लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में संसदीय गरिमा, सुधार और ऐतिहासिक उपलब्धियों का नया अध्याय- अरविन्द सिसोदिया
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लोकसभा अध्यक्ष के रुप में लगातार सात वर्ष पूर्ण होनें पर आलेख
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में संसदीय गरिमा, सुधार और ऐतिहासिक उपलब्धियों का नया अध्याय - अरविन्द सिसोदिया
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की संसद के लोकसभा सदन के माननीय अध्यक्ष ओम बिरला, अध्यक्ष के रूप में सफल 7 साल पूर्ण कर चुके हैँ। बिरला भारत के सफल और गंभीर राजनेताओं में सुमार होते हैँ। वे विनम्रता की प्रतिमूर्ति और जन सरोकारों के लिए निरंतर प्रयत्नरत, मधुर व्यवहार और अत्यंत मिलनसार व्यक्तित्व के धनी है। Veb तीन बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा चुनाव जीत कर, लगातार दूसरी बार निर्विरोध लोकसभा अध्यक्ष हैँ। उनके नाम दर्ज यह उपलब्धियां, यह सम्मान, उनके विराट व्यक्तित्व का परिचय देता है।
भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक परंपराओं, संवाद और जवाबदेही का प्रतीक भी है। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष का दायित्व केवल सदन का संचालन करना नहीं, बल्कि संसदीय मर्यादाओं को सुदृढ़ करना, सभी पक्षों को समान अवसर देना और विधायी प्रक्रिया को प्रभावी बनाना भी होता है। 17वीं और 18वीं लोकसभा के माननीय अध्यक्ष के रूप में श्री ओम बिरला ने इन सभी दायित्वों का निर्वहन करते हुए संसदीय इतिहास में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। लगातार दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने वाले पिछले दो दशकों के पहले अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कार्यकुशलता, अनुशासन, पारदर्शिता और नवाचार का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसे भारतीय संसदीय इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा।
ऐतिहासिक उत्पादकता और प्रभावी विधायी नेतृत्व
ओम बिरला के प्रथम कार्यकाल (2019–2024) में लोकसभा ने 25 वर्षों की सर्वाधिक औसत 97 प्रतिशत कार्य उत्पादकता दर्ज की। यह उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय रही क्योंकि इसी अवधि में कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी का कठिन दौर आया। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद संसद के कुछ सत्रों में 167 से 170 प्रतिशत तक की अभूतपूर्व उत्पादकता हासिल हुई, जिसने भारतीय संसदीय व्यवस्था की कार्यक्षमता का नया मानक स्थापित किया।
इस कार्यकाल में कुल 222 विधेयक पारित हुए, जिन पर 440 घंटे से अधिक समय तक विस्तृत चर्चा हुई। यह दर्शाता है कि उनके नेतृत्व में संसद केवल कानून पारित करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि गंभीर विमर्श और व्यापक बहस की परंपरा को भी आगे बढ़ाया गया।
राष्ट्रहित से जुड़े ऐतिहासिक कानून
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कार्यकाल में अनेक ऐसे विधेयक कानून बने जिन्होंने भारत की राजनीतिक, सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक राष्ट्रसम्मत परिवर्तन किए। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने का ऐतिहासिक निर्णय इसी अवधि में संसद ने लिया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी ए ए ), मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम द्वारा तीन तलाक की कुप्रथा का अंत तथा नए संसद भवन में पारित पहला कानून—नारी शक्ति वंदन अधिनियम—भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं, जिसके माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
इसी दौरान औपनिवेशिक दौर के भारतीय दंड संहिता (आईपीसी ), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी ) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लेने वाले तीन नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस ) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए)पारित किए गए। इसके अतिरिक्त डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े आधुनिक प्रावधान, विवाद से विश्वास जैसी आर्थिक सुधार पहल, सरोगेसी नियमन तथा बाल विवाह निषेध कानून में संशोधन जैसे अनेक महत्वपूर्ण विधायी कदम भी इसी कालखंड में आगे बढ़े।
संसदीय संचालन में अनुशासन और नई कार्यसंस्कृति
लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि संसद का संचालन केवल नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप ