Urgent डिमांड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'मेटा' Metaके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही करने हेतु संयुक्त मांग पत्र।
स्थान - कोटा
दिनांक: 8 अगस्त 2026
माननीय प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार, नई दिल्ली।
प्रतिलिपि:
माननीय मंत्री जी,
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार।
आदरणीय,
हम इस ईमेल के माध्यम से आपका ध्यान सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज वैश्विक कंपनी 'मेटा' (Meta/Facebook/Instagram/WhatsApp) की हालिया संदेहास्पद, भेदभावपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना गतिविधियों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल बाजार है, लेकिन मेटा जैसी विदेशी कंपनियाँ भारतीय कानूनों, यहाँ के नागरिकों की सुरक्षा और प्राइवेसी को लगातार ताक पर रख रही हैं।
अतः देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक ताने-बाने और डिजिटल संप्रभुता के हित में हमारी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
* देश के नेतृत्व का सम्मान: हाल ही में तकनीकी गड़बड़ी के बहाने देश के शीर्ष नेतृत्व के वीडियो को ब्लॉक किया जाना भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक सीधा प्रहार है। किसी विदेशी निजी कंपनी को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह भारत के शीर्ष नेतृत्व की सामग्री को अपनी मर्जी से सेंसर करे।
* बाल सुरक्षा (CSAM): इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्मों पर विज्ञापनों और रील्स के माध्यम से बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) का प्रसार देश के भविष्य के लिए बेहद गंभीर खतरा है, जिसे रोकने में मेटा का एल्गोरिदम पूरी तरह विफल रहा है।
* डीपफेक और एआई का दुरुपयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जनित भ्रामक वीडियो/तस्वीरों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले मामलों में सामग्री हटाने की समय-सीमा (3 घंटे) को कड़ाई से लागू किया जाए।
* व्हाट्सएप प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा: व्हाट्सएप द्वारा भारतीय उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा और चैट के कमर्शियल इस्तेमाल की कोशिशें नागरिकों की निजता के मौलिक अधिकार का हनन हैं। मेटा को मजबूर किया जाए कि वह भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा भारत की सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित (Local Data Storage) रखे।
* स्थानीय भारतीय भाषाओं के मॉडरेटर्स की नियुक्ति: भारत की क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं (जैसे हिंदी, तमिल, बंगाली, मराठी आदि) में अभद्र भाषा और फेक न्यूज को पकड़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में स्थानीय मॉडरेटर्स की नियुक्ति अनिवार्य की जाए, ताकि भाषाई क्षेत्रों में तनाव न फैले।
* भारतीय संविधान की सर्वोच्चता: मेटा अक्सर भारत में अमेरिकी कानूनों की आड़ लेकर बचती रही है। हमारी मांग है कि भारत में संचालित होने वाले हर डिजिटल प्लेटफॉर्म को अनिवार्य रूप से केवल और केवल भारतीय संविधान और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों के तहत ही जवाबदेह बनाया जाए।
* 'सेफ हार्बर' (Safe Harbor) सुरक्षा की समाप्ति: आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को मिलने वाली कानूनी प्रतिरक्षा (Safe Harbor) को तुरंत समाप्त या निलंबित किया जाए, ताकि इन प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट होने वाली हर अवैध सामग्री के लिए मेटा को सीधे तौर पर सह-आरोपी बनाया जा सके।
हमारी मुख्य मांगें:-
1. भारत सरकार मेटा को एक निश्चित समय सीमा के भीतर नया और सख्त कम्प्लायंस रोडमैप जमा करने के लिए बाध्य करे।
2. भारत की सभी अनुसूचित भाषाओं के लिए पर्याप्त संख्या में स्थानीय भाषा मॉडरेटर्स की नियुक्ति अनिवार्य की जाए।
3. नियमों का उल्लंघन होने पर मेटा के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।
4. यदि कंपनी आदतन नियमों की अनदेखी करती है, तो भारत में इसकी सेवाओं पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने या पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े विकल्पों पर विचार किया जाए।
हमें पूरा विश्वास है कि आपके सक्षम नेतृत्व में भारत सरकार देश की डिजिटल संप्रभुता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए 'मेटा' के विरुद्ध एक ऐतिहासिक और कठोर उदाहरण स्थापित करेगी।
सधन्यवाद।
भवदीय,
अरविन्द सिसोदिया
शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी
राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल, जयपुर
निवास - राधाकृष्ण मन्दिर रोड़, ड़ड़वाड़ा, कोटा जंक्शन
पिनकोड - 324002
मोबाइल नंबर - 9414180151
……….…………
To (मुख्य प्रेषिती): connect@mygov.nic.in, pmoindia@gov.in
(प्रधानमंत्री कार्यालय और भारत सरकार के आधिकारिक ईमेल)
CC (प्रतिलिपि): ashwini.vaishnaw@sansad.nic.in, secretary-meity@meity.gov.in
(केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव के आधिकारिक ईमेल)
Subject (विषय): [Urgent Demand] सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'मेटा' (Meta) के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही करने हेतु संयुक्त मांग पत्र।
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