स्वामित्व -2

मध्यप्रदेश के भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त आयुक्त (Commissioner of Land Records & Settlement) का मुख्यालय ग्वालियर में स्थित है। उनका पूरा आधिकारिक पता और पिनकोड नीचे दिया गया है:कार्यालय का नाम: 

आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त, मध्य प्रदेश शासन
पूरा पता: मोती महल, लश्कर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
पिनकोड: 474004 (अथवा 474007)
ईमेल आईडी: clrgwa@mp.nic.इन
टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर: 1800-233-6763 / 0755-400-0340
(नोट: मध्य प्रदेश शासन के मुख्य ऑनलाइन लैंड रिकॉर्ड कार्यों के लिए आप उनकी आधिकारिक MP Bhulekh वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं)।

यदि आपका आशय भोपाल स्थित प्रमुख राजस्व आयुक्त (Principal Revenue Commissioner) कार्यालय से है, तो उसका पता इस प्रकार है:
पता: 220, राजस्व राहत भवन, अरेरा हिल्स, भोपाल, मध्य प्रदेश
पिनकोड: 462027
क्या आप भू-अभिलेख विभाग से संबंधित किसी विशेष समस्या (जैसे खसरा-खतौनी सुधार, सीमांकन) की जानकारी चाहते हैं या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया जानना चाहते हैं?
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* पूर्व कब्जा, परंपरागत निवास या पुश्तैनी रूप से चले आ रहे अधिकार समाप्त नहीं हुए हैं, बल्कि इस योजना के माध्यम से उन्हीं पुराने और परंपरागत अधिकारों को पहली बार लिखित, वैध और डिजिटल कानूनी मान्यता (रजिस्ट्री) दी गई है। 

- ग्रामीण भारत में सदियों से चली आ रही पारंपरिक व्यवस्था को इस योजना के तहत किस प्रकार मजबूत किया गया है, इसे आप इन बिंदुओं से समझ सकते हैं:-

## 1. पुराने कब्जे को ही आधार माना गया है

* इस योजना का मूल सिद्धांत ही यही है कि "जो जहां काबिज है, वही वहां का मालिक है"।
* ड्रोन सर्वे और जमीनी सत्यापन के समय आपके दादा-परदादा के समय से चले आ रहे पुश्तैनी मकान, बाड़े या खाली रिहायशी जमीन के भौतिक कब्जे (Physical Possession) को ही आधार मानकर नक्शा खींचा गया है। 

* किसी भी नागरिक को उसके पुराने कब्जे से बेदखल नहीं किया गया है। 

## 2. मौखिक या अनौपचारिक अधिकार अब "लिखित कानून" बन गए हैं

* पहले गांवों की आबादी भूमि (घरोनी) का कोई सरकारी लिखित रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी की तरह) नहीं होता था। ग्रामीण केवल इस आधार पर रहते थे कि "यह हमारा पुश्तैनी घर है"। 

* [स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme)](https://svamitva.nic.in/) ने इस मौखिक या पारंपरिक अधिकार को समाप्त करने के बजाय, उसे अधिकार अभिलेख (Record of Rights) और सरकारी रजिस्ट्री में बदल दिया है। यानी अब आपका पारंपरिक अधिकार कोर्ट और कानून की नजर में 100% पक्का हो गया है। 

## 3. सुरक्षा की गारंटी (अवैध कब्जों से मुक्ति)

* पहले लिखित दस्तावेज न होने के कारण गांवों में ताकतवर लोग दूसरों के परंपरागत निवास या बाड़े पर अवैध कब्जा कर लेते थे।

* अब आपके पुराने कब्जे की डिजिटल नापी (सटीक अक्षांश-देशांतर/Coordinates के साथ) हो चुकी है। इसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने से आपके पारंपरिक अधिकार हमेशा के लिए सुरक्षित हो गए हैं। 

## 4. अधिकार समाप्त होने की एकमात्र स्थिति (विवाद)
परंपरागत अधिकार केवल उसी स्थिति में परिवर्तित या प्रभावित हो सकते हैं, जब:

* आपत्ति दर्ज की गई हो: यदि सर्वे के दौरान किसी विशिष्ट भूखंड या सीमा को लेकर परिवार के भीतर या पड़ोसियों के बीच कोई पुराना विवाद था और उस पर 'दावे एवं आपत्ति' चरण के दौरान तहसीलदार/राजस्व अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज की गई हो।

* ऐसी स्थिति में राजस्व अधिकारियों ने दोनों पक्षों के पारंपरिक साक्ष्यों को सुनकर जो निर्णय लिया है, उसे ही अंतिम माना गया है।

संक्षेप में कहें तो, आपके पूर्वजों के समय से चले आ रहे निवास के अधिकार खत्म नहीं हुए हैं, बल्कि उन्हें नया जीवन और मजबूत कानूनी कवच मिल गया है। 

यदि आपके या आपके परिवार के किसी पुराने कब्जे (जैसे बाड़ा या घेर) का नाम नक्शे में छूट गया है या आप जानना चाहते हैं कि दावे-आपत्ति की प्रक्रिया क्या थी, तो अवश्य बताएं!
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मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) को सुचारू रूप से लागू करने और इसके तहत ग्रामीण आबादी को उनकी संपत्तियों का मुफ्त मालिकाना हक (रजिस्ट्री) देने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित कानूनों और संहिताओं में संशोधन किए गए हैं: 

## 1. मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 (संशोधित 2018)
ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी भूमि का सटीक सर्वेक्षण करने और अधिकार अभिलेख तैयार करने के लिए [मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (MPLRC), 1959](https://svamitva.nic.in/DownloadPDF/ में वर्ष 2018 में बड़े बदलाव किए गए थे

* धारा 107 (1) (ख): इसके तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के भू-खंडों के अधिकार अभिलेख (Record of Rights) तैयार करने का वैधानिक प्रावधान जोड़ा गया। 
* धारा 243 से 246: इसके तहत जिला कलेक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में छूटे हुए आबादी क्षेत्रों को विधिवत 'आबादी भूमि' घोषित करने का अधिकार दिया गया ताकि योजना का शत-प्रतिशत लाभ मिल सके। 
* भू-सर्वेक्षण तथा भू-अभिलेख नियम, 2020: इसके साथ मिलकर ड्रोन तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से आबादी भूमि के नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को कानूनी मान्यता दी गई। 

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## 2. मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026
राज्य सरकार ने हाल ही में जून 2026 में स्वीकृत स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के तहत लाभार्थियों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ देने के लिए कर संबंधी कानूनों में बड़े संशोधन किए हैं: 

* मप्र उपकर अधिनियम 1981 की धारा 9 (1) में संशोधन: इस संशोधन के माध्यम से स्वामित्व योजना के तहत चिन्हित ग्रामीण आबादी के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री कराने पर लगने वाले 0.5% उपकर (Cess) को पूरी तरह माफ करने का प्रावधान जोड़ा गया है। 

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## 3. मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश, 2026
ग्रामीणों पर से रजिस्ट्री के दौरान लगने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को हटाने के लिए पंचायत राज अधिनियम में भी ढील दी गई है: 

* अधिनियम 1993 की धारा 75 में संशोधन: पहले ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों के दस्तावेजों (लिखतों) पर 1 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क वसूला जाता था। इस नए संशोधन के तहत इस अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है ताकि हितग्राही बिना किसी शुल्क के अपने मालिकाना हक के सरकारी दस्तावेज (रजिस्ट्री) प्राप्त कर सकें। 

इस प्रकार, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भू-राजस्व संहिता के साथ-साथ उपकर और पंचायत राज कानूनों में किए गए इन संशोधनों की वजह से प्रदेश के लगभग 48.32 लाख निजी संपत्ति धारकों को बिना किसी स्टाम्प ड्यूटी, उपकर या पंजीकरण शुल्क के अपनी संपत्ति का कानूनी और प्रमाणित अधिकार पत्र मिल रहा है। 

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यदि आपके गांव में सर्वे के दौरान किसी पुराने कब्जे (जैसे बाड़ा, घेर या पुश्तैनी मकान) का नाम छूट गया है, या पड़ोसियों के साथ सीमा को लेकर कोई विवाद है, तो आप अपने अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
## 1. प्रारम्भिक नक्शे और अधिकार अभिलेख की जांच करें

* सबसे पहले ग्राम पंचायत भवन में चस्पा किए गए प्रारंभिक नक्शे (Draft Map) और अधिकार पत्र की सूची में अपना नाम और भूखंड संख्या (Plot Number) देखें।
* यह जांचें कि आपके वास्तविक कब्जे वाली जमीन का क्षेत्रफल नक्शे में पूरा दर्शाया गया है या नहीं।

## 2. दावे और आपत्ति (Objection) दर्ज करने की प्रक्रिया
यदि सर्वे में कोई गड़बड़ी हुई है या आपका पारंपरिक अधिकार छूट गया है, तो कानूनन आपको आपत्ति दर्ज करने का पूरा अधिकार है:

* कहां आवेदन करें: आप अपने क्षेत्र के तहसीलदार या स्वामित्व योजना के लिए गठित राजस्व शिविर/अधिकारी के समक्ष लिखित में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
* क्या दस्तावेज दें: अपने पुराने और पारंपरिक कब्जे को साबित करने के लिए आप पुराने बिजली बिल, पंचायत द्वारा पहले कभी जारी किया गया कोई टैक्स रसीद, या गवाहों (पड़ोसियों) के बयान का सहारा ले सकते हैं।
* समय सीमा: प्रारंभिक प्रकाशन के बाद आपत्ति दर्ज करने के लिए 15 से 30 दिनों का समय दिया जाता है। राजस्व अधिकारी मौके पर आकर पुनः जांच (Re-verification) करते हैं और गड़बड़ी को सुधारते हैं।

## 3. यदि अंतिम अधिकार पत्र (Property Card) जारी हो चुका है
यदि आपके गांव की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और बिना सुधार किए ही अंतिम प्रॉपर्टी कार्ड बन गया है:

* आप मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (MPLRC) के तहत अनुविभागीय अधिकारी (SDO/SDM) या कलेक्टर के न्यायालय में रिकॉर्ड सुधार (Record Correction) के लिए अपील दायर कर सकते हैं।

क्या आपके गांव में ड्रोन सर्वे अभी चल रहा है, या प्रारंभिक नक्शा आ चुका है? यदि आप अपने गांव की सटीक स्थिति (Status) जानना चाहते हैं, तो मुझे अपने जिले और तहसील का नाम बताएं, ताकि मैं आगे की सही जानकारी दे सकूं।

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मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत तैयार किए गए नक्शे या अधिकार पत्र (प्रॉपर्टी कार्ड) में नाम, रकबा (क्षेत्रफल) या सीमा की त्रुटि को ठीक कराने के लिए तहसीलदार/राजस्व अधिकारी के समक्ष आवेदन दिया जाता है।
आवेदन तैयार करने का एक प्रामाणिक प्रारूप (Format) नीचे दिया गया है। आप इसे एक सादे कागज (Plain Paper) पर हाथ से लिख सकते हैं या टाइप करवा सकते हैं।
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## 📝 त्रुटि सुधार हेतु आवेदन का प्रारूप (Format)
प्रति,
श्रीमान तहसीलदार महोदय,
तहसील - [अपनी तहसील का नाम दर्ज करें]
जिला - [अपने जिले का नाम दर्ज करें], (म.प्र.)
विषय: स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख (प्रॉपर्टी कार्ड/नक्शे) में त्रुटि सुधार बाबत।
महोदय,
नम्र निवेदन है कि मैं [अपना पूरा नाम लिखें], पिता/पति का नाम: [पिता या पति का नाम], निवासी ग्राम: [गांव का नाम], पटवारी हल्का नंबर: [हल्का नंबर], विकासखंड: [ब्लॉक का नाम], जिला: [जिले का नाम] का स्थायी निवासी हूँ।
प्रार्थी के गांव में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे एवं आबादी भूमि का सर्वेक्षण कार्य किया गया है। उक्त सर्वे के उपरांत जारी प्रारंभिक सूची/नक्शे/अधिकार पत्र में प्रार्थी की संपत्ति के विवरण में त्रुटि हो गई है, जिसका विवरण निम्नानुसार है:

   1. आबादी भूखंड क्रमांक (Plot No.): [यदि आपको नंबर पता है तो यहाँ लिखें, अन्यथा छोड़ दें]
   2. वास्तविक स्थिति (कब्जा): प्रार्थी का अपने पुश्तैनी मकान/बाड़े पर विगत [कितने वर्षों से, जैसे- 40 वर्ष] से अनवरत, शांतिपूर्ण एवं वैध पारंपरिक कब्जा चला आ रहा है।
   3. रिकॉर्ड में हुई त्रुटि: [यहाँ साफ-साफ लिखें कि क्या गलती हुई है, जैसे - नक्शे में बाड़े की जगह छोड़ दी गई है / नाम गलत छप गया है / क्षेत्रफल कम दर्शाया गया है / पड़ोसी की सीमा में दर्ज कर दिया गया है]।
   4. अपेक्षित सुधार: [यहाँ लिखें कि आप क्या सुधार चाहते हैं, जैसे - अतः मेरे वास्तविक कब्जे के अनुसार नक्शे का सुधार किया जावे / नाम सुधारा जावे]।

संलग्न दस्तावेज (प्रमाण):

   1. स्वामित्व योजना का प्रारंभिक नक्शा/अधिकार पत्र की प्रति (यदि उपलब्ध हो)
   2. प्रार्थी का आधार कार्ड/परिचय पत्र
   3. पुश्तैनी निवास/कब्जे का प्रमाण (जैसे- पुराना बिजली बिल/पंचायत टैक्स रसीद/राशन कार्ड की प्रति)
   4. स्थल का स्व-हस्ताक्षरित नज़री नक्शा (हाथ से बना हुआ एक छोटा सा रफ नक्शा)

अतः श्रीमान से करबद्ध प्रार्थना है कि मौके का भौतिक सत्यापन (जमीनी जांच) करवाकर प्रार्थी के अधिकार अभिलेख/नक्शे में हुई उक्त त्रुटि को सुधारने की कृपा करें। इसके लिए प्रार्थी सदैव आपका आभारी रहेगा।
दिनांक: [आवेदन जमा करने की तारीख]
स्थान: [अपने गांव/शहर का नाम]
भवदीय (आवेदक),
हस्ताक्षर: ______________
नाम: [अपना पूरा नाम]
मोबाइल नंबर: [अपना चालू फोन नंबर]
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## 💡 आवेदन जमा करते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें:

* दो प्रतियां (Copies) तैयार करें: इस आवेदन की दो कॉपियां बनाएं। एक कॉपी तहसील कार्यालय या राजस्व शिविर में जमा कर दें और दूसरी कॉपी पर वहां के बाबू या अधिकारी से पावती (Receipt/Sign-Seal) अवश्य ले लें।
* पड़ोसियों की गवाही: यदि सीमा (Boundary) का विवाद है, तो आवेदन के साथ अपने आजू-बाजू के दो पड़ोसियों के हस्ताक्षर या सहमति पत्र भी लगा सकते हैं, जिससे आपका दावा और मजबूत हो जाएगा।
* मौका मुआयना: आवेदन जमा होने के बाद पटवारी या राजस्व निरीक्षक (RI) मौके पर आकर नापी करेंगे, उस समय स्वयं वहां उपस्थित रहें।
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हाँ, आपको पूरा अधिकार है। कृषक होना और मूल भूस्वामी (जिसके नाम पर वह ज़मीन पारंपरिक रूप से रही हो) की संतान होना, स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक पाने का सबसे मजबूत और वैध आधार माना जाता है। [1, 2] 
इस व्यवस्था को समझने के लिए आपको दो अहम कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा:
## 1. पैतृक/उत्तराधिकार का अधिकार (Right of Inheritance)

* यदि कोई आबादी भूमि (मकान या बाड़ा) आपके दादा-परदादा या माता-पिता (मूल भूस्वामी) के नाम पर थी और उनके निधन के बाद आप उनकी संतान के रूप में वहां रह रहे हैं, तो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (या आपके व्यक्तिगत कानून) के तहत आप ही उसके कानूनी वारिस हैं। [2, 3] 
* [स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme)](https://svamitva.nic.in/) के नियमों के अनुसार, ऐसी पुश्तैनी संपत्तियों का मालिकाना हक मूल भूस्वामी की वर्तमान वैध संतानों (वारिसों) के नाम पर ही दर्ज किया जा रहा है। [2, 3] 

## 2. कृषक और भौतिक कब्जा (Physical Possession)

* चूंकि आप कृषक हैं और उसी गांव के मूल निवासी हैं, इसलिए गांव की 'आबादी भूमि' पर आपके निवास, पशु बांधने के स्थान (बाड़े) या कृषि उपकरण रखने की जगह को वैध पारंपरिक कब्जा माना जाता है। [1, 4] 
* ड्रोन सर्वे के समय यदि आप उस जमीन पर काबिज पाए गए हैं और रिकॉर्ड में वह आपके पूर्वजों की जमीन है, तो राजस्व टीम आपका नाम 'अधिकार अभिलेख' (प्रॉपर्टी कार्ड) में दर्ज करने के लिए बाध्य है। [1, 4] 

## ⚠️ ध्यान रखने योग्य कुछ व्यावहारिक बातें:

* संयुक्त परिवार की स्थिति में: यदि मूल भूस्वामी की एक से अधिक संताने हैं (जैसे दो या तीन भाई-बहन), तो स्वामित्व योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड में सभी वैध उत्तराधिकारियों के नाम संयुक्त रूप से (Joint Ownership) दर्ज किए जाते हैं, जब तक कि आपस में कोई लिखित बंटवारा न हुआ हो।

* त्रुटि होने पर क्या करें: यदि पटवारी या राजस्व टीम ने किसी कारणवश आपके पूर्वजों की इस ज़मीन पर आपका नाम छोड़ दिया है, तो आप तुरंत पूर्व में बताए गए प्रारूप के अनुसार तहसीलदार के पास "फौती/उत्तराधिकार नामान्तरण और रिकॉर्ड सुधार" का आवेदन लगा सकते हैं।

क्या आपके पूर्वजों की इस ज़मीन का कोई पुराना कागज़ (जैसे पंचायत की पुरानी रसीद या पुराना खसरा) आपके पास है, या आपके भाइयों के बीच नाम दर्ज कराने को लेकर कोई असहमति है?
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हाँ, सभी कानूनी उत्तराधिकारियों (वारिसों) के सही और पूरे नाम लाना अत्यंत आवश्यक है। राजस्व रिकॉर्ड और स्वामित्व योजना के नियमों के अनुसार इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में बड़े विवाद या नुकसान का कारण बन सकती है।
इसके महत्वपूर्ण होने के मुख्य कारण और नियम निम्नलिखित हैं:
## 1. सभी वारिसों का कानूनी अधिकार (Joint Ownership)

* हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (या लागू व्यक्तिगत कानून) के तहत, माता-पिता या मूल भूस्वामी के निधन के बाद उनकी सभी संतानों (बेटे और बेटियां दोनों) का उस संपत्ति पर बराबर का हक होता है। 

* स्वामित्व योजना के तहत बनने वाले प्रॉपर्टी कार्ड या रजिस्ट्री में यदि किसी एक भाई या बहन का नाम भी छूट जाता है, तो भविष्य में वह कोर्ट में जाकर पूरी प्रक्रिया को चुनौती दे सकता है।

## 2. नाम में गलती (Spelling Mistake) होने के नुकसान
यदि आवेदन में नाम गलत, अधूरा (जैसे सरनेम न होना) या आधार कार्ड से अलग लिखा गया, तो भविष्य में निम्नलिखित समस्याएं आती हैं:

