कविता - रक्षाबंधन का पर्व बताता
कविता - रक्षाबंधन का पर्व बताता
सनातन में स्त्री का सर्वोच्च स्वाभिमान है।
नारी है समानता की सहभागीता,
ईश्वर में भी उसका बराबरी का सम्मान है।
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बहन में स्नेह, ममता की धारा,
भाई में रक्षा का संकल्प महान है।
बंधन यह केवल धागा नहीं,
रिश्तों की गरिमा का विधान है।
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नारी जननी, नारी जीवन,
नारी से ही सृष्टि का अभियान है।
शक्ति वही, सरस्वती वही,
लक्ष्मी का भी वही स्वरूप महान है।
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वेदों में गूँजी उसकी वाणी,
गार्गी-मैत्रेयी उसका प्रमाण हैं।
ज्ञान, तपस्या, साहस, नेतृत्व—
नारी के अपने अधिकार हैं।
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जहाँ नारी का मान सुरक्षित,
वहीं संस्कृति का उत्थान है।
जहाँ मिले समान अवसर उसको,
वहीं राष्ट्र का सच्चा अभिमान है।
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नारी केवल पूजित प्रतिमा नहीं,
वह जीवन की सक्रिय पहचान है।
सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वतंत्रता,
यही सनातन का सच्चा विधान है।
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रक्षाबंधन हर वर्ष संदेशा देता है,
रिश्तों में विश्वास महान है।
सिर्फ बहन की रक्षा ही नहीं,
उसका सम्मान धर्म-विधान है।
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आओ आज प्रतिज्ञा लें हम,
हर नारी की सुरक्षा कर्तव्य हमारा है।
समान अधिकार, समान अवसर,
यही भारत की अविरल पहचान है।
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रक्षाबंधन पर्व बताता,
सनातन में नारी का ईश्वरीय मान है।
नारी है शक्ति, नारी सहभागी,
नारी से ही संस्कृति महान है।
====समाप्त ====
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