जनसांख्यिकीय हेरफेर घुसपैठ से कहीं अधिक सामाजिक सद्भाव के लिए 'बड़ा खतरा' है: प्रधानमंत्री मोदी
जनसंख्या असंतुलन के अध्ययन हेतु वह सब कुछ जो मूल पृष्ठ भूमि में है..... पूरा पढ़ने पर ही समझ आयेगा....
एक रिपोर्ट का लिंक है इसे खोल कर पढ़ें
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प्रधानमंत्री [नरेंद्र मोदी] ने जनसंख्या असंतुलन (Demographic Imbalance) और अवैध घुसपैठ की यह गंभीर आशंका लाल किले की प्राचीर से ही देश के सामने रखी थी.
79वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2025) के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने इस विषय पर कड़ा रुख अपनाया था:
* लाल किले से दिया गया बयान: पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था, "एक सोची-समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को बदला जा रहा है और एक नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं".
* घुसपैठियों पर प्रहार: उन्होंने आगाह किया कि घुसपैठिए देश के युवाओं की रोजी-रोटी छीन रहे हैं और सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा व सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.
* मिशन की घोषणा: इसी ऐतिहासिक संबोधन के दौरान उन्होंने देश में अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय बदलावों से निपटने के लिए एक 'हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन' (High-Powered Demography Mission) शुरू करने का बड़ा ऐलान किया था.
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पुरानी कड़ियाँ:
इससे पहले भी साल 2019 में 73वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से बोलते हुए उन्होंने देश में तेजी से बढ़ती आबादी यानी 'जनसंख्या विस्फोट' (Population Explosion) पर अपनी पहली बड़ी चिंता जताई थी और छोटा परिवार रखने की अपील की थी.
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जनसांख्यिकीय हेरफेर घुसपैठ से कहीं अधिक सामाजिक सद्भाव के लिए 'बड़ा खतरा' है: प्रधानमंत्री मोदी
भारत की आत्मा "विविधता में एकता" में निहित है, इस बात पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने चेतावनी दी कि इसके क्षरण से राष्ट्र कमजोर होगा और इस खतरे का सामना करने के लिए सतर्कता और दृढ़ कार्रवाई का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह के दौरान सभा को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह के दौरान सभा को संबोधित किया।
ऑनलाइन डेस्क, एजेंसियां
को अपडेट
01 अक्टूबर 2025,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय हेरफेर आज भारत की सामाजिक सद्भाव के लिए घुसपैठ से भी बड़ा खतरा है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा हमेशा से "विविधता में एकता" में निहित रही है और चेतावनी दी कि यदि इस सिद्धांत का उल्लंघन किया जाता है, तो देश की शक्ति कम हो जाएगी।
मोदी ने अपने 15 अगस्त के भाषण और अपनी 'जनसांख्यिकीय मिशन' की घोषणा को भी याद किया, जिसका उद्देश्य "हमारी बहनों और बेटियों को निशाना बनाकर युवाओं की आजीविका छीनने वाले घुसपैठियों से भारतीय नागरिकों की रक्षा करना" था।
उन्होंने कहा, “आज सामाजिक सद्भाव को घुसपैठियों की तुलना में जनसांख्यिकीय परिवर्तन की साजिशों से कहीं अधिक खतरा है, जिसका सीधा असर आंतरिक सुरक्षा और भविष्य की शांति पर पड़ता है। भारत आज ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहा है जो सीधे तौर पर उसकी एकता, संस्कृति और सुरक्षा को निशाना बनाती हैं।”
मोदी ने कहा कि आरएसएस ने लगातार सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता दी है, और सामाजिक सद्भाव को हाशिए पर पड़े लोगों को प्राथमिकता देकर सामाजिक न्याय स्थापित करने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के रूप में परिभाषित किया है।
उन्होंने कहा, "आज देश के सामने ऐसी चुनौतियां हैं जो सीधे तौर पर उसकी एकता, संस्कृति और सुरक्षा को निशाना बनाती हैं - जिनमें अलगाववादी विचारधाराएं और क्षेत्रवाद से लेकर जाति और भाषा को लेकर विवाद और बाहरी ताकतों द्वारा भड़काई गई विभाजनकारी प्रवृत्तियां शामिल हैं।"
भारत की आत्मा में हमेशा से निहित "विविधता में एकता" के सिद्धांत पर जोर देते हुए, मोदी ने चेतावनी दी कि यदि इस सिद्धांत का उल्लंघन हुआ तो भारत की शक्ति कमजोर हो जाएगी। इसलिए, उन्होंने इस मूलभूत सिद्धांत को निरंतर सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, "आज सामाजिक सद्भाव को जनसांख्यिकीय हेरफेर और घुसपैठ से गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसका आंतरिक सुरक्षा और भविष्य की शांति पर सीधा प्रभाव पड़ता है... इसी चिंता के कारण मैंने लाल किले से जनसांख्यिकी मिशन की घोषणा की है।"
मोदी ने इस खतरे का सामना करने के लिए सतर्कता और दृढ़ कार्रवाई का भी आह्वान किया।
शताब्दी समारोह का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया था और इसमें आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भाग लिया।
केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में नागपुर में स्थापित, आरएसएस एक स्वयंसेवी संगठन के रूप में स्थापित किया गया था जिसका उद्देश्य नागरिकों के बीच सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना था।
