राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष समापन कार्यक्रम 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष (100 साल पूरे होने) के समापन के ऐतिहासिक अवसर पर, 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपना वार्षिक संबोधन दिया।
कार्यक्रम में दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्त मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
सरसंघचालक मोहन भागवत के 2026 के विजयादशमी संबोधन के मुख्य बिंदु और बड़े संदेश निम्नलिखित हैं:-
1. वैश्विक और आंतरिक चुनौतियाँ (रिजीम चेंज की साजिशें)
• विदेशी ताकतों का हस्तक्षेप: मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम से चली एक आंधी दुनिया भर की सभ्यता, सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संस्कारों को नष्ट करना चाहती है। उन्होंने बांग्लादेश, फ्रांस और अल्बानिया जैसे देशों का उदाहरण देते हुए सचेत किया कि भारत में भी ऐसी ही अस्थिरता (रिजीम चेंज या सत्ता परिवर्तन) पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि अपने पिट्ठुओं को बैठाया जा सके।
• देश को तोड़ने की साजिश: उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ आंतरिक और बाहरी तत्व अपने स्वार्थ के लिए समाज को आपस में बांटने का काम कर रहे हैं।
2. डिजिटल युग और सामाजिक कुरीतियाँ (AI, OTT और नशा)
• ओटीटी और एआई पर नियमन: वर्तमान तकनीकों पर चिंता जताते हुए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर परोसी जा रही सामग्रियों के नियमन (कंट्रोल) की आवश्यकता पर जोर दिया।
• नशे के खिलाफ आह्वान: समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति के खिलाफ सामूहिक रूप से खड़े होने और युवाओं को इससे बचाने की अपील की।
3. सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता
• विभाजन से कमजोरी: उन्होंने कहा कि आपस में विभाजित होने के कारण ही हम अतीत में कमजोर हुए हैं। उन्होंने विविधता के सम्मान और सामाजिक समरसता को राष्ट्र निर्माण की कुंजी बताया।
• पंच परिवर्तन: समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उन्होंने 'पंच परिवर्तन' (मूल्यों, आचरण और सेवाभाव में बदलाव) पर बल दिया, जिसकी सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की है।
• आचरण का महत्व: उन्होंने कहा कि अपनी मूल जीवन-दृष्टि और आचरण को भूलने के कारण ही हमारा पतन हुआ है, इसलिए समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटना होगा। [1]
4. भारत की वैश्विक जिम्मेदारी (विश्वगुरु की भूमिका)
• भागवत ने जोर देकर कहा कि भारत के पास पूरी दुनिया को सार्वभौमिक धर्म (Universal Dharma) और वैश्विक सद्भाव का पाठ पढ़ाने की पवित्र जिम्मेदारी है।
• उन्होंने भारत को 'विश्वगुरु' बनाने के लिए नई और भावी पीढ़ी को पूरी तरह तैयार करने का सुझाव दिया।
5. महापुरुषों का स्मरण
शताब्दी वर्ष के इस संबोधन में उन्होंने समाज को त्याग और सेवा की प्रेरणा देने वाले कई महापुरुषों का विशेष उल्लेख किया, जिनमें शामिल हैं:
• संत रविदास महाराज (650वीं जयंती)
• स्वामी श्रद्धानंद (बलिदान के 100 वर्ष)
• स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती (जन्मशताब्दी)
• राजनारायण बसु (200वीं जयंती)
भाषण से पूर्व परंपरा के अनुसार नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भव्य पथ संचलन और शस्त्र पूजा का भी आयोजन किया गया।
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