पर मेगा ब्रिज: श्योपुर और सवाई माधोपुर के बीच मध्य प्रदेश-राजस्थान सीमा पर चंबल नदी पर एक नए बड़े रेलवे पुल के निर्माण की आवश्यकता होगी।
* पर्यावरण संरक्षण: चूंकि यह मार्ग कूनो और रणथंभौर के बफ़र या कॉरिडोर क्षेत्रों के पास से गुजर सकता है, अतः वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक ईको-फ्रेंडली अंडरपास/ओवरपास डिज़ाइनों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
अनुरोध:
अतः आपसे विनम्र आग्रह है कि क्षेत्र की गरीब व आदिवासी जनता के कल्याण, सामरिक महत्व और पर्यटन विकास को दृष्टिगत रखते हुए गुना-बमोरी-श्योपुर-सवाई माधोपुर नई रेल लाइन के लिए 'प्रारंभिक इंजीनियरिंग एवं ट्रैफिक सर्वे' (PETS) कराने तथा इसे आगामी रेल बजट/योजनाओं में शामिल करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की कृपा करें।
इस पुनीत कार्य के लिए क्षेत्र की जनता सदैव आपकी आभारी रहेगी।
सधन्यवाद।
भवदीय,
[आपका नाम]
[आपका पद/संस्था, यदि कोई हो]
[पता और संपर्क नंबर]
[स्थान और दिनांक]
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## संलग्नक-1: प्रोजेक्ट समरी एवं क्षेत्रीय लाभ विवरण
(गुना-बमोरी-श्योपुर कलां-सवाई माधोपुर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन प्रस्ताव)
## 1. प्रोजेक्ट की संक्षिप्त रूपरेखा (Executive Summary)
* परियोजना का नाम: गुना-बमोरी-श्योपुर कलां-सवाई माधोपुर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन।
* प्रस्तावित रेलवे ज़ोन: पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) / उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR)।
* कुल अनुमानित लंबाई: लगभग 240 - 250 किलोमीटर।
* ट्रैक का प्रकार: सिंगल लाइन ब्रॉडगेज (भविष्य में दोहरीकरण और विद्युतीकरण की क्षमता के साथ)।
* इंटर-कनेक्टिविटी लाभ: यह लाइन भोपाल-गुना-ग्वालियर रूट को सीधे दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग (सवाई माधोपुर) से जोड़ेगी।
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## 2. स्थानीय कृषि लाभ (Agricultural Benefits)
गुना और श्योपुर जिले मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र हैं। इस रेल लाइन के आने से कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:
* धान और सरसों का सुगम परिवहन: श्योपुर जिला अपनी उच्च गुणवत्ता वाली सरसों और धान (बासमती चावल) के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। रेल कनेक्टिविटी मिलने से यहाँ के किसानों की उपज सीधे देश की बड़ी मंडियों (जैसे दिल्ली, मुंबई, कांडला पोर्ट) तक कम भाड़े में पहुँच सकेगी।
* धनिया और मसाला बेल्ट को बढ़ावा: गुना का बमोरी और आसपास का क्षेत्र धनिया (Coriander) उत्पादन का बहुत बड़ा केंद्र है। वर्तमान में लॉजिस्टिक्स (परिवहन) की कमी के कारण किसानों को सही दाम नहीं मिल पाता। यह रेल मार्ग धनिया उत्पादकों को राष्ट्रीय बाज़ार देगा।
* खाद और बीज की समय पर उपलब्धता: रबी और खरीफ सीजन के दौरान इस पिछड़े अंचल में यूरिया, डीएपी (खाद) और उन्नत बीजों की रैक सीधे बमोरी और कराहल ब्लॉक तक आ सकेगी, जिससे कालाबाजारी और परिवहन की किल्लत हमेशा के लिए खत्म होगी।
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## 3. व्यापारिक एवं औद्योगिक लाभ (Commercial & Industrial Growth)
* लघु वनोपज (Minor Forest Produce) का व्यापार: बमोरी और कराहल के घने जंगलों में रहने वाले आदिवासी भाई-बहन महुआ, शहद, चिरौंजी, और जड़ी-बूटियों का संग्रहण करते हैं। रेल संपर्क से इन लघु वनोपजों को प्रोसेसिंग यूनिट्स और बड़े शहरों के उद्योगों तक सीधे पहुँचाया जा सकेगा, जिससे आदिवासियों की आय दोगुनी होगी।
* लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकास: गुना और श्योपुर के बीच यह नया कॉरिडोर बनने से नए वेयरहाउस (गोदाम), कोल्ड स्टोरेज और कृषि आधारित उद्योगों (Food Processing Units) की स्थापना होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर हज़ारों युवाओं को रोज़गार मिलेगा।
* कोटा-ग्वालियर कॉरिडोर का एकीकरण: श्योपुर में इस लाइन के जुड़ने से कोटा (इंडस्ट्रियल हब) और ग्वालियर-झाँसी के बीच मालगाड़ियों के आवागमन के लिए एक नया और छोटा वैकल्पिक रूट तैयार हो जाएगा।
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## 4. सामाजिक एवं सामरिक दृष्टि से महत्व
* महत्वाकांक्षी जिलों का विकास: नीति आयोग द्वारा चिह्नित पिछड़े ब्लॉकों और क्षेत्रों में परिवहन के इस सबसे सस्ते साधन के पहुँचने से स्वास्थ्य (आपातकालीन चिकित्सा के लिए बड़े शहरों तक पहुँच) और शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार होगा।
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
भाजपा मीडिया संयोजक कोटा संभाग
( मूल निवासी ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना )
पता - बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मन्दिर रोड़,
ड़ड़वाड़ा, कोटा जंक्शन राजस्थान
पिनकोड - 324002
मोबाईल - 9414180151
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