त्रुटियों को दुरुस्त करने हेतु
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दिनांक -
प्रति,
श्रीमान प्रमुख सचिव महोदय
राजस्व विभाग, मध्य प्रदेश शासन,
भूतल, वल्लभ भवन-2, मंत्रालय, अरेरा हिल्स, भोपाल, मध्य प्रदेश - 462011
ईमेल आईडी: psrevenue@mp.gov.in
ईमेल आईडी: prirevcom@mp.gov.in
विषय:- निम्नानुसार
1. स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार किए जा चुके अधिकार अभिलेख/प्रॉपर्टी कार्ड में त्रुटिपूर्ण, अपूर्ण एवं विधि-विरुद्ध प्रविष्टियों के सुधार, वास्तविक उत्तराधिकारियों, संयुक्त सहस्वामियों के नाम सम्मिलित करने, पूर्व एवं वर्तमान धारकों के अधिकार की कड़ी स्पष्ट करने तथा आपत्तियों के समयबद्ध निराकरण हेतु प्रदेश-स्तरीय विशेष मार्गदर्शी परिपत्र जारी किए जाने बाबत।
2- विशेषकर ग्रामीण आबादी भू-अभिलेखों में संयुक्त परिवारों की पैतृक भूमि / कब्जा तथा उत्तराधिकारियों/संयुक्त स्वामित्व के नामों में हुई गंभीर त्रुटियों / विलोपन को दुरुस्त करने हेतु प्रदेश स्तर पर विशेष मार्गदर्शी दिशा-निर्देश (सर्कुलर) जारी करने बाबत।
3- गावों में आबादी भूमि पर बसावट सेंकड़ों वर्षों है, कई कई पीढ़ियों के निर्मित आवास हैँ, इसलिए इन्हें सिर्फ सरकारी भूमि नहीं माना जा सकता, बल्कि इन भूमियों के निवासी गण ही कानूनी व्यवस्था से मालिक ही हैँ। और इन में सभी निवासों में संयुक्त सहस्वामित्व का प्रश्न है / उत्तराधिकार के प्रश्न हैँ। इसलिए कल्याणकारी सरकार का दायित्व है कि वह मानवीय दृष्टिकोण से इन्हें सुलझानें की उचित व्यवस्थायें करे और विवादों को न्यूनतम स्तर पर लाने के सभी उपाय करे, जिनका वर्तमान में व्यापक अभाव है। इस हेतु पूरे प्रदेश में एक जैसी समस्या समाधान व्यवस्था लागू की जानें बाबत।
4- स्वामित्व योजना पूरी तरह से नई है , कागजोँ पर प्रचार प्रसार के व्यापक निर्देश थे पर जमीनी हकीकत उलट थी, इसीलिए विवाद हैँ। काफ़ी काम कोरोना विभीषिका में हुआ जिससे भी व्यवहारिक सूचना तंत्र का अभाव था। और सबसे बड़ी बात यह कि संयुक्त परिवारों के मामले में विषय सबकी जानकारी में आये ही नहीं। इसलिए यह कहने से काम नहीं चलेगा कि प्रथम प्रकाशन अथवा द्वितीय प्रकाशन पर आपत्ति नहीं की। इस सर्वेक्षण में वोट लेनें वाली संस्था या नागरिक लोग भी थे, इस कारण भी व्यापक मनमानी व अनियमिततायें हुई और मानवीय आधार पर उन्हे ठीक किया जाना न्याय के हित में और विशिष्ट अन्यायों के समापन के पक्ष में है। इसलिए संवेदनशील समस्या निवारण उपाय बाबत।
5. 'स्वामित्व योजना' के तहत ग्रामीण आबादी के तैयार किए गए भू-अभिलेखों में जहां आपत्ति/विवाद है अथवा सुधार हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है, ऐसे प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए तथा जब तक त्रुटि-दुरुस्ती / निराकरण नहीं हो जाती, तब तक ऐसे प्लॉटों की रजिस्ट्री पर रोक लगाई जानें बाबत।
6. 'स्वामित्व योजना आपत्ति एवं त्रुटि सुधार अधिकारी' के रूप में प्रत्येक जिले में एसडीओ/अनुविभागीय अधिकारी को नियुक्त कर, उन्हें इस प्रकार के समस्त विवादों एवं त्रुटि-सुधार प्रकरणों के निराकरण हेतु राज्य सरकार की ओर से अंतर्गत तहसीलों के लिए अधिकृत किए जाने बाबत।
उदाहरण हेतु संदर्भ प्रकरण:-
मध्य प्रदेश, जिला गुना, उपखण्ड गुना, तहसील बमोरी में स्वामित्व योजना अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ-3/2020-21, प्लॉट क्रमांक 32, जिसका 2175 वर्गमीटर क्षेत्रफल है , आवासीय भूमि खसरा क्रमांक 273, ग्राम मोड़का, पटवारी हल्का क्रमांक 64, सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना स्थित प्लाट के मूल धारक स्व भूपेंद्र सिंह जी पुत्र समंदर सिंह जी थे, इससे पूर्व उनकी माताजी इस आवासीय भूखंड की धारक रहीं हैँ। उनकी इस आवासीय संपत्ति, जिसमें किलेनुमा दो मंजिला पक्के मकानों सहित पक्की चारदिवारी, स्टोरेज हाउसेज, कुआँ सहित बहुमूल्य संपत्ति है।
भूपेंद्र सिंह जी की मृत्यु 20 जनवरी 2016 को निर्वसियत हो गई। स्व भूपेंद्र सिंह जी के पत्नी, पुत्र और पुत्री सहित कुल आठ प्रथम श्रेणी उत्तराधिकारी उनकी समस्त चल अचल संपती के संयुक्त सहस्वामी हैँ। चार अलग अलग ग्रामों के फ़ौती नामांतरण में सभी आठ उत्तराधिकारीयों के संयुक्त नाम खसरा खतौनी पर दर्ज हुये हैँ। बंटवारा ग्राम मोड़का में भी सभी आठ उत्तराधिकारियो के मध्य कृषि भूमि का समभाग विभाजन हुआ है।
किन्तु ग्राम मोड़का के उपरोक्त आवासीय प्लाट के स्वामित्व अभिलेख एवं प्रॉपर्टी कार्ड में मात्र तीन उत्तराधिकारीयों के नाम भूस्वामी के रूप में दर्ज कर गंभीर विधिक भूल की गई है। इसमें हिस्सा भी विधि विरुद्ध 1/2,1/4,1/4 तय कर दिया गया। इन तथ्यात्मक त्रुटियों / विधि विरुद्ध इंद्राजियों का सुधार कर स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया के सभी प्रथम श्रेणी के वैध आठ उत्तराधिकारियों के नाम सम भाग, संयुक्त सहस्वामी के रूप में दर्ज किए जाने के अनेकों आग्रह किये जा चुके हैँ, किन्तु अभिलेख में सुधार नहीं हुआ।
इसलिए माननीय जिला कलेक्टर महोदय गुना के कार्यालय में उपरोक्त विवाद के हल किये जाने के अंतिम निर्णय तक उक्त संपत्ति के संबंध में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री, नामांतरण, हस्तांतरण, बंधक, ऋण अथवा अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही पर रोक लगाए जाने हेतु आग्रह दिनांक 17-09-2026 से किया हुआ है।
ज्ञातव्य रहे कि - उपरोक्त प्लाट के अभिलेख में स्व भूपेंद्र सिंह जी के आठ प्रथम श्रेणी उत्तराधिकारीयों की जगह मात्र तीन उतराधिकारी दर्ज कर गंभीरतम आपराधिक मनमानी की गई है जो विधि विरुद्ध है।
इस हेतु आपत्ति आवेदन जिला कलेक्टर, गुना के कार्यालय में आवेदक श्री अरविन्द सिंह सिसोदिया द्वारा दिनांक 17-09-2026 को प्रस्तुत किया जा चुका है। इससे पूर्व भी जिला कलेक्टर महोदय, तहसीलदार बमोरी, जिला गुना तथा ग्राम पटवारी, मोड़का को लगातार अवगत कराया जाता रहा है, किंतु अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इस तरह के अनेकों प्रकरण हैँ, जो न्याय की प्रतीक्षा में हैँ।
महोदय,
सादर निवेदन है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को उनकी पुश्तैनी संपत्तियों के मालिकाना हक को अभिलेखबद्ध करने के उद्देश्य से 'स्वामित्व योजना' (SVAMITVA Scheme) संचालित की गई है। यह प्रदेश के करोड़ों ग्रामीणों एवं कृषकों के आवासीय रिकार्ड के सशक्तिकरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण, दूरगामी एवं जनकल्याणकारी योजना है।
परंतु वर्तमान में संपूर्ण प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार किए जा चुके अधिकार अभिलेख/प्रॉपर्टी कार्ड में अनेक गंभीर तथ्यात्मक एवं विधिक विसंगतियां सामने आ रही हैं। अब जबकि शासन द्वारा इन संपत्तियों के संबंध में अंतिम वैधानिक कार्यवाही एवं रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, ऐसे समय में पहले से तैयार अभिलेखों में विद्यमान त्रुटियों, अपूर्ण प्रविष्टियों एवं विवादित/विधि-विरुद्ध प्रविष्टियों का समय रहते निराकरण किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
जिला स्तर पर इन त्रुटियों के सुधार एवं आपत्तियों के निराकरण की एक समान, सरल, समयबद्ध एवं प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के कारण, विधि विरुद्ध अन्यायपूर्ण निर्णय / अभिलेख प्रभाव में होनें से ग्रामीण नागरिकों में असंतोष उत्पन्न हो रहा है। तथा भविष्य को लेकर व्यापक अनिश्चितता उत्पन्न हुई है। जमीनीस्तर के इस सत्य को राजस्व विभाग के अधिकारीगण व कर्मचारी गण भी जानते हैँ।
प्रदेश स्तर पर मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यावहारिक समस्याएं एवं विसंगतियां सामने आ रही हैं—
1. संयुक्त परिवारों के सह-स्वामियों/उत्तराधिकारियों के नामों का विलोपन
ग्रामीण मध्य प्रदेश में सदियों से संयुक्त परिवार की परंपरा रही है, जहां एक ही बड़े पुश्तैनी भूखंड, मकान या बाड़े पर मूल भूस्वामी के कई पुत्रों, पुत्रियों, बहुओं एवं अन्य वैध उत्तराधिकारियों का संयुक्त अथवा पारिवारिक स्वामित्व / कब्जा एवं उपयोग रहा है।
परंतु तैयार किए गए स्वामित्व अभिलेखों में कई स्थानों पर केवल मौके पर उपस्थित किसी एक सदस्य अथवा परिवार के किसी एक व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया है तथा अन्य वैध सह-स्वामियों/उत्तराधिकारियों के नाम छोड़ दिए गए हैं।
ऐसी प्रविष्टियों की पुनः जांच कर वास्तविक एवं वैध उत्तराधिकारियों के नामों को लागू उत्तराधिकार कानूनों के अनुरूप अभिलेख में सम्मिलित किया जाना आवश्यक है। इस हेतु sir 2003 की मतदाता सूची काफ़ी सहायक हो सकती है।
2. कृषकों के पारंपरिक कब्जों (बाड़े/घेर) की अनदेखी
ग्रामीण अंचलों में कृषकों एवं ग्रामीण परिवारों के सदियों पुराने पैतृक बाड़े, घेर, मवेशी बांधने के स्थान, खलिहान एवं रिहायशी भूखंड पीढ़ियों से उनके कब्जे एवं उपयोग में रहे हैं।
परंतु ड्रोन सर्वेक्षण अथवा अन्य तकनीकी सर्वेक्षण के दौरान त्रुटि अथवा अन्य कारणों से ऐसे अनेक पारंपरिक कब्जे मुख्य आबादी नक्शे एवं अभिलेख से गायब अथवा अपवर्जित हो गए हैं।
अतः ऐसे मामलों में वर्तमान तैयार अभिलेखों का पुनः स्थलीय सत्यापन कर वास्तविक स्थिति के अनुरूप आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।
3. उत्तराधिकारियों के नामों में लिपिकीय एवं वर्तनी संबंधी त्रुटियां
मूल भूस्वामी के वैध उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करते समय अनेक स्थानों पर नाम अधूरे दर्ज किए गए हैं, उपनाम/सरनेम छूट गए हैं, नामों की वर्तनी गलत है अथवा अन्य प्रकार की लिपिकीय त्रुटियां हुई हैं।
कई मामलों में वैध उत्तराधिकारियों, विशेषकर विवाहित पुत्रियों के नाम तक अभिलेख से बाहर हो गए हैं। यह विधि विरुद्ध है।
अतः ऐसी सभी प्रविष्टियों की जांच कर सही नाम, पूरा नाम एवं वैधानिक उत्तराधिकारियों के नामों का आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।
4. भविष्य में दीवानी मुकदमेबाजी की गंभीर आशंका
संयुक्त परिवार की संपत्तियों में सभी वैध वारिसों के सही एवं पूरे नाम दर्ज नहीं होने से परिवारों में आपसी विवाद एवं वैमनस्य उत्पन्न होने की गंभीर संभावना है।
यदि वर्तमान त्रुटिपूर्ण अभिलेखों के आधार पर किसी एक व्यक्ति के नाम पर वैधानिक रजिस्ट्री निष्पादित कर दी गई, तो अन्य वैध उत्तराधिकारियों के अधिकार गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें अपनी पैतृक संपत्ति के अधिकार की रक्षा के लिए न्यायालयों की शरण लेनी पड़ सकती है।
यदि वर्तमान स्तर पर इन त्रुटियों का निराकरण नहीं किया गया तो भविष्य में मुकदमेबाजी की बाढ़ आने तथा संपत्ति संबंधी विवाद घर-घर पहुंचने की गंभीर आशंका है।
आज जिस त्रुटि का समाधान राजस्व प्रशासन द्वारा सरल एवं सीमित प्रक्रिया में किया जा सकता है, वही त्रुटि कल परिवार के सदस्यों के बीच दीर्घकालीन विवाद, राजस्व प्रकरण एवं दीवानी मुकदमे का कारण बन सकती है।
इससे न केवल ग्रामीण परिवारों को मानसिक एवं आर्थिक क्षति होगी, बल्कि आने वाले समय में प्रदेश की राजस्व न्यायिक व्यवस्था एवं दीवानी न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का भारी बोझ भी बढ़ सकता है।
अतः भविष्य की मुकदमेबाजी को रोकने के लिए वर्तमान में ही तैयार अभिलेखों की त्रुटियों का निष्पक्ष एवं समयबद्ध सुधार किया जाना जनहित में अत्यंत आवश्यक है।
5. विकासात्मक एवं कृषि ऋण में बाधा
नाम अपूर्ण होने, उपनाम छूटने अथवा पहचान संबंधी विवरण में वर्तनी का अंतर होने के कारण ग्रामीण नागरिकों एवं कृषकों को बैंक ऋण, कृषि, व्यवसाय, पशुपालन, आवास निर्माण एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
अतः ऐसी लिपिकीय एवं पहचान संबंधी त्रुटियों का सरल एवं शीघ्र निराकरण किया जाना आवश्यक है।
6. मैदानी स्तर पर त्वरित जनसुनवाई एवं त्रुटि-सुधार का अभाव
वर्तमान में इस योजना के अभिलेखों को ठीक करने का कोई कार्य नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में नागरिकों को बार-बार विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं तथा समय एवं धन दोनों की हानि होती है।
अतः इन प्रकरणों के लिए विशेष एवं समयबद्ध जनसुनवाई व्यवस्था आवश्यक है।
7. वर्तमान भू-धारक के पास संपत्ति किस आधार पर आई, यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है
तैयार स्वामित्व अभिलेखों में केवल वर्तमान भू-धारक/कब्जाधारी का नाम दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए, विशेषकर उन मामलों में जहां संपत्ति पैतृक एवं संयुक्त पारिवारिक संपत्ति रही हो।
त्रुटि-सुधार के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि—
- वर्तमान भू-धारक के पास उक्त भूमि/संपत्ति किस आधार पर आई;
- पूर्व में उक्त संपत्ति किसके नाम अथवा अधिकार में थी;
- मूल धारक कौन था;
- वर्तमान धारक एवं पूर्व धारक के बीच अधिकार का संबंध क्या है;
- संपत्ति उत्तराधिकार, फौती नामांतरण, पारिवारिक बंटवारे अथवा किसी अन्य विधिसम्मत आधार से वर्तमान धारक तक कैसे पहुंची।
अतः पूर्व धारक से वर्तमान धारक तक अधिकार की कड़ी की जांच एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर उसका परीक्षण किया जाना आवश्यक है।
8. फौती नामांतरण एवं पूर्व के वैध दस्तावेजों को अभिलेख पर लिया जाए / चाहे वे कृषि भूमि के ही क्यों न हों
मूल धारक के पूर्व में किए गए फौती नामांतरण (Mutation), नामांतरण आदेश, पंजीकृत दस्तावेज, विधिसम्मत बंटवारा अथवा अन्य उपलब्ध वैधानिक दस्तावेजों को आवासीय भूखंडों के संबंध में भी उचित महत्व देते हुए अभिलेख पर लिया जाना चाहिए।
यदि संबंधित परिवार के पूर्व के राजस्व अभिलेखों में फौती नामांतरण के माध्यम से मूल धारक के वैध उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज हो चुके हैं, तो ऐसे पूर्व अभिलेखों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
इसी प्रकार पूर्व में विधिसम्मत रूप से निष्पादित एवं उपलब्ध बंटवारा दस्तावेजों/अन्य अभिलेखों का भी परीक्षण किया जाना चाहिए।
इन पूर्व अभिलेखों के परीक्षण से वास्तविक पारिवारिक उत्तराधिकार एवं संपत्ति के इतिहास की पुष्टि करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है तथा मैदानी स्तर पर मनमाने ढंग से किसी एक व्यक्ति को अधिकारधारी दर्ज करने की संभावना कम होती है।
अतः ऐसे पूर्व अभिलेखों एवं दस्तावेजों को सर्वोच्च प्राथमिकता से परीक्षण एवं विचारण में लिया जाए।
9. उत्तराधिकार कानूनों का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए
स्वामित्व योजना का उद्देश्य संपत्तियों को अभिलेखबद्ध करना एवं नागरिकों के संपत्ति संबंधी अधिकारों को स्पष्ट करना है, न कि किसी वैध उत्तराधिकारी के अधिकार को समाप्त करना।
अतः तैयार अभिलेखों में सुधार करते समय लागू उत्तराधिकार कानूनों का पूर्ण पालन किया जाना चाहिए।
विशेष रूप से वैध पुत्रों, पुत्रियों, विवाहित पुत्रियों, विधवाओं, माताओं तथा अन्य लागू कानून के अनुसार उत्तराधिकारियों के अधिकारों की जांच की जानी चाहिए।
किसी वैध उत्तराधिकारी का नाम केवल उसके वर्तमान निवास, वैवाहिक स्थिति अथवा मौके पर उपस्थित न होने के आधार पर अभिलेख से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। इस स्थिति के विपरीत कोई भी निर्देश / निर्णय कानूनी रूप से विधि विरुद्ध है।
10. आपत्ति एवं विवाद वाले मामलों का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए
जिन स्वामित्व अभिलेखों के संबंध में आपत्ति प्रस्तुत की गई है, विवाद लंबित है अथवा त्रुटि-सुधार के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया है, उन प्रकरणों को सामान्य प्रशासनिक प्रकरणों की तरह लंबित न रखा जाए।
राज्य सरकार एक जिम्मेदार एवं जवाबदेह संस्था है तथा नागरिकों के वैधानिक अधिकारों एवं न्याय की रक्षा करना शासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अतः ऐसे आपत्ति/विवाद/त्रुटि-सुधार प्रकरणों का सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर, समयबद्ध एवं कारणयुक्त आदेश द्वारा निराकरण किया जाना आवश्यक है।
11. विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री एवं अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही पर रोक
जहां किसी तैयार स्वामित्व अभिलेख/प्रॉपर्टी कार्ड के संबंध में वैध आपत्ति, विवाद अथवा सुधार आवेदन लंबित है और उसमें किसी व्यक्ति के एकल स्वामित्व अथवा उत्तराधिकार को लेकर गंभीर प्रश्न उठाया गया है, वहां आपत्ति/त्रुटि-सुधार का अंतिम निर्णय होने तक लागू विधिक प्रक्रिया के अनुरूप ऐसी संपत्ति की रजिस्ट्री, नामांतरण, हस्तांतरण, बंधक, ऋण अथवा अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही पर रोक लगाने की व्यवस्था की जाए, ताकि लंबित विवाद के दौरान तीसरे पक्ष के अधिकार उत्पन्न न हों और मूल विवाद और अधिक जटिल न हो।
अतः मध्य प्रदेश शासन से निम्नलिखित नीतिगत निर्देश जारी किए जाने की करबद्ध प्रार्थना है—
क. प्रदेश स्तरीय विशेष परिपत्र जारी हो
राजस्व विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा संपूर्ण प्रदेश के समस्त जिला कलेक्टरों एवं जिला भू-अभिलेख अधिकारियों के लिए एक व्यापक, स्पष्ट एवं एकरूप विशेष मार्गदर्शी परिपत्र (Unified State Circular) जारी किया जाए, जिसमें तैयार हो चुके स्वामित्व अभिलेखों में त्रुटि-सुधार एवं विवाद/आपत्ति निराकरण की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित हो।
ख. वंशावली के आधार पर अनिवार्य सुधार
समस्त जिला कलेक्टरों के माध्यम से तहसीलदारों एवं अनुविभागीय अधिकारियों (SDO) को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि संयुक्त परिवार की पैतृक आबादी भूमि के तैयार अभिलेखों में केवल मौके पर काबिज एक व्यक्ति के नाम को अंतिम आधार न माना जाए।
मूल भूस्वामी की पूर्ण एवं प्रामाणिक वंशावली का परीक्षण कर सभी वैध उत्तराधिकारियों के नाम, लागू कानून के अनुसार, संयुक्त स्वामित्व/सह-स्वामित्व के रूप में दर्ज किए जाने की व्यवस्था की जाए।
ग. वर्तमान धारक के अधिकार का स्रोत एवं पूर्व धारक का रिकॉर्ड स्पष्ट किया जाए
प्रत्येक विवादित/आपत्तिपूर्ण प्रकरण में यह जांच की जाए कि वर्तमान धारक के पास संपत्ति किस आधार पर आई तथा पूर्व में भूमि/संपत्ति किसके नाम अथवा अधिकार में थी।
पूर्व के फौती नामांतरण, राजस्व अभिलेख, पंजीकृत दस्तावेज, विधिसम्मत बंटवारा एवं अन्य उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण कर अधिकार की वास्तविक श्रृंखला स्पष्ट की जाए।
घ. पूर्व के दस्तावेजों को अभिलेख पर लेने का स्पष्ट प्रावधान हो
मूल धारक के पूर्व के फौती नामांतरण, नामांतरण आदेश तथा पंजीकृत अथवा विधिसम्मत बंटवारा दस्तावेजों को आवासीय भूखंडों के मामलों में भी अभिलेख पर लेकर उनका परीक्षण किया जाए।
ऐसे दस्तावेजों के परीक्षण से वास्तविक उत्तराधिकारियों एवं संपत्ति के पूर्व अधिकार की स्थिति स्पष्ट करने में सहायता मिलेगी तथा मैदानी स्तर पर मनमानी प्रविष्टियों पर रोक लगेगी।
ङ. विशेष 'स्वामित्व त्रुटि सुधार एवं आपत्ति निराकरण शिविर' आयोजित किए जाएं
प्रत्येक जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष राजस्व शिविर आयोजित किए जाएं, जहां पटवारी, राजस्व निरीक्षक एवं संबंधित तहसीलदार/राजस्व अधिकारी उपस्थित रहकर—
- वंशावली सत्यापन,
- फौती नामांतरण का परीक्षण,
- पूर्व अभिलेखों का परीक्षण,
- उत्तराधिकारियों की पहचान,
- पारंपरिक कब्जों का भौतिक सत्यापन,
- बाड़े/घेर/खलिहान की जांच,
- नाम एवं वर्तनी की त्रुटि सुधार,
- रकबा एवं सीमा संबंधी त्रुटियों का परीक्षण,
- तथा लंबित आपत्तियों की सुनवाई
कर सकें।
च. प्रत्येक जिले में एसडीओ को 'स्वामित्व योजना आपत्ति एवं त्रुटि सुधार अधिकारी' अंतर्गत तहसीलों के लिए नियुक्त किया जाए
प्रत्येक जिले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को 'स्वामित्व योजना आपत्ति एवं त्रुटि सुधार अधिकारी' के रूप में नामित कर, उन्हें इस योजना के अंतर्गत तैयार अभिलेखों में प्राप्त आपत्तियों, त्रुटि-सुधार आवेदनों एवं विवादित प्रविष्टियों की जांच एवं निराकरण हेतु आवश्यक प्रशासनिक अधिकार प्रदान किए जाएं।
उनके अधीन संबंधित तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी आवश्यक अभिलेख एवं स्थलीय जांच उपलब्ध कराएं तथा प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण की जिला स्तर पर समीक्षा की जाए।
छ. लंबित आपत्ति वाले प्लॉटों की रजिस्ट्री पर रोक
जिन प्लॉटों/संपत्तियों के संबंध में स्वामित्व अभिलेख की त्रुटि, उत्तराधिकार, संयुक्त स्वामित्व अथवा अन्य गंभीर विवाद/आपत्ति लंबित है, उनके संबंध में त्रुटि/आपत्ति के अंतिम विधिसम्मत निराकरण तक रजिस्ट्री एवं अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही रोकने हेतु स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था की जाए, ताकि गलत अभिलेख के आधार पर आगे किसी तीसरे पक्ष का अधिकार न बने।
ज. उत्तराधिकार कानून एवं वैधानिक अधिकारों के विपरीत जारी परिपत्र/निर्देश तत्काल निरस्त किए जाएं
मध्य प्रदेश शासन के विभिन्न विभागों/अधिकारियों द्वारा समय-समय पर जारी किए गए ऐसे किसी भी परिपत्र, दिशा-निर्देश, आदेश अथवा प्रशासनिक निर्देश, जिनके कारण नागरिकों के लागू उत्तराधिकार कानूनों, वैधानिक संपत्ति अधिकारों अथवा संयुक्त परिवार के वैध उत्तराधिकारियों के अधिकार प्रभावित होते हों अथवा उनका प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष उल्लंघन होता हो, उनकी तत्काल समीक्षा कराई जाए।
यदि समीक्षा में ऐसा कोई परिपत्र, निर्देश अथवा आदेश प्रचलित कानून एवं वैधानिक उत्तराधिकार अधिकारों के विपरीत पाया जाता है, तो उसे तत्काल निरस्त/वापस लिया जाए तथा उसके आधार पर की गई ऐसी प्रविष्टियों की भी समीक्षा एवं आवश्यकतानुसार विधिसम्मत सुधार की व्यवस्था की जाए।
विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी प्रशासनिक परिपत्र अथवा विभागीय निर्देश विधि द्वारा प्रदत्त उत्तराधिकार के अधिकारों को सीमित, समाप्त अथवा प्रभावित करने का आधार न बने।
साथ ही, भविष्य में जारी किए जाने वाले सभी विभागीय परिपत्रों एवं दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया जाए कि वे लागू अधिनियमों, नियमों एवं नागरिकों के वैधानिक उत्तराधिकार अधिकारों के अधीन होंगे तथा किसी प्रशासनिक निर्देश के आधार पर किसी वैध उत्तराधिकारी को उसके कानूनन प्राप्त अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।
विशेष निवेदन
महोदय, स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों के संबंध में अधिकार की स्पष्टता एवं सुरक्षा प्रदान करना है। यह उद्देश्य तभी पूर्ण हो सकता है जब तैयार किए जा चुके स्वामित्व अभिलेख वास्तविक पारिवारिक उत्तराधिकार, उपलब्ध पूर्व अभिलेखों तथा वैधानिक अधिकारों को सही रूप में प्रतिबिंबित करें।
अभिलेख तैयार हो जाने मात्र से उसमें हुई तथ्यात्मक अथवा विधिक त्रुटि समाप्त नहीं हो जाती। यदि किसी वैध उत्तराधिकारी का नाम छूट गया है, किसी अन्य व्यक्ति का नाम गलत रूप से दर्ज हो गया है, पूर्व धारक से वर्तमान धारक तक अधिकार का आधार स्पष्ट नहीं है अथवा लागू उत्तराधिकार कानूनों के विपरीत प्रविष्टि हुई है, तो उसका समय रहते सुधार किया जाना आवश्यक है।
विशेषकर संयुक्त परिवारों की पीढ़ियों पुरानी पैतृक संपत्तियों के संबंध में यदि वर्तमान चरण में त्रुटियों का निराकरण नहीं किया गया और उन्हीं अभिलेखों के आधार पर अंतिम रजिस्ट्रियां कर दी गईं, तो आज की एक छोटी राजस्व अभिलेखीय त्रुटि भविष्य में परिवारों के बीच गंभीर संपत्ति विवाद का रूप ले सकती है।
इससे मुकदमेबाजी की बाढ़ आने, विवाद घर-घर पहुंचने तथा राजस्व एवं दीवानी न्यायालयों पर अनावश्यक भार बढ़ने की गंभीर संभावना है।
अतः भविष्य की मुकदमेबाजी को रोकने तथा ग्रामीण परिवारों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए वर्तमान में ही तैयार स्वामित्व अभिलेखों की त्रुटियों का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध निराकरण किया जाना शासन एवं जनहित—दोनों में अत्यंत आवश्यक है।
अतः निवेदन है कि उपरोक्त विषय को प्रदेश-व्यापी नीतिगत एवं जनहित का विषय मानते हुए तत्काल विशेष परिपत्र जारी किया जाए तथा तैयार हो चुके स्वामित्व अभिलेखों में त्रुटि एवं विधि-विरुद्ध प्रविष्टियों के सुधार हेतु विशेष राज्यव्यापी अभियान एवं प्रभावी आपत्ति/शिकायत निराकरण व्यवस्था लागू की जाए।
इस अत्यंत न्यायसंगत, जनकल्याणकारी एवं ग्रामीण/कृषक हितैषी निर्णय हेतु संपूर्ण मध्य प्रदेश के ग्रामीण नागरिक आपके सदैव आभारी रहेंगे।
दिनांक : ....................
स्थान : कोटा (म.प्र.)
भवदीय
आवेदक
(अरविन्द सिंह सिसोदिया)
पुत्र स्व. श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया
मूल निवासी – ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना (म.प्र.)
वर्तमान पता – बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन, राजस्थान – 324002
मोबाइल – 9414180151
प्रतिलिपि — आवश्यक कार्यवाही हेतु:
1. संभागीय आयुक्त महोदय, ग्वालियर मप्र
कार्यालय का पता: नवीन राजस्व भवन, चंद्रवदनी नाका, विवेकानंद नीडम रोड, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
पिनकोड - 474009
ईमेल आईडी: commgwa@mp.nic.in
2. जिला कलेक्टर, गुना (म.प्र.)
कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, नवीन कलेक्टर भवन (कलेक्ट्रेट), गुना, मध्य प्रदेश
पिनकोड: 473001
ईमेल आईडी: dmguna@nic.in
3. जिला पंजीयन अधिकारी महोदय, गुना
कार्यालय वरिष्ठ जिला पंजीयक / जिला पंजीयन अधिकारी, कलेक्ट्रेट परिसर, गुना, मध्य प्रदेश
पिनकोड: 473001
ईमेल आईडी: drgun@mp.gov.in
4. तहसीलदार महोदय ,
कार्यालय तहसीलदार, तहसील कार्यालय बमोरी, जिला गुना, मध्य प्रदेश
पिनकोड: 473105
आधिकारिक ईमेल: tehsilbamori@gmail.com
माननीय राजस्व मंत्री महोदय
मध्य प्रदेश राजस्व विभाग
ग्राउंड फ्लोर, वल्लभ भवन-2, मंत्रालय,
अरेरा हिल्स, भोपाल, मध्य प्रदेश 462011
माननीय प्रधानमंत्री महोदय
प्रधानमंत्री कार्यालय
=========
प्रति,
श्रीमान प्रमुख सचिव महोदय / माननीय राजस्व मंत्री जी,
राजस्व विभाग, मध्य प्रदेश शासन,
मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल (म.प्र.)