मोदी स्वयं आरएसएस के 'प्रचारक' थे और भाजपा में शामिल होने से पहले एक सक्षम आयोजक के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे, भाजपा अपनी वैचारिक प्रेरणा हिंदुत्व संगठन से प्राप्त करती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र निर्माण में आरएसएस की भूमिका की सराहना की और कहा कि हमलों के बावजूद इसने कोई कड़वाहट नहीं दिखाई।
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26 मई 2026,
हाई पावर्ड समिति गठन व उद्देश्य
गृह मंत्रालय
आज़ादी का अमृत महोत्सव
भारत सरकार 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति' का गठन करती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को 'उच्च स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन' की घोषणा की थी, जिसके परिणामस्वरूप आज उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम घुसपैठियों से मुक्त भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अवैध घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाले अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय परिवर्तन किसी भी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।
न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में गठित इस समिति में जनगणना आयुक्त के साथ श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त आईएएस), श्री बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त आईपीएस) और डॉ. शमिका रवि सदस्य होंगे।
जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक गंभीर समस्या है जो न केवल हमारी संप्रभुता से जुड़ी है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में बड़े बदलाव और आदिवासी समाजों के संरक्षण से भी संबंधित है।
यह समिति अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का व्यापक मूल्यांकन करेगी।
समिति धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के पैटर्न का विश्लेषण करेगी और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। समस्या के समाधान के लिए सुनियोजित और समयबद्ध उपाय
प्रस्तुत किए जाएंगे। समिति एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी; आवश्यकता पड़ने पर समिति का कार्यकाल छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।
26 मई 2026, शाम 5:30 बजे, पीआईबी दिल्ली द्वारा प्रकाशित
भारत सरकार ने अवैध अप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने और इन जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से निपटने के उपाय सुझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को "उच्च स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन" की घोषणा की थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर 2025 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।
न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर (सेवानिवृत्त) समिति के अध्यक्ष होंगे। जनगणना आयुक्त के अतिरिक्त, तीन विशिष्ट विशेषज्ञ - श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त आईएएस), श्री बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त आईपीएस) और डॉ. शमिका रवि - समिति के सदस्य होंगे। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-प्रथम) समिति के सदस्य सचिव होंगे। यह समिति एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। आवश्यकता पड़ने पर, गृह मंत्रालय समिति का कार्यकाल अधिकतम छह महीने तक बढ़ा सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा: “अवैध घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाला अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय परिवर्तन किसी भी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति' की घोषणा की थी। मुझे यह सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि सरकार ने इस समिति का गठन कर दिया है।
न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में गठित इस समिति में जनगणना आयुक्त के साथ श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त आईएएस), श्री बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त आईपीएस) और डॉ. शमिका रवि सदस्य होंगे। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-I) इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।
जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक गंभीर समस्या है जो न केवल हमारी संप्रभुता से जुड़ी है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में बड़े बदलाव और आदिवासी समाजों के संरक्षण से भी संबंधित है। यह समिति अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का व्यापक मूल्यांकन करेगी। इसके कारणों का विश्लेषण किया जाएगा। यह धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के पैटर्न का विश्लेषण करेगा और इस मुद्दे को हल करने के लिए एक सुनियोजित और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करेगा।
यह उच्चस्तरीय समिति अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का वैज्ञानिक आकलन करेगी, उनके कारणों का विश्लेषण करेगी और उचित नीतिगत, विधायी और प्रशासनिक उपायों की सिफारिश करेगी। समिति की प्रस्तावित संरचना और कार्यक्षेत्र निम्नलिखित हैं:-
I - जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों, जिनमें अवैध आप्रवासन भी शामिल है, पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श करना।