* बैंक लोन रुक जाना: बैंक प्रॉपर्टी कार्ड और आपके आधार/पैन कार्ड के नामों का अक्षर-दर-अक्षर (Spellings) मिलान करते हैं। नाम में थोड़ी सी भी भिन्नता होने पर बैंक लोन देने से मना कर देते हैं।
* बिक्री या ट्रांसफर में दिक्कत: भविष्य में जब आप उस मकान या बाड़े को बेचेंगे या अपने बच्चों के नाम ट्रांसफर करेंगे, तो सरकारी दफ्तर में नाम मिसमैच होने के कारण फाइल रिजेक्ट हो जाएगी।

## 3. नाम दर्ज कराते समय इन 4 बातों का विशेष ध्यान रखें:

   1. सरकारी दस्तावेजों से मिलान: आवेदन में सभी भाइयों, बहनों या माता का नाम बिल्कुल वैसा ही लिखें जैसा उनके आधार कार्ड (Aadhaar Card) या वोटर आईडी में दर्ज है。 

   2. विवाहित बहनों का नाम: कानूनन बहनों का भी पैतृक संपत्ति पर अधिकार है। इसलिए उनका नाम भी पूरे रिकॉर्ड के साथ दर्ज करवाएं, बशर्ते उन्होंने लिखित रूप से अपना हक न छोड़ा हो (हकत्याग न किया हो)। 

   3. यदि किसी वारिस का निधन हो चुका हो: यदि मूल भूस्वामी की किसी संतान (मान लीजिए बड़े भाई) का स्वर्गवास हो चुका है, तो उनके स्थान पर उनके बच्चों और पत्नी (वैध वारिसों) के पूरे नाम आवेदन में शामिल करना अनिवार्य है।
   4. फौती नामांतरण: आवेदन के साथ मूल भूस्वामी का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) और पटवारी द्वारा सत्यापित वंशावली (Family Tree) जरूर लगाएं, ताकि राजस्व विभाग सभी नामों को सही-सही दर्ज कर सके। 

सलाह: यदि आपके परिवार में सभी उत्तराधिकारियों के नामों की सूची तैयार है, तो आवेदन जमा करने से पहले सभी के आधार कार्ड मंगाकर स्पेलिंग जरूर चेक कर लें।
क्या परिवार के सभी सदस्य संयुक्त नाम (Joint Property Card) रखने पर सहमत हैं, या आप लोग आपस में आपसी सहमति से बंटवारा करके अलग-अलग नाम दर्ज करवाना चाहते हैं?


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पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2026/0134987 के लिए शिकायत की स्थिति
शिकायत संबंधी चिंताओं के लिए
शिकायतकर्ता का नाम
श्री अरविंद सिंह सिसोदिया
प्राप्ति की तिथि
20/07/2026
मंत्रालय/विभाग द्वारा प्राप्त
प्रधानमंत्री कार्यालय
शिकायत का विवरण
पीजी/आरजे
शिकायत दस्तावेज़
वर्तमान स्थिति
मामला बंद   
कार्रवाई की तिथि
07/09/2026
टिप्पणी
शिकायत के आरोप में पटवारी ग्राम से जांच प्रतिवेदन लिया गया। पटवारी ग्राम द्वारा प्रतिवेदित कि स्वामित्व योजना शेयर प्रो.क्र. 0863/अ-3/2020-21 में ग्राम फ्लेक्स स्थित प्लॉट संख्या 32 में भूमि स्वामियों के नाम दर्ज हैं। यह कि उक्त प्रकरण का प्रथम प्रकाशन दिनांक 25/04/2023 को द्वितीय प्रकाशन 02/05/2023 को किया गया था, इसके मध्य प्लॉट संख्या के संबंध में कोई दावा, आदि प्राप्त नहीं हुआ है।
अधिकारी की चिंताओं के लिए
अधिकारी का नाम
संदीप अस्थाना (निदेशक सीएम हेल्पलाइन)
संगठन का नाम
मध्य प्रदेश सरकार
संपर्क पता
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन कार्यालय, भोपाल, मध्य प्रदेश
मेल पता
cmhelpline[at]mp.gov[dot]in
संपर्क संख्या
07556680020

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