विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की चुनावी व्यवस्था ने बनाया वैश्विक प्रभाव, ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देना चाहिए : अरविन्द सिसोदिया ECI
भारत की चुनाव व्यवस्था : विज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोकतांत्रिक प्रबंधन का विश्वव्यापी मॉडल
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की चुनावी व्यवस्था ने बनाया वैश्विक प्रभाव, ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देना चाहिए : अरविन्द सिसोदिया
भारत केवल विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं है, बल्कि करोड़ों मतदाताओं, लाखों मतदान केंद्रों, विशाल भौगोलिक विविधता और असाधारण प्रशासनिक जटिलताओं के बीच चुनाव कराने की अपनी क्षमता के कारण वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण चुनाव-प्रबंधन मॉडल भी प्रस्तुत करता है।
भारतीय चुनाव व्यवस्था की विशेषता केवल मतदान कराने में नहीं, बल्कि मतदाता सूची के सतत पुनरीक्षण, फोटो पहचान, इलेक्ट्रॉनिक मतदान, VVPAT, डिजिटल प्रबंधन, बूथ-स्तरीय सत्यापन, पारदर्शिता, समावेशिता और त्वरित मतगणना जैसे अनेक स्तरों के समन्वय में दिखाई देती है।
भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था के रूप में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन करता है। आयोग की आधिकारिक व्यवस्था में मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची की खोज, ई-EPIC, चुनावी शिकायतें और मतदाता सेवाओं के लिए डिजिटल माध्यम उपलब्ध हैं।
मतदाता सूची : लोकतंत्र की पहली वैज्ञानिक नींव
किसी भी चुनाव की विश्वसनीयता का आधार उसकी मतदाता सूची होती है। भारत में मतदाता सूची को स्थिर दस्तावेज नहीं माना जाता, बल्कि उसका निरंतर पुनरीक्षण और अद्यतन किया जाता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रेविसिओं (SIR) के माध्यम से मतदाता सूचियों की जांच और अद्यतन की प्रक्रिया की जा रही है। निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों के अनुसार चुनावी पुनरीक्षण में घर-घर सत्यापन, अपंजीकृत पात्र मतदाताओं की पहचान, विसंगतियों का पता लगाना तथा मृत, स्थानांतरित और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज मतदाताओं की पहचान जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं।
SIR-2026 के लिए निर्वाचन आयोग ने डिजिटल पोर्टल पर नागरिकों को अपना नाम खोजने, पुराने SIR रिकॉर्ड देखने, आवश्यक फॉर्म भरने और अपील की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। आयोग की वेबसाइट पर 2002/2003 के संबंधित राज्य रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराए गए हैं।
उत्तर प्रदेश में 2025-26 के SIR के दौरान प्रारंभिक ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच व्यापक सत्यापन और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया हुई। अंतिम सूची में 13.4 करोड़ से अधिक मतदाता रहे और आयोग ने बताया कि पुनरीक्षण में 1.77 लाख BLO की भूमिका रही।
इससे यह स्पष्ट होता है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण केवल कंप्यूटर से नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मैदानी सत्यापन, दस्तावेज, दावे-आपत्तियां, अपील और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंटों की निगरानी सहित बहु-स्तरीय प्रक्रिया है।
डिजिटल तकनीक और मानवीय सत्यापन का समन्वय
भारतीय चुनाव प्रणाली की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें तकनीक को मानव प्रशासन का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सहयोगी बनाया गया है।
BLO स्तर पर घर-घर सत्यापन, डिजिटल डेटाबेस, मतदाता सेवाओं के ऑनलाइन माध्यम, चुनावी सूचनाओं के डिजिटल प्रसार तथा इनेट जैसे प्लेटफॉर्म एक व्यापक चुनावी सूचना-तंत्र का निर्माण करते हैं।
2026 में निर्वाचन आयोग ने इनेट को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसका उद्देश्य विभिन्न चुनावी सेवाओं और संचार प्रणालियों को एक मंच पर लाना है।
इस मॉडल की वैज्ञानिक विशेषता डेटा + फील्ड वेरिफिकेशन + सार्वजनिक जांच + संस्थागत ऑडिट के संयोजन में है।
EVM और VVPAT : तकनीक के साथ सत्यापन की व्यवस्था
भारत ने मतदान प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का व्यापक उपयोग विकसित किया है। EVM के साथ VVPAT की व्यवस्था मतदाता को अपने मत के रिकॉर्ड का दृश्य सत्यापन उपलब्ध कराती है।
चुनाव प्रक्रिया में केवल मशीन का इस्तेमाल ही महत्वपूर्ण नहीं है। मतदान केंद्र पर मॉक पोल, सीलिंग, स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षा, उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति तथा मतगणना के दौरान उम्मीदवारों के एजेंटों की निगरानी जैसे अनेक स्तर शामिल हैं।
2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान ECI के अनुसार 38 प्रतिनिधियों ने 22 देशों से आकर मतदान प्रक्रिया का अवलोकन किया। मतदान केंद्रों पर दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर और स्वयंसेवकों जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया।
समावेशी लोकतंत्र : महिला, दिव्यांग और वरिष्ठ मतदाताओं पर ध्यान
भारतीय चुनाव प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पक्ष उसका समावेशी स्वरूप है।
महिला-प्रबंधित मतदान केंद्र, दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैंप एवं व्हीलचेयर, सहायता स्वयंसेवक, परिवहन सुविधाएं तथा दृष्टिबाधित मतदाताओं के लिए ब्रेल-संबंधी सुविधाएं चुनाव को अधिक सुलभ बनाने के प्रयास हैं। विदेशी चुनाव प्रतिनिधिमंडलों ने भारत में ऐसी व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया है।
इस दृष्टि से भारतीय चुनाव व्यवस्था केवल “कितने वोट पड़े” का प्रशासनिक अभ्यास नहीं है, बल्कि कौन-कौन मतदान कर सकता है और उसे मतदान तक पहुंच कैसे मिले, इस प्रश्न पर भी केंद्रित है।
एक दिन में करोड़ों मतों की गणना : एलन मस्क की टिप्पणी
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एलन मस्क ने भारत की मतगणना की गति पर टिप्पणी करते हुए X पर लिखा कि भारत ने 640 मिलियन वोटों की गिनती एक दिन में पूरी कर ली, जबकि कैलिफोर्निया में मतगणना जारी थी।
यह टिप्पणी भारतीय चुनाव प्रबंधन के उस पहलू की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करती है जिसमें विशाल संख्या में मतों की गणना को निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत अपेक्षाकृत कम समय में पूरा किया जाता है।
हालांकि, अलग-अलग देशों की चुनाव प्रणालियों, डाक मतपत्रों, कानूनों और परिणाम घोषित करने की प्रक्रियाओं में अंतर होता है। इसलिए भारत और अमेरिका की तुलना को इन संस्थागत अंतरों को ध्यान में रखकर ही समझना चाहिए।
अमेरिका में भारत के फोटो-आईडी मॉडल का उल्लेख
अगस्त 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उल्लेख करते हुए अमेरिका में सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की अपनी मांग दोहराई। ट्रंप ने भारत में फोटो पहचान आधारित मतदान व्यवस्था और सीमित डाक मतदान का हवाला देते हुए अमेरिकी चुनाव व्यवस्था में अधिक कठोर पहचान एवं नागरिकता-संबंधी प्रावधानों की वकालत की।
यहां यह अंतर ध्यान देने योग्य है कि भारत और अमेरिका की चुनाव प्रणालियां कानूनी एवं प्रशासनिक दृष्टि से अलग हैं। इसलिए अमेरिकी बहस में भारत का उदाहरण एक तुलनात्मक संदर्भ के रूप में सामने आया है, न कि दोनों देशों की प्रणालियों की पूर्ण समानता के रूप में।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस संदर्भ में कहा कि भारत की चुनावी मशीनरी की विश्वसनीयता और मजबूती वैश्विक स्तर पर स्थापित तथ्य हैं।
