कांग्रेस सहित विपक्षी दल जमीनीस्तर पर नाकाम हैँ और अपनी नाकामी का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ते हैँ - सिसोदिया
राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन न्यासी और टिप्पणीकार अरविन्द सिसोदिया ने विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि राजनीतिक दल अपनी बूथ स्तर की निष्क्रियता और संगठनात्मक कमजोरियों का ठीकरा चुनाव आयोग के माथे नहीं मढ़ सकते।
सिसोदिया का यह बयान हाल ही में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) और चुनाव प्रक्रियाओं को लेकर विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए 'वोट चोरी' के आरोपों के जवाब में आया है।
अरविन्द सिसोदिया के बयान के मुख्य बिंदु
• प्रशासनिक तंत्र और जनादेश का अपमान: सिसोदिया ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाना वास्तव में देश के जनमत, संविधान और चुनावी प्रक्रिया में दिन-रात लगे लाखों सरकारी कर्मचारियों की निष्ठा का सीधा अपमान है।
• जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत: उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव केवल दिल्ली में बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त या आयोग नहीं कराता। इसमें जमीनी स्तर पर बीएलओ (Booth Level Officers), पीठासीन अधिकारी और स्थानीय प्रशासनिक अमला शामिल होता है।
• दलों की अपनी जिम्मेदारी: राजनीतिक दलों का यह कर्तव्य है कि वे अपने बूथ स्तर के एजेंटों (BLAs) को सक्रिय रखें। यदि राजनीतिक दल खुद बूथ स्तर पर निष्क्रिय रहते हैं और मतदाता सूची के सत्यापन या मतदान के दौरान उनके कार्यकर्ता मुस्तैद नहीं होते, तो वे अपनी इस संगठनात्मक विफलता के लिए चुनाव आयोग को दोषी नहीं ठहरा सकते।
• तथ्यों से परे राजनीति: उनका मानना है कि जब दल ज़मीनी स्तर पर मतदाताओं को जागरूक करने या बूथ प्रबंधन में पीछे रह जाते हैं, तो अपनी हार या कमियों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना एक आसान रास्ता बन जाता है, जो कि लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है।
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