II -इस प्रकार के जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संभावित कारणों का अध्ययन करना, जैसे कि सीमा पार गतिविधियाँ (अवैध आप्रवासन सहित), आर्थिक अवसर और अन्य सामाजिक-पर्यावरणीय कारक।
III -इन परिवर्तनों के पीछे के मूल कारणों की पहचान करना, जिनमें अवैध आप्रवासन, असामान्य बसावट पैटर्न और सुनियोजित प्रवासन शामिल हैं।
IV -धार्मिक या सामाजिक समुदायों के स्तर पर जनसंख्या के संरचनात्मक परिवर्तनों का विश्लेषण करने के लिए, विशेष रूप से जहां वे व्यापक रुझानों से विचलित होते हैं।
V- देश में पहले से रह रहे अवैध अप्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक सुव्यवस्थित और स्थायी परिचालन तंत्र की सिफारिश करना।
VI- सीमा प्रबंधन, जनसंख्या स्थिरीकरण और इस तरह के रुझानों की निरंतर निगरानी के लिए पहचान प्रणालियों को मजबूत करने हेतु एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र की सिफारिश करना।
VII- अवैध आप्रवासन और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाले जनसांख्यिकीय असंतुलन से संबंधित मामलों पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा प्रस्तावित करना।
VIII - समिति जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों, जिनमें अवैध आप्रवासन भी शामिल है, से निपटने के लिए उपयुक्त समझे जाने वाले किसी भी अन्य उपाय की सिफारिश कर सकती है।
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आरके/पीआर/पीएस
(रिलीज़ आईडी: 2265494)
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हाई-लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेस (High-Level Committee on Demographic Changes) का आधिकारिक कार्यकाल 26 मई 2026 से प्रारंभ हुआ है और यह मई 2027 तक प्रभावी रहेगा.
केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार इस समिति की समय-सीमा का ब्यौरा इस प्रकार है:
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* प्रारंभ (Start Date): 26 मई 2026 (इस दिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने समिति के गठन का प्रस्ताव और संकल्प पत्र (Resolution) अधिकारिक रूप से अधिसूचित किया था).
* मूल अवधि (Original Tenure): समिति को गठन की तारीख से 1 वर्ष (12 महीने) के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट और नीतिगत सुझाव सौंपने का निर्देश दिया गया है.
* अंतिम तिथि (Deadline): बिना किसी विस्तार के इसकी वर्तमान समय-सीमा मई 2027 तक है.
* कार्यकाल विस्तार का प्रावधान (Extension Provision): यदि समिति को वैज्ञानिक डेटा जुटाने या सीमावर्ती राज्यों के दौरों के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता होती है, तो गृह मंत्रालय के पास इसके कार्यकाल को अधिकतम 6 महीने के लिए और बढ़ाने का वैधानिक अधिकार है.
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इस प्रकार, यदि आवश्यकता पड़ी तो इस कमेटी का कुल कार्यकाल बढ़ाकर नवंबर 2027 तक किया जा सकता है.
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इस समिति के सचिवालयीय (Secretariat) और पत्राचार संबंधी कार्यों को सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन व्यवस्थित किया गया है। चूंकि यह एक उच्च-स्तरीय और बेहद संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी समिति है, इसलिए इसका कोई अलग से स्वतंत्र सार्वजनिक कार्यालय या सार्वजनिक ईमेल आईडी जारी नहीं की गई है।
समिति के पत्राचार और संचालन का पूरा ब्यौरा इस प्रकार है:
* नोडल कार्यालय (Nodal Office): समिति का मुख्य कामकाज गृह मंत्रालय (विदेशी प्रभाग), नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली से संचालित हो रहा है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (Joint Secretary - Foreigners-I) ही इस कमेटी के 'सदस्य सचिव' (Member Secretary) हैं, जो सभी आधिकारिक पत्राचार संभालते हैं।
* लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक सहायता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय गृह सचिव को निर्देश दिया है कि समिति के रोज़मर्रा के कामकाज, डेटा संग्रहण और राज्यों के दौरों के लिए गृह मंत्रालय के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का ही उपयोग किया जाए और उन्हें सभी प्रशासनिक सहायता दी जाए।
* पत्राचार का माध्यम (Communication Mechanism): कमेटी ने विभिन्न राज्य सरकारों, राज्य पुलिस और केंद्रीय मंत्रालयों से जमीनी स्तर का फीडबैक और डेटा प्राप्त करने के लिए एक विस्तृत प्रश्नावली (Detailed Questionnaire) तैयार की है। राज्यों और सार्वजनिक प्राधिकरणों के साथ सभी आधिकारिक पत्राचार गृह मंत्रालय के आधिकारिक और सुरक्षित सरकारी नेटवर्क के माध्यम से ही किए जा रहे हैं।
यदि भविष्य में आम जनता से सुझाव या आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं, तो गृह मंत्रालय अपनी आधिकारिक वेबसाइट (mha.gov.in) के माध्यम से एक विशेष पोर्टल, ईमेल या डाक पता जारी करेगा।
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जस्टिस (रिटायर्ड) प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के मुख्य सचिवों को भेजने के लिए जो विस्तृत प्रश्नावली (Detailed Questionnaire) तैयार की है, उसका मुख्य आधार 2011 की जनगणना (Census 2011) के आंकड़ों से वर्तमान स्थिति की तुलना करना है.
इस प्रश्नावली के माध्यम से राज्य सरकारों से मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत डेटा और रिपोर्ट मांगी गई है:
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* आबादी और बस्तियों में बदलाव (Settlement Growth): राज्यों से पूछा गया है कि साल 2011 की जनगणना के बाद से उनके राज्यों में, विशेषकर संवेदनशील या सीमावर्ती इलाकों में, आबादी के पैटर्न में कितना बदलाव आया है? नई बस्तियों या झुग्गियों (Settlements) के बसने की दर क्या रही है?
* विशेष गहन संशोधन (SIR) और वोटर लिस्ट डेटा: समिति ने चुनाव आयोग और राज्यों से Special Intensive Revision (SIR) का डेटा मांगा है, जिसके तहत वोटर लिस्ट से संदेहास्पद या फर्जी नामों को हटाए जाने (Deletions) और नए नाम जुड़ने की विस्तृत जानकारी मांगी गई है.
* अवैध घुसपैठ और असामान्य प्रवासन (Illegal Immigration): अवैध रूप से सीमा पार कर आने वाले लोगों या देश के भीतर ही अचानक किसी विशेष क्षेत्र में होने वाले सुनियोजित प्रवासन (Orchestrated Migration) को लेकर राज्यों के पास क्या इनपुट या पुलिस रिकॉर्ड हैं? [5]
* सामाजिक-धार्मिक ढाँचे में बदलाव (Structural Shifts): धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर आबादी के ऐसे बदलावों का डेटा, जो सामान्य जनसंख्या वृद्धि दर (Broad Demographic Trends) से मेल नहीं खाते या बहुत असामान्य हैं.
* अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की स्थिति: वर्तमान में राज्यों के पास अवैध प्रवासियों की पहचान करने, उन्हें डिटेंशन सेंटरों में रखने या उनके निर्वासन (Deportation) के लिए क्या प्रशासनिक व्यवस्था है और उसमें क्या कमियां आ रही हैं.
* सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और निगरानी: अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे जिलों में घुसपैठ रोकने के लिए राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच किस प्रकार का समन्वय है और वहाँ संसाधनों की क्या कमी है.
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रणनीति:
यह प्रश्नावली भेजने का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब समिति के सदस्य अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का जमीनी दौरा (Field Visits) करें, तो उनके पास पहले से ही राज्यों का पुख्ता, साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) डेटा मौजूद हो. इसी डेटा के आधार पर अधिकारी और स्थानीय निकायों के साथ बैठकर आगे की नीति तैयार की जा सके.
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जस्टिस (रिटायर्ड) प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता वाली इस हाई-लेवल कमेटी का मुख्य ध्यान देश के उन संवेदनशील क्षेत्रों पर है, जहाँ 2011 की जनगणना के बाद से आबादी के ढांचे में असामान्य रूप से भारी बदलाव देखा गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, यह कमेटी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे जिलों (Border Districts), बड़े महानगरीय क्षेत्रों (Metro Cities) और औद्योगिक कस्बों का जमीनी अध्ययन कर रही है।
अध्ययन के लिए जिन विशिष्ट राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है, वे निम्नलिखित हैं:
## 1. पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सीमावर्ती राज्य (Focus on Bangladesh & Myanmar Border)
अवैध घुसपैठ और अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय बदलावों के लिहाज से ये राज्य समिति की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं:
* [पश्चिम बंगाल] और [असम] : इन राज्यों के सीमावर्ती जिलों में बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ के कारण स्थानीय आबादी का संतुलन बिगड़ने की सबसे अधिक शिकायतें रही हैं।
* [मणिपुर] और [मिजोरम] : म्यांमार में जारी संकट के बाद इन राज्यों में हुए अवैध प्रवासन और जनजातीय व सामाजिक संतुलन (Tribal & Social Balance) पर इसके प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है।
* [मेघालय] और [त्रिपुरा]: यहाँ भी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में आबादी के बदलते पैटर्न की बारीकी से जांच हो रही है।
## 2. उत्तरी सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र (Northern Border & Strategic Areas)
[[कश्मीर] : अगस्त 2026 में कमेटी ने अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान जम्मू संभाग और सीमावर्ती जिलों का व्यापक दौरा किया। यहाँ पाकिस्तान की ओर से होने वाली घुसपैठ, अवैध बसावट और विस्थापित समुदायों (जैसे जगती माइग्रेंट टाउनशिप में रह रहे कश्मीरी पंडितों) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया।
[ बिहार]: नेपाल सीमा से सटे इन दोनों राज्यों के जिलों में अचानक बढ़ी कुछ विशेष बस्तियों और जनसांख्यिकीय बदलाव के इनपुट के आधार पर यहाँ डेटा जुटाया जा रहा है।
[बाड़मेर] जैसे सीमावर्ती जिलों में आबादी के बदलते रुझानों का अध्ययन करने के लिए कमेटी यहाँ भी दौरा करेगी।
## 3. बड़े महानगरीय और औद्योगिक शहर (Metropolitan & Industrial Hubs)
केवल सीमावर्ती क्षेत्र ही नहीं, बल्कि देश के भीतर भी जहाँ घुसपैठिए अवैध रूप से आकर बस गए हैं, उन पर भी कमेटी का फोकस है:
* [दिल्ली-एनसीआर], [मुंबई], [बेंगलुरु]और [कोलकाता] जैसे बड़े मेट्रो शहरों के कुछ पॉकेट्स और झुग्गी बस्तियों में पहचान छुपाकर रह रहे अवैध प्रवासियों (जैसे रोहिंग्या और अन्य) के प्रभाव और उनके स्थानीय वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने के पैटर्न की जांच की जा रही है।
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कमेटी की रणनीति:
इन सभी राज्यों से विस्तृत प्रश्नावली का जवाब मिलने के बाद, कमेटी के सदस्य प्रशासनिक अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों (जैसे BSF, राज्य पुलिस) और स्थानीय नागरिक समूहों के साथ बैठकें कर जमीनी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
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स्थानीय जनजातियों (Tribes) की सुरक्षा और फर्जी वोटर आईडी कार्ड्स (Identity Cards) का मुद्दा इस हाई-लेवल कमेटी के अध्ययन का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा है। गृह मंत्रालय (MHA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अवैध घुसपैठ का सबसे सीधा असर स्थानीय मूल निवासियों के अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रणाली की निष्पक्षता पर पड़ रहा है।
इस संबंध में कमेटी की कार्ययोजना और विशेष प्रावधान निम्नलिखित हैं:
## 1. स्थानीय जनजातियों (Tribes) की सुरक्षा के प्रावधान
अवैध घुसपैठ के कारण झारखंड (संथाल परगना क्षेत्र) और पूर्वोत्तर (नार्थ-ईस्ट) के राज्यों में मूल जनजातियों की आबादी का प्रतिशत लगातार कम हो रहा है। इसके समाधान के लिए कमेटी इन पहलुओं पर काम कर रही है:
* अधिकारों और संस्कृति का संरक्षण: कमेटी इस बात का आकलन कर रही है कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची (Fifth & Sixth Schedules) के तहत प्राप्त विशेष अधिकारों के बावजूद जनजातीय क्षेत्रों में अवैध बसावट कैसे हो रही है।
* भूमि अधिकारों (Land Rights) की रक्षा: कई क्षेत्रों में स्थानीय जनजातियों की जमीनों पर अवैध कब्जों (Land Alienation) की शिकायतें मिली हैं। कमेटी इसके लिए कड़े कानूनी (Legislative) उपायों की सिफारिश करेगी ताकि बाहरी या अवैध प्रवासी जनजातीय भूमि न खरीद सकें।
* रोजगार और संसाधनों का आरक्षण: अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय बदलावों से स्थानीय युवाओं के रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) पर पड़ रहे दबाव को रोकने के लिए नीतिगत सुरक्षा चक्र तैयार किया जा रहा है।
## 2. फर्जी वोटर आईडी और पहचान दस्तावेजों पर नकेल
अवैध प्रवासियों द्वारा भारतीय पहचान पत्र (जैसे वोटर आईडी और आधार कार्ड) बनवाकर खुद को वैध नागरिक साबित करने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने (Electoral Manipulation) की कोशिशों को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं:
* स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) डेटा की स्क्रूटनी: कमेटी चुनाव आयोग की मदद से वोटर लिस्ट में अचानक आई उछाल का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रही है। विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में घर-घर जाकर किए गए सत्यापन (Door-to-door verification) के डेटा को खंगाला जा रहा है ताकि फर्जी मतदाताओं को बाहर निकाला जा सके।
* NIC और तकनीकी नेटवर्क का उपयोग: गृह मंत्रालय के सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से आधार (UIDAI) और राज्य के नागरिक डेटाबेस का मिलान किया जा रहा है।
* सिस्टम की कमियों को दूर करना: कमेटी प्रशासनिक स्तर पर उन खामियों (Loopholes) की पहचान कर रही है जिनका फायदा उठाकर घुसपैठिए फर्जी दस्तावेज बनवा लेते हैं। इसके लिए पहचान प्रणालियों (Identification Systems) को मजबूत करने के लिए नए तकनीकी और कानूनी नियम सुझाए जाएंगे।
निष्कर्ष:
कमेटी का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्थाई और समयबद्ध तंत्र (Permanent Operational Mechanism) बनाना है, जिससे न केवल अवैध प्रवासियों की पहचान हो सके, बल्कि भविष्य में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनजातीय पहचान के साथ कोई खिलवाड़ न किया जा सके।
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हाई-लेवल कमेटी (High-Level Committee on Demographic Changes) का गठन केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाल किले से की गई घोषणा और केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद किया गया है। यह समिति देश में अवैध घुसपैठ और अन्य अप्राकृतिक कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का गहराई से अध्ययन करने के लिए बनाई गई है।
इस हाई-पावर कमेटी का पूरा ब्यौरा निम्नलिखित है:
## 1. समिति की संरचना (Key Members)
इस उच्च स्तरीय समिति में न्यायपालिका, सिविल सेवा, सुरक्षा और अर्थशास्त्र जगत के शीर्ष विशेषज्ञों को शामिल किया गया है:
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* अध्यक्ष: जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज) इस पूरी समिति का नेतृत्व कर रहे हैं।
* सदस्य:
* श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त IAS अधिकारी)
* श्री बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त IPS अधिकारी और पूर्व दिल्ली पुलिस कमिश्नर)
* डॉ. शमिका रवि (प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद - PMEAC की सदस्य)
* सदस्य सचिव: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के विदेशी मामलों को संभालने वाले संयुक्त सचिव (Joint Secretary)।
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## 2. समिति का मुख्य उद्देश्य और कार्यक्षेत्र (Mandate & Terms of Reference)
गृह मंत्रालय के समन्वय के साथ काम कर रही इस समिति को निम्नलिखित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:
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* वैज्ञानिक डेटाबेस अध्ययन: यह समिति देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर सीमावर्ती राज्यों और संवेदनशील जिलों में अवैध प्रवासन (Illegal Immigration) के कारण हुए बदलावों का वैज्ञानिक और डेटा-आधारित अध्ययन करेगी।
* असामान्य आबादी पैटर्न की जांच: धार्मिक और सामाजिक समुदायों के बीच आबादी के ऐसे ढांचागत बदलावों की पड़ताल करना जो सामान्य जनसांख्यिकीय रुझानों से मेल नहीं खाते।
* घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन: देश में पहले से मौजूद अवैध प्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और डिपोर्ट (निर्वासन) करने के लिए एक मजबूत तंत्र की सिफारिश करना।
* सीमा सुरक्षा और नीतिगत सुझाव: सीमा प्रबंधन को और सख्त करने, नागरिक पहचान प्रणालियों को मजबूत करने और जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए कड़े प्रशासनिक व विधायी (Legislative) उपायों का सुझाव देना।
* केंद्र-राज्य समन्वय: अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकी असंतुलन से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक नीतिगत ढांचा (Policy Framework) तैयार करना。
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## 3. समय सीमा (Timeline)
समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए एक वर्ष का समय दिया गया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर गृह मंत्रालय द्वारा छह महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस समिति के सुझावों के आधार पर देश को घुसपैठ मुक्त बनाने और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाएगी।
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