सारा तमाशा गैर कानूनी वोटों का मतदाता सूची में बनाये रखने का है, भारत के युवाओं का भविष्य निंगल रहे घुसपैठियों को देश कतई स्वीकार नहीं करेगा - अरविन्द सिसोदिया
प्रेस विज्ञप्ति
देश के युवाओं का भविष्य किसी भी घुसपेठियों को नहीं निगलने देंगे — अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 16 अक्टूबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन न्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग पर किए जा रहे आक्रमण और डराने धमकाने की कोशिशों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, “सारा तमाशा गैरकानूनी वोटों को अपने फायदे के लिए मतदाता सूची में बनाए रखने का है, किन्तु भारत की युवाशक्ति अब घुसपैठियों को कतई स्वीकार नहीं करेगी।”
उन्होंने कहा कि, “चुनाव आयोग का विरोध कर रहे दलों में कोई यह नहीं कह रहा कि गैरकानूनी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएँ। कोई भी विपक्षी दल यह नहीं कह रहा कि भारत के युवाओं का भविष्य निगलने की कोशिश कर रही अवैध घुसपैठ रोकी जाए तथा अवैध प्रवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएँ। जबकि यह उनका प्रथम कर्तव्य है।”
सिसोदिया ने कहा कि, “किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार चुनने का अधिकार केवल और केवल वहाँ के वैध नागरिकों को होता है। लेकिन पिछले कुछ समय से भारत में मतदाता सूचियों में विदेशी घुसपैठियों के नामों को लेकर एक गंभीर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है। यह माना जाता है कि कुछ राजनीतिक दलों के संरक्षण में अवैध नाम मतदाता सूची में शामिल हो रहे हैं। इस कारण देश के विचारकों और राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि राजनीतिक लाभ के लिए गैरकानूनी वोटों को मतदाता सूची में बनाए रखने का खेल अब और नहीं चल सकता। भारत अब अपने नागरिकों के हक और सुरक्षा की कीमत पर घुसपैठियों को कतई स्वीकार नहीं करेगा।”
सिसोदिया ने कहा कि, “ वर्तमान में देश भर में चल रहे एसआईआर अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, मृत, दोहरी प्रविष्टि वाले और अवैध मतदाताओं के नामों को हटाना है। जिसका स्वागत होना चाहिए किन्तु तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीती करने वाले अवैध नामों को मतदाता सूची में बनाये रखने के षड्यंत्र के तहत झूठे आरोप लगा रहे हैँ। ”
उन्होंने कहा कि " कुछ विपक्षी दल एक खास ‘वोट बैंक’ की राजनीति के तहत अवैध प्रवासियों को संरक्षण देते हैं, जो सामान्यतः देश-विरोधी रुख रखते हैं। इस अवैध तंत्र को ध्वस्त करना देश के लोकतांत्रिक ढाँचे को बचाने के लिए अनिवार्य हो गया है। ताकी भारतीय नागरिकों के हित सुरक्षित रखे जा सकें। "
घुसपैठिये आने वाली पीढ़ी के अधिकारों पर सीधा डाका हैँ
सिसोदिया ने कहा कि, “इस राष्ट्रीय विमर्श का दूसरा और सबसे संवेदनशील पहलू है—देश के संसाधन और हमारे बच्चों का भविष्य। भारत एक सीमित संसाधनों वाला देश है, जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर पहले से ही भारी दबाव है। यदि विदेशी घुसपैठियों के लिए ‘लाल कालीन’ बिछाया जाता रहा और उन्हें अवैध रूप से नागरिकता व मताधिकार मिलते रहे, तो यह देश के वैध नागरिकों और आने वाली पीढ़ी के अधिकारों पर सीधा डाका होगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित घुसपैठ न केवल जनसांख्यिकीय असंतुलन पैदा करती है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए भी एक बड़ा खतरा है।”
सिसोदिया ने कहा कि " मतदाता सूची के इस शुद्धीकरण को लेकर आज जो राजनीतिक घमासान मचा है, यह सामान्य प्रक्रिया है, उसका एक लंबा इतिहास रहा है। सरकारी और ऐतिहासिक आँकड़ों के अनुसार, अतीत में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान कुल 7 बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। देश का पहला विशेष गहन पुनरीक्षण वर्ष 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुआ था, जिसके बाद उनके समय में ही वर्ष 1957 और 1961 में इसे दोहराया गया। इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री (1965–66), इंदिरा गांधी व राजीव गांधी के काल (1983–84), पी. वी. नरसिम्हा राव (1992–95) और मनमोहन सिंह सरकार के शुरुआती दौर (2004) तक यह अभियान अलग-अलग समय पर चलाया गया। जब पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में यह प्रक्रिया 7 बार पूरी की जा चुकी है, तो वर्तमान में इस पर अतिराजनीति करना पूरी तरह बेमानी है।"
सिसोदिया ने कहा कि, “यह स्पष्ट है कि राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता और वैध नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है। ' भारत अब घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करेगा’ का यह बढ़ता संकल्प इस बात का प्रमाण है कि देश अब अपनी सीमाओं और अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य को लेकर पूरी तरह सजग और दृढ़ हो चुका है। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम इसी तथ्य के प्रमाण हैँ। ”
भवदीय,
अरविन्द सिसोदिया
9414180151
प्रेस विज्ञप्ति
भारत की मतदातासूची अवैध घुसपेठियो से मुक्त रखना आवश्यक, देश के युवाओं का भविष्य किसी को नहीं निगलने देंगे - अरविन्द सिसोदिया
कोटा 16 अक्टूबर। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया नें कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के द्वारा चुनाव आयोग पर किये जा रहे आक्रमण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि " सारा तमाशा गैर कानूनी वोटों को अपने फायदे के लिए मतदाता सूची में बनाये रखने का है, किन्तु भारत की युवाशक्ति अब घुसपैठियों को कतई स्वीकार नहीं करेगी । " उन्होंने कहा कि " चुनाव आयोग का विरोध कर रहे दलों में कोई यह नहीं कह रहा कि अनलीगल वोट मतदाता सूची से हटाएँ जाएँ। कोई भी विपक्षी दल यह नहीं कह रहा कि भारत के युवाओं का भविष्य निंगलने की कोशिश कर रही अवैध घुसपैठ रोकी जाये, उन्हे लीगल दस्तावेजों से हटाया जाये। जबकि यह उनका प्रथम कर्तव्य है। "
सिसोदिया नें कहा कि " किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार चुनने का अधिकार केवल और केवल वहाँ के वैध नागरिकों को होता है। लेकिन पिछले कुछ समय से भारत में मतदाता सूचियों (वोटर लिस्टेस ) में विदेशी घुसपैठियों के नामों को लेकर एक गंभीर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई है। यह माना जाता है कि यह अवैध नाम कुछ राजनैतिक दलों के संरक्षण से मतदाता सूची में आरहे हैँ। इस कारण देश के विचारकों और राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि राजनीतिक लाभ के लिए गैर-कानूनी वोटों को मतदाता सूची में बनाए रखने का खेल अब और नहीं चल सकता। भारत अब अपने नागरिकों के हक और सुरक्षा की कीमत पर घुसपैठियों को कतई स्वीकार नहीं करेगा।"
सिसोदिया नें कहा कि " इस पूरे विवाद के केंद्र में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न - एसआईआर ) अभियान है। वर्तमान में देश भर में चल रहे इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, मृत, दोहरी प्रविष्टि वाले और अवैध मतदाताओं के नामों को हटाना है। " उन्होंने कहा कि विपक्षी दल एक खास 'वोट बैंक' की राजनीति के तहत अवैध प्रवासियों को संरक्षण देते हैं, जो सामान्यतः देश विरोधी रुख रखते हैं। इस अवैध तंत्र को ध्वस्त करना देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने के लिए अनिवार्य हो गया है।"
देश के युवाओं के भविष्य को, घुसपैठियों को नहीं खाने देंगे
सिसोदिया नें कहा कि " इस राष्ट्रीय विमर्श का दूसरा और सबसे संवेदनशील पहलू है—देश के संसाधनों और हमारे बच्चों का भविष्य। भारत एक सीमित संसाधनों वाला देश है, जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर पहले से ही भारी दबाव है। यदि विदेशी घुसपैठियों के लिए 'रेड कारपेट' बिछाया जाता रहा और उन्हें अवैध रूप से नागरिकता व मताधिकार मिलते रहे, तो यह देश के वैध नागरिकों और आने वाली पीढ़ी के अधिकारों पर सीधा डाका होगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित घुसपैठ न केवल जनसांख्यिकीय असंतुलन (डेमोग्राफ़िक शिफ्ट ) पैदा करती है, बल्कि आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए भी एक बड़ा खतरा है।
सिसोदिया नें कहा कि दिलचस्प बात यह है कि मतदाता सूची के इस शुद्धीकरण (एस आई आर) को लेकर आज जो राजनीतिक घमासान मचा है, उसका एक लंबा इतिहास रहा है। सरकारी और ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, अतीत में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान कुल 7 बार एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। देश का पहला एसआईआर वर्ष 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुआ था, जिसके बाद उनके समय में ही वर्ष 1957 और 1961 में इसे दोहराया गया। इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री (1965-66), इंदिरा व राजीव गांधी के काल (1983-84), पी. वी. नरसिम्हा राव (1992-95) और मनमोहन सिंह सरकार के शुरुआती दौर (2004) तक यह अभियान अलग-अलग समय पर चलाया गया। ऐसे में विचारकों का तर्क है कि जब पूर्व की सरकारों में यह विधिक प्रक्रिया सात बार पूरी की जा चुकी है, तो वर्तमान में इस पर अतिराजनीति करना पूरी तरह बेमानी है।
सिसोदिया नें कहा कि " यह स्पष्ट है कि राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता और वैध नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है। "भारत अब घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करेगा" का यह बढ़ता संकल्प इस बात का प्रमाण है कि देश अब अपनी सीमाओं और अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य को लेकर पूरी तरह सजग और दृढ़ हो चुका है।"
भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
9414180151
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