विकृत मानसिकता से अपने बच्चों की सुरक्षा करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है — अरविन्द सिसोदिया


स्कूल में जबरिया घुसपैठ करने आये लोगों की तत्काल गिरफ्तारी हो - अरविन्द सिसोदिया 

विकृत मानसिकता से अपने बच्चों की सुरक्षा करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है — अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 22 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने जयपुर के निकट ग्रामीणों और कथित सीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, "अपने बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों द्वारा किया गया प्रतिरोध स्वाभाविक है। बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को भी आत्मरक्षा तथा सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है।"

सिसोदिया ने कहा कि, "देश सीजेपी की अनैतिक, आपराधिक और अराजकतावादी मानसिकता को जंतर-मंतर से लेकर आए दिन दिए जाने वाले सार्वजनिक वक्तव्यों तक देख और महसूस कर रहा है। देश का सामाजिक वातावरण इस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों को पूरी तरह अस्वीकार करता है।"

उन्होंने कहा कि, "गाली-गलौज करने वाले तथा अनैतिक आचरण और अशोभनीय गतिविधियों का प्रदर्शन करने वाले लोगों से अपने बच्चों की सुरक्षा हर नागरिक चाहता है। अधिकांश देशवासी ऐसे आचरण को पसंद नहीं करते और अपने बच्चों को ऐसे वातावरण से दूर रखना चाहते हैं।"

सिसोदिया ने कहा कि, "भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 24 तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से संबंधित कानूनी प्रावधान बच्चों को शोषण, हिंसा और असुरक्षित वातावरण से बचाने के लिए नागरिकों और राज्य की जिम्मेदारी को रेखांकित करती हैं।"

उन्होंने कहा कि, "भारत का संविधान शासन की व्यवस्था देशवासियों द्वारा निर्वाचित सरकार को सौंपता है। जिन्हें जनता ने शासन के लिए निर्वाचित नहीं किया है और जिन्हें शासन में हस्तक्षेप क कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है, वे जबरदस्ती 'सुपर सरकार' कैसे बन सकते हैं? कोई भी नागरिक सीजेपी का गुलाम नहीं है।"

सिसोदिया ने कहा कि, "सरकार को ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अराजकता फैलाने, कानून - व्यवस्था भंग करने और बच्चों, शिक्षकों अथवा आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि " स्कूल पर हमला करने आये लोगों के विरुद्ध तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जानी चाहिए, किसी भी संगठन, समूह या व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती, शैक्षिक व्यवस्था और समाज में भय एवं अराजकता उत्पन्न करनेवालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाये ।"

उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। इसमें किसी भी संगठन या समूह को कानून-व्यवस्था हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। वहीं शिक्षकों और तथा अभिभावकों के अधिकारों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती। पुलिस और प्रशासन क़ानून व्यवस्था के प्रति अपने दायित्वों का दृढ़ता से पालन करें।

भवदीय 
अरविन्द सिसोदिया 
9414180151


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विकृत मानसिकता से अपने बच्चों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, कोई भी सीजेपी का गुलाम नहीं है - अरविन्द सिसोदिया

भारतीय बच्चों को पढ़ने दें, विदेशीहितों से दुष्प्रेरित अनैतिक षड्यंत्र बंद करें - अरविन्द सिसोदिया 

कोटा 22 अगस्त। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया नें अवैधरूप से कथित सीजेपी कार्यकर्ताओं और ग्रामवासियों के बीच हुई टकराव की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि " जयपुर के निकट ग्रामीणों नें अपने बच्चों व शिक्षकों की सुरक्षा के लिए जो प्रतिरोध किया वह स्वाभाविक है। " उन्होंने कहा कि " बच्चों, शिक्षकों और अविभावकों को भी आत्मरक्षा और व्यवस्था निर्माण का पूरा अधिकार हैँ। "  

सिसोदिया ने कहा कि " देश कॉकरोज की अनैतिक व आराजकतावादी मानसिकता को जंतर मंतर से लेकर आये दिन के सार्वजनिक वक्तव्योँ में देख रहा है, महसूस कर रहा है और देश का सामाजिक वातावरण इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों को पूरी तरह अस्वीकार करता है। " 


सिसोदिया नें कहा कि " गंदी गंदी गालियां देनें वाले, अनैतिकता का प्रगटीकरण करनेवाले आचरण करने वालों से अपने बच्चों की सुरक्षा सभी नागरिक चाहते हैँ। अधिकांश देशवासी इनसे घृणा करते हैँ और अपने बच्चों को दूर रखना चाहते हैँ। " उन्होंने कहा कि " भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 और 24 तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों को हर प्रकार के शोषण और असुरक्षित माहौल से बचाने का अधिकार नागरिकों और राज्य को देता है। "

सिसोदिया नें कहा कि " भारत का संविधान शासन की व्यवस्था देशवासियों द्वारा निर्वाचित सरकार को देती है, जो जनता के द्वारा चुने ही नहीं गये, जिन्हे कोई अधिकार ही नहीं है, वे जबरदस्ती सुपर सरकार कैसे बन सकते हैँ। कोई भी सीजेपी का गुलाम नहीं है। "

सिसोदिया नें कहा कि " आम जनता का मानना है कि सीजेपी जैसे संगठन युवाओं की भावनाओं और उनके मुद्दों का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक एजेंडे को चमकाने के लिए कर रहे हैं, जिससे अंततः युवा पीढ़ी का भविष्य ही दांव पर लग रहा है। 






कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और जेन जी (Gen Z) के नाम पर हो रहे कुछ प्रदर्शनों को लेकर आम जनता, स्थानीय निवासियों और विचारकों में तीव्र आक्रोश और विरोध देखा जा रहा है। इस विरोध और जन-असंतोष के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण और चिंताएं सामने आई हैं: -

* अभद्र शब्दावली और गाली-गलौज की संस्कृति: जंतर-मंतर और सोशल मीडिया पर हुए आंदोलनों के दौरान कुछ युवाओं द्वारा घोर आपत्तिजनक, अश्लील और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया। सभ्य समाज और आम परिवारों में इस "गालियों की रेस" को लेकर भारी नाराजगी है, क्योंकि इसे अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर बदतमीजी को बढ़ावा देना माना जा रहा है। 


* कानून-व्यवस्था को चुनौती: आंदोलन के नाम पर सड़कों पर अराजकता फैलाने, अभद्र नारेबाजी करने और कानून को अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति देखी गई। कई मामलों में पुलिस ने अभद्र वीडियो बनाने और शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में युवाओं के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है।

* राजनीतिक स्वार्थ के लिए जेन जी (Gen Z) का इस्तेमाल: आलोचकों और आम जनता का मानना है कि सीजेपी जैसे संगठन युवाओं (Gen Z) की भावनाओं और उनके मुद्दों का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक एजेंडे को चमकाने के लिए कर रहे हैं, जिससे अंततः युवा पीढ़ी का भविष्य ही दांव पर लग रहा है। 

* जमीनी स्तर पर जनता का विरोध: राजस्थान के बगरू और अन्य ग्रामीण इलाकों में जब सीजेपी की टीमें 'स्कूल ठीक करो' अभियान के नाम पर सरकारी स्कूलों में पहुंचीं, तो वहां के [स्थानीय ग्रामीणों और लोगों ने उनका कड़ा विरोध किया]। ग्रामीणों का कहना था कि वे अपने स्तर पर स्कूलों की मरम्मत करवा सकते हैं और उन्हें इस राजनीतिक अराजकता का हिस्सा नहीं बनना है।

* कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई: पार्टी द्वारा गैर-पंजीकृत होने के बावजूद बड़े पैमाने पर चंदा जुटाने और राजनीतिक दल जैसा आचरण करने के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायतें दर्ज की गई हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में इसकी आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी कड़ी कार्रवाई की है। 

यही कारण है कि कल तक जो युवा सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज के लिए इस अभद्रता को "कूल" या "बोल्ड" समझ रहे थे, वे अब पुलिस की कानूनी कार्रवाई और सामाजिक बहिष्कार के डर से माफी मांगते नजर आ रहे हैं। आम नागरिकों का यह विरोध किसी जायज मांग के खिलाफ नहीं, बल्कि आंदोलन की आड़ में फैलाई जा रही अश्लीलता और अराजकता के खिलाफ है। 
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'चलो संसद' मार्च और विरोध प्रदर्शनों में आपराधिक व अराजक तत्वों की घुसपैठ की पुष्टि आधिकारिक जांच रिपोर्टों में होने के बाद यह पूरा आंदोलन गंभीर रूप से कटघरे में खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस द्वारा गृह मंत्रालय को सौंपी गई आंतरिक और आधिकारिक स्क्रूटनी रिपोर्ट के अनुसार, इस छात्र आंदोलन की आड़ में बड़े पैमाने पर हिस्ट्रीशीटरों और आदतन अपराधियों ने घुसपैठ की थी। इस विषय से जुड़े मुख्य तथ्यात्मक पहलू निम्नलिखित हैं: 

* आधिकारिक पुलिस डेटा और गंभीर आरोप: दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और तकनीकी डेटा के माध्यम से जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों की पहचान की, जिनमें से 989 व्यक्तियों का पुराना आपराधिक इतिहास पाया गया। इनमें हत्या के 101 आरोपी, हत्या के प्रयास के 62 मामले, डकैती/लूटपाट के 284 मामले, और आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार) व एनडीपीएस (नशीले पदार्थ) के सैकड़ों आरोपी शामिल थे। 

* 20 जुलाई का संसद मार्च और भड़की हिंसा: सीजेपी के 20 जुलाई 2026 को हुए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच भारी झड़प हुई। बिना प्रशासनिक अनुमति के हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में घुसने और बैरिकेड्स तोड़ने के प्रयास के कारण हुई इस हिंसा में लगभग 200 पुलिसकर्मी और 65 से अधिक छात्र व प्रदर्शनकारी घायल हुए थे, साथ ही सरकारी वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया। 

* सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख व कानूनी वर्गीकरण: इस मामले पर सुनवाई करते हुए [सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट विभाजन रेखा खींची]। अदालत ने आदेश दिया कि बिना किसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले वास्तविक छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएं, लेकिन गंभीर अपराधों (जैसे हत्या, दुष्कर्म, डकैती) के पुराने रिकॉर्ड वाले तत्वों को किसी भी प्रकार की कानूनी राहत या माफी देने से साफ इनकार कर दिया। 

* संगठन का बचाव और पलटवार: विवाद बढ़ने पर [सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बयान जारी कर कहा] कि इतने बड़े जनआंदोलन में भीड़ को पूरी तरह नियंत्रित करना मुमकिन नहीं था。 उन्होंने दलील दी कि यदि कोई बाहरी आपराधिक तत्व भीड़ में घुसा भी था, तो वे सीजेपी का हिस्सा नहीं हैं और पुलिस को वास्तविक छात्रों व आंदोलनकारियों को प्रताड़ित करने के बजाय केवल उन अपराधियों पर अलग से कार्रवाई करनी चाहिए। 

राजनीतिक विश्लेषकों और आम नागरिकों का मानना है कि नीट (NEET-UG) पेपर लीक मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसे बड़े मुद्दे से शुरू हुआ यह आंदोलन, अराजक तत्वों की संलिप्तता, तोड़फोड़ और सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल के कारण अपनी नैतिक साख खोता जा रहा है। 
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कानूनी रूप से बिना अनुमति किसी भी निजी या सरकारी संपत्ति में प्रवेश करना 'अवैध प्रवेश' (Criminal Trespass) की श्रेणी में आता है, और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा स्कूलों में किए जा रहे इस व्यवधान को रोकने के लिए अब सरकारों ने कड़े कानूनी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। [1, 2] 
[भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329 (पूर्व में IPC की धारा 441/442)](https://devgan.in/bns/section/329/) के तहत किसी की सहमति के बिना उसकी संपत्ति (चाहे वह घर हो या स्कूल) में घुसना, डराना या परेशान करना एक दंडनीय अपराध है। [3, 4] 
हाल ही में सीजेपी के 'स्कूल ठीक करो' अभियान के नाम पर स्कूलों में जबरन घुसने और व्यवधान पैदा करने की घटनाओं पर प्रशासन ने निम्नलिखित कानूनी और प्रशासनिक रोक लगाई है:
## 1. राजस्थान सरकार का सख्त प्रतिबंध (आधिकारिक आदेश)
सीजेपी के बिना अनुमति स्कूलों में घुसने और शिक्षकों से अभद्रता करने के मामलों के बाद [राजस्थान के शिक्षा विभाग ने अगस्त 2026 में एक आपातकालीन आदेश जारी किया है](https://www.thehindu.com/news/national/rajasthan/rajasthan-restricts-entry-of-outsiders-in-govt-schools-after-cjp-says-it-will-conduct-inspection/article71355460.ece): [5, 6] 

* प्रवेश पर पूर्ण रोक: अब स्कूल के प्रधानाचार्य (Principal) या संस्था प्रधान की लिखित अनुमति के बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता। [6] 
* फ़ोटोग्राफ़ी और वीडियोग्राफ़ी पर बैन: छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा और निजता का हवाला देते हुए स्कूल के अंदर बिना मंजूरी के फ़ोटो खींचने, वीडियो बनाने या लाइव स्ट्रीमिंग करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। [5, 6] 
* विज़िटर रजिस्टर अनिवार्य: स्कूल में आने वाले हर बाहरी व्यक्ति को अब मुख्य द्वार पर विज़िटर रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर और आने का कारण दर्ज करना होगा। [6] 

## 2. स्थानीय जनता और ग्रामीणों द्वारा जमीनी विरोध
चूंकि किसी भी बाहरी संगठन को सरकारी संस्थानों में समानांतर प्रशासन चलाने या कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है, इसलिए जमीनी स्तर पर भी इसका भारी विरोध हो रहा है:

* जयपुर के बगरू में हिंसक झड़प: जयपुर के बगरू (रामपुरा कंवरपुरा) में जब सीजेपी की टीम एक सरकारी स्कूल का "निरीक्षण" करने पहुंची, तो स्थानीय ग्रामीणों और लोगों ने उन्हें गांव से खदेड़ दिया और उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़ की। ग्रामीणों का कहना था कि वे अपने स्कूल की समस्याएं स्थानीय स्तर पर सुलझा सकते हैं और वे किसी बाहरी राजनीतिक प्रोपेगैंडा का हिस्सा नहीं बनना चाहते। [7, 8] 
* हैदराबाद और तेलंगाना में भी रोक: तेलंगाना के [हैदराबाद](https://www.google.com/search?kgmid=/m/09c6w), [मल्कजगिरी](https://www.google.com/search?kgmid=/g/11n39p1nzv) और [सिकंदराबाद](https://www.google.com/search?kgmid=/m/03z760) जैसे क्षेत्रों में भी प्रशासन ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को बिना अनुमति के स्कूलों में सोशल ऑडिट करने और व्यवधान डालने से रोक दिया है। [9] 

## 3. शिक्षकों के साथ अभद्रता पर कानूनी कार्रवाई
महाराष्ट्र के हिंगोली में एक सरकारी स्कूल के दौरे के दौरान सीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा स्कूल के शिक्षकों के साथ कैमरे पर बदतमीजी और दुर्व्यवहार करने का वीडियो सामने आने के बाद सरकारी कर्मचारी (सरकारी सेवक) के कार्य में बाधा डालने और मानहानि के तहत भी कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है। [10] 
निष्कर्ष: कानूनन कोई भी गैर-सरकारी संगठन या गैर-पंजीकृत राजनीतिक दल खुद को 'प्रशासन' मानकर सरकारी कार्यालयों या स्कूलों में जांच के नाम पर अराजकता नहीं फैला सकता। यदि वे ऐसा करते हैं, तो स्कूल प्रशासन उनके खिलाफ BNS की धारा 329 (Criminal Trespass) और सरकारी कार्य में बाधा डालने के तहत तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर उनकी गिरफ्तारी करवा सकता है। 

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स्कूलों में CJP की अराजकता और अवैध घुसपैठ के विरुद्ध

दिनांक: 21 अगस्त 2026
स्थान: नई दिल्ली / जयपुर

"हम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों द्वारा 'स्कूल ठीक करो' अभियान की आड़ में देश के विभिन्न राज्यों (विशेषकर राजस्थान, महाराष्ट्र और तेलंगाना) के सरकारी स्कूलों में बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के जबरन घुसने, वहां का शैक्षणिक माहौल खराब करने और सम्मानित शिक्षकों के साथ की जा रही अभद्रता की कड़े शब्दों में घोर निंदा करते हैं।
शिक्षा के मंदिर राजनीति और अराजकता का अखाड़ा नहीं हो सकते। किसी भी गैर-पंजीकृत संगठन या राजनीतिक दल को यह अधिकार नहीं है कि वह स्वयं को कानून और प्रशासन से ऊपर मानकर सरकारी संपत्तियों में अवैध प्रवेश (Criminal Trespass) करे। CJP द्वारा कैमरों के सामने व्यूज और लाइक्स बटोरने के लिए राष्ट्र-निर्माता शिक्षकों को प्रताड़ित करना और छात्राओं की निजता व सुरक्षा को खतरे में डालना अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय कृत्य है।

राजस्थान के बगरू (जयपुर) सहित देश के अन्य हिस्सों में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा CJP का किया गया कड़ा विरोध यह साबित करता है कि आम जनता बच्चों के सुरक्षित भविष्य और स्कूलों की गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
हम राज्य सरकारों और स्थानीय पुलिस प्रशासन से मांग करते हैं कि ऐसे तत्वों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329 तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। स्कूलों में बिना अनुमति वीडियोग्राफी करने वाले अराजक तत्वों को तुरंत गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए, ताकि हमारे बच्चों का भविष्य और स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित रह सके।"




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