भारत की स्वतंत्रता के लिए, 15 अगस्त ही क्यों चुना...?


15 अगस्त ही क्यों चुना....यह सोचना पूरी तरह स्वाभाविक है, क्योंकि तारीख का चुनाव निश्चित रूप से ब्रिटिश कमांडर लॉर्ड माउंटबेटन के अहंकार और उनके व्यक्तिगत "विजय दिवस" से जुड़ा था। लेकिन भारत की स्वतंत्रता की असलियत केवल इस एक तारीख तक सीमित नहीं है। माउंटबेटन का फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक औपचारिकता (Formalities) और तारीख का ठप्पा था, जबकि आजादी का असली आधार दशकों लंबा संघर्ष था। 

## आजादी की असली वजहें

* जन आंदोलन का दबाव: महात्मा गांधी के नेतृत्व में [भारत] छोड़ो आंदोलन, सविनय अवज्ञा और असहयोग आंदोलनों ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी। 

* आजाद हिंद फौज का खौफ: नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी 'आजाद हिंद फौज' के सैन्य प्रयासों ने अंग्रेजों को यह अहसास करा दिया था कि वे अब भारतीय सैनिकों के भरोसे राज नहीं कर सकते।

* नौसेना विद्रोह (1946): मुंबई में हुए रॉयल इंडियन नेवी के विद्रोह ने ब्रिटिश सरकार को डरा दिया कि अब भारतीय सशस्त्र बल उनके नियंत्रण में नहीं हैं। 

* ब्रिटेन की आर्थिक कंगाली: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन आर्थिक रूप से इतना कमजोर हो चुका था कि उसके लिए इतने बड़े उपनिवेश (Colony) पर नियंत्रण रखना नामुमकिन था। 

संक्षेप में कहें तो, अंग्रेजों ने अपनी मर्जी से [भारत] को 'गिफ्ट' में आजादी नहीं दी, बल्कि उन्हें भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। माउंटबेटन ने केवल अपनी पसंद का दिन (Date) चुना था, लेकिन आजादी (Independence) भारतीयों ने अपने बलिदान से छीनी थी।
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द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर विजय दिवस (VJ Day - Victory over Japan Day) और उसमें [लॉर्ड माउंटबेटन] की भूमिका का ऐतिहासिक ब्यौरा इस प्रकार है: 

## 1. युद्ध का अंतिम दौर और परमाणु हमला (अगस्त 1945)

* परमाणु हमले: अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा और 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर [परमाणु बम गिराए]

* सोवियत संघ की एंट्री: इसी दौरान सोवियत संघ ने भी जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी, जिससे जापानी सेना पूरी तरह घिर गई। 

## 2. बिना शर्त आत्मसमर्पण की घोषणा (15 अगस्त 1945)

* सम्राट का संदेश: 15 अगस्त 1945 को जापान के सम्राट हिरोहितो ने रेडियो पर देश को संबोधित किया। उन्होंने मित्र राष्ट्रों (Allies) की 'पोट्सडैम घोषणा' की शर्तों को स्वीकार करते हुए बिना शर्त आत्मसमर्पण (Unconditional Surrender) का ऐलान किया। 

* घोषणा की अहमियत: इसी दिन को ब्रिटेन और अमेरिका में आधिकारिक रूप से 'जापान पर विजय दिवस' (VJ Day) घोषित किया गया था। 

## 3. लॉर्ड माउंटबेटन की भूमिका और ऐतिहासिक हस्ताक्षर
[लॉर्ड लुईस माउंटबेटन] उस समय दक्षिण-पूर्व एशिया कमांड (SEAC) के सुप्रीम अलाइड कमांडर (सर्वोच्च मित्र सेनापति) थे। इस नाते पूरे क्षेत्र में जापानी सेना को घुटनों पर लाने का जिम्मा उनका था: 

* टोक्यो खाड़ी में मुख्य हस्ताक्षर (2 सितंबर 1945): युद्ध की आधिकारिक समाप्ति 2 सितंबर 1945 को हुई, जब टोक्यो खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस मिसौरी (USS Missouri) पर जापान ने आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

* सिंगापुर में माउंटबेटन का मुख्य समारोह (12 सितंबर 1945): माउंटबेटन ने दक्षिण-पूर्व एशिया (सिंगापुर, मलय, बर्मा आदि) में तैनात जापानी सेना का आत्मसमर्पण स्वीकार करने के लिए 12 सितंबर 1945 को सिंगापुर के सिटी हॉल में एक भव्य समारोह आयोजित किया।

* तलवारें सरेंडर कराईं: यहाँ जापानी जनरल सेइशिरो इतागाकी ने माउंटबेटन के सामने आत्मसमर्पण के दस्तावेजों पर दस्तखत किए। माउंटबेटन ने जापानी सैन्य कमांडरों की तलवारें भी अपने कब्जे में लीं, जो ब्रिटिश सेना की बड़ी प्रतिष्ठा का प्रतीक बनीं। 

## माउंटबेटन के लिए 15 अगस्त का महत्व
भले ही सिंगापुर में सरेंडर के कागजात पर दस्तखत सितंबर में हुए थे, लेकिन 15 अगस्त 1945 वह ऐतिहासिक दिन था जब जापानी सम्राट ने हार मानकर युद्ध रोकने का रेडियो संदेश दिया था। [8] 
चूंकि [माउंटबेटन] इस पूरी कमांड के मुखिया थे, इसलिए इस तारीख को वे अपने करियर की सबसे बड़ी कामयाबी और "पर्सनल लकी डे" मानते थे। यही वजह थी कि दो साल बाद, जब उन्हें भारत को जल्दबाजी में सत्ता सौंपनी पड़ी, तो उन्होंने अपने इसी विजय दिवस (15 अगस्त 1947) को चुना। 


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