अवरोध और अपमान की राष्ट्रघाती विपक्षी राजनीति को जनता सबक सिखाएगी — अरविंद सिसोदिया


अवरोध और अपमान की राष्ट्रघाती विपक्ष को, जनता सबक सिखाएगी — अरविंद सिसोदिया

कोटा 2 सितंबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ राष्ट्रवादी बुद्धिजीवी अरविंद सिसोदिया ने कांग्रेस सहित विपक्ष की राजनीति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि " लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध और आलोचना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विकास कार्यों में अनावश्यक अवरोध, व्यक्तिगत अपमान और अप्रमाणित तथा गढ़े हुये आरोपों के माध्यम से सामाजिक वातावरण को विषाक्त बनाने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता। लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध और देश के प्रति शत्रुता जैसा व्यवहार कांग्रेस की आदत बन चुकी है। जिसे देश का जनमत कभी माफ नहीं करेगा और समय आनें पर वह मतदान की शक्ति से सबक सिखाएगा।"
सिसोदिया ने कहा कि " कांग्रेस सहित विपक्षी दलों को सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों में यदि कोई वास्तविक कमी दिखाई देती है तो वे तथ्यों, दस्तावेजों और वैकल्पिक नीतियों के साथ जनता के सामने अपनी बात रख सकते हैँ, किन्तु  केवल विरोध के लिए अड़ंगा और निराधार आरोपों के माध्यम से जनभावनाओं में भ्रम पैदा करना जनहित में नहीं है बल्कि राष्ट्रविरोधी कृत्य होता है।" उन्होंने कहा कि " कांग्रेस के जो लोग चाय के कप में जातिवाद ढूंढ़ रहे हैँ, उनकी दूषित मनोविकृति और जबरदस्त झूठ को आम व्यक्ती भी समझ रहा है। समाज को बाँटने का यह दुष्कृत कृत्य उल्टा ही पढ़ा है,जनता को इनकी कुबुद्धि पर तरस आरहा है।"

उन्होंने कहा कि " राजनीतिक असहमति राष्ट्रहित से ऊपर नहीं हो सकती। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधारभूत ढाँचे और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को राजनीतिक टकराव का शिकार नहीं बनाया जा सकता । सरकार के निर्णयों की समीक्षा और आलोचना हो, लेकिन राष्ट्रहित और विकास   प्रभावित न हो, यह सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।" 
सिसोदिया नें कहा कि " धार्मिक स्थलों पर जाकर तुष्टिकरणवादी नारे लगवाना और गंदगी फैलाना पूरी तरह अनुचित है, उसकी साफ सफाई को शुद्धिकरण कह कर, झूठा नैरेटिव चलाना देश के प्रति अन्याय और समाज में फूट डालो राज करो की दुष्कर प्रवृत्ति है। जिसे समाज कतई स्वीकार नहीं करता है। भारत में अब कोई छुआ छूत नहीं है, कांग्रेस जबरदस्ती इसे समाज पर नहीं थोप सकती।"

सिसोदिया नें कहा कि " मनुस्मृति का लेखन हजारों साल पहले हुआ, इसे विश्व की पहली समाज व्यवस्था को व्यवस्थित करने वाला मार्गदर्शक ग्रंथ माना जाता है जिसका प्रभाव संपूर्ण विश्व की सभ्यताओं और समाज व्यवस्थाओं पर आज तक भी है। जबकि यह कहीं भी अनिवार्य नहीं है। स्वयंस्वीकार्यता से समाज जीवन में है। इसके विरुद्ध मात्र एक वोट बैंक को संतुष्ट करने और समाज में विघटन खड़ा करने के लिए झूठे नैरेटिव गढ़ना सिर्फ तुच्छ राजनैतिक नौटंकी है। देश इस तरह की नौटंकी को अस्वीकार करता है। "

सिसोदिया ने  कहा " देश में अराजकता उत्पन्न करने हेतु विदेशी फंडिंग, सोसल मीडिया पर विदेशी एकाउन्ट, विदेशी फॉलोवर्स और विदेशी षड्यंन्त्रों के विदेशी प्रभाव तथा सोशल मीडिया पर होने वाले संगठित दुष्प्रचार से जुड़े विषयों पर भी पारदर्शी जाँच की आवश्यकता है । " उन्होंने कहा कि " विदेशी स्रोतों से प्राप्त किसी भी वित्तीय सहयोग की वैधानिकता का परीक्षण कानून के अनुसार होना चाहिए। विदेशी फॉलोअर्स या डिजिटल समर्थन मात्र को राष्ट्र-विरोध का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन यदि किसी गतिविधि में राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुँचाने का प्रमाण मिले तो सक्षम संस्थाओं को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।" 
उन्होंने कहा कि " सोशल मीडिया के माध्यम से झूठी अथवा भ्रामक सूचनाओं का प्रसार लोकतांत्रिक संवाद के लिए गंभीर चुनौती है। राजनीतिक दलों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए।" 

सिसोदिया ने कहा कि " जनता जागरूक है और वह अवरोध, अपमान, भ्रामक प्रचार बनाम सकारात्मक विकास की राजनीति के बीच अंतर करना जानती है। लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और जनता राजनीतिक दलों के आचरण, नीतियों तथा उनके कार्यों का मूल्यांकन तथ्यों और अपने अनुभव के आधार पर करती है।" 

उन्होंने विपक्षी राजनीतिक दलों से आह्वान किया कि " राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को व्यक्तिगत कटुता और अवरोध की राजनीति से ऊपर उठाकर विकास, सुशासन, शिक्षा, रोजगार और राष्ट्रहित के मुद्दों पर केंद्रित किया जाना चाहिए ।" 

भवदीय 
अरविन्द सिसोदिया 
9414180151

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

25 वर्षों में जनसेवा से वैश्विक नेतृत्व तक, मोदीजी की स्वाभिमानी राष्ट्र निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा — अरविन्द सिसोदिया

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

भगवान कृष्ण का जलवा पूजन : डोल ग्यारस

'उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन' क्यों...?

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

जगाया तुमको कितनी बार jgaya tumko kitni bar

जनसांख्यिकीय हेरफेर घुसपैठ से कहीं अधिक सामाजिक सद्भाव के लिए 'बड़ा खतरा' है: प्रधानमंत्री मोदी

Lord Dattatreya's 24 Gurus and the Teachings Received from Them