13 करोड़ नाम वापस जोड़ने की मांग कांग्रेस के दिमागी दिवालियेपन की निशानी, बीएलओ मृत और लापता लोगों को कहां से लाएगा - अरविन्द सिसोदिया

प्रेस विज्ञप्ति

13 करोड़ नाम वापस जोड़ने की मांग कांग्रेस के दिमागी दिवालियेपन की निशानी, बीएलओ मृत और लापता लोगों को कहां से लाएंगे — अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 3 अक्टूबर। भाजपा कोटा संभाग के संभागीय मीडिया संयोजक, राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का आरोप लगाकर 13 करोड़ से अधिक नाम वापस जोड़ने की मांग करने वाली कांग्रेस और इंडी गठबंधन की मांग पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।

सिसोदिया ने कांग्रेस की इस मांग को पूरी तरह बेतुकी, गैरकानूनी और दिमागी दिवालियेपन का प्रतीक बताते हुए कहा, "कांग्रेस की इस मांग को तो स्वयं ब्रह्मा भी पूरी नहीं कर सकते। भारत का कोई भी कानून किसी मृत और लापता व्यक्ति को मतदाता बनाने की इजाजत नहीं देता।"

उन्होंने कहा कि अपनी तय हार और गठबंधन की फूट से बौखलाई कांग्रेस जनता और सोसल मीडिया के बीच एक ऐसा सफेद झूठ परोस रही है, जो पूरी तरह देश के स्थापित कानूनों और संविधान के खिलाफ है।

क्या कांग्रेस के पास बूथ स्तर पर बीएलए नहीं हैं?

सिसोदिया ने कहा कि निर्वाचन आयोग प्रत्येक स्तर पर प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और एजेंटों को प्रक्रिया में साथ रखता है। सामान्यतः प्रत्येक बूथ पर राज्य सरकार के कर्मचारी बीएलओ और राजनीतिक दल का स्थानीय कार्यकर्ता बीएलए होता है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस अथवा आरोप लगाने वाले दलों के बीएलए क्या कर रहे थे? बूथ पर कोई आपत्ति नहीं है। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। सभी राज्यों की ड्राफ्ट सूचियां राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई थीं, ताकि वे स्वयं इसका सत्यापन (वेरिफिकेशन) कर सकें।

सिसोदिया ने कहा कि सच यही है कि कांग्रेस के पास जमीन पर कोई संगठन नहीं बचा है और वह जिन्दा दिखने के लिए सिर्फ झूठ परोसने की नौटंकी कर रही है।

मृत नागरिकों की नागरिकता स्वतः समाप्त है

सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस जिन 13.3 करोड़ नामों को वापस जोड़ने की जिद पर अड़ी है, उनमें से लगभग 2.8 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। मृत्यु के साथ ही व्यक्ति की नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। भारत के संविधान और चुनाव कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो मृत व्यक्ति को वोटर लिस्ट में बनाए रखे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग मृत हुए लोगों को दोबारा जिंदा करने जैसी हास्यास्पद बालहठ है।

भौतिक रूप से लापता लोगों को वापस कैसे लाएंगे?

उन्होंने कहा कि स्थानीय बीएलओ को स्थायी रूप से अनुपस्थित 3 करोड़ लोगों के नाम मिले हैं। वे दावेदारी के लिए मौजूद ही नहीं हैं। नियमतः उनके नाम वहां से स्थायी अनुपस्थिति के कारण हटाए जाते हैं।

यदि उन्हें उसी पुराने स्थान पर वोटर बनना है, तो उन्हें वापस वहीं आकर उपस्थित होना होगा। जो व्यक्ति वहां भौतिक रूप से मौजूद ही नहीं है, उसका नाम कोई कैसे जोड़ सकता है? जो है ही नहीं, उसे जोड़ना नामुमकिन है।

दोहरे स्थान पर नाम रखना गंभीर अपराध

सिसोदिया ने चेतावनी दी कि एक ही मतदाता का नाम अलग-अलग विधानसभाओं या स्थानों पर कई जगह रखना पूरी तरह गैरकानूनी है। किंतु बहुत बड़ी संख्या में लोग शहर और गांव, दोनों जगह अपना नाम रखते हैं। इसके अनेक कारण भी होते हैं। 1 करोड़ मतदाताओं के नाम कई जगह होने के कारण काटे गए हैं।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भी दोहरे नाम नहीं रख सकता, इसलिए उन्हें हटाने का काम कानूनसम्मत है। कांग्रेस चाहती है कि लोग दो-दो जगह वोट डालें, जो कि चुनावी जालसाजी को बढ़ावा देने की कोशिश है।

स्थानांतरित व्यक्ति पुराने पते पर मतदाता नहीं रहता

सिसोदिया ने कहा कि जो नागरिक किन्हीं कारणों से स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुका है, जैसे विवाह, नौकरी, रोजगार, धंधा अथवा किसी अन्य कारण से, तो उसका नाम पुराने पते से कटेगा और नए पते पर जुड़ेगा। 6.3 करोड़ नाम इसी तरह के कटे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी तरह यह दबाव नहीं डाल सकती कि नागरिक पुराने पते पर जाकर फिर से रहें।

संवैधानिक संस्थाओं को बंधक बनाने का प्रयास

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण (रिवीजन) कानून के दायरे में होता है। कांग्रेस अपने विफल नेताओं के लिए जमीन तैयार करने के चक्कर में पूरी तरह बेतुके और फर्जी दावों का सहारा ले रही है, जो यह साबित करता है कि पार्टी का मानसिक और वैचारिक दिवालियापन चरम पर पहुंच चुका है।

मतदाता सूची में घुसपैठियों को जगह नहीं

सिसोदिया ने कहा कि मतदाता सूची में जबरदस्ती घुसपैठ करने की दशकों से चल रही हेरफेर को पूरी तरह रोकने के लिए सख्त उपाय करने ही चाहिए। भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां कोई भी आकर मतदाता सूची में घुस जाए।

कांग्रेस को झूठ की राजनीति छोड़कर कानून का सम्मान करना चाहिए

अरविन्द सिसोदिया ने अंत में कहा कि कांग्रेस को झूठ की राजनीति छोड़कर देश के कानून का सम्मान करना सीखना चाहिए। मृत, विस्थापित और फर्जी मतदाताओं के दम पर चुनाव जीतने का सपना देखने वाली कांग्रेस को देश की जागरूक जनता और देश का कानून कभी कामयाब नहीं होने देगा।

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
भाजपा कोटा संभाग मीडिया संयोजक
मोबाइल: 9414180151


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प्रेस विज्ञप्ति 

13 करोड़ नाम वापस जोड़ने की मांग कांग्रेस के दिमागी दिवालियेपन की निशानी, बीएलओ मृत और लापता लोगों को कहां से लाएंगे - अरविन्द सिसोदिया

कोटा 3 अक्टूबर । भाजपा कोटा संभाग के संभागीय मीडिया संयोजक एवं राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का आरोप लगाकर 13 करोड़ से अधिक नाम वापस जोड़ने की मांग करने वाली कांग्रेस और इंडी गठबंधन की मांग पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।

सिसोदिया ने कांग्रेस की इस मांग को पूरी तरह बेतुकी, गैरकानूनी और दिमागी दिवालियेपन का प्रतीक बताते हुए कहा, "कांग्रेस की इस मांग को तो स्वयं ब्रह्मा भी पूरी नहीं कर सकते। भारत का कोई भी कानून किसी मृत और लापता व्यक्तियों को मतदाता बनाने की इजाजत नहीं देता।"

उन्होंने कहा कि अपनी तय हार और गठबंधन की फूट से बौखलाई कांग्रेस जनता और मीडिया के बीच एक ऐसा सफेद झूठ परोस रही है, जो पूरी तरह देश के स्थापित कानूनों और संविधान के खिलाफ है।

क्या कांग्रेस के पास बीएलए बूथस्तर पर हैँ नहीं 

सिसोदिया नें कहा कि निर्वाचन आयोग प्रत्येक स्तर पर प्रमुख राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों और एजेंटों को प्रक्रिया में साथ रखता है। समान्यतः प्रत्येक बूथ पर राज्य सरकार के कर्मचारी बीएलओ और राजनैतिक दल का स्थानीय कार्यकर्ता बीएलए होता है। यहाँ सवाल यही है कि कांग्रेस अथवा आरोप लगाने वाले दलों के बीएलए क्या कर रहे थे? बूथ पर कोई आपत्ति नहीं है। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। सभी राज्यों की ड्राफ्ट सूचियां राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई थीं ताकि वे खुद इसका सत्यापन (वेरिफिकेशन ) कर सकें। सच यही है कि कांग्रेस के पास जमीन पर कोई संगठन नहीं है वे सिर्फ झूठ परोसने की नौटंकी कर रहे है। 


मृत नागरिकों की नागरिकता स्वतः समाप्त है 

सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस जिन 13. 3 करोड़ नामों को वापस जोड़ने की जिद पर अड़ी है, उनमें से लगभग 2.8 करोड़ लोग ऐसे हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। मृत्यु के साथ ही व्यक्ति की नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। भारत के संविधान और चुनाव कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मृत व्यक्ति को वोटर लिस्ट में बनाए रखे। कांग्रेस की मांग मृत हुए लोगों को दोबारा जिंदा करने जैसी हास्यास्पद बालहठ है।

भौतिकरूप से लापता वापस कैसे आएंगे 

उन्होंने कहा कि स्थानीय बी एल ओ को स्थाईरूप से अनुपस्थित 3 करोड़ लोगों के नाम मिले हैँ। वे दावेदारी को मौजूद ही नहीं हैँ। नियमतः उनके नाम वहां से स्थाई अनुपस्थिति के कारण हटाए जाते हैं। यदि उन्हें उसी पुराने स्थान पर वोटर बनना है, तो उन्हें वापस वहीं आकर उपस्थित होना होगा। जो व्यक्ति वहां भौतिक रूप से मौजूद ही नहीं है, उसका नाम कोई कैसे जोड़ सकता है ? जो है ही नहीं, उसे जोड़ना नामुमकिन है।

दोहरे स्थान पर नाम रखना गंभीर अपराध

सिसोदिया ने चेतावनी दी कि एक ही मतदाता का नाम अलग-अलग विधानसभाओं या स्थानों पर कई जगह रखना पूरी तरह गैरकानूनी है। किन्तु बहुत बड़ी संख्या शहर व गांव पर अपना नाम रखते हैँ, इसके अनेक कारण भी होते है,1 करोड़ मतदाता  नाम कई जगह होनें से कटे हैँ। क्योंकि चुनाव आयोग भी दोहरे नाम नहीं रख सकता इसलिए उन्हे हटाने का काम क़ानून सम्मत है। कांग्रेस चाहती है कि लोग दो-दो जगह वोट डालें, जो कि चुनावी जालसाजी को बढ़ावा देने की कोशिश है।

स्थानांतरित नाम पुराने पते पर मतदाता नहीं होते 

सिसोदिया नें कहा कि जो नागरिक किन्ही कारणों से स्थाईरूप से स्थानांतरण कर चुका है, जैसे विवाह, नौकरी, रोजगार, धंधा या अथवा किसी अन्य कारण से, तो यह नाम पुराने पते से कटेगा और नये पर जुड़ेगा। 6.3 करोड़ करोड़ नाम इसी तरह के कटे हैँ। इसलिए कांग्रेस यह दबाब किसी तरह नहीं डाल सकती कि नागरिक पुराने पते पर जाकर फिरसे से रहें।

संवैधानिक संस्थाओं को बंधक बनाने का प्रयास 

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण (रिवीज़न) कानून के दायरे में होता है। कांग्रेस अपने विफल नेताओं के लिए जमीन तैयार करने के चक्कर में पूरी तरह से बेतुके और फर्जी दावों का सहारा ले रही है, जो यह साबित करता है कि पार्टी का मानसिक और वैचारिक दिवालियापन चरम पर पहुंच चुका है।

मतदाता सूची में घुसपैठियों को जगह नहीं 

सिसोदिया नें कहा कि मतदाता सूची में जबरदस्ती घुसपैठ करने की दसकों से चल रही हेरफेर को पूरी तरह रोकने के लिए, सख्त उपाय करने ही चाहिए, भारत कोई धर्मशाला नहीं, जो कोई भी आकर मतदाता सूची में घुस जाये।

अरविन्द सिसोदिया ने अंत में कहा कि कांग्रेस को झूठ की राजनीति छोड़कर देश के कानून का सम्मान करना सीखना चाहिए। मृत, विस्थापित और फर्जी मतदाताओं के दम पर चुनाव जीतने का सपना देखने वाली कांग्रेस को देश की जागरूक जनता और देश का कानून कभी कामयाब नहीं होने देगा।

भवदीय 
अरविन्द सिसोदिया 
मोबाईल 9414180151

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कांग्रेस ने अधिकारिक तौर पर मतदाता सूची में 13.3 करोड़ नाम दोबारा जोड़ने की मांग की है। पार्टी की हाल ही में दिल्ली में हुई कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में इस संबंध में एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से इन कटे हुए नामों को तुरंत बहाल करने की बात कही गई है। 

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और प्रवक्ताओं ने इस मांग को लेकर निम्नलिखित आधिकारिक बयान जारी किए हैं:

* महासचिव जयराम रमेश: उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर कांग्रेस की 4 प्रमुख मांगें साझा कीं, जिसमें पहली मांग ही "मतदाता सूची से हटाए गए 13+ करोड़ नामों को तुरंत बहाल करना" है 

* राहुल गांधी और प्रियंका गांधी: राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इसके सबूत पेश करने का दावा किया, वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि चुनाव आयोग ने 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाकर उनके लोकतांत्रिक अधिकार में हस्तक्षेप किया है। 

* के.सी. वेणुगोपाल और सचिन पायलट: कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को 'धोखाधड़ी' बताते हुए इन 13.3 करोड़ वोटों को वापस शामिल करने की पुरजोर मांग उठाई है। 

सत्तारूढ़ दल (भाजपा) का पक्ष:
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया है। भाजपा और चुनाव आयोग के समर्थकों का तर्क है कि यह कोई "वोट चोरी" नहीं है, बल्कि मतदाता सूची को साफ करने (क्लीनिंग) की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें मृत, डुप्लिकेट या स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम हटाए गए हैं। 

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हां, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने इन आरोपों पर आधिकारिक और स्पष्ट उत्तर दिया है। चुनाव आयोग ने कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए "वोट चोरी" के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि विपक्ष का यह दावा पूरी तरह से भ्रामक (Misleading) है कि मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हमेशा के लिए काट दिए गए हैं। 

चुनाव आयोग (ECI) ने 13 करोड़ मतदाताओं के आंकड़ों पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण दिए हैं: 

* यह अंतिम सूची नहीं, 'ड्राफ्ट स्टेज' है: आयोग ने स्पष्ट किया कि 13.3 करोड़ का यह आंकड़ा विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत तैयार की गई प्रारंभिक ड्राफ्ट (प्रारूप) मतदाता सूची का है。 इसका मतलब यह नहीं है कि ये नाम अंतिम रूप से हटा दिए गए हैं, बल्कि इन्हें प्रक्रिया के तहत चिन्हित किया गया था। 

* ASDD (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट) वर्गीकरण: चुनाव आयोग ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) का एक दस्तावेज जारी कर इस 13 करोड़ के आंकड़े का बिंदुवार वर्गीकरण प्रस्तुत किया है:

* 6.3 करोड़ मतदाता: ऐसे लोग हैं जो अपने पुराने पते से स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट (स्थानांतरित) हो चुके हैं।

   * 3 करोड़ मतदाता: ऐसे लोग हैं जो अपने पते पर अनुपस्थित या लापता पाए गए हैं।
   * 2.8 करोड़ मतदाता: ऐसे लोग हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है।

   * लगभग 1 करोड़ मतदाता: ऐसे नाम हैं जो डुप्लिकेट (एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत) थे। 

* राजनीतिक दलों को शामिल करना: आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। सभी राज्यों की ड्राफ्ट सूचियां राजनीतिक दलों और उनके बूथ स्तर के एजेंटों (BLAs) के साथ साझा की गई थीं ताकि वे खुद इसका सत्यापन (Verification) कर सकें। 

## विवाद के बाद चुनाव आयोग का नया कदम
विपक्ष के भारी विरोध और इस मामले के तूल पकड़ने के बाद, चुनाव आयोग ने 29 सितंबर 2026 को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को लिखित आदेश जारी किया है: 

* आयोग ने अब एक 'विशेष ड्राइव' (Special Drive) शुरू करने का निर्देश दिया है। [2, 4] 
* इसके तहत चुनाव कर्मी खुद घर-घर जाकर उन पात्र और छूटे हुए मतदाताओं के दस्तावेज जुटाएंगे जिनके नाम इस प्रक्रिया के दौरान प्रभावित हुए हैं ताकि कोई भी वास्तविक नागरिक वोट देने से वंचित न रहे। 


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