विषय: 1- 'स्वामित्व योजना' के तहत संपूर्ण मध्य प्रदेश के ग्रामीण आबादी भू-अभिलेखों में संयुक्त परिवारों की पैतृक भूमि व उत्तराधिकारियों / संयुक्त स्वामित्व के नामों में हो रही गंभीर त्रुटियों को दुरुस्त करने हेतु प्रदेश स्तर पर विशेष मार्गदर्शी दिशा-निर्देश (सर्कुलर ) जारी करने बाबत।
2- स्वामित्व योजना' के तहत ग्रामीण आबादी तैयार किये गये भू-अभिलेखों पर जहां आपत्ति है / विवाद है/ आवेदन प्रस्तुत कर सुधार की अपेक्षा है। उन्हे प्राथमिकता से दुरुस्थ किया जावे एवं जब तक दूरस्थी न हो तब तक इस तरह के प्लाटों की रजिस्ट्रीयों पर रोक लगाई जाये।
3- स्वामित्व योजना आपत्ति एवं त्रुटि सुधार अधिकारी के रुपमें प्रत्येक जिले में एसडीओ / अनुविभागीय अधिकारी को नियुक्ति कर, उन्हे इस तरह के समस्त विवाद हल करने के लिए अधिकृत किया जावे।
संदर्भ प्रकरण - जिला गुना मप्र में तहसील बमोरी में स्वामित्व योजना अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ-3/2020-21 में प्लॉट क्रमांक 32, आवासीय भूमि खसरा क्रमांक 273, ग्राम मोड़का, पटवारी हल्का 64 सूजाखेड़ी, तहसील बमोरी, जिला गुना स्थित पैतृक आवासीय संपत्ति जो किलेनुमा दो मंजिला पक्के मकानों सहित बहुमूल्य संपत्ति के, स्वामित्व अभिलेख एवं प्रॉपर्टी कार्ड में हुई गंभीर विधिक एवं तथ्यात्मक त्रुटि का सुधार कर स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया के सभी प्रथम श्रेणी के वैध उत्तराधिकारियों के नाम संयुक्त सह-स्वामी के रूप में दर्ज किए जाने तथा अंतिम निर्णय तक उक्त संपत्ति के संबंध में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री, नामांतरण, हस्तांतरण, बंधक, ऋण अथवा अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही पर रोक लगाए जाने बाबत। (उपरोक्त आवेदन जिला कलेटर गुना मप्र के कार्यालय में आवेदक अरविन्द सिंह सिसोदिया द्वारा दिनांक - 17-09-2026 को जमा करवाया हुआ है।/ इससे पूर्व भी जिला कलेक्टर महोदय / तहसीलदार बमोरी जिला गुना, ग्राम पटवारी - मोड़का को लगातार अवगत करवाया जाता रहा है। किन्तु समाधान नहीं हुआ है।)
महोदय,
सादर निवेदन है कि [मध्य प्रदेश] शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को उनकी पुश्तैनी संपत्तियों का मालिकाना हक देने तथा उन्हें अभिलेखबद्ध करने के उद्देश्य से 'स्वामित्व योजना' (SVAMITVA Scheme) संचालित की गई है। यह प्रदेश के करोड़ों ग्रामीणों और कृषकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शासन की एक अत्यंत दूरगामी, महत्वाकांक्षी और जन-कल्याणकारी योजना है।
परंतु, वर्तमान में संपूर्ण प्रदेश के विभिन्न जिलों से अधिकार अभिलेख (प्रॉपर्टी कार्ड) तैयार करने के दौरान जमीनी स्तर पर कुछ अत्यंत गंभीर और व्यापक विसंगतियां सामने आ रही हैं। चूंकि शासन अब 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के तहत इन संपत्तियों की अंतिम वैधानिक रजिस्ट्रियां करने जा रहा है, अतः जिला स्तर पर इन त्रुटियों के सुधार की कोई केंद्रीकृत व सरल व्यवस्था न होने से ग्रामीणों में भारी असंतोष व्याप्त है।
प्रदेश स्तर पर मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यावहारिक समस्याएं एवं विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं:
1. संयुक्त परिवारों (जॉइंट फॅमिलीज ) के सह-खातेदारों के नामों का विलोपन:
ग्रामीण मध्य प्रदेश में सदियों से संयुक्त परिवार की परंपरा रही है, जहाँ एक ही बड़े पुश्तैनी भूखंड, मकान या बाड़े पर मूल भूस्वामी के कई बेटों, बहुओं और उत्तराधिकारियों का सामूहिक कब्जा होता है। परंतु मैदानी राजस्व अमले (पटवारियों) द्वारा केवल मौके पर उपस्थित किसी एक सदस्य या केवल बड़े भाई का नाम दर्ज कर बाकी सभी वैध सह-खातेदारों (भाइयों/बहनों/माताओं) के नाम छोड़े जा रहे हैं।
2. कृषकों के पारंपरिक कब्जों (बाड़े/घेर) की अनदेखी:
ग्रामीण अंचलों में कृषकों के सदियों पुराने पैतृक बाड़ों, घेर, मवेशी बांधने के स्थान, खलिहान और रिहायशी भूखंडों को ड्रोन सर्वे के दौरान त्रुटिवश अथवा लापरवाही के कारण मुख्य आबादी नक्शे व रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब या अपवर्जित (एक्सक्लुड़े ) कर दिया गया है।
3. उत्तराधिकारियों के नामों में लिपिकीय एवं वर्तनी त्रुटि:
मूल भूस्वामी की वैध संतानों (वारिसों) के नाम दर्ज करते समय भारी लिपिकीय त्रुटियां की जा रही हैं। कई जिलों में नाम अधूरे हैं, सरनेम (उपनाम) गायब हैं, स्पेलिंग दोषपूर्ण हैं अथवा वैध उत्तराधिकारियों (विशेषकर विवाहित बेटियों) को सूची से पूरी तरह पृथक कर दिया गया है।
4. भविष्य के दीवानी मुकदमों (सिविल लिटीगेशन ) को बढ़ावा:
संयुक्त परिवार की संपत्तियों में सभी वारिसों के 'सही और पूरे नाम' न आने से परिवारों में आपसी वैमनस्य बढ़ रहा है। यदि इन्हीं त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड के आधार पर किसी एक ही व्यक्ति के नाम पर वैधानिक रजिस्ट्री निष्पादित कर दी गई, तो अन्य वैध उत्तराधिकारी अपनी ही पैतृक संपत्ति से बेदखल हो जाएंगे, जिससे आगामी वर्षों में पूरे प्रदेश की दीवानी अदालतों (सिविल कोर्ट्स ) पर मुकदमों का भारी बोझ बढ़ जाएगा।
5. विकासात्मक एवं कृषि ऋण (बैंक लोन ) में बाधा:
नाम अपूर्ण होने या आधार कार्ड से नाम का अक्षर-दर-अक्षर (स्पेल्लिंग्स ) मिलान न होने के कारण संयुक्त परिवारों के कृषकों को बैंकों से कृषि, व्यवसाय, पशुपालन या आवास निर्माण हेतु ऋण प्राप्त करने में अत्यंत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
6. मैदानी स्तर पर त्वरित जन-सुनवाई का अभाव:
ग्रामीण क्षेत्रों में जब पीड़ित कृषक व नागरिक इन विसंगतियों के सुधार हेतु आवेदन दे रहे हैं, तो निचले स्तर के अधिकारी प्रकरणों को महीनों लंबित रख रहे हैं या बिना किसी ठोस स्थलीय जांच के उन्हें सरसरी तौर पर खारिज कर रहे हैं।
