btsm भारत-तिब्बत सहयोग मंच,चित्तौड़ प्रांत सेतवांग यात्रा पर 120 से अधिक यात्री जायेंगे, कोटा नगर से पहली बार 70 से अधिक यात्री भाग लेंगे


भारत-तिब्बत सहयोग मंच,चित्तौड़ प्रांत से
तवांग यात्रा पर 120 से अधिक यात्री जायेंगे, कोटा नगर से पहली बार 70 से अधिक यात्री भाग लेंगे 

कोटा 26 अक्टूबर । भारत-तिब्बत सहयोग मंच  के तत्वावधान में 19 से 25 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाली तवांग यात्रा को लेकर यात्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार रात्री में आई एल मन्दिर कोटा पर आयोजित की गई। बैठक के मुख्यअतिथि उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय संयोजक शशि प्रकाश शर्मा एवं प्रांतीय अध्यक्ष अरविन्द कौशल रहे अध्यक्षता जिला अध्यक्ष कुंजबिहारी गौतम नें की। बैठक में यात्रा में शामिल होने वाले यात्रियों को यात्रा के उद्देश्य, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व, आवश्यक तैयारियों और यात्रा संबंधी दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस वर्ष चित्तौड़ प्रांत से 120 से अधिक यात्रियों के शामिल होने की संभावना है, जबकि कोटा नगर से पहली बार 70 से अधिक यात्री इस यात्रा में सहभागिता करेंगे।

बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भारत-तिब्बत सहयोग मंच के उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय संयोजक शशि प्रकाश शर्मा ने कहा कि तवांग यात्रा केवल एक धार्मिक अथवा पर्यटन यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकात्मता, सांस्कृतिक चेतना और सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अभियान है। इस यात्रा के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों को अरुणाचल प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामरिक महत्ता से परिचित कराने के साथ राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत किया जाता है।

उन्होंने बताया कि भारत-तिब्बत सहयोग मंच की तवांग यात्रा का प्रारंभ वर्ष 2012 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के मार्गदर्शन में हुआ था। यह यात्रा प्रतिवर्ष नवंबर-दिसंबर के दौरान आयोजित की जाती है। यात्रा की परंपरागत रूपरेखा में असम के गुवाहाटी स्थित " मां कामाख्या मंदिर से अरुणाचल प्रदेश के तवांग और भारत-तिब्बत सीमा के निकट बुमला पास तक" पहुंचने का कार्यक्रम शामिल रहा है। इसके माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोग सीमावर्ती क्षेत्रों की परिस्थितियों, स्थानीय संस्कृति और वहां के नागरिकों के जीवन से परिचित होते हैं।

चीन की विस्तारवादी नीति के विरोध और राष्ट्रीय संप्रभुता का संदेश

शशि प्रकाश शर्मा ने कहा कि तवांग और अरुणाचल प्रदेश भारत की राष्ट्रीय अस्मिता एवं संप्रभुता से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर किए जाने वाले दावों के संदर्भ में यह यात्रा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति वास्तविक कब्जे का सबूत व जनजागरण का माध्यम बनती है। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और उसकी पहचान, संस्कृति एवं राष्ट्रीय विरासत देश की एकता से गहराई से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि भारत-तिब्बत सहयोग मंच तिब्बत से जुड़े विषयों, वहां की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत तथा तिब्बती समाज के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कार्य करता है। मंच कैलाश मानसरोवर की चीन से मुक्ति  और तिब्बती की आजादी जैसे विषयों को भी प्रमुखता देता है। तवांग यात्रा इन मुद्दों के प्रति जनचेतना विकसित करने और चीन की विस्तारवादी नीतियों के विरोध में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करती है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रयास

तवांग यात्रा का महत्व केवल सामरिक एवं राजनीतिक दृष्टि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और तिब्बत के बीच सदियों पुराने धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की याद भी दिलाती है। तवांग स्थित प्रसिद्ध बौद्ध मठ भारत के प्रमुख बौद्ध धार्मिक केंद्रों में से एक है और एशिया की बौद्ध परंपरा में इसका विशेष स्थान है। मंच 1959 में तिब्बत से भारत आए बौद्धधर्म गुरु दलाई लामा के ऐतिहासिक घटना का विशेष महत्व प्रदान करता है।

यात्रा के दौरान बोमडिला, दिरांग और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों से गुजरते हुए यात्रियों को पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के ऐतिहासिक महत्व को करीब से जानने का अवसर मिलता है। इससे देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के बीच आपसी संवाद, सांस्कृतिक जुड़ाव और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को प्रोत्साहन मिलता है।

वीर सैनिकों के बलिदान को नमन करने का अवसर

तवांग यात्रा के दौरान 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों और वीर सैनिकों की स्मृतियों को भी विशेष रूप से याद किया जाता है। जसवंतगढ़ स्थित महावीर चक्र से सम्मानित राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के स्मारक का विशेष महत्व है। उनकी वीरता और कर्तव्यनिष्ठा भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस एवं देश के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।

ऐसे स्थलों पर पहुंचकर यात्री देश की सीमाओं की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। साथ ही, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में देश की सुरक्षा में जुटे भारतीय सेना के जवानों और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह यात्रा देशवासियों को सीमा सुरक्षा के महत्व और सैनिकों के त्याग के प्रति संवेदनशील बनाने का भी कार्य करती है।

चित्तौड़ प्रांत से 120 से अधिक यात्री होंगे शामिल

बैठक में भारत-तिब्बत सहयोग मंच के चित्तौड़ प्रांत अध्यक्ष अरविंद कौशल ने बताया कि इस वर्ष चित्तौड़ प्रांत से 120 से अधिक यात्री तवांग यात्रा में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि यात्रा के प्रति लोगों का उत्साह संगठन के उद्देश्यों, राष्ट्रीय विषयों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है। उन्होंने यात्रियों से आह्वान किया कि वे यात्रा के दौरान अनुशासन, आपसी सहयोग और संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन करते हुए इसके उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाएं।

वहीं, जिला अध्यक्ष कुंज बिहारी गौतम ने बताया कि कोटा नगर से पहली बार 70 से अधिक यात्री तवांग यात्रा में सहभागिता कर रहे हैं। यह नगर के लिए उत्साहजनक अवसर है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में यात्रियों का आगे आना राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक जुड़ाव और देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रति लोगों की रुचि को प्रदर्शित करता है। उन्होंने सभी यात्रियों से यात्रा की तैयारियों को गंभीरता से लेने तथा सामूहिक जिम्मेदारी के साथ इसमें भाग लेने का आग्रह किया।

यात्रा को सफल बनाने पर दिया जोर

बैठक के दौरान सभी यात्रियों को यात्रा की रूपरेखा, आवश्यक तैयारियों, व्यवस्थाओं और पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देशों की जानकारी प्रदान की गई। यात्रियों को आपसी समन्वय बनाए रखने, निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलने तथा यात्रा के दौरान अनुशासन और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया।

भवदीय 
अरविन्द सिसोदिया 
प्रांतीय महामंत्री 
9414180151

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