कविता - राष्ट्रधर्म की हर कसौटी पर आगे बढ़ना होगा
कविता - राष्ट्रधर्म की हर कसौटी पर आगे बढ़ना होगा
- अरविन्द सिसोदिया 9414180151
राष्ट्रवाद के प्रखर प्रहरी बनकर उभरना होगा,
अंदर-बाहर के हर शत्रु को ध्वस्त करना होगा।
राणा-शिवा की संतानों! अब बजरंगी बनना होगा,
राष्ट्रधर्म की हर कसौटी पर आगे बढ़ना होगा॥
===1===
मत पूछो हम कौन हैं, भारत की पहचान हैं,
गंगा की पावन धारा, हिमगिरि का स्वाभिमान हैं।
झुकना हमने सीखा नहीं, रुकना हमें गवारा कहां,
हम तो माँ भारती के चरणों का अमर सम्मान हैं॥
===2===
जब-जब मातृभूमि ने रण का संदेश दिया,
वीरों ने हँसते-हँसते शीशों को समर्पित किया।
रक्त की हर एक बूँद बूंद तिरंगे का स्वाभिमान है ,
भारत माँ की जय-जयकार ही जीवन का अरमान है।
===3===
भूलो मत हल्दीघाटी की वह गौरवमयी हुंकार,
भूलो मत सिंहगढ़ पर गूँजी शिवबा की ललकार।
चंद्रशेखर का साहस, भगत सिंह का बलिदान ,
चलते हैं हम लेकर अपना अमर स्वाभिमान॥
===4===
नहीं चाहिए वैभव ऐसा, जो राष्ट्रधर्म भुला दे,
नहीं चाहिए जीवन ऐसा, जो स्वाभिमान झुका दे।
यदि आवश्यकता पड़े वतन पर प्राण निछावर करने की,
भारत का हर नवयुवक फिर इतिहास नया बना देगा॥
===5===
जब तक गंगा की धारा है, जब तक नभ में सूरज है,
जब तक भारत माँ की धरती पर वीरों का गर्जन है।
तब तक कोई शक्ति नहीं इस राष्ट्र को झुका पाएगी,
हर भारतवासी के सीने में जब तक भगवा का स्पंदन है॥
===6===
आओ मिलकर आज शपथ लें, यह प्रण कभी न टूटेगा,
भारत का गौरव, भारत का मस्तक कभी न झुकेगा।
वंदे मातरम् की गूँज से अंबर भी थर्रा जाएगा,
भारत माँ का हर बेटा फिर इतिहास रच जाएगा॥
===समाप्त===
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