दिल्ली जंतर मंतर और विदेशी फंडिंग

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों के बाद जांच एजेंसियों ने कथित विदेशी फंडिंग और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को लेकर अपनी जांच तेज कर दी है। 

## 🔍 जांच और छापेमारी की मुख्य बातें

* चार शहरों में छापेमारी: जांच एजेंसियों ने पिछले तीन दिनों में [मुंबई] के कई ठिकानों पर सघन छापेमारी की है। 

* कंपनियां रडार पर: एजेंसियों के रडार पर 5 से अधिक कंपनियां हैं, जिनमें मुख्य रूप से डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के लिए काम करने वाली फर्में शामिल हैं। 

* दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त: छापेमारी के दौरान कंपनियों के वित्तीय लेनदेन, कैंपेन और इंफ्लूएंसर के बीच हुए एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए हैं और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं। 

* टूलकिट और नैरेटिव की जांच: जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों की छवि खराब करने के लिए क्या एआई (AI) एडिटेड वीडियो और भ्रामक पोस्ट प्रसारित करने के लिए फंडिंग की गई थी। 

## 💼 गृह मंत्रालय को शिकायत और विदेशी कनेक्शन के आरोप

* दुबई कारोबारी का नाम: विवाद के केंद्र में दुबई स्थित 'एब्रेको फ्रेट' के मालिक मोहम्मद शाजी मडथिल (शाजी निलंबुर) का नाम सामने आया है। 

* 23 कर्मचारियों को भेजने का आरोप: उन पर आरोप है कि उन्होंने दुबई ऑफिस से 23 मलयाली कर्मचारियों की टीम को हवाई टिकट, फाइव-स्टार होटल में ठहराव और भत्ते देकर जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल पर भेजा था। 

* जांच की मांग: इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से शिकायत कर एनआईए (NIA) और ईडी (ED) से जांच कराने की मांग की गई है। 

## 🏛️ विदेश मंत्रालय और कोर्ट का रुख

* विदेश मंत्रालय (MEA): विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया था कि फिलहाल उनके पास विदेशी फंडिंग के संबंध में साझा करने के लिए कोई आधिकारिक जानकारी या सबूत नहीं है। 

* [दिल्ली हाई कोर्ट]:
 कोर्ट में प्रदर्शन की एनआईए जांच कराने के लिए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने एनआईए जांच के आदेश देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की स्थिति में कार्रवाई के लिए सामान्य कानूनी प्रक्रियाएं पहले से मौजूद हैं। 

पुख्ता सबूत और डिजिटल रिकॉर्ड जुटाने के बाद इस पूरे मामले में जांच एजेंसियां जल्द ही आधिकारिक एफआईआर (FIR) भी दर्ज कर सकती हैं। 

क्या आप इस प्रदर्शन से जुड़ी मांगों या सीजेपी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके के बारे में कोई विशिष्ट जानकारी चाहते हैं?

======

Jantar Mantar Protest: Probe into CJP's foreign funding; five companies on agencies' राडार

Jantar Mantar Protest: सीजेपी की विदेशी फंडिंग की जांच, एजेंसियों के रडार पर पांच कंपनियां; चार शहर में छापा

Sun, 02 Aug 2026
दिल्ली-एनसीआर

एजेंसियां पता लगा रही हैं कि किन माध्यमों से फंड जुटाए गए। जांच एजेंसियों के रडार पर पांच से ज्यादा कंपनियां हैं। इनमें कुछ डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के लिए काम करने वाली कंपनियां भी हैं।

Jantar Mantar Protest: Probe into CJP's foreign funding; five companies on agencies' radar
बीते तीन दिनों में कंपनियों के मुंबई, बंगलूरू, गुरुग्राम व दिल्ली के कई ठिकानों पर छापे मारे गए। 
विस्तार

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर जांच एजेंसियां विदेशी फंडिंग समेत कई बिंदुओं पर जांच कर रही हैं। एजेंसियां पता लगा रही हैं कि किन माध्यमों से फंड जुटाए गए। जांच एजेंसियों के रडार पर पांच से ज्यादा कंपनियां हैं। इनमें कुछ डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के लिए काम करने वाली कंपनियां भी हैं।

