राहुल गांधी द्वारा देश की चुनावी प्रक्रिया के संबंध में फैलाया जा रहा झूठ, लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास है - सिद्धार्थ यादव
श्री सिद्धार्थ यादव द्वारा -
29-09-2026
भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक श्री सिद्धार्थ यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्य बिंदु
कांग्रेस पार्टी का 'चुनावी क्षेत्र में बड़ा यू-टर्न' बेनकाब हो गया है। वही कांग्रेस पार्टी जिसने कभी फर्जी और नकली मतदाताओं को हटाने की मांग की थी, अब मतदाता सूचियों को साफ करने का विरोध कर रही है।
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केरल में चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने एसआईआर को मददगार बताया था, जबकि अब वही कांग्रेस अन्य राज्यों में एसआईआर को लेकर भ्रम फैला रही है।
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कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंहवी ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फर्जी मतदाताओं को हटाने की मांग की थी, लेकिन जब एसआईआर में फर्जी मतदाताओं को हटाया जा रहा है, तो कांग्रेस पार्टी इसका विरोध कर रही है।
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यूपीए शासन के दौरान, मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए और जोड़े गए, फिर भी कांग्रेस ने कोई सवाल नहीं उठाया। हालांकि, आज वही संवैधानिक प्रक्रिया कांग्रेस के लिए अनियमितता प्रतीत होती है।
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राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को यह स्पष्ट करना होगा कि देश में स्वच्छ और पारदर्शी मतदाता सूची होनी चाहिए या नहीं।
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कांग्रेस पार्टी की 'सुविधाजनक राजनीति' बेनकाब हो गई है। राजनीतिक सुविधा के अनुसार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना किसी जिम्मेदार विपक्ष का आचरण नहीं हो सकता।
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक श्री सिद्धार्थ यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया के संबंध में झूठी बातें फैलाकर लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, केरल, पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र के उदाहरण देते हुए श्री यादव ने कहा कि कांग्रेस ने पहले फर्जी, मृत और नकली मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची में संशोधन की मांग की थी, लेकिन अब वह मतदाता सूची संशोधन पर सवाल उठा रही है। श्री सिद्धार्थ यादव ने कांग्रेस से सवाल उठाते हुए उससे स्वच्छ मतदाता सूची पर अपना रुख स्पष्ट करने और संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने और उनकी छवि धूमिल करने के लिए माफी मांगने की मांग की।
श्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि विपक्षी दलों, विशेषकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा देश की चुनावी प्रक्रिया के संबंध में फैलाया जा रहा झूठा प्रचार और गलत बयानबाजी, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को कमज़ोर करने और लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने का प्रयास है। कुछ उदाहरणों के माध्यम से वे कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक यू-टर्न और स्वार्थपरक राजनीति के प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करना चाहते हैं। कांग्रेस पार्टी ने अपनी चुनावी विफलताओं को छिपाने के लिए यह पूरी कहानी गढ़ी है। प्रत्येक राज्य से उदाहरण प्रस्तुत किए जाएंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि कांग्रेस पार्टी पहले इन राज्यों में क्या कहती थी और आज क्या कहती है।
भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक ने बताया कि 2018 में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंहवी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और ट्वीट किया कि आंध्र प्रदेश की मतदाता सूची में लगभग 50 लाख नाम दोहराए गए हैं। कांग्रेस ने मांग की कि इन नामों को हटाया जाए, सूची से नाम हटाए जाएं और उसकी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का संशोधन किया जाए। 2026 में एसआईआर (SIR) आयोजित किया गया और मतदाता सूची से 44.28 लाख नाम हटा दिए गए। श्री यादव ने बताया कि तेलंगाना में भी एक कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी और कहा था कि तेलंगाना की मतदाता सूची में 70 लाख नाम दोहराए गए और गलत हैं, जिन्हें हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि तेलंगाना की मतदाता सूची का संशोधन किया जाना चाहिए और चुनावों में दोहराए गए नाम होना उचित नहीं है। इसके बाद, मतदाता सूची को शुद्ध किया गया और एसआईआर आयोजित किया गया, जिसके तहत लगभग 73.39 लाख नाम हटा दिए गए।
श्री यादव ने जोर देकर कहा कि 2018 में कांग्रेस पार्टी कहती थी कि यदि फर्जी मतदाताओं और मृत मतदाताओं के नाम नहीं हटाए गए तो यह लोकतंत्र के साथ धोखा होगा। हालांकि, जब नाम हटाए जा रहे हैं, तो कांग्रेस पार्टी की आज की बातें भी सच साबित हो रही हैं। राजस्थान में, 15 अगस्त 2018 को, कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि 42 लाख नाम दोहराए गए हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया कि यदि ये नाम नहीं हटाए गए तो यह लोकतंत्र के साथ धोखा होगा। एसआईआर के तहत, लगभग इतनी ही संख्या में, यानी 41.85 लाख नाम हटाए गए। केरल में, कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि 4.34 लाख नाम दोहराए गए हैं। कांग्रेस पार्टी ने केवल आरोप ही नहीं लगाए; उसके नेता ने एक वेबसाइट बनाई, उस पर ये नाम अपलोड किए, उच्च न्यायालय का रुख किया और जोर देकर कहा कि चुनाव से पहले इन नामों को हटाया जाना चाहिए। एसआईआर के संचालन के दौरान, कुल 8.57 लाख दोहराए गए नाम पाए गए और उन्हें हटा दिया गया।
श्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि सभी को यह भी देखना चाहिए कि 'सुविधा की राजनीति' क्या होती है। केरल में एसआईआर (चुनावी मतदाता सूची) कराई गई और कांग्रेस पार्टी विजयी हुई। कांग्रेस की मांग के अनुसार जिन नामों को हटाने की मांग की गई थी, उन्हें हटा दिया गया और साथ ही कई डुप्लिकेट नाम भी हटा दिए गए। इसके बाद कांग्रेस ने कहा कि एसआईआर बहुत मददगार साबित हुई और उसने बहुत अच्छा काम किया। उसने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी ने मतदाता सूची में फर्जी नाम दर्ज किए थे, जिससे अनियमितताएं हुई थीं। उसने कहा कि एसआईआर कराई गई, इसलिए उसे जीत मिली। केरल कांग्रेस नेता और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि एसआईआर ने मृत मतदाताओं के नाम हटाए, डुप्लिकेट नामों को हटाया और सभी विवादित नामों को हटा दिया, जिससे कांग्रेस को फायदा हुआ। कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर एसआईआर की प्रशंसा की। हालांकि, यह रुख और कांग्रेस पार्टी की 'सुविधा की राजनीति' समय-समय पर बदलती रहती है और अपने राजनीतिक हितों के अनुसार रूपांतरित होती रहती है।
भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग उतने ही नाम हटाए गए जितने कांग्रेस पार्टी द्वारा बताए गए थे। प्रस्तुत ऑडियो में यह सुना गया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद कई वीडियो क्लिप सामने आए हैं जिनमें अवैध मतदाता और घुसपैठिए यह स्वीकार करते हुए पाए गए हैं कि उन्होंने देश के चुनावों में भाग लिया था और एसआईआर प्रक्रिया से पहले वोट डाले थे। बिहार में, 2013 में किए गए एक सर्वेक्षण में 76 लाख फर्जी मतदाता पाए गए थे। उस समय भाजपा केंद्र में सत्ता में नहीं थी; कांग्रेस सत्ता में थी। उस समय चुनाव आयोग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 76 लाख फर्जी मतदाता, मृत मतदाता और डुप्लिकेट नाम पाए गए थे। 2025 में, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर एसआईआर आयोजित किया गया था, और 65 लाख नाम हटाए गए थे। दिल्ली में, 2013 में, चुनाव आयोग ने स्वयं 13.58 लाख नाम हटाए थे, और हाल ही में किए गए एसआईआर में 33 लाख और नाम हटाए गए। महाराष्ट्र में, 2014 में, जब केंद्र में यूपीए सरकार सत्ता में थी, तब बिना किसी एसआईआर के 71.76 लाख नाम हटाए गए और 74 लाख नाम जोड़े गए। यह सब यूपीए सरकार के दौरान बिना एसआईआर के हुआ। अब, हमने देखा है कि एसआईआर के दौरान 39 लाख नए नाम जोड़े गए हैं। हालांकि, इस बार विपक्ष के नेता, कांग्रेस पार्टी और विपक्ष ने इसे अनियमितता बताया है, जबकि यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने इसे अनियमितता नहीं माना था।
श्री यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल के वीडियो में भी अवैध निवासी कैमरे पर यह दावा करते हुए देखे गए कि वे सीमा पार कर रहे थे। अब तक कांग्रेस पार्टी कहती थी कि मतदाता सूची में गलत मतदाता, मृत मतदाता और फर्जी नाम दर्ज हैं, नाम साफ नहीं हैं और मतदाता सूची में गड़बड़ी है। उनका कहना था कि ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं जो वहां के निवासी नहीं हैं, इसलिए वे सभी फर्जी मतदाता हैं और इन नामों का इस्तेमाल करके चुनावी अनियमितताएं की जा रही हैं। एसआईआर प्रक्रिया के बाद, जब भारत निर्वाचन आयोग ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की सत्यनिष्ठा बनाए रखी, तो कांग्रेस नेताओं ने कहना शुरू कर दिया कि अब चुनावों में गड़बड़ी है क्योंकि नाम हटाए जा रहे हैं, फर्जी नाम हटाए जा रहे हैं और मृत मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी का यह पुराना रवैया हमारे सामने स्पष्ट है।
श्री सिद्धार्थ यादव ने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी के यू-टर्न की कहानी खुद राहुल गांधी सुना रहे हैं। चुनाव से पहले राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में कहा था कि अगर ममता बनर्जी ने रास्ता नहीं खोला होता तो भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं आती। राहुल गांधी ने इसके लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, चुनाव के तुरंत बाद राहुल गांधी ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि यह सब एसआईआर और चुनाव आयोग की करतूत है। श्री सिद्धार्थ यादव ने सवाल उठाया कि क्या देश में मतदाता सूचियों की निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए या नहीं। उन्होंने पूछा कि क्या देश में वोट डालने वालों की मतदाता सूचियां पूरी तरह साफ होनी चाहिए या नहीं। अगर कांग्रेस पार्टी ने पहले खुद यह तर्क दिया था तो अब वह अपने रुख से क्यों पलट गई? या तो कांग्रेस पार्टी 2018 में झूठ बोल रही थी या 2026 में। ये दोनों दावे एक साथ सच नहीं हो सकते। कांग्रेस नेताओं ने वर्षों से लगातार कहा है कि मतदाता सूचियों को साफ किया जाना चाहिए, मतदाता सूचियों को साफ किया जाना चाहिए और मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाने चाहिए। अब वही नेता कह रहे हैं कि नामों को हटाना अनियमितता है। कांग्रेस पार्टी के इरादों में विरोधाभास अब जनता के सामने स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक ने बताया कि 24 अगस्त 2013 को दिल्ली में 13.58 लाख वोट रद्द कर दिए गए थे। उस समय भाजपा विपक्ष में थी, लेकिन उसने एक बार भी यह नहीं कहा कि यह गलत है, वोट चोरी है, या प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी है। 9 अगस्त 2013 को बिहार में 76 लाख मतदाता संदिग्ध पाए गए थे। उस समय विपक्ष के किसी भी नेता ने यह नहीं कहा कि ये मतदाता अनियमित थे, प्रक्रिया में खामी थी, या कुछ गलत हो रहा था। 27 अप्रैल 2014 को महाराष्ट्र में बिना एसआईआर (SIR) के 71.76 लाख मतदाता हटा दिए गए और 74 लाख मतदाता जोड़ दिए गए। उस समय किसी ने भी वोट चोरी की बात नहीं कही। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 10 बार एसआईआर (SIR) कराया गया, लेकिन किसी ने भी प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया। इसलिए अब विपक्ष के नेताओं और सभी दलों के लिए अपनी जिम्मेदारी समझना जरूरी हो गया है। देश के लोकतंत्र पर सवाल उठाना, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करना, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना, संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को कम करना और संवैधानिक निकायों पर आरोप लगाकर और उनकी छवि धूमिल करके उन्हें उनकी विफलताओं के लिए दोषी ठहराना विपक्ष की जिम्मेदारी नहीं है। यह देश के खिलाफ एक घिनौना कृत्य है, एक ऐसा कृत्य जो देश को नुकसान पहुंचाता है और एक ऐसा कृत्य जो लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाता है। कांग्रेस पार्टी को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी को अपनी राजनीतिक विफलताओं की समीक्षा करनी चाहिए और अपनी बैठकों में इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि वह बार-बार जनता का जनादेश हासिल करने में क्यों विफल रही है। कांग्रेस पार्टी को "जो उसे भाता है उसे स्वीकार करना और जो भाता नहीं उसे अस्वीकार करना" की अपनी नीति को छोड़ देना चाहिए। इस तरह के दृष्टिकोण का देश के लोकतंत्र में या किसी भी परिपक्व लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।
श्री यादव ने कहा कि आज इसी मंच से वह राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के सामने पांच सवाल रखते हैं।
पहला सवाल: जब कांग्रेस नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंहवी ने 2018 में तेलंगाना और राजस्थान में फर्जी मतदाताओं के नाम उजागर करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, तो क्या उस समय वे झूठ बोल रहे थे? यदि वे झूठ बोल रहे थे, तो कांग्रेस पार्टी ने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की?
दूसरा प्रश्न: जब कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने 2021 में फर्जी मतदाताओं के मामले में केरल उच्च न्यायालय का रुख किया, तो क्या उन्होंने झूठ बोला था या उस समय वे गलत थे? यदि वे गलत थे, तो कांग्रेस पार्टी ने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की?
तीसरा सवाल: जब कांग्रेस पार्टी के नेता कहते हैं कि केरल में चुनाव जीतने के कारण एसआईआर (SIR) से उन्हें फायदा हुआ है, तो क्या वे झूठ बोल रहे हैं? और अगर वे झूठ बोल रहे हैं, तो कांग्रेस पार्टी उनके खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है?
चौथा प्रश्न: कांग्रेस पार्टी को इस बात का भी जवाब देना चाहिए कि देश में स्वच्छ और पारदर्शी मतदाता सूची का होना आवश्यक है या नहीं।
पांचवा प्रश्न: जब देश की संवैधानिक संस्थाएं संवैधानिक प्रक्रियाओं और संविधान में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करती हैं, नियमों के अनुसार और देश के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में कार्य करती हैं, तो क्या कांग्रेस पार्टी के लिए उन पर आरोप लगाना, उन्हें बदनाम करना और देश की जनता में भ्रम पैदा करना ही एकमात्र कार्य रह जाता है?
श्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि आज उन्होंने कांग्रेस पार्टी का 'चुनावी क्षेत्र में हुआ बड़ा यू-टर्न' सबके सामने रख दिया है। उन्होंने सबके सामने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी पहले क्या करती थी, क्या कहती थी और आज क्या कहती है। इससे साफ पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी की नीति और इरादों में खामी है और वह 'सुविधाजनक राजनीति' कर रही है।
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