इंडी गठबंधन राहुल नेतृत्व पर एकमत नहीं, बैठक में खुली एकता की पोल - अरविन्द सिसोदिया
प्रेस विज्ञप्ति
इंडी गठबंधन राहुल के नेतृत्व पर एकमत नहीं, बैठक में अनुपस्थिति से खुली एकता की पोल - अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 1 अक्टूबर। राजस्थान पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन न्यासी अरविन्द सिसोदिया ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लगातार चुनावी पराजयों के बाद कांग्रेस आत्ममंथन करने के बजाय झूठे आरोप, भ्रम और बहानों की जोरजबरदस्ती की राजनीति पर उतर आई है। उन्होंने कहा कि जनता के दिल में प्रधानमंत्री मोदीजी का जो सम्मान है, उसे बकबास और गंदी भाषा से समाप्त नहीं किया जा सकता।
सिसोदिया ने कहा कि जिस इंडी गठबंधन को एकजुट विपक्ष के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, उसकी बैठक में ही प्रमुख सहयोगी दलों की गैरमौजूदगी ने उसकी वास्तविक स्थिति सामने ला दी। यह राहुल गाँधी के प्रति अविश्वास का भी प्रगटीकरण है। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल पहले यह स्पष्ट करें कि क्या वे वास्तव में राहुल गांधी को अपना निर्विवाद नेता स्वीकार करते हैं या उनसे कतरा रहे हैँ।
ईडी गठबंधन तो टूट चुका प्रतीत होता है
सिसोदिया नें कहा कि " मूलतः इंडी गठबंधन बैठक शुरू होने से पहले ही गठबंधन टूट चुका प्रतीत होता है । न तो अखिलेश यादव बैठक में आए,अरविंद केजरीवाल भी अनुपस्थित थे। जबकि उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव होने वाले हैं। वहीं एमके स्टालिन भी अनुपस्थित थे, डीएमके ने तो यहां तक कह दिया है कि जहां भी कांग्रेस मौजूद होगी, वह उसके साथ नहीं बैठेगी। । कई अन्य घटकों नें मात्र वर्चुअल जुड़ने की औपचारिकता की है।
“ हार गये तो चुनाव आयोग मुर्दाबाद”
सिसोदिया ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति में दोहरा मापदंड साफ दिखाई देता है। चुनाव परिणाम अनुकूल हों तो लोकतंत्र और संस्थाओं की दुहाई दी जाती है और परिणाम प्रतिकूल हों तो चुनाव आयोग तथा संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को अपना काम कानून के अनुसार करने देना चाहिए। देश की जनता वोट देती है, चुनाव आयोग चुनाव कराता है और संवैधानिक संस्थाएं अपने दायित्व निभाती हैं,किसी राजनीतिक दल की सुविधा के अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं चल सकती।
स्वच्छ मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद
मतदाता सूची को लेकर सिसोदिया ने कहा कि मृत व्यक्तियों, दोहराए गए नामों और कानून के अनुसार अपात्र नामों की पहचान कर सूची को अद्यतन करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा है। येशा पूर्व में भी कई बार हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ मतदाता सूची का विरोध करने के बजाय राजनीतिक दलों को पारदर्शी और विधिसम्मत प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल नारों से प्रभावित नहीं होती। जनता काम, नीतियों और अपने अनुभव के आधार पर मतदान करती है।
वंशवादी दलों में ही लोकतंत्र का टोटा
सिसोदिया ने कहा कि विपक्ष यदि लोकतंत्र बचाने की बात करता है तो उसे पहले अपने संगठन के भीतर लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया और नेतृत्व को लेकर स्पष्टता दिखानी चाहिए। उन्होंने 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष को जनता के सामने यह बताना चाहिए कि वह देश के भविष्य के लिए क्या ठोस वैकल्पिक नीति और कार्यक्रम लेकर आ रहा है। उन्होंने कहा कि हर चुनाव से पहले मुद्दे बदलना और हर हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाना जनता के सामने अब पुराना राजनीतिक फार्मूला बन चुका है।
सिसोदिया ने कहा कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा और मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला किसी राजनीतिक परिवार नहीं, बल्कि भारत की जनता अपने मताधिकार से करती है। लोकतंत्र में अंतिम शक्ति मतदाता के पास है और राजनीतिक दलों को संबैधानिक जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि बहानों की राजनीति छोड़कर आत्ममंथन करे, जनता के सवालों का जवाब दे और अपनी राजनीतिक रणनीति पर पुनर्विचार करे। केवल चुनाव आयोग, न्यायपालिका या संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता।
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
9414180151
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