कविता - जेन जी के नाम पर मतिभ्रष्टता न फैलाएँ
कविता - जेन जी के नाम पर मतिभ्रष्ट साम्यवाद न फैलाएँ
-अरविन्द सिसोदिया
जेन जी के नाम पर मतिभ्रष्टता न फैलाएँ,
असभ्यता के अंधकार में नई पीढ़ी को न उलझाएँ।
आराजकतावाद से सावधान हो जाएँ,
माता-पिता, भाई-बहन सब जाग जाएँ।
====1====
गंदी-गंदी गालीयों से कोई भविष्य निर्माण नहीं ,
चरित्रहीनता का पथ कभी स्वाभिमान नहीं ।
संस्कारों की ज्योति हर आँगन में जलाएँ,
भारत की गौरव-गाथा बच्चों को सुनाएँ।
====2====
जो तोड़ने की बात करे, उससे सचेत रहो,
जो जोड़ने की राह दिखाए, उसके संग बढ़ो।
कलम उठा कर ज्ञान का प्रकाश फैलाए,
वाणी गूंजा कर सत्य और साहस सिखाए।
====3====
युवा वही जो राष्ट्रधर्म का मान बढ़ाए,
अपने कर्मों से भारत का मस्तक ऊँचा उठाए।
नफ़रत की आँधी चाहे कितनी भी आए,
प्रेम और सद्भाव का दीप का दीप जलाएं ।
====4====
परिश्रम, अनुशासन और सेवा को अपनाएँ,
स्वार्थ और आलस्य को सबसे पहले दूर भगाएँ।
हम सब मिलकर ऐसा जाग्रत भारत बनाएँ,
जहाँ संस्कृति, सभ्यता और सदाचार मुस्काएँ।
====5====
आराजकतावाद से सावधान हो जाएँ,
माता-पिता, भाई-बहन सब जाग जाएँ।
===समाप्त====
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें