कविता - रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति


कविता 
रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति
- अरविन्द सिसोदिया 
रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति,
संकल्प है समाज की शक्ति के प्रति।
भाई-बहन के अटूट प्रेम की प्रतिष्ठा के प्रति,
इसमें न कमी आने देना,
यह संकल्प है जगत-जननी के प्रति।
रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति।
====1====
राखी केवल धागा नहीं, विश्वास की पहचान है,
बहना के स्नेह में ममता, भाई में रक्षा का मान है।
भाई दूज भी कहता है, रिश्ता रहे अटूट सदा,
बहन का सम्मान और सुरक्षा, यही धर्म का विधान है।
नारी का आदर करना, सनातन की पहचान है,
नारी के सम्मान से ही घर, समाज और राष्ट्र महान है।
====2====
नारी जननी, नारी शक्ति, नारी जीवन का आधार है,
दुर्गा में शक्ति, सरस्वती में ज्ञान, लक्ष्मी का अवतार है।
वेदों में गूँजी गार्गी-मैत्रेयी की ज्ञानमयी वाणी,
नारी के साहस और सामर्थ्य की अमर निशानी।
नारी अबला नहीं, वह सृजन और सामर्थ्य की कर्ता है,
उसके अधिकारों का सम्मान ही संस्कृति का सम्मान है।
====3====
शिक्षा मिले, सुरक्षा मिले, स्वतंत्रता का अधिकार मिले,
हर बेटी को आगे बढ़ने के समान अवसर मिले।
नारी केवल पूजित प्रतिमा नहीं, जीवन की सक्रिय शक्ति है,
हर क्षेत्र में उसकी सहभागिता ही राष्ट्र की सच्ची भक्ति है।
जहाँ नारी का मान सुरक्षित, वहाँ संस्कृति महान है,
जहाँ नारी बराबर सहभागी, वही राष्ट्र बलवान है।
====4====
आओ इस रक्षाबंधन पर, केवल उत्सव नहीं मनाएँ,
बहन की रक्षा के साथ उसके सपनों की भी रक्षा कर पाएँ।
भेदभाव की हर दीवार गिराएँ, समानता का दीप जलाएँ,
नारी के सम्मान को जीवन का संकल्प बनाएँ।
प्रेम, विश्वास, समान अधिकार—यही भारत की शान है,
नारी शक्ति के सम्मान से ही भारत महान है।
रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति,
यह संकल्प है हर नारी, हर जगत-जननी के प्रति।

====समाप्त====
======

कविता - भाई-बहन के प्रेम की अविरल धारा
- अरविन्द सिसोदिया 

रक्षाबंधन और भाई दूज के पर्व बताते,
सनातन! नारी का सर्वोच्च सम्मान संवारे।
भाई-बहन के प्रेम की अविरल धारा,
सह-अस्तित्व का सुंदर अडिग विधान प्यारा।
===1===
राखी केवल धागा नहीं, विश्वास की डोरी,
भाई के मन में बहना की रक्षा का मान है।
भाई-दूज सिखाता स्नेह और शुभकामनाएँ,
रिश्तों में प्रेम ही सबसे बड़ा धनवान है।
===2===
नारी जननी, नारी शक्ति, नारी जीवन का आधार,
नारी से ही सृष्टि सजी, नारी से संसार।
दुर्गा में शक्ति, सरस्वती में ज्ञान,
लक्ष्मी में समृद्धि का दिव्य स्वरूप महान।
वेदों में गूँजी गार्गी-मैत्रेयी की वाणी,
ज्ञान-तपस्या से बनी संस्कृति की निशानी।
नारी अबला नहीं, सामर्थ्य की पहचान है,
उसका गौरव ही सनातन का अभिमान है।
===3===
नारी केवल पूजित प्रतिमा नहीं, सक्रिय जीवन है,
उसकी शिक्षा, सुरक्षा, स्वतंत्रता उसका अधिकार है।
समान अवसर, समान अधिकार मिले उसको,
तभी समाज सशक्त और राष्ट्र महान है।
जहाँ नारी का मान सुरक्षित और सम्मानित,
वहीं संस्कृति का उत्थान, वहीं सच्चा ज्ञान है।
नारी सहभागी बने विकास के हर पथ पर,
यही भारत के भविष्य का उज्ज्वल निर्माण है।
===4===
आओ इन पावन पर्वों पर संकल्प नया लें,
हर बहन, हर बेटी का सम्मान करें।
रक्षा के साथ उसके सपनों की भी रक्षा हो,
उसके अधिकारों का हम सब सम्मान करें।
प्रेम, समानता, विश्वास और सद्भाव बढ़ाएँ,
भेदभाव की हर दीवार को आज गिराएँ।
नारी शक्ति, नारी सम्मान से भारत महान हो,
यही सनातन संस्कृति का सच्चा अभियान हो।
===समाप्त===

॥ नारी सम्मान — राष्ट्र का अभिमान ॥






टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

माँ बाण माता : सिसोदिया वंश की कुलदेवी

भारत का परमवैभव तथा विश्वगुरुत्व हम में से प्रत्येक के पुरुषार्थ से सिद्ध होने वाला है – डॉ. मोहन भागवत जी

मेटा और मस्क का भारतीय संप्रभुता विरोधी रवैया बड़ा खतरा, इन्हें राष्ट्रीय शत्रु घोषित किया जाये - अरविन्द सिसोदिया

हर साल रावण कद बढ़ाता कमीशन के चक़्कर में

श्री चांदमारी बालाजी मंदिर मार्ग कोटा की समस्या व समाधान Chandmari Balaji Kota

कांग्रेस सहित विपक्षी दल जमीनीस्तर पर नाकाम हैँ और अपनी नाकामी का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ते हैँ - सिसोदिया

राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव,कैंसर का 'झाड़ा'