देश चाहता है कि 'कॉकरोज' और जंतर-मंतर हिंसा में विदेशी टूलकिट का पूरा सच सामने आए – अरविन्द सिसोदिया


देश चाहता है कि 'कॉकरोज' और जंतर-मंतर हिंसा में विदेशी टूलकिट का पूरा सच सामने आए – अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 1 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कहा है कि देश की जनता अब 'कॉकरोज जनता पार्टी' से जुड़े घटनाक्रम और जंतर-मंतर से शुरू होकर संसद क्षेत्र तक पहुंची हिंसक घटनाओं के पूरे सच को जानना चाहती है। उनका कहना है कि यदि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे विदेशी डिजिटल नेटवर्क, संदिग्ध फंडिंग, संगठित टूलकिट या भारत विरोधी शक्तियों की किसी भी स्तर पर भूमिका रही है, तो उसे बिना किसी राजनीतिक दबाव के देश के सामने लाया जाना चाहिए।

सिसोदिया ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की संप्रभुता किसी भी लोकतांत्रिक बहस से ऊपर हैं। लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन यदि किसी आंदोलन की आड़ में हिंसा, अराजकता, सरकारी संस्थानों पर हमला, सुरक्षा बलों पर आक्रमण या विदेशी प्रभाव की आशंका पैदा होती है, तो उसकी गहन और निष्पक्ष जांच राष्ट्रीय दायित्व बन जाती है।

उन्होंने कहा कि 'कॉकरोज जनता पार्टी' के गठन, उसके डिजिटल नेटवर्क, सोशल मीडिया अभियानों, संभावित फंडिंग स्रोतों तथा उससे जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों के माध्यम से जांच कराई जानी चाहिए। यदि किसी विदेशी संगठन, डिजिटल प्लेटफॉर्म या बाहरी नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो उसे भी पूरी पारदर्शिता के साथ उजागर किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि देश यह जानने का अधिकार रखता है कि कहीं भारत के युवाओं को डिजिटल माध्यमों से प्रभावित करने या सामाजिक अस्थिरता पैदा करने का कोई सुनियोजित प्रयास तो नहीं किया गया।

सिसोदिया ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से निकाले गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा की भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि हिंसा पूर्व नियोजित थी, यदि इसमें असामाजिक या आपराधिक तत्व शामिल थे, अथवा यदि किसी संगठित तंत्र ने भीड़ को उकसाने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया, तो पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय लेन-देन, संचार माध्यमों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन घटनाओं के पीछे वास्तविक जिम्मेदार कौन थे।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज सूचना का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन यदि इसका उपयोग झूठी सूचनाएं फैलाने, समाज में वैमनस्य पैदा करने, सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल गिराने या जनता को भ्रमित करने के लिए किया गया है, तो ऐसे मामलों में कानून के अनुरूप कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यदि किसी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनकी भी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक की जानी चाहिए।

सिसोदिया ने कहा कि देश किसी पूर्वाग्रह या राजनीतिक निष्कर्ष की नहीं, बल्कि सत्य की अपेक्षा करता है। यदि जांच में विदेशी फंडिंग, अवैध डिजिटल नेटवर्क, हिंसा की साजिश या किसी अन्य गैरकानूनी गतिविधि की पुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं, तो उसे भी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि भ्रम और दुष्प्रचार का अंत हो सके।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी प्रश्न पर न तो राजनीति होनी चाहिए और न ही किसी प्रकार का समझौता। देश की जनता अपेक्षा करती है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच कर सत्य को सामने लाया जाए, ताकि लोकतंत्र में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो तथा भारत विरोधी किसी भी साजिश की वास्तविकता, यदि हो, तो कानून के दायरे में उजागर की जा सके।यदि इसे किसी समाचार पत्र या प्रेस विज्ञप्ति में प्रकाशित करना है, तो यह संस्करण प्रभावशाली रहेगा और साथ ही अप्रमाणित आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से भी बचेगा।
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 जुनैद की जाँच 

दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को लंबे समय तक मुफ्त भोजन (बिरयानी) खिलाने के लिए मिली फंडिंग के स्रोत को लेकर मोहम्मद जुनैद और उनके परिवार से पूछताछ व जाँच कर रही है।जाँच और पूछताछ के मुख्य बिंदुफंडिंग पर सवाल: पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि जुनैद के पास लगातार 35-36 दिनों तक हजारों लोगों को मुफ्त खाना खिलाने के लिए इतना पैसा और संसाधन कहां से आ रहे थे।परिवार से पूछताछ: गाजियाबाद के नाहल गांव स्थित उनके घर पर पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पहुंचकर उनके पिता और रिश्तेदारों से बैंक खातों तथा दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की है।सुप्रीम कोर्ट का रुख: जुनैद मलिक ने पुलिस पर अवैध हिरासत में रखकर प्रताड़ित करने और परिवार को परेशान करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने को कहा है।

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हाँ, इस भोजन सप्लाई और फंडिंग के स्रोतों की पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा सक्रिय रूप से जाँच की जा रही है। दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हो रही भोजन व्यवस्था के पीछे के वित्तीय नेटवर्क को खंगाल रही हैं। [1, 2, 3] 
जाँच के मुख्य बिंदु और वर्तमान कार्रवाई इस प्रकार हैं:
## 1. प्रमुख आयोजकों और वालंटियर्स से पूछताछ

* जुनैद मलिक से पूछताछ: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को बड़े पैमाने पर मुफ्त भोजन बांटने वाले गाजियाबाद के मोहम्मद जुनैद मलिक को पुलिस ने हिरासत में लेकर उनके फंडिंग स्रोतों को लेकर गहन पूछताछ की है। जुनैद ने बताया कि यह लोगों का सामूहिक प्रयास है और कई लोग ऐप्स के माध्यम से मदद भेज रहे हैं। [1, 2, 4] 
* परिजनों की जांच: पुलिस ने जुनैद के उत्तर प्रदेश स्थित पैतृक गांव और परिवार के सदस्यों से भी यह जानने के लिए पूछताछ की है कि इस भोजन वितरण के लिए पैसा कहाँ से आ रहा था। [1] 

## 2. रेस्टोरेंट और पैकेजिंग की ट्रैकिंग

* रैपर्स से सुराग: दिल्ली पुलिस प्रदर्शन स्थल पर मिले खाली खान-पान के डिब्बों और रैपर्स के जरिए संबंधित रेस्टोरेंट और कैफे की पहचान कर रही है। [5] 
* ऑर्डर रिकॉर्ड्स की जांच: पुलिस ने कई फूड आउटलेट्स का दौरा कर उनसे पिछले कुछ दिनों में आए बल्क ऑर्डर्स (थोक ऑर्डर) और उनके भुगतान (पेमेंट) का पूरा रिकॉर्ड और प्रूफ मांगा है। [5] 

## 3. विदेशी फंडिंग दावों पर सरकार का रुख

* विदेश मंत्रालय (MEA) का बयान: इस मामले में जब विदेश मंत्रालय से जंतर-मंतर प्रदर्शन में विदेशी फंडिंग को लेकर सवाल पूछा गया, तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता [रणधीर जायसवाल](https://www.google.com/search?q=%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%A7%E0%A5%80%E0%A4%B0+%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2&kgmid=/g/11vr44zsy5#sv=CBwS4QUKjwUSjAUKzARBSmlUNHRJZ0Z6YVRlcTFtLU1yTGJuR195MUJRdkxub0t6cmUwMHk5cXlKSEZUWHZQWkNQbFpZaUdBMG5rUTdMR0x0LTljUFhpTFI2OFpKN1ozMk9JVU1sVk10U1lCS3ZTYVRqZC1fMUNmUTJvNWdmalhIQ1lwNFNOZUhBYVAzR1IzRlY1TnVleUZEenI4bE1EdzJnSTkzRDVlbXZjRnlGdVhjdVREczl5RXhVcjZ5eWx2dmpZWXZSVlFzUzRfRS05WlQybVJRRG9wMVNPU0E4ektRQWJVNnM5bVZpeWNQMVVrdlg3YjlMUXFuRkxGeVBXOHJTWFhCNUdIcW9jSDhkbExlcGJBdUEtZXNYVS1GaTlFRWpnRkZHX0xNRGJUQVZBUUYzRzh4eUF0aF9pb0RLYkNxelRyUzNHeVJLeDNOV3BPVk9DdEdhX21VbXluZ3Eyd21aRndpUlBtcExiUDJNZWhybmRoSmtSRUtQeUt4c1pVYWk5X1dncUV4bGlvRzF5UFdkR0NtaGE5UWlUcE9aelhNVGkzSXBXa3NGYlJsWVZueFl6VGpQdUczbEd0ZWs5YWtHcU1aYTc0X19nMkhXTFFJekFHR0xvNkxwLVJqWG5IUEJTbUwzOTEyTWxSVlEwcE5PRG5xYk5lZjNKU1NIVlo0Vl82QUZsZ25aUjFBN09ocUExNklXQ2NpUnU2SnlCaktMV2RwcmxNd1o2YThOcUR1c1RuNWs3ZW1ZNndzQjVVdzZNcHVzanR6RW5WT2xhUi1sN1Nnc3hpMUMSF21BZHVhb1h1TnNpWmh2Y1BfLUs4NlFzGiJBRHNyOWZUQ1ZxY0hGemRZMEFXOVBhQTk1b05qTmtJTG9REgQ3ODU0GgEzIioKAXESJeCksOCko-Ckp-ClgOCksCDgpJzgpL7gpK_gpLjgpLXgpL7gpLIiFgoFa2dtaWQSDS9nLzExdnI0NHpzeTUoABhFIJ7z-dsB) ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनके पास इस संबंध में साझा करने के लिए कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। [6, 7] 
* रुटीन वित्तीय प्रक्रिया: अधिकारियों के अनुसार, किसी भी बड़े सार्वजनिक जमावड़े या आंदोलन में इस तरह की भारी फंडिंग और बाहरी खर्चों के स्रोतों का पता लगाना एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। [1] 

यदि आप इस जांच प्रक्रिया से जुड़ी किसी विशेष कानूनी कार्रवाई या ताजा अदालती अपडेट के बारे में जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं।
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरने-प्रदर्शन के दौरान विदेशों से ऑनलाइन पेमेंट कर भोजन सप्लाई करने का मामला सामने आया है, जहां जर्मनी, दुबई, कतर, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से [Swiggy] और [Zomato] जैसे ऐप्स के जरिए प्रदर्शनकारियों के लिए लगातार खाने के पैकेट भेजे जा रहे हैं। [1, 2, 3, 4] 
## जंतर-मंतर पर विदेशी फंडिंग और भोजन सप्लाई

* विदेशी भुगतान: डिलीवरी बॉयज़ के अनुसार, जंतर-मंतर पर आने वाले कई खान-पान के ऑर्डर के पैसे जर्मनी, सऊदी अरब, दुबई और कतर जैसे देशों से ऑनलाइन चुकाए गए हैं। [2] 
* बड़ी मात्रा में पार्सल: रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेशों में बैठे लोग और समर्थक हजारों की संख्या में भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री के पार्सल डिलीवर करवा रहे हैं। [4, 5] 
* पुलिस जांच और कानूनी कदम: इस फंडिंग और भोजन वितरण के स्रोतों को लेकर पुलिस और जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है। [6, 7] 

· 1970 M01 1
यदि आप इस मामले के बारे में कोई विशेष जानकारी या ताजा अपडेट जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं।


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लोकतंत्र में आंदोलन करना अधिकार है किंतु मर्यादा में उसमें लूटपाट- तोड़फोड़ - नग्नता - फुहड़ता -गंदी गंदी गालियां इनका कोई स्थान नहीं हो सकता यदि ऐसा होता है तो पुलिस व जवानों को सख्त से सख्त कदम उठाने का पूरा अधिकार है।
 भारत में लोकतांत्रिक संवैधानिक तरीके से चुनी हुई सरकार है उसे नेपाल व बांग्लादेश बनाने की धमकी देने वालों को सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेकर सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए।
 जय हिंद वंदे मातरम



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