भारत का चुनाव प्रबंधन अब वैश्विक प्रशिक्षण का माध्यम भी
भारत की चुनावी क्षमता का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। निर्वाचन आयोग का इंडिया इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
ECI के अनुसार IIIDEM के माध्यम से 2011 से अब तक 141 देशों के 2,977 चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आयोग ने 28 चुनाव प्रबंधन निकायों और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ समझौते भी किए हैं।
IIIDEM स्वयं को लोकतांत्रिक शासन और चुनावी अखंडता के क्षेत्र में वैश्विक ज्ञान एवं क्षमता-विकास केंद्र के रूप में प्रस्तुत करता है और 141 देशों तक अपनी अंतरराष्ट्रीय पहुंच बताता है।
इसका अर्थ यह है कि भारत अब केवल अपने चुनाव नहीं करा रहा, बल्कि चुनाव प्रबंधन के अनुभव, प्रशिक्षण और संस्थागत ज्ञान को दूसरे देशों के साथ साझा भी कर रहा है।
इंटरनेशनल आईडिया की अध्यक्षता : वैश्विक स्तर पर भारतीय भूमिका
भारत के चुनाव प्रबंधन की अंतरराष्ट्रीय भूमिका का एक महत्वपूर्ण उदाहरण 2026 में इंटरनेशनल आईडिया की कौंसिल ऑफ़ मेंबर स्टेट्स की अध्यक्षता है।
International IDEA के अनुसार भारत को 2026 के लिए परिषद का अध्यक्ष चुना गया और भारत का प्रतिनिधित्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने किया। यह परिषद 35 सदस्य देशों और दो पर्यवेक्षकों वाला अंतर-सरकारी मंच है।
भारत की अध्यक्षता के दौरान लोकतंत्र के भविष्य, चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता एवं पेशेवर क्षमता और चुनावी अखंडता जैसे विषयों पर वैश्विक सहयोग को प्रमुखता दी जा रही है।
इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय संवाद की कड़ी में IICDEM 2026 का आयोजन हुआ, जिसमें चुनावी अखंडता, तकनीक, लोकतांत्रिक लचीलापन और संस्थागत सहयोग पर चर्चा हुई तथा दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 को अपनाया गया।
विदेशी प्रतिनिधियों की प्रत्यक्ष निगाह में भारतीय चुनाव
भारतीय चुनाव प्रक्रिया को समझने के लिए विदेशी प्रतिनिधिमंडलों का भारत आना अपने आप में महत्वपूर्ण है।
2026 के इंटरनेशनल इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम में 22 देशों के 38 प्रतिनिधियों ने भारत में चुनाव प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इससे पहले भी विदेशी चुनाव अधिकारियों ने भारतीय मतदान केंद्रों, स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षा, महिला-संचालित मतदान केंद्रों, दिव्यांग सुविधाओं और पारदर्शिता के उपायों का अध्ययन किया है।
यानी भारतीय चुनाव प्रणाली की विशेषता केवल भारतीय संस्थाओं द्वारा किए गए दावों में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चुनाव प्रबंधन समुदाय के साथ अनुभव साझा करने की निरंतर प्रक्रिया में भी दिखाई देती है।
भारत : चुनाव प्रबंधन में 'Scale + साइंस + System' का मॉडल
भारत की चुनाव व्यवस्था को समझने के लिए तीन शब्द महत्वपूर्ण हैं—
स्केल — लगभग एक अरब के स्तर की मतदाता आबादी और विशाल भौगोलिक क्षेत्र में चुनाव संचालन।
साइंस — डेटा प्रबंधन, इलेक्ट्रॉनिक मतदान, VVPAT, डिजिटल प्लेटफॉर्म, मतदाता सूची पुनरीक्षण और तकनीकी निगरानी।
सिस्टम — संवैधानिक संस्था, BLO नेटवर्क, मतदान एजेंट, उम्मीदवारों के प्रतिनिधि, सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रॉन्ग रूम, मतगणना और दावे-आपत्तियों की बहु-स्तरीय प्रक्रिया।
इन तीनों का एक साथ संचालन भारत की चुनावी व्यवस्था को एक विशिष्ट प्रशासनिक प्रयोग बनाता है।
ज्ञानेश कुमार के योगदान पर भारत रत्न की मांग
इन्हीं अंतरराष्ट्रीय संदर्भों को देखते हुए अरविन्द सिसोदिया ने कहा है कि भारत की चुनाव व्यवस्था ने विश्व के सामने लोकतांत्रिक प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका मत है कि भारतीय चुनाव व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर मिली पहचान और चुनाव प्रबंधन को सुदृढ़ करने में योगदान को देखते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।
भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है और इसके लिए निर्धारित संवैधानिक एवं आधिकारिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही निर्णय होता है। इसलिए यह मांग एक सार्वजनिक प्रस्ताव के रूप में देखी जानी चाहिए।
निष्कर्ष
भारत की चुनाव व्यवस्था की वास्तविक शक्ति किसी एक व्यक्ति, किसी एक तकनीक या किसी एक चुनाव में नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थागत ढांचे, करोड़ों मतदाताओं, लाखों चुनावकर्मियों, बूथ-स्तरीय सत्यापन, डिजिटल तकनीक, EVM-VVPAT, फोटो पहचान, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संयुक्त तंत्र में निहित है।
आज भारत का चुनाव प्रबंधन केवल देश के भीतर प्रशासनिक आवश्यकता नहीं रह गया है। IIIDEM के माध्यम से 141 देशों के चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण, इंटरनेशनल आईडिया की 2026 अध्यक्षता और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों द्वारा भारतीय चुनावों का प्रत्यक्ष अध्ययन इस बात के प्रमाण हैं कि भारत का चुनावी अनुभव अंतरराष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुका है।
भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का यह पक्ष निश्चित रूप से गौरव का विषय है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र ने केवल विशाल स्तर पर चुनाव कराने की क्षमता विकसित नहीं की, बल्कि चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में अपना अनुभव और संस्थागत ज्ञान दुनिया के साथ साझा करने की क्षमता भी विकसित की है।
विशेष रूप से “13.4 करोड़ नाम हटाए गए”, “70% नाम केवल माइग्रेशन के कारण हटे”, “भारत में बायोमेट्रिक मतदान” जैसे दावों को मैंने तथ्य के रूप में शामिल नहीं किया है।
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भारत में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया चलाई जा रही है।
## 1. मतदाता सूची को कैसे शुद्ध किया गया?
* डोर-टू-डोर सत्यापन (Self-Enumeration): चुनाव आयोग के बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर डेटा एकत्र करते हैं और मतदाताओं से फॉर्म भरवाते हैं।
* ऐतिहासिक डेटा से मिलान: इस प्रक्रिया में वर्तमान डेटा का मिलान दो दशक पुराने (2002-2004) संदर्भ मतदाता रिकॉर्ड से किया जा रहा है।
* सॉफ़्टवेयर द्वारा विसंगतियों की पहचान: आयोग के विशेष सॉफ़्टवेयर के ज़रिए नाम, पते या जन्मतिथि में गड़बड़ी, बिना मैपिंग वाले (Unmapped) मतदाताओं और डुप्लीकेट एंट्रीज़ को फ़िल्टर किया जा रहा है।
* श्रेणीबद्ध छंटनी (ASD वर्गीकरण): उन मतदाताओं की पहचान कर उन्हें हटाया जा रहा है जो अनुपस्थित (Absent), कहीं और स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead) हैं या जिनके नाम दो जगह दर्ज हैं।
## 2. मतदाता सूची को कितना शुद्ध किया गया (आंकड़े)?
* करोड़ों नाम हटाए गए: जून 2025 से अगस्त 2026 के बीच देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 13.4 करोड़ (134 मिलियन) नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर किए गए।
* सत्यापन के बाद सुधार: बाद में किए गए फिजिकल वेरिफिकेशन और अपीलों के बाद 13 राज्यों में डिलीट किए गए नामों की संख्या घटकर 8.6 करोड़ रह गई।
* हटाने का मुख्य कारण: इसमें से लगभग 70 प्रतिशत नाम पलायन (Migration) या मतदाता के उस पते पर अनुपस्थित होने के कारण हटाए गए हैं।
## 3. अमेरिका में कैसे और क्यों हुई प्रशंसा?
* डोनाल्ड ट्रंप का बयान (अगस्त 2026): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Truth Social) पर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए भारतीय चुनाव व्यवस्था की खूब तारीफ की।
* फोटो आईडी और मतदाता संख्या की सराहना: ट्रंप ने कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में 64.6 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने वोट डाला और हर एक मतदाता के पास एक वैध फोटो पहचान पत्र (Valid Photo ID) था, जबकि वहां 1% से भी कम मतदान मेल (डाक) के ज़रिए हुआ।
* अमेरिका में SIR मॉडल की वकालत: ट्रंप ने भारत का उदाहरण देकर अमेरिकी कांग्रेस से सेव अमेरिका एक्ट (SAVE America Act) पास करने की मांग की है, ताकि अमेरिका में भी बिना आईडी और बिना नागरिकता प्रमाण के वोटिंग रोकी जा सके और भारत की तरह ही वहां भी कंप्यूटर डेटाबेस के ज़रिए वोटर लिस्ट की सफ़ाई (Audit) की जा सके।
* भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रतिक्रिया: इस प्रशंसा के बाद भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा कि भारतीय चुनाव मशीनरी की विश्वसनीयता और मजबूती को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) के मालिक एलन मस्क (Elon Musk) ने भी भारतीय चुनाव प्रणाली की खुलकर तारीफ की है।
हालांकि, उनका मुख्य ध्यान मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) के बजाय भारत में वोटों की गिनती की रफ्तार और चुनाव प्रक्रिया की सटीकता पर था। एलन मस्क ने अपने प्लेटफॉर्म X पर भारतीय चुनाव व्यवस्था की सराहना करते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:
* एक दिन में 64 करोड़ वोटों की गिनती: मस्क ने अमेरिकी चुनाव व्यवस्था पर तंज कसते हुए लिखा, "भारत ने एक ही दिन में 64 करोड़ (640 मिलियन) वोटों की गिनती पूरी कर ली, जबकि अमेरिका का कैलिफोर्निया राज्य हफ़्तों बाद भी वोटों की गिनती ही कर रहा है।"
* भारतीय तकनीक और कुशलता की सराहना: मस्क ने भारत की इस बात के लिए तारीफ की कि इतने विशाल लोकतंत्र और करोड़ों मतदाताओं वाले देश में बिना किसी देरी या गड़बड़ी के चुनाव के नतीजे बहुत तेजी से आ जाते हैं।
दोनों (डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क) की तारीफों का मुख्य संदेश:
जहां डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की मतदाता सूची, फोटो पहचान पत्र (Photo ID) की अनिवार्यता और प्रामाणिकता की प्रशंसा की, वहीं एलन मस्क ने भारत की तीव्र मतगणना और चुनावी कार्यकुशलता को दुनिया के लिए एक मिसाल बताया। अमेरिकी दिग्गजों द्वारा दिए गए इन बयानों को भारत के चुनाव आयोग (ECI) की वैश्विक स्तर पर एक बड़ी सराहना के रूप में देखा जा रहा है। [
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अमेरिका के अलावा दुनिया के कई अन्य प्रमुख देशों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और वैश्विक संस्थाओं ने भी भारत की चुनावी प्रणाली की जमकर प्रशंसा की है।
भारत का चुनाव आयोग (ECI) दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव आयोजित करता है, जिसे वैश्विक स्तर पर "लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव" माना जाता है। समय-समय पर विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भारतीय चुनाव प्रबंधन की सराहना की है:
