स्वामित्व -राष्ट्रपति महोदया

दिनांक: 23/10/2026

ईमेल द्वारा / पंजीकृत डाक / स्पीड पोस्ट द्वारा

प्रति,
महामहिम राष्ट्रपति महोदया,
भारत गणराज्य,
राष्ट्रपति सचिवालय,
राष्ट्रपति भवन,
नई दिल्ली – 110004।

विषय: मध्य प्रदेश शासन की स्वामित्व योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी भूमि के अधिकार अभिलेखों एवं प्रॉपर्टी कार्ड में कथित गंभीर त्रुटियों, वैध उत्तराधिकारियों एवं संयुक्त सहस्वामियों के नाम छूटने, उत्तराधिकार एवं संपत्ति अधिकारों से संबंधित विसंगतियों, लंबित शिकायतों का निराकरण नहीं होने तथा राज्यव्यापी त्रुटि-सुधार व्यवस्था लागू कराने हेतु संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण एवं उचित कार्यवाही के लिए याचिका।

संदर्भ:

1. मध्य प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग को प्रस्तुत विस्तृत शिकायत, दिनांक 05/10/2027, यदि उक्त तिथि वाला आवेदन वास्तव में प्रस्तुत किया जा चुका हो।

2. जिला कलेक्टर, गुना के समक्ष प्रस्तुत आपत्ति एवं त्रुटि-सुधार आवेदन, दिनांक 17/09/2026।

3. स्वामित्व योजना अंतर्गत प्रकरण क्रमांक 0863/अ-3/2020-21, प्लॉट क्रमांक 32, ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना, मध्य प्रदेश।

4. संबंधित तहसीलदार, बमोरी, राजस्व अधिकारियों एवं ग्राम पटवारी को पूर्व में दिए गए आवेदन एवं शिकायतें।


याचिकाकर्ता:

श्री अरविन्द सिंह सिसोदिया
पुत्र स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया
मूल निवासी – ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना, मध्य प्रदेश।
वर्तमान पता – बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन, राजस्थान – 324002।
मोबाइल: 9414180151
ईमेल: sisodiaarvind0@gmail.com

महोदया,

सविनय निवेदन है कि मैं, अरविन्द सिंह सिसोदिया, मध्य प्रदेश के जिला गुना के ग्राम मोड़का का मूल निवासी हूँ। ग्रामीण आबादी भूमि के स्वामित्व अभिलेखों में कथित त्रुटियों, वैध उत्तराधिकारियों के नाम छूट जाने तथा इन त्रुटियों के सुधार हेतु संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष बार-बार आवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद प्रभावी समाधान अथवा स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध नहीं होने के संबंध में यह याचिका महामहिम के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।

यह विषय केवल मेरे परिवार की संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश के अनेक ग्रामीण परिवारों की आबादी भूमि, संयुक्त स्वामित्व, उत्तराधिकार एवं संपत्ति संबंधी वैधानिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा व्यापक जनहित का विषय है।

अतः महामहिम से विनम्र अनुरोध है कि इस याचिका को उचित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विचारार्थ भेजने तथा संबंधित शासन एवं प्रशासन से नियमानुसार कार्रवाई और शिकायतों के निस्तारण के संबंध में प्रतिवेदन प्राप्त करने हेतु उचित कदम उठाने की कृपा करें।

1. याचिका की पृष्ठभूमि एवं समस्या की प्रकृति

मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के आवासीय भूखंडों एवं संपत्तियों का अभिलेखीकरण करने के उद्देश्य से स्वामित्व योजना संचालित की गई है। इसका मूल उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को उनकी आवासीय संपत्तियों के संबंध में अभिलेखीय स्पष्टता उपलब्ध कराना तथा संपत्ति संबंधी अधिकारों को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

किन्तु योजना के अंतर्गत तैयार किए गए कुछ अधिकार अभिलेखों एवं प्रॉपर्टी कार्ड में, याचिकाकर्ता के अनुभव तथा प्राप्त तथ्यों के अनुसार, गंभीर तथ्यात्मक एवं विधिक विसंगतियाँ सामने आई हैं। इनमें संयुक्त परिवारों के वैध उत्तराधिकारियों के नाम छूटना, संयुक्त कब्जे एवं सहस्वामित्व की अनदेखी, नामों में त्रुटियाँ, पारंपरिक बाड़ों एवं अन्य उपयोग में रहे भूखंडों का अभिलेखों में शामिल नहीं होना तथा पूर्व अभिलेखों और उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेजों का पर्याप्त परीक्षण नहीं किया जाना शामिल है।

ऐसी परिस्थितियों में केवल अभिलेख तैयार हो जाने को प्रत्येक मामले में सभी संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों के अंतिम और निर्विवाद निर्धारण के समान नहीं माना जाना चाहिए। जहाँ वास्तविक त्रुटि, वैध आपत्ति अथवा उत्तराधिकार संबंधी विवाद सामने आएँ, वहाँ लागू कानून एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निष्पक्ष जाँच और आवश्यक सुधार की प्रभावी व्यवस्था होना अत्यंत आवश्यक है।

2. याचिकाकर्ता के परिवार की संपत्ति से संबंधित विशिष्ट प्रकरण

मध्य प्रदेश के जिला गुना, उपखण्ड गुना, तहसील बमोरी, ग्राम मोड़का, पटवारी हल्का क्रमांक 64, सूजाखेड़ी में स्थित आवासीय भूखंड का विवरण निम्नानुसार है:

- स्वामित्व योजना प्रकरण क्रमांक: 0863/अ-3/2020-21।
- प्लॉट क्रमांक: 32।
- क्षेत्रफल: 2175 वर्गमीटर।
- आवासीय भूमि खसरा क्रमांक: 273।
- ग्राम: मोड़का।
- पटवारी हल्का और ग्राम पंचायत सूजाखेड़ी।
- तहसील: बमोरी।
- जिला: गुना, मध्य प्रदेश।

उक्त संपत्ति के मूल धारक स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया, पुत्र स्व. समंदर सिंह थे। उपलब्ध पारिवारिक एवं राजस्व अभिलेखों के अनुसार, इस संपत्ति पर लगभग 80 वर्ष से अधिक से उनके परिवार का कब्जा एवं उपयोग रहा है। संपत्ति में किलेनुमा दो मंजिला पक्के मकान, पक्की चारदीवारी, भंडारण भवन तथा कुआँ सहित अन्य निर्माण एवं परिसंपत्तियाँ विद्यमान हैं।

स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया का निधन दिनांक 20 जनवरी 2016 को बिना वसीयत किए हुआ। याचिकाकर्ता के अनुसार, उनके कुल आठ प्रथम श्रेणी के वैध उत्तराधिकारी हैं, जिनके उत्तराधिकार एवं हिस्सों का निर्धारण लागू व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानून, उपलब्ध दस्तावेजों तथा संबंधित न्यायिक एवं राजस्व आदेशों के अनुसार किया जाना आवश्यक है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि संबंधित परिवार की अन्य कृषि भूमियों के फौती नामांतरण अभिलेखों में सभी आठ उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज हुए हैं। ग्राम मोड़का में कृषि भूमि के बंटवारे तथा संबंधित उत्तराधिकार प्रकरणों के दस्तावेज भी उपलब्ध हैं, जिनमें याचिकाकर्ता के अनुसार उत्तराधिकारियों के अधिकारों के संबंध में निष्कर्ष दर्ज हैं।

इसके बावजूद, स्वामित्व योजना के अंतर्गत उपर्युक्त आवासीय भूखंड के स्वामित्व अभिलेख एवं प्रॉपर्टी कार्ड में केवल तीन व्यक्तियों के नाम दर्ज किए गए हैं तथा उनके हिस्से क्रमशः 1/2, 1/4 एवं 1/4 दर्शाए गए हैं।

याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्ति यह है कि शेष वैध उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज नहीं किए गए तथा संबंधित हिस्सों का निर्धारण उपलब्ध उत्तराधिकार एवं संपत्ति संबंधी अभिलेखों के अनुरूप नहीं दिखाई देता। इस संबंध में सभी संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जाँच कर लागू कानून के अनुसार सही प्रविष्टियाँ किए जाने की आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता यह स्पष्ट करना चाहता है कि सभी आठ व्यक्तियों के नाम और उनके हिस्सों का अंतिम निर्धारण संबंधित उत्तराधिकार कानून, प्रमाणित अभिलेखों तथा किसी लागू न्यायिक आदेश के अनुरूप किया जाना चाहिए। यदि उपलब्ध दस्तावेजों से सभी आठ व्यक्तियों का संयुक्त अधिकार प्रमाणित होता है, तो उनके वैधानिक अधिकारों के अनुरूप अभिलेख सुधार किया जाना न्यायोचित होगा।

3. संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें, परंतु समाधान का अभाव

उक्त विसंगतियों के सुधार के लिए याचिकाकर्ता द्वारा जिला कलेक्टर, गुना के कार्यालय में दिनांक 17/09/2026 को आपत्ति एवं सुधार आवेदन प्रस्तुत किया जा चुका है।

इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता द्वारा जिला कलेक्टर, गुना, तहसीलदार, बमोरी तथा ग्राम मोड़का के संबंधित पटवारी को पूर्व में भी कई बार समस्या से अवगत कराया गया है।

याचिकाकर्ता ने विवादित संपत्ति के संबंध में अंतिम निर्णय होने तक लागू विधिक प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक संरक्षणात्मक कदम उठाने तथा संपत्ति के हस्तांतरण अथवा अन्य स्वामित्व संबंधी कार्यवाही से उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताओं को रोकने का भी अनुरोध किया है।

किन्तु याचिकाकर्ता के अनुसार, अब तक न तो विवाद का प्रभावी समाधान हुआ है और न ही त्रुटि-सुधार के लिए ऐसी स्पष्ट, व्यावहारिक एवं समयबद्ध प्रक्रिया बताई गई है, जिसके माध्यम से प्रकरण का अंतिम निराकरण कराया जा सके।

इस स्थिति से याचिकाकर्ता तथा अन्य संबंधित उत्तराधिकारियों के अधिकारों एवं संपत्ति के भविष्य के संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है।

4. ग्रामीण आबादी भूमि एवं संयुक्त परिवारों की व्यापक समस्या

मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक परिवार पीढ़ियों से एक ही आवासीय भूखंड, मकान, बाड़े, घेर, खलिहान एवं अन्य पारंपरिक उपयोग की भूमि पर रहते और उसका उपयोग करते आए हैं।

इनमें से कई संपत्तियाँ परिवार के मूल सदस्य की मृत्यु के बाद एक से अधिक उत्तराधिकारियों के अधिकार में आती हैं। ऐसे मामलों में वास्तविक अधिकार केवल वर्तमान में मौके पर उपस्थित व्यक्ति अथवा किसी एक सदस्य के नाम से निर्धारित नहीं किए जा सकते; संबंधित दस्तावेजों, कब्जे, उत्तराधिकार, पूर्व अभिलेखों तथा लागू कानूनों का परीक्षण आवश्यक होता है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, कुछ मामलों में स्वामित्व योजना के सर्वेक्षण एवं अभिलेखीकरण के दौरान परिवार के सभी सदस्यों तक पर्याप्त सूचना नहीं पहुँची, अथवा संबंधित व्यक्तियों को अपने नामों एवं अधिकारों में हुई त्रुटियों की जानकारी समय पर नहीं मिली।

इसलिए केवल प्रथम अथवा द्वितीय प्रकाशन के समय आपत्ति प्रस्तुत नहीं किए जाने के आधार पर प्रत्येक मामले में सुधार की संभावना समाप्त मान लेना उचित नहीं होगा। संबंधित परिस्थितियों, सूचना की उपलब्धता, आपत्ति के कारणों तथा लागू नियमों के अनुरूप प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण होना चाहिए।

इसी प्रकार, जहाँ किसी भूखंड पर लंबे समय से आवासीय अथवा पारंपरिक कब्जा रहा है, वहाँ वास्तविक स्थिति, उपलब्ध दस्तावेजों एवं संबंधित भूमि की विधिक प्रकृति की जाँच कर नियमानुसार उचित निर्णय किया जाना आवश्यक है।

5. प्रमुख विसंगतियाँ जिनके निराकरण की आवश्यकता है

याचिकाकर्ता के अनुसार, निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है:

(क) वैध उत्तराधिकारियों के नाम छूटना: संयुक्त परिवार की पैतृक संपत्तियों में पुत्रियों, विवाहित पुत्रियों, विधवाओं, माताओं तथा अन्य वैध उत्तराधिकारियों के अधिकारों की लागू कानून के अनुसार जाँच की जाए।

(ख) संयुक्त सहस्वामित्व की अनदेखी: किसी एक व्यक्ति का नाम दर्ज होने मात्र से अन्य व्यक्तियों के संभावित वैधानिक अधिकार समाप्त न माने जाएँ।

(ग) पूर्व अभिलेखों की अनदेखी: फौती नामांतरण, पूर्व राजस्व अभिलेख, पंजीकृत दस्तावेज, वैध बंटवारा तथा न्यायालयों के आदेशों का संबंधित मामले में उचित परीक्षण किया जाए।

(घ) नाम एवं पहचान संबंधी त्रुटियाँ: नाम, उपनाम, वर्तनी, पहचान संबंधी विवरण तथा अन्य लिपिकीय त्रुटियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुधारा जाए।

(ङ) पारंपरिक कब्जों एवं भूखंडों का अपवर्जन: बाड़े, घेर, खलिहान तथा अन्य पारंपरिक उपयोग वाले भूखंडों की आवश्यकता होने पर स्थलीय जाँच कराई जाए।

(च) पूर्व धारक से वर्तमान धारक तक अधिकार की कड़ी: जहाँ आवश्यक हो, संपत्ति का मूल धारक कौन था और वर्तमान धारक तक अधिकार किस विधिसम्मत आधार पर पहुँचा, इसकी जाँच की जाए।

(छ) आपत्ति निस्तारण की स्पष्ट प्रक्रिया का अभाव: नागरिकों को आवेदन, दस्तावेज, सक्षम अधिकारी, सुनवाई, समय-सीमा एवं अपील अथवा अन्य उपलब्ध विधिक उपायों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

6. भविष्य में संपत्ति विवाद एवं मुकदमेबाजी की आशंका

यदि गंभीर आपत्ति अथवा त्रुटि के बावजूद किसी अभिलेख को बिना आवश्यक जाँच के अंतिम आधार मानकर आगे की कार्यवाही की जाती है, तो प्रभावित व्यक्तियों के बीच संपत्ति विवाद उत्पन्न हो सकता है।

ऐसे विवादों के कारण परिवारों को राजस्व अधिकारियों तथा न्यायालयों के समक्ष लंबे समय तक कार्यवाही करनी पड़ सकती है। इससे नागरिकों के समय, धन एवं मानसिक शांति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और न्यायिक संस्थाओं पर भी अतिरिक्त भार पड़ सकता है।

अतः यह जनहित में आवश्यक है कि जहाँ किसी अभिलेख के संबंध में वास्तविक विवाद या सुधार आवेदन लंबित हो, वहाँ सक्षम अधिकारी समयबद्ध सुनवाई करें और लागू कानून के अनुसार आवश्यक अंतरिम संरक्षण अथवा अन्य उपायों पर निर्णय लें।

विशेष रूप से रजिस्ट्री, हस्तांतरण, बंधक अथवा अन्य संपत्ति संबंधी कार्यवाही पर रोक केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिक अधिकार एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप, संबंधित परिस्थितियों के परीक्षण के बाद ही लगाई जाए।

7. संवैधानिक एवं विधिक दृष्टिकोण

भारत का संविधान विधि के समक्ष समानता तथा विधि के समान संरक्षण का आश्वासन देता है। संपत्ति से वंचित किए जाने के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 300-क के अंतर्गत यह व्यवस्था है कि किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार के बिना वंचित नहीं किया जाएगा।

याचिकाकर्ता का विनम्र निवेदन है कि संपत्ति संबंधी अधिकारों के अभिलेखीकरण और विवादों के निस्तारण में लागू कानूनों, संबंधित उत्तराधिकार प्रावधानों तथा सक्षम न्यायालयों के आदेशों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

जहाँ अधिकारों के निर्धारण पर वास्तविक विवाद हो, वहाँ संबंधित व्यक्तियों को सुनवाई का उचित अवसर देकर कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। प्रशासनिक अभिलेखों में सुधार की प्रक्रिया इस प्रकार संचालित हो कि किसी व्यक्ति के वैधानिक अधिकारों को बिना विधिसम्मत आधार के प्रभावित न किया जाए।

8. महामहिम राष्ट्रपति महोदया से विनम्र प्रार्थनाएँ

उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों के आधार पर महामहिम से निम्नलिखित प्रार्थनाएँ की जाती हैं:

1. याचिका पर उचित कार्यवाही: इस याचिका को राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी, विशेषकर भारत सरकार के संबंधित ग्रामीण विकास विभाग तथा मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग, को विचारार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित करने की कृपा की जाए।

2. राज्य शासन से प्रतिवेदन प्राप्त करना: मध्य प्रदेश शासन से इस विषय पर तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्राप्त करने की उचित व्यवस्था की जाए कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार अभिलेखों में त्रुटि-सुधार, उत्तराधिकारियों के नाम सम्मिलित करने तथा विवादित प्रविष्टियों के निराकरण के लिए वर्तमान में कौन-सी प्रक्रिया लागू है और लंबित शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई है।

3. प्रदेश-स्तरीय एकरूप मार्गदर्शी परिपत्र: मध्य प्रदेश शासन को नियमानुसार विचार करने हेतु निर्देशित अथवा अनुशंसित किया जाए कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार अधिकार अभिलेखों एवं प्रॉपर्टी कार्ड में त्रुटि-सुधार तथा आपत्तियों के निराकरण के लिए स्पष्ट, एकरूप एवं समयबद्ध दिशा-निर्देश जारी करने की संभावना पर विचार करे।

4. संयुक्त परिवारों के मामलों की जाँच: पैतृक आबादी भूमि से संबंधित विवादों में मूल धारक, उपलब्ध वंशावली, पूर्व राजस्व अभिलेख, फौती नामांतरण, पंजीकृत दस्तावेज, विधिसम्मत बंटवारे तथा अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों का परीक्षण कर लागू कानून के अनुसार वास्तविक वैध उत्तराधिकारियों के अधिकारों का निर्धारण सुनिश्चित करने हेतु उचित प्रशासनिक व्यवस्था की जाए।

5. गुना जिले के विशिष्ट प्रकरण की जाँच: स्वामित्व योजना प्रकरण क्रमांक 0863/अ-3/2020-21, प्लॉट क्रमांक 32, क्षेत्रफल 2175 वर्गमीटर, ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना के संबंध में संबंधित सक्षम अधिकारी से निष्पक्ष जाँच एवं तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्राप्त किया जाए।

उक्त प्रकरण में यह जाँचा जाए कि स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया के उत्तराधिकारियों के संबंध में उपलब्ध अभिलेखों का समुचित परीक्षण किया गया था या नहीं, केवल तीन व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाने का आधार क्या था तथा 1/2, 1/4 एवं 1/4 के हिस्से किस दस्तावेज अथवा विधिक आधार पर निर्धारित किए गए।

यदि जाँच में त्रुटि प्रमाणित हो, तो लागू कानून एवं सक्षम प्राधिकारी की शक्तियों के अनुरूप आवश्यक सुधार कराया जाए।

6. लंबित शिकायतों पर समयबद्ध निर्णय: जिला कलेक्टर, गुना एवं संबंधित राजस्व अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत दिनांक 17/09/2026 के आवेदन तथा अन्य लंबित अभ्यावेदनों की स्थिति की समीक्षा कराकर, सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई एवं कारणयुक्त आदेश पारित कराने हेतु उचित कदम उठाए जाएँ।

7. विवादित संपत्तियों के संरक्षण पर विचार: जिन संपत्तियों के संबंध में गंभीर उत्तराधिकार अथवा स्वामित्व विवाद लंबित हो, उनमें संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों को अनावश्यक रूप से प्रभावित होने से बचाने के लिए लागू कानून के अंतर्गत उपलब्ध अंतरिम संरक्षणात्मक उपायों पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा विचार किया जाए।

8. विशेष त्रुटि-सुधार शिविर: मध्य प्रदेश शासन को प्रत्येक जिले एवं आवश्यकतानुसार ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष जनसुनवाई अथवा त्रुटि-सुधार शिविर आयोजित करने की संभावना पर विचार करने हेतु कहा जाए, जिनमें संबंधित राजस्व अधिकारी उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण कर नागरिकों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करें।

9. सक्षम अधिकारी एवं स्पष्ट प्रक्रिया: राज्य शासन से यह स्पष्ट कराने की व्यवस्था की जाए कि स्वामित्व योजना संबंधी आपत्तियों एवं त्रुटि-सुधार आवेदनों पर कौन-सा अधिकारी निर्णय लेने के लिए सक्षम है, आवेदन कहाँ प्रस्तुत किया जाए, आवश्यक दस्तावेज क्या हैं तथा निर्णय और अपील की प्रक्रिया क्या है।

10. उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों की सुरक्षा: यह सुनिश्चित करने हेतु उचित प्रशासनिक कदम उठाए जाएँ कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार अभिलेखों की जाँच एवं सुधार में लागू उत्तराधिकार कानूनों तथा सक्षम न्यायालयों के आदेशों का पालन हो और किसी वैध उत्तराधिकारी के अधिकारों को केवल वर्तमान निवास, वैवाहिक स्थिति अथवा सर्वेक्षण के समय अनुपस्थित होने के कारण बिना विधिसम्मत आधार के समाप्त न माना जाए।

11. राज्यव्यापी समस्या का आकलन: मध्य प्रदेश शासन से यह विचार करने का अनुरोध किया जाए कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों, नाम छूटने, गलत प्रविष्टियों, क्षेत्रफल अथवा सीमा संबंधी विसंगतियों तथा लंबित विवादों का जिलेवार आकलन कराया जाए और आवश्यकतानुसार सुधार अभियान चलाया जाए।

12. कार्यवाही की सूचना: याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर की गई कार्यवाही, सक्षम प्राधिकारी को भेजे जाने तथा संबंधित शिकायत के निस्तारण की स्थिति से याचिकाकर्ता को नियमानुसार अवगत कराने की उचित व्यवस्था की जाए।

9. विशेष निवेदन

महोदया, ग्रामीण परिवारों की पैतृक संपत्तियाँ केवल आर्थिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि अनेक पीढ़ियों के निवास, पारिवारिक इतिहास एवं जीवनयापन से जुड़ी हुई हैं। इन संपत्तियों के संबंध में तैयार किए जाने वाले अभिलेखों का सही, पारदर्शी एवं कानूनसम्मत होना अत्यंत आवश्यक है।

याचिकाकर्ता का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध बिना जाँच के आरोप लगाना नहीं है, बल्कि संबंधित अभिलेखों में विद्यमान कथित विसंगतियों की निष्पक्ष जाँच, वैधानिक अधिकारों की सुरक्षा तथा प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी समाधान प्राप्त करना है।

जब नागरिक बार-बार आवेदन प्रस्तुत करने के बावजूद यह नहीं जान पाते कि उनकी शिकायत का निराकरण कौन करेगा, किस प्रक्रिया से होगा और कितना समय लगेगा, तब समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।

अतः महामहिम से विनम्र प्रार्थना है कि इस याचिका को ग्रामीण नागरिकों के संपत्ति संबंधी अधिकारों, प्रशासनिक जवाबदेही एवं जनहित से संबंधित विषय मानते हुए नियमानुसार उचित कार्यवाही हेतु संबंधित सक्षम प्राधिकारियों तक पहुँचाने की कृपा करें।

हमें पूर्ण विश्वास है कि विधिसम्मत जाँच, निष्पक्ष सुनवाई एवं प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से इस समस्या का उचित समाधान संभव है।

दिनांक: 23/10/2026
स्थान: कोटा, राजस्थान

भवदीय,

(अरविन्द सिंह सिसोदिया)
पुत्र स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया
मूल निवासी – ग्राम मोड़का, तहसील बमोरी, जिला गुना, मध्य प्रदेश।
वर्तमान पता – बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड, डडवाड़ा, कोटा जंक्शन, राजस्थान – 324002।
मोबाइल – 9414180151
ईमेल – sisodiaarvind0@gmail.com

संलग्नक

1. जिला कलेक्टर, गुना को दिनांक 17/09/2026 को प्रस्तुत शिकायत/आपत्ति आवेदन की प्रति।
2. स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्लॉट क्रमांक 32, ग्राम मोड़का से संबंधित उपलब्ध अधिकार अभिलेख एवं प्रॉपर्टी कार्ड की प्रति।
3. स्वर्गीय श्री भूपेंद्र सिंह सिसोदिया का मृत्यु प्रमाणपत्र, यदि उपलब्ध हो।
4. संबंधित आठ उत्तराधिकारियों की वंशावली एवं उपलब्ध पहचान/उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेज।
5. कृषि भूमि के फौती नामांतरण अभिलेखों एवं अन्य संबंधित राजस्व अभिलेखों की प्रतियाँ।
6. उपलब्ध बंटवारा दस्तावेज, नामांतरण आदेश तथा संबंधित न्यायालयीन आदेशों की प्रतियाँ।
7. पूर्व में प्रस्तुत अन्य शिकायतों, अनुस्मारकों एवं प्राप्त जवाबों की प्रतियाँ।
8. संबंधित अधिकारियों को भेजे गए पत्रों एवं ईमेल का उपलब्ध प्रमाण।
9. अन्य सहायक दस्तावेज एवं प्रमाण, जो प्रकरण के निष्पक्ष परीक्षण के लिए आवश्यक हों।

प्रतिलिपि, सूचनार्थ एवं नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही हेतु:

1. माननीय राज्यपाल महोदय, मध्य प्रदेश, राजभवन, भोपाल।
2. मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, मंत्रालय, भोपाल।
3. प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग, मध्य प्रदेश शासन, भोपाल।
4. संभागीय आयुक्त, ग्वालियर संभाग, मध्य प्रदेश।
5. जिला कलेक्टर, गुना, मध्य प्रदेश।
6. संबंधित सक्षम राजस्व अधिकारी, जिला गुना, मध्य प्रदेश।

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