बीते तीन दिनों में कंपनियों के मुंबई, बंगलूरू, गुरुग्राम व दिल्ली के कई ठिकानों पर छापे मारे गए। कंपनियों के वित्तीय लेन-देन, कैंपेन, इंफ्लूएंसर के बीच एग्रीमेंट समेत कई दस्तावेज खंगाले गए। कुछ डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, जांच में कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की बात भी सामने आई है। इसके जरिये सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को भी जांच के दायरे में लाया जा रहा है। पुख्ता सबूत और लिखित, डिजिटल रिकॉर्ड जुटाने के बाद मामले में एफआईआर भी दर्ज होगी। 

2000 संदिग्ध अकाउंट की जांच
जांच में पता चला कि एआई एडिटेड वीडियो और गलत पोस्ट प्रसारित करवाए गए, ताकि पीएम और मंत्रियों की छवि खराब हो सके। करीब दो हजार से ज्यादा संदिग्ध अकाउंट की पहचान हुई है। जिनमें कई अकाउंट विदेश से, तो करीब 700 अकाउंट भारत मेंे चलाए जा रहे थे। एजेंसियां उनसे जुड़े डिजिटल डाटा सुरक्षित रखने संबंधी जानकारी भी जुटा रहीं हैं। 

जैश आतंकी की जंतर-मंतर पर तोड़फोड़ की थी साजिश
कोलकाता। पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने गिरफ्तार जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिम मंडल की साजिश का खुलासा किया है। मंडल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन में पुलिस की वर्दी पहनकर तोड़-फोड़ करने की साजिश रची थी। सूत्रों ने बताया कि कई पुलिस अधिकारी और राजनेता भी हामिम के निशाने पर थे। 


Jantar Mantar Student Protest: Did Jaish-e-Mohammed Hatch the Plot?
जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन: क्या जैश-ए-मोहम्मद ने रची थी साजिश?

Delhi: Criminals with a track record of robberies and heists also participated in the Jantar Mantar protest
Delhi: डकैती-लूट में अर्धशतक लगा चुके बदमाश भी शामिल थे जंतर मंतर प्रदर्शन में, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से पहचान
दिल्ली-एनसीआर
Probe Intensifies Into CJP Digital Campaign, Influencers Under Scanner Over Alleged Paid Posts
CJP डिजिटल कैंपेन पर शिकंजा, दावा 40–80 हजार लेकर किए गए पोस्ट !
देश
Jantar Mantar protest and violence: Preparations underway to crack down on several major influencers and YouTu
जंतर मंतर प्रदर्शन और हिंसा: कई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और यूट्यूबर पर कसेगा शिकंजा, तीन कंपनियां भी रडार पर
दिल्ली-एनसीआर
Jantar Mantar Protest: FIR claims AAP leaders, along with CJP
Jantar Mantar Protest: एफआईआर में दावा- हिंसा में सीजेपी के साथ आप नेताओं का भी हाथ, सुनियोजित साजिश बताया
दिल्ली-एनसीआर

जांच के दायरे में यूट्यूबर भी
बताया जा रहा है कि प्रदर्शन और हिंसा को लेकर जांच एजेंसियों के दायरे में कई यूट्यूबर भी हैं। उनकी भूमिका संदिग्ध है जिसमें पैसों का खेल दिखाई दे रहा है। 

======
हां, भारत में हर साल कितने IAS, IPS, डॉक्टर और इंजीनियर बनते हैं, इसका पूरा रिकॉर्ड (Data) मौजूद है। हालांकि, इन चारों क्षेत्रों का रिकॉर्ड रखने वाली संस्थाएं और उनके तरीके अलग-अलग हैं। सरकार के पास आजादी के बाद से लेकर अब तक (1947 से 2026 तक) का हर साल का सटीक डेटा उपलब्ध है। [1, 2, 3, 4, 5] 
इन चारों प्रोफेशन के रिकॉर्ड और सालाना आंकड़ों का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
## 1. IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) और IPS (भारतीय पुलिस सेवा)
IAS और IPS देश की 'अखिल भारतीय सेवाएं' (All India Services) हैं। इनका सालाना चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा किया जाता है और इसका पूरा लेखा-जोखा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और गृह मंत्रालय (MHA) के पास सुरक्षित रहता है। [2, 6, 7, 8] 

* सालाना संख्या: पिछले कुछ दशकों से प्रशासनिक सुधारों (बसवान समिति) के तहत प्रति वर्ष 180 IAS अधिकारी चुने जाते हैं। वहीं हर साल लगभग 200 IPS अधिकारी चुने जाते हैं। [2, 3, 4, 9] 
* कुल वर्तमान संख्या: वर्तमान में पूरे भारत में लगभग 5,577 सक्रिय IAS अधिकारी (स्वीकृत पद 6,877) और लगभग 5,047 IPS अधिकारी सेवा में हैं। [6, 8, 10, 11] 
* रिकॉर्ड की उपलब्धता: सरकार हर साल DoPT की आधिकारिक वेबसाइट पर 'Civil List' जारी करती है। इसमें आजादी के बाद से अब तक के हर बैच के एक-एक अधिकारी का नाम, जन्मतिथि और उनकी राज्य कैडर की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज होती है। [8, 12] 

------------------------------
## 2. डॉक्टर्स (Doctors)
भारत में हर साल कितने डॉक्टर (MBBS) डिग्री पूरी कर रहे हैं, इसका रिकॉर्ड नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) (पूर्व में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया - MCI) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय रखता है।

* सालाना संख्या: वर्तमान समय (2025-2026) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल 1 लाख से अधिक डॉक्टर (MBBS毕业生) बनकर तैयार होते हैं। आजादी के समय (1947) यह संख्या महज कुछ हजारों में थी, लेकिन आज देश में 700 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं।
* रिकॉर्ड की उपलब्धता: हर डॉक्टर को प्रैक्टिस करने के लिए NMC या राज्य मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। NMC के 'Indian Medical Register' में आजादी के बाद से देश के हर रजिस्टर्ड डॉक्टर का डेटाबेस मौजूद है।

------------------------------
## 3. इंजीनियर्स (Engineers)
देश में तकनीकी शिक्षा और हर साल बनने वाले इंजीनियरों का रिकॉर्ड अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) के पास होता है।

* सालाना संख्या: भारत दुनिया में सबसे ज्यादा इंजीनियर बनाने वाले देशों में से एक है। वर्तमान में भारत में हर साल लगभग 12 लाख से 15 लाख इंजीनियर (B.Tech/B.E.) पास आउट होते हैं।
* रिकॉर्ड की उपलब्धता: AICTE हर साल अपनी रिपोर्ट में देश के सभी मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों की कुल सीटों और पास होने वाले छात्रों का सांख्यिकीय डेटा (Statistical Data) जारी करता है।

------------------------------
## एक दिलचस्प फैक्ट: अधिकारियों में इंजीनियर्स-डॉक्टर्स का दबदबा
संसदीय समितियों और DoPT के हालिया आंकड़ों से एक बेहद रोचक ट्रेंड सामने आया है। आज के समय में UPSC (IAS/IPS) में सिलेक्ट होने वाले युवाओं में सबसे बड़ी संख्या इंजीनियर्स और डॉक्टर्स की ही है। [8, 13, 14, 15] 

* हाल के वर्षों के डेटा के अनुसार, UPSC सिविल सेवा में सफल होने वाले उम्मीदवारों में लगभग 60% से 65% अकेले इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के होते हैं। [14, 15] 
* लगभग 4% से 5% उम्मीदवार मेडिकल (डॉक्टर्स) बैकग्राउंड से होते हैं। [14, 15] 
* यानी देश के जो बेहतरीन दिमाग डॉक्टर या इंजीनियर बनते हैं, उनमें से कई बाद में प्रशासनिक अधिकारी (IAS/IPS) बन जाते हैं। [1, 13, 15] 

------------------------------

यह समझना बेहद दिलचस्प है कि भारत की आजादी के बाद से दशक दर दशक (Decade by Decade) सिविल सेवा परीक्षा (UPSC), मेडिकल और इंजीनियरिंग के क्षेत्र का विस्तार कैसे हुआ।
शुरुआती दशकों में देश में संसाधन और आबादी दोनों कम थे, इसलिए आवेदकों और चयनित होने वालों की संख्या आज के मुकाबले बहुत छोटी थी। जैसे-जैसे दशक बीतते गए, यह संख्या लाखों-करोड़ों में बदल गई।
दशक दर दशक का अनुमानित सांख्यिकीय डेटा (Statistical Data) और ट्रेंड नीचे दी गई तालिकाओं में स्पष्ट रूप से समझाया गया है:

