हनुमान अंश की सफलता, ईश्वर विरोधी राजनीती को सामाज का करारा जबाब - अरविन्द सिसोदिया

‘हनुमान अंश’ की सफलता, ईश्वर-विरोधी राजनीति को समाज का करारा जवाब : अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 11 सितंबर। हाल ही में बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलताएं दर्ज कर रही फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर जाने-माने विचारक एवं विश्लेषक तथा राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने कहा है कि, “‘हनुमान अंश’ फिल्म की अभूतपूर्व सफलता को केवल एक सिनेमाई कामयाबी तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह भारतीय समाज की गहरी सांस्कृतिक चेतना का प्रकटीकरण भी है।”

सिसोदिया ने कहा कि, “यह फिल्म सत्य सनातन की उच्चतम वैज्ञानिकता से परिपूर्ण अपने अध्यात्म से हमें न केवल परिचित करवाती है, बल्कि अपने सामर्थ्य पर गौरवान्वित होने की प्रेरणा भी देती है। इसलिए इसे अवश्य देखना चाहिए।”

सिसोदिया ने कहा कि, “राजनीति के मंच से चाहे जितने एजेंडे चला लो और सनातन को कोस लो, लेकिन देश की जनता ने फिर साबित कर दिया है कि उनके दिल में आज भी हिंदुत्व, सनातन, राम और हनुमान का ही सर्वोच्च स्थान है। महज 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी एक आध्यात्मिक फिल्म का मामूली शुरुआत से 200 करोड़ रुपये के क्लब के करीब पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि दर्शक अब घिसे-पिटे प्रोपेगैंडा और हिंदू-विरोधी नैरेटिव के बजाय दमदार कंटेंट, आस्था और राष्ट्रवादी भावनाओं को पसंद करते हैं। यह सफलता भारत के अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर दृढ़ता से खड़े होने का प्रमाण भी है।”

अपने बयान में अरविन्द सिसोदिया ने कहा, “यह साबित करता है कि देश की जनता अपनी जड़ों पर गर्व करती है। करोड़ों दर्शकों का सिनेमाघरों तक पहुंचना इस बात का सीधा प्रमाण है कि यह सफलता हिंदू संस्कृति के विराट वैभव को मिला अभूतपूर्व सामाजिक समर्थन है।”

सिसोदिया ने आगे कहा कि आज का दर्शक महंगे पीआर स्टंट, भव्य सेट्स या थोपे गए लाउड नैरेटिव के बजाय यथार्थ, सादगी और आत्मिक शांति देने वाले कंटेंट को प्राथमिकता दे रहा है। नीम करोली बाबा और भगवान हनुमान जी की महिमा पर आधारित यह फिल्म भारतीय समाज की उस शाश्वत आस्था को रेखांकित करती है, जो सदियों से हमारे राष्ट्र की आत्मा रही है।

उन्होंने कहा, “सनातन हिंदू संस्कृति सत्य, उच्चतम वैज्ञानिकता और श्रेष्ठतम जीवन-मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है। इसी पर आधारित यह फिल्म बिना किसी विवाद, हिंसा या अश्लीलता के, हिंदुत्व की आध्यात्मिक शक्ति का प्रकटीकरण भी करती है।”

सिसोदिया ने कहा कि “पूरे परिवार का एक साथ सिनेमाघर पहुंचना यह दर्शाता है कि समाज अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को गौरव के साथ देखना चाहता है। उसे जबरदस्ती थोपी जा रही फूहड़ता और असामाजिकता की गंदगी पसंद नहीं है।”

उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक क्षेत्र में गिरती शालीनता, अनैतिकता, गाली-गलौज, बदतमीजी और अराजकतावाद के विरुद्ध जनता का यह मूक और संगठित समर्थन एक संदेश भी है कि “भारतीय संस्कृति पर आक्रमण बंद करें और उसकी गहराइयों को समझें व स्वीकार करें। सम्मान की भाषा बोलें।”

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी
राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल
मोबाइल : 9414180151

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