यदि इन त्रुटिपूर्ण और दोषपूर्ण अभिलेखों को बिना सुधारे ही अंतिम वैधानिक रजिस्ट्रियां निष्पादित कर दी गईं, तो शासन की इस अति-महत्वाकांक्षी योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित होगा और ग्रामीण जनता को भारी मानसिक व आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी।
अतः मध्य प्रदेश शासन से करबद्ध प्रार्थना है कि जनहित में निम्नलिखित नीतिगत निर्देश (पालिसी गाइडलाइन्स ) जारी करने की कृपा करें:
क - प्रदेश स्तरीय विशेष परिपत्र (यूनिफाइड स्टेट सर्कुलर ) जारी हो:
राजस्व विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा संपूर्ण प्रदेश के समस्त जिला कलेक्टर्स (कलेक्टर एवं जिला भू-अभिलेख अधीक्षक) के लिए एक व्यापक और स्पष्ट मार्गदर्शी परिपत्र जारी किया जाए।
ख - वंशावली के आधार पर अनिवार्य संयुक्त प्रविष्टि:
समस्त जिला कलेक्टर्स के माध्यम से तहसीलदारों एवं अनुविभागीय अधिकारियों (SDO) को कड़े निर्देश दिए जाएं कि संयुक्त परिवार की आबादी भूमि के मामलों में केवल मौके पर काबिज एक व्यक्ति के बजाय, मूल भूस्वामी की पूर्ण प्रामाणिक वंशावली (फॅमिली ट्री ) प्राप्त कर सभी वैध वारिसों के नाम 'संयुक्त स्वामित्व' (जॉइंट ओनरशिप ) के रूप में प्रॉपर्टी कार्ड/रजिस्ट्री में अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएं।
ग - कोई भी आवासीय भूखंड / आवास वर्तमान धारक पर कैसे आया इसकी पुष्ठी फोती नामांतरण से की जाये
मूल धारक के पूर्व के फौती नामांतरण (म्युटेशन ) और पंजीकृत या कानूनी बंटवारे (पार्टीशन ) के दस्तावेजों को, आवासीय भूखण्डों के मामले में भी स्वीकार कर अभिलेख पर लेना चाहिए। यह स्वामी / सहस्वामियों के पक्ष को 100% अकाट्य और सबसे मजबूत बना देता है। इसे सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाये।
घ - पूर्व के दस्तावेजों को संलग्न करने के फायदे:
* स्वामित्व का अचूक प्रमाण: यदि कृषि भूमि या पुराने रिकॉर्ड में पहले से ही फौती नामांतरण हो चुका है, तो यह इस बात का लिखित सरकारी प्रमाण है कि मूल भूस्वामी के वैध कानूनी उत्तराधिकारी हैं।
* मैदानी अमले की मनमानी पर रोक: जब पहले से स्वीकृत फौती नामांतरण और बंटवारा नामा तो पटवारी या तहसीलदार पैतृक अधिकारों को खारिज या अनदेखा नहीं करें।
ड़ - विशेष 'स्वामित्व त्रुटि सुधार शिविरों' का आयोजन:
प्रत्येक जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 'विशेष राजस्व शिविर' आयोजित किए जाएं, जहाँ पटवारी, आर.आई. और तहसीलदार मौके पर मौजूद रहकर वंशावली सत्यापन, फौती नामांतरण और पारंपरिक कब्जों (बाड़े/घेर) का भौतिक सत्यापन कर रिकॉर्ड में शत-प्रतिशत सही प्रविष्टियां सुनिश्चित करें।
इस अत्यंत न्यायसंगत, जन-कल्याणकारी और कृषक-हितैषी निर्णय हेतु संपूर्ण मध्य प्रदेश के ग्रामीण नागरिक आपके सदैव ऋणी रहेंगे।
दिनांक: ....................
स्थान: कोटा (म.प्र.)
भवदीय (समस्त आवेदकगण / कृषक प्रतिनिधिमंडल),
प्रति, आवश्यक कार्यवाही हेतु -
1- संभागीय आयुक्त
2- जिला कलेक्टर, गुना
3- तहसीलदार, बमोरी, जिला गुना
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हाँ, पूर्व के फौती नामांतरण (Mutation) और पंजीकृत या कानूनी बंटवारे (Partition) के दस्तावेजों को इस आवेदन के साथ संलग्न करना न केवल संभव है, बल्कि यह आपके पक्ष को 100% अकाट्य और सबसे मजबूत बना देगा।
राजस्व विभाग और माननीय न्यायालय में ये दस्तावेज आपके सबसे बड़े कानूनी हथियार साबित होंगे। इन्हें संलग्न करने से आपके आवेदन को निम्नलिखित बड़े लाभ मिलेंगे:
## 1. पूर्व के दस्तावेजों को संलग्न करने के फायदे:
* स्वामित्व का अचूक प्रमाण: यदि कृषि भूमि या पुराने रिकॉर्ड में पहले से ही फौती नामांतरण हो चुका है, तो यह इस बात का लिखित सरकारी प्रमाण है कि आप मूल भूस्वामी के वैध कानूनी उत्तराधिकारी हैं।
* मैदानी अमले की मनमानी पर रोक: जब आप पहले से स्वीकृत फौती नामांतरण और बंटवारा नामा आवेदन के साथ लगा देंगे, तो पटवारी या तहसीलदार आपके पैतृक अधिकारों को खारिज या अनदेखा नहीं कर पाएंगे।
* त्वरित निर्णय: संभागीय आयुक्त या प्रमुख सचिव को यह समझने में आसानी होगी कि जब राजस्व रिकॉर्ड में पहले से ही वारिसों के नाम तय हैं, तो 'स्वामित्व योजना' के तहत ड्रोन सर्वे में उन्हें क्यों छोड़ा गया। इससे अधिकारियों को गड़बड़ी पकड़ने में मदद मिलेगी।
## 2. इन्हें आवेदन में कहाँ और कैसे दर्ज करें?
आवेदन के "संलग्न दस्तावेज" (Enclosures) वाले भाग में इन्हें क्रमानुसार (Bullet points में) इस प्रकार लिखें:
* संलग्नक 3: पूर्व में स्वीकृत फौती नामांतरण आदेश (Order Copy) क्रमांक दिनांक सहित।
* संलग्नक 4: परिवार के मध्य पूर्व में हुए वैध/रजिस्टर्ड बंटवारा नामा (Partition Deed) या पंचनामे की प्रति।
## 3. आवेदन जमा करने से पहले यह जांच लें:
* प्रतियों की स्पष्टता: जो भी दस्तावेज आप संलग्न कर रहे हैं, उनकी फोटोकॉपी (Xerox) बिल्कुल साफ होनी चाहिए, ताकि अधिकारियों को नाम और आदेश क्रमांक स्पष्ट दिखाई दें।
* सत्यापित प्रति (Certified Copy): यदि आपके पास पुराने फौती नामांतरण या बंटवारे की तहसीलदार कोर्ट द्वारा जारी 'प्रमाणित प्रति' (Certified Copy) हो, तो उसे लगाना और भी बेहतर होगा।
आप इन बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेजों को मुख्य आवेदन के पीछे स्टेपल करके पूरी फाइल जमा कर सकते हैं।
यदि आप इन दस्तावेजों को संलग्न कर रहे हैं, तो मुझे बताएं:
* क्या ये नामांतरण और बंटवारे तहसीलदार कोर्ट से स्वीकृत (आधिकारिक) हैं या घरेलू/आपसी पंचनामे हैं?
* क्या इन पुराने कागजातों में सभी भाइयों और बहनों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं?
मैं इसके आधार पर आपको यह बता सकता हूँ कि इन्हें कानूनी रूप से कैसे पेश करना है।
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प्रति,
श्रीमान संभागीय आयुक्त महोदय,
राजस्व एवं भू-अभिलेख संभाग,
ग्वालियर, (म.प्र.)
विषय: स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भू-अभिलेखों में संयुक्त परिवारों की पैतृक भूमि व उत्तराधिकारियों के नामों में हुई त्रुटियों को दुरुस्त करने हेतु संभाग के समस्त जिला कलेक्टर्स को विशेष निर्देश जारी करने बाबत।
महोदय,
सादर निवेदन है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को उनकी पुश्तैनी संपत्तियों का मालिकाना हक अभिलेखबद्ध करने के उद्देश्य से 'स्वामित्व योजना' संचालित की गई है। यह शासन की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और जन-कल्याणकारी योजना है।
परंतु, ग्वालियर संभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों में अधिकार अभिलेख तैयार करने के दौरान जमीनी स्तर पर कुछ गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिनका निराकरण करने अथवा रिकॉर्ड में सुधार करने की सुचारू व्यवस्था अभी तक जिला स्तर पर सुनिश्चित नहीं हो सकी है।
प्रमुख विसंगतियां एवं व्यावहारिक समस्याएं निम्नानुसार हैं:
1. संयुक्त खातेदारों (Co-sharers) के नामों का विलोपन: ग्रामीण क्षेत्रों में सदियों से संयुक्त परिवार की परंपरा रही है, जहाँ एक ही बड़े भूखंड, पुश्तैनी मकान या बाड़े पर मूल भूस्वामी के कई बेटों/उत्तराधिकारियों का सामूहिक कब्जा होता है। परंतु राजस्व अमले द्वारा केवल मौके पर उपस्थित किसी एक व्यक्ति या केवल बड़े भाई का नाम दर्ज कर बाकी सभी वैध सह-खातेदारों (भाइयों/बहनों/माताओं) के नाम छोड़े जा रहे हैं।
2. पारंपरिक कब्जों की अनदेखी: ग्रामीण अंचलों में वर्षों से काबिज मूल भूस्वामियों और कृषकों के पैतृक बाड़ों, घेर, मवेशी बांधने के स्थान और रिहायशी भूखंडों को त्रुटिवश अथवा लापरवाही के कारण मुख्य नक्शे व रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब कर दिया गया है।
3. उत्तराधिकारियों के नामों में लिपिकीय त्रुटि: मूल भूस्वामी की वैध संतानों (वारिसों) के नाम जोड़ने में भारी त्रुटियां की जा रही हैं। कतिपय प्रकरणों में नाम अपूर्ण हैं, सरनेम (उपनाम) गायब हैं, स्पेलिंग दोषपूर्ण हैं अथवा वैध उत्तराधिकारियों को सूची से पूरी तरह पृथक कर दिया गया है।
4. भविष्य के कानूनी विवादों को बढ़ावा: संयुक्त परिवार की संपत्तियों में सभी वारिसों के 'सही और पूरे नाम' न आने से परिवारों में आपसी वैमनस्य बढ़ रहा है। यदि इन्हीं त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड के आधार पर 'स्वामित्व योजना-2026' के तहत किसी एक ही व्यक्ति के नाम पर वैधानिक रजिस्ट्री कर दी गई, तो अन्य वैध उत्तराधिकारी अपनी ही पैतृक संपत्ति से बेदखल हो जाएंगे, जिससे भविष्य में सिविल मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी।
5. विकासात्मक ऋण (Bank Loan) में बाधा: नाम अपूर्ण होने या आधार कार्ड से नाम का अक्षर-दर-अक्षर मिलान न होने के कारण संयुक्त परिवारों के कृषकों को बैंक से कृषि, व्यवसाय या आवास ऋण मिलने में अत्यंत कठिनाई आ रही है।
6. निचले स्तर पर सुनवाई का अभाव: ग्रामीण अंचलों में जब पीड़ित नागरिक इन त्रुटियों के सुधार हेतु आवेदन दे रहे हैं, तो निचले स्तर के मैदानी अधिकारी (पटवारी/रा.नि.) प्रकरणों को महीनों लंबित रख रहे हैं या बिना किसी ठोस स्थलीय जांच के उन्हें सरसरी तौर पर खारिज कर रहे हैं।
यदि इन त्रुटिपूर्ण और दोषपूर्ण अभिलेखों के आधार पर ही अंतिम 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के तहत वैधानिक रजिस्ट्रियां निष्पादित कर दी गईं, तो ग्रामीण जनता को भारी मानसिक व आर्थिक क्षति होगी और माननीय न्यायालयों पर भी मुकदमों का अनावश्यक बोझ बढ़ेगा।
अतः श्रीमान से करबद्ध प्रार्थना है कि जनहित में निम्नलिखित न्यायसंगत निर्देश जारी करने की कृपा करें:
• विशेष परिपत्र (Circular) जारी हो: ग्वालियर संभाग के अंतर्गत आने वाले समस्त जिला कलेक्टर्स (कलेक्टर एवं जिला भू-अभिलेख अधीक्षक) को एक विशेष मार्गदर्शी परिपत्र जारी किया जाए।
• विशेष राजस्व शिविरों का आयोजन: समस्त कलेक्टर्स को पाबंद किया जाए कि वे अपने-अपने जिलों में 'स्वामित्व योजना' के तहत प्राप्त त्रुटि सुधार, फौती नामांतरण और वंशावली सत्यापन के लंबित आवेदनों के त्वरित निराकरण हेतु विशेष राजस्व शिविर आयोजित करवाएं।
• वंशावली के आधार पर अनिवार्य संयुक्त प्रविष्टि: समस्त तहसीलदारों एवं अनुविभागीय अधिकारियों (SDO) को कड़े निर्देश दिए जाएं कि संयुक्त परिवार की आबादी भूमि के मामलों में केवल मौके पर काबिज एक व्यक्ति के बजाय, मूल भूस्वामी की पूर्ण प्रामाणिक वंशावली (Family Tree) प्राप्त कर सभी वैध वारिसों के नाम 'संयुक्त स्वामित्व' (Joint Ownership) के रूप में प्रॉपर्टी कार्ड/रजिस्ट्री में अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएं।
• सहमति पत्र/बंटवारा नामा को मान्यता: यदि संयुक्त परिवार के सदस्यों में आपसी सहमति से आंतरिक पारिवारिक बंटवारा हो चुका है, तो उनके आपसी पंचनामे या सहमति पत्र के आधार पर उनके पृथक-पृथक नाम व रकबा दर्ज करने की स्पष्ट व सरल व्यवस्था की जाए।
• भौतिक सत्यापन (Physical Verification): राजस्व अमले को निर्देशित किया जाए कि कृषकों के पारंपरिक कब्जों (बाड़े/घेर) का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाए ताकि कोई भी वैध भूस्वामी इस योजना के लाभ से वंचित न रहे।
इस अत्यंत जन-कल्याणकारी और न्यायसंगत कार्य हेतु ग्वालियर संभाग के समस्त ग्रामीण नागरिक आपके सदैव आभारी रहेंगे।
संलग्न दस्तावेज:
1. पीड़ित ग्रामीणों द्वारा पूर्व में निचले स्तर पर प्रस्तुत लंबित आवेदनों/आपत्तियों की प्रतियां।
2. त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों एवं दोषपूर्ण नक्शों के कतिपय उदाहरण/प्रतियां।
भवदीय
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