## 1. अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों (IEVP) द्वारा सराहना
भारत का चुनाव आयोग समय-समय पर इंटरनेशनल इलेक्शन विजिटर्स प्रोग्राम (IEVP) आयोजित करता है, जिसमें विदेशी डेलीगेट्स खुद आकर भारत की वोटिंग प्रक्रिया को करीब से देखते हैं:
* 22 से अधिक देशों के प्रतिनिधि (अप्रैल 2026): हाल ही में असम, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान क्रोएशिया, फिजी, ऑस्ट्रेलिया, रूस, मेडागास्कर और किर्गिज़ गणराज्य जैसे 22 से अधिक देशों के 38 प्रतिनिधियों ने भारतीय चुनाव प्रक्रिया को देखा। उन्होंने चुनाव आयोग की पारदर्शिता, तकनीकी उत्कृष्टता और समावेशिता की सराहना की।
* महिला संचालित बूथों और दिव्यांग सुविधाओं की तारीफ: विदेशी प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से केवल महिलाओं द्वारा संचालित (All-Women) पोलिंग स्टेशनों, व्हीलचेयर और बुजुर्गों के लिए स्वयंसेवकों की व्यवस्था तथा दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल बैलेट पेपर (Braille Ballot) जैसी सुविधाओं की खूब तारीफ की।
* पड़ोसी देशों का अनुभव: श्रीलंका, बांग्लादेश, फिलीपींस और जिम्बाब्वे के चुनाव अधिकारियों ने भारतीय मतदाताओं के उत्साह और पोलिंग बूथों पर बिना किसी अव्यवस्था के सुचारू रूप से होने वाली वोटिंग को एक बेहतरीन मैनेजमेंट मॉडल बताया है।
## 2. वैश्विक नेताओं और संस्थाओं की प्रतिक्रिया
* यूरोपीय संघ (EU): यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत में दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनावों के शानदार और सफल आयोजन की गहरी सराहना की है।
* वैश्विक संगठनों में नेतृत्व: भारत की चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता के कारण ही भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को इंटरनेशनल आइडिया (International IDEA) काउंसिल ऑफ मेंबर स्टेट्स का चेयरमैन (वर्ष 2026 के लिए) चुना गया है, जिसका मुख्यालय स्टॉकहोम (स्वीडन) में है। यह वैश्विक स्तर पर भारत के चुनाव प्रबंधन को मिली एक बहुत बड़ी मान्यता है।
## 3. भारतीय EVM और तकनीकी मॉडल को अपनाते अन्य देश
भारत की चुनावी तकनीक इतनी विश्वसनीय मानी जाती है कि दुनिया के कई देश अपने यहाँ चुनाव कराने के लिए भारत की मदद ले रहे हैं:
* नेपाल, भूटान और नामीबिया जैसे देश अपने यहाँ मतदान के लिए भारत में बनी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और तकनीकी सहायता का उपयोग करते हैं।
* इंडोनेशिया (दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र) ने भी अपने चुनाव प्रबंधन को मजबूत करने और तकनीकी सहयोग के लिए भारत के चुनाव आयोग के साथ समझौता (MoU) किया है।
* भारत का इन्डिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) अब तक 140 से अधिक देशों के लगभग 3,000 चुनाव अधिकारियों को ट्रेनिंग दे चुका है।
संक्षेप में कहें तो, भारत की विशाल मतदाता सूची, उसकी शुद्धता, निष्पक्षता और आधुनिक तकनीक (जैसे बायोमेट्रिक और EVM) आज पूरी दुनिया के लोकतांत्रिक देशों के लिए एक "ग्लोबल बेंचमार्क" बन चुकी है।
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भारत के चुनाव प्रबंधन और IIIDEM (इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट) के वैश्विक प्रभाव से जुड़ी विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है:
## 1. IIIDEM (इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट) क्या है?
यह भारत के चुनाव आयोग (ECI) की एक उन्नत प्रशिक्षण और अनुसंधान शाखा (Advanced Training and Resource Wing) है। इसकी स्थापना चुनाव प्रबंधन को और अधिक पेशेवर, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए की गई थी।
* अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण (International Capacity Building): IIIDEM दुनिया भर के देशों के चुनाव अधिकारियों (Election Management Bodies - EMBs) के लिए विशेष क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित करता है। इसमें चुनाव योजना, मतदाता शिक्षा (Voter Education), और आईटी टूल्स का उपयोग सिखाया जाता है।
* आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चुनाव: डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए IIIDEM ने "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, चुनाव और लोकतांत्रिक शासन" पर एक वैश्विक सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। इसमें 11 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं ताकि डीपफेक, दुष्प्रचार (Misinformation) और चुनावों में एआई के दुरुपयोग को रोका जा सके।
* अकादमिक कोर्सेज: चुनाव प्रबंधन को एक विज्ञान की तरह पढ़ाने के लिए IIIDEM ने प्रतिष्ठित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई के साथ मिलकर इंटरनेशनल इलेक्टरल मैनेजमेंट एंड प्रैक्टिसेज (MIEMP) में एक विशेष मास्टर प्रोग्राम भी तैयार किया है।
## 2. अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों (IEVP) द्वारा भारत की विशेष तारीफ
हाल ही में जब भारत में राज्य विधानसभा चुनाव और बड़े लोकतांत्रिक अभ्यास हुए, तो 22 से अधिक देशों के 38 प्रतिनिधियों ने भारत आकर चुनावी मैनेजमेंट को लाइव देखा:
* क्रोएशिया के प्रतिनिधि (ब्रानिमीर फ़ार्कास): उन्होंने भारतीय चुनाव प्रक्रिया की सटीकता, भारी मतदाता भागीदारी और अनुशासन को देखकर इसे "लोकतंत्र का त्योहार" (Festival of Democracy) कहा।
* सिएरा लियोन के प्रतिनिधि (अबू बक्र महमूद कोरोमा): उन्होंने भारतीय EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की सुरक्षा और उसकी सादगी की विशेष रूप से सराहना की, जिसे कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी आसानी से उपयोग कर सकता है।
* वेबकास्टिंग और पारदर्शिता: विदेशी डेलीगेट्स ने पोलिंग स्टेशनों की 100% लाइव वेबकास्टिंग और सीसीटीवी कंट्रोल रूम्स को देखा और इसे पारदर्शिता का सबसे मजबूत स्तंभ (Strong pillar of transparency) बताया।
## 3. वैश्विक संगठनों में भारत का ऐतिहासिक नेतृत्व (International IDEA)
भारत की इसी चुनावी साख और पारदर्शिता के कारण भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ा सम्मान मिला है:
* 35 देशों के मंच की अध्यक्षता: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार वर्ष 2026 के लिए इंटरनेशनल आइडिया (International IDEA) काउंसिल ऑफ मेंबर स्टेट्स के चेयरमैन बनाए गए हैं।
* स्टॉकहोम में कमान: स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित बैठक में भारत ने यह अध्यक्षता ग्रहण की। यह मंच दुनिया भर में लोकतांत्रिक संस्थानों और चुनाव प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए काम करता है।
* थीम और 'दिल्ली घोषणापत्र': भारत के नेतृत्व में नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया (IICDEM 2026), जिसमें 42 चुनावी निकायों ने हिस्सा लिया और 'दिल्ली घोषणापत्र 2026' को अपनाया। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों (Electoral Rolls) को शुद्ध रखना और नई तकनीकों का सुरक्षित उपयोग करना है।
## 4. अन्य प्रमुख देशों द्वारा सराहना और समझौते (MoU)
* इंडोनेशिया: दुनिया के इस बड़े मुस्लिम आबादी वाले लोकतंत्र ने भारतीय चुनाव आयोग के साथ एक सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि वे भारत के डिजिटल चुनावी डेटाबेस और मैनेजमेंट टूल्स को सीख सकें।
* नेपाल, भूटान और नामीबिया: ये देश अपनी चुनाव व्यवस्था में सीधे तौर पर भारत में बनी EVM तकनीकों और भारत के प्रशासनिक सहयोग पर भरोसा करते हैं।
इन वैश्विक उदाहरणों से साफ है कि भारत केवल अपने देश में मतदाता सूची शुद्ध नहीं कर रहा, बल्कि अपनी सीख और तकनीक से पूरी दुनिया के लोकतंत्रों को मजबूत बनाने का काम कर रहा है।
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भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने इस 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची में किए गए सुधारों और हटाए गए नामों के आधिकारिक आंकड़े पेश किए हैं। आयोग के अनुसार, यह पूरी कवायद मतदाता सूची की शुद्धता (Purity), पारदर्शिता और 'भूतिया मतदाताओं' (Ghost Voters) को खत्म करने के लिए की गई है।
आयोग द्वारा जारी किए गए मुख्य आंकड़े और राज्यवार विवरण निम्नलिखित हैं:
## 1. राष्ट्रीय स्तर पर कुल आंकड़े (Draft List Clean-up)
* 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए: चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए इस SIR अभियान के तहत 13 करोड़ से अधिक (130 मिलियन+) नाम शुरुआती ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए गए हैं.
* दूसरा चरण (Phase 2): इस चरण में शामिल 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का डेटा 50.99 करोड़ से घटकर 45.81 करोड़ रह गया. यानी कुल मतदाता सूची में लगभग 10.2% की कमी (नेट 5.18 करोड़ नामों की छंटनी) दर्ज की गई.
* तीसरा चरण (Phase 3): 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे इस चरण में ड्राफ्ट सूचियों से अब तक 1.5 करोड़ से अधिक (11.51%) नाम हटाए जा चुके हैं.
## 2. राज्यों के प्रमुख आंकड़े (सबसे बड़ी कटौतियां)
आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देश के बड़े राज्यों में बड़े पैमाने पर डुप्लीकेट और मृत नाम मिले हैं:
* उत्तर प्रदेश: यहां देश में सबसे बड़ी प्रशासनिक छंटनी देखी गई, जहां ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए, जो राज्य की कुल मतदाता सूची का लगभग 18.7% है.
* पश्चिम बंगाल: यहां सूची से लगभग 83.86 लाख से 91 लाख के बीच नाम हटाए गए.
* आंध्र प्रदेश व हरियाणा: तीसरे चरण के दौरान आंध्र प्रदेश में 44.89 लाख और हरियाणा में 33.83 लाख नाम हटाए गए हैं.
* दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी): दिल्ली में लगभग 47.7 लाख (4.7 मिलियन) नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर किए गए. इनमें से 43 लाख से अधिक लोग या तो शहर छोड़ चुके थे (Shifted) या वहां मौजूद नहीं थे.
* प्रतिशत के मामले में सबसे आगे: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सबसे बड़ी आनुपातिक कटौती दर्ज की गई, जहां 16.6% नाम साफ किए गए, जबकि लक्षद्वीप में सबसे कम केवल 0.3% (181 मतदाता) नाम हटाए गए.
## 3. नाम हटाने के मुख्य कारण (आयोग का वर्गीकरण)
चुनाव आयोग ने डिलीट किए गए नामों की श्रेणियों का विवरण भी साझा किया है, जो आपकी बात को सही साबित करता है कि लोग खुद नाम नहीं कटवाते:
* अनुपस्थित या पलायन (Absent/Shifted): हटाए गए नामों में से सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 4.52 करोड़ मतदाता ऐसे थे जो अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं थे या दूसरे राज्यों/शहरों में शिफ्ट हो चुके थे.
* मृत्यु (Deceased): कुल हटाए गए नामों में से लगभग 1.11 करोड़ नाम उन लोगों के थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके नाम दशकों से सूची में बने हुए थे.
* एकाधिक प्रविष्टियां (Multiple Enrolments): सॉफ़्टवेयर मैपिंग के दौरान करीब 49.58 लाख (लगभग 50 लाख) नाम ऐसे पाए गए जो एक से अधिक जगहों पर वोटर आईडी कार्ड के साथ दर्ज थे.
## चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण (क्या ये अंतिम आंकड़े हैं?)
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यह कोई अंतिम कटौती नहीं है। यह केवल सॉफ़्टवेयर और गहन पुनरीक्षण के बाद तैयार की गई 'ड्राफ्ट लिस्ट' (Draft Roll) है। आयोग आम जनता और राजनीतिक दलों को 'दावे और आपत्तियां' (Claims & Objections Window) दर्ज कराने का मौका दे रहा है, जिसके तहत यदि किसी वास्तविक नागरिक का नाम गलती से कट गया है, तो वह फॉर्म-6 भरकर अपना नाम वापस जुड़वा सकता है.
आयोग का कहना है कि इस बड़े डेटाबेस क्लीन-अप से भारत की मतदाता सूची विश्व में सबसे सटीक और पारदर्शी बन जाएगी।
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