## 1. IAS और IPS (दशक दर दशक चयन का ट्रेंड)
1950 और 1960 के दशक में परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों की संख्या बहुत कम (हजारों में) होती थी और परीक्षा केवल मुख्य लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होती थी (प्रारंभिक परीक्षा यानी Prelims की शुरुआत 1979 में हुई)। 

| दशक / वर्ष | कुल आवेदन/परीक्षार्थी (लगभग) | मुख्य परीक्षा/इंटरव्यू तक पहुँचे | कुल चयनित (सभी सेवाएं) | सालाना IAS चयन | सालाना IPS चयन |
|---|---|---|---|---|---|
| 1950 का दशक | 3,000 से 5,000 | 500 - 800 | 50 - 100 | ~30 से 40 | ~25 से 35 |

| 1960 का दशक | 10,000 से 15,000 | 1,000 - 1,500 | 200 - 300 | ~80 से 100 | ~60 से 75 |

| 1970 का दशक | 20,000 से 30,000 | 2,000 - 3,000 | 400 - 500 | ~120 से 140 | ~80 से 100 |

| 1990 का दशक | 2.5 लाख से 3 लाख | ~10,000 (Mains) | 600 - 700 | ~80 से 100* | ~60 से 80 |

| 2010 का दशक | 8 लाख से 10 लाख | ~15,000 (Mains) | 900 - 1100 | ~180 (फिक्स) | ~150 से 200 |

| 2020 का दशक | 11 लाख से 13 लाख | ~14,000 (Mains) | 900 - 1000 | ~180 (फिक्स) | ~200 (फिक्स) |


*नोट: 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद सरकार ने 'डाउनसाइजिंग' (सरकारी पदों को सीमित करना) की नीति अपनाई थी, जिससे उस दौर में कुछ सालों के लिए IAS की वैकेंसी घटकर 80 तक आ गई थी। बाद में प्रशासनिक कमी को देखते हुए इसे बढ़ाकर 180 फिक्स किया गया।

------------------------------
## 2. डॉक्टर्स (MBBS graduates)
आजादी के समय देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती थी (लगभग 20-25 कॉलेज)। आज देश में 700 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं।

* 1950 का दशक: पूरे देश में हर साल मुश्किल से 1,500 से 2,000 डॉक्टर पास आउट होते थे।

* 1970 का दशक: कॉलेजों की संख्या बढ़ने से यह आंकड़ा सालाना 8,000 से 10,000 डॉक्टर तक पहुँचा।

* 1990 का दशक: प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत हुई और सालाना 20,000 से 25,000 डॉक्टर बनने लगे।

* वर्तमान दौर (2020 का दशक): [NMC के अनुसार] अब NEET परीक्षा में हर साल 20 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी बैठते हैं और देश में प्रति वर्ष 1 लाख से अधिक डॉक्टर्स (MBBS) डिग्री पूरी करते हैं।
------------------------------
## 3. इंजीनियर्स (B.Tech / B.E.)
इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत ने सबसे बड़ा उछाल देखा है। 1950 के दशक में इंजीनियरिंग को बेहद दुर्लभ और कुलीन (Elite) पढ़ाई माना जाता था।

* 1950 का दशक: देश में गिने-चुने इंजीनियरिंग कॉलेज और शुरुआती IITs थे। हर साल केवल 3,000 से 4,000 इंजीनियर डिग्री पाते थे।

* 1970 का दशक: देश में औद्योगीकरण बढ़ा। सालाना इंजीनियरिंग स्नातकों की संख्या 20,000 से 25,000 तक पहुँची। 

* 1990 का दशक: IT सेक्टर (कंप्यूटर क्रांति) का दौर शुरू हुआ। देश में प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की बाढ़ आ गई। सालाना संख्या 1.5 लाख से 2 लाख पार कर गई।

* वर्तमान दौर (2020 का दशक): आज JEE और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में लाखों छात्र बैठते हैं। [AICTE के रिकॉर्ड के अनुसार]

(https://www.aicte-india.org/) भारत में हर साल 12 लाख से 15 लाख इंजीनियर पास आउट होते हैं।

## मुख्य निष्कर्ष (Key Trend)
आजादी के बाद (1950) से आज तक, जहां IAS और IPS बनने वालों की संख्या में केवल 4 से 5 गुना की वृद्धि हुई है (क्योंकि यह सरकारी पदों और कैडर स्ट्रेंथ पर निर्भर है), वहीं देश में डॉक्टरों की संख्या में 50 गुना और इंजीनियरों की संख्या में 350 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 





टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव,कैंसर का 'झाड़ा'

हिन्दु भूमि की हम संतान नित्य करेंगे उसका ध्यान

तीन जन्मों की याद : स्वर्णलता तिवारी

कांग्रेस की हिन्दू विरोधी मानसिकता का प्रमाण

देशहित सबसे पहले, हर षड्यंत्र की परतें खोलें, देश का जनमत आपके साथ है — अरविन्द सिसोदिया

संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो

जीवन मे कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो