जंतर मंतर और सीमापार के हस्तक्षेप उजागर किये जाएँ
## 📑 व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्ट: जंतर-मंतर (दिल्ली) आतंकी व डिजिटल हाइब्रिड साजिश का पर्दाफाश
दिनांक: अगस्त 2026
दस्तावेज़ वर्गीकरण: समेकित विशेष सुरक्षा और तकनीकी विश्लेषण रिपोर्ट
जांच और तकनीकी नोड: पंजाब पुलिस, पश्चिम बंगाल STF, दिल्ली पुलिस साइबर सेल, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
------------------------------
## 1. मुख्य निष्कर्ष (Executive Summary)
जुलाई और अगस्त 2026 के बीच भारत की विभिन्न प्रांतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश की राजधानी को दहलाने की एक अत्यंत परिष्कृत 'हाइब्रिड साजिश' (Hybrid Plot) को विफल किया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र व CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के बड़े विरोध-प्रदर्शनों को मुख्य टारगेट बनाया था। साजिश का दोहरा उद्देश्य था: ज़मीनी स्तर पर पेट्रोल बम से हमला कर भारी हिंसा भड़काना और इंटरनेट पर 'मेटा' (Meta/फेसबुक-इंस्टाग्राम) जैसे वैश्विक टेक प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम का दुरुपयोग करके देशव्यापी दंगे भड़काना।
------------------------------
## 2. ऑन-ग्राउंड आतंकी कड़ियाँ: तीन राज्यों का नेटवर्क## क. पंजाब मॉड्यूल (ISI समर्थित स्लीपर सेल)
* कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ: अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने तत्कालीन कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में सीमा-पार से संचालित दो आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 4 नाबालिग (Minors) शामिल थे। इनके पास से 3 अत्याधुनिक पिस्टल, 9 कारतूस और 4 तैयार पेट्रोल बोतल बम बरामद किए गए।
* आरोपियों का बयान और रेकी: आरोपियों ने स्वीकार किया कि ISI आकाओं ने उन्हें पैसों का लालच देकर दिल्ली के जंतर-मंतर भेजा था। उन्होंने बकायदा ट्रेन से दिल्ली जाकर जंतर-मंतर धरना स्थल की पूरी रेकी (Surveillance) की थी।
* हमला विफल होने का कारण: आरोपी पेट्रोल बम से हमला करने ही वाले थे, लेकिन दिल्ली पुलिस की अत्यधिक सख्त बैरिकेडिंग और भारी सुरक्षा घेरे को देखकर वे डर गए और बिना हमला किए वापस पंजाब लौट आए, जिसके बाद उन्हें दबोच लिया गया।
* आधिकारिक स्पष्टीकरण: [पंजाब पुलिस ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया](https://www.hindustantimes.com/cities/chandigarh-news/punjab-police-refute-claim-linking-jantar-mantar-protest-to-isi-module-101786043249701.html) कि ये आतंकी जंतर-मंतर पर हमला करके अशांति फैलाना चाहते थे, लेकिन वहाँ प्रदर्शन कर रहे आम छात्रों का इस आतंकी मॉड्यूल से कोई सीधा या संगठित संबंध नहीं था।
## ख. पश्चिम बंगाल मॉड्यूल (जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क)
* कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ: पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पूर्व बर्धमान से हामीम मंडल (Hamim Mondal) और हावड़ा से आदित्य सिंह को गिरफ्तार किया। इस मॉड्यूल की मुख्य कढ़ी अर्पिता सरकार को झारखंड के साहिबगंज से पकड़ा गया।
* पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय कड़ियाँ: हामीम मंडल पाकिस्तान के 'शाहजाद भट्टी गैंग' से जुड़े 4 प्रमुख हैंडल्स—Abir Jat333, Uzair, Rana, और Hamad के सीधे संपर्क में था, जो यूके (UK) और मेक्सिको के वीओआईपी (VOIP) नंबरों का इस्तेमाल कर रहे थे।
* साजिश का तरीका (Modus Operandi): हामीम मंडल ने कबूल किया कि उसे जंतर-मंतर के प्रदर्शन में 'दिल्ली पुलिस की वर्दी' पहनकर घुसपैठ करने का टास्क मिला था। योजना यह थी कि पुलिस की वर्दी में भीड़ पर पेट्रोल बम फेंके जाएं, जिससे जनता में यह संदेश जाए कि पुलिस प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा हमला कर रही है, और पूरे देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो जाए। अर्पिता सरकार हनीट्रैप और इंस्टाग्राम के जरिए वीआईपी (VIPs) की सुरक्षा और मूवमेंट की खुफिया जानकारी लीक कर रही थी।
------------------------------
## 3. डिजिटल प्रोपेगैंडा वॉर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका
ज़मीनी हमलों के समानांतर, सोशल मीडिया पर भारत विरोधी नैरेटिव और दंगे भड़काने के लिए एक अभूतपूर्व डिजिटल ऑपरेशन चलाया गया:
## क. दिल्ली पुलिस का डिजिटल क्रैकडाउन और नोटिसेज
* पाकिस्तानी बोट नेटवर्क (Bot Networks): दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच में पाया कि 20 से 23 जुलाई के बीच जंतर-मंतर प्रदर्शनों से जुड़ी भड़काऊ, फेक रील्स और एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो को अचानक कृत्रिम रूप से हवा दी जा रही थी।
* अकाउंट्स ब्लॉक करना: दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान से संचालित हो रहे 400 से अधिक सोशल मीडिया हैंडल्स को चिन्हित कर ब्लॉक करवाया, जो सरकारी अधिकारियों के बयानों को तोड़-मरोड़ कर और फेक रील्स के जरिए भारत में दंगे भड़काने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही भड़काऊ और अपमानजनक पोस्ट करने वाले कई हैंडल धारकों को आईटी एक्ट (IT Act) के तहत नोटिस जारी किए गए।
## ख. मेटा (Meta) की आधिकारिक स्वीकारोक्ति और माफी
इस डिजिटल प्रोपेगैंडा के बीच, आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और इलेक्ट्रॉनिकी व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के साथ मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) के शीर्ष नेतृत्व की गंभीर बैठकें हुईं, जिसमें निम्नलिखित बातें सामने आईं:
* मेटा द्वारा गंभीर कमियों की स्वीकारोक्ति: मेटा के ग्लोबल पॉलिसी हेड जोएल कपलान (Joel Kaplan) ने आधिकारिक तौर पर भारत सरकार के सामने स्वीकार किया कि उनके प्लेटफॉर्म पर बॉट अकाउंट्स, डीपफेक्स और अनलेबल्ड एआई कंटेंट को नियंत्रित करने में गंभीर तकनीकी खामियां (Serious Issues) रही हैं।
* पेड प्रमोशन का दुरुपयोग: मेटा ने यह माना कि जंतर-मंतर प्रदर्शनों के दौरान 'पेड प्रमोशन्स' (Paid Content) का दुरुपयोग करके भारत-विरोधी और अशांति फैलाने वाले कंटेंट को आर्गेनिक (प्राकृतिक) दिखाने की कोशिश की गई और विशिष्ट ऑडियंस को टारगेट किया गया।
* मार्क जुकरबर्ग की तरफ से माफी: मेटा ने स्वीकार किया कि उनके ऑटोमेटेड एआई फिल्टर्स की गलती (ओपरेशनल एरर) के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वपूर्ण रील/पोस्ट पर अस्थाई रोक लग गई थी। जोएल कपलान ने इस प्रशासनिक और तकनीकी चूक के लिए मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) की ओर से भारत के आईटी मंत्री से सीधे माफी मांगी और कंटेंट को बहाल किया।
## ग. एक्स (X) और गूगल/यूट्यूब को सख्त निर्देश
* दिल्ली पुलिस ने 'द हिंदू' और 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट्स के अनुसार इंस्टाग्राम, एक्स (X) और गूगल को सैकड़ों टेकडाउन नोटिस (Takedown Notices) जारी किए। इन प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने सर्वर लॉग्स दिल्ली पुलिस और एनआईए (NIA) से साझा करें ताकि विदेश से फंडेड इन डिजिटल ऑपरेशन्स के वित्तीय स्रोतों (Financial Trails) का पता लगाया जा सके।
------------------------------
## 4. वर्तमान प्रशासनिक और सुरक्षा स्थिति
* प्रशासनिक विवाद: इस बेहद संवेदनशील आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने के ठीक बाद, 7 अगस्त 2026 को पंजाब सरकार ने अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर का अचानक तबादला कर दिया और उन्हें डीजीपी कार्यालय चंडीगढ़ रिपोर्ट करने को कहा। विपक्ष (भाजपा नेताओं) ने आरोप लगाया है कि जंतर-मंतर पर आतंकी साजिश के खुलासे से पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध के कारण सरकार ने यह दंडात्मक कदम उठाया। हालांकि, सरकार ने इसे रूटीन प्रशासनिक फेरबदल बताया है।
* केंद्रीय एजेंसियों का टेकओवर: मामले के अंतर-राज्यीय (Inter-State) और अंतरराष्ट्रीय (International) आयामों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश पर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) इस पूरे हाइब्रिड नेटवर्क की सघन जांच कर रही है।
* जंतर-मंतर पर न्यायिक रुख: इस बीच सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के बड़े खतरे को देखते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने भी केंद्र सरकार से सवाल किया है कि क्या सुरक्षा और शहर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में पूरी तरह से बंद (Shut Down) किया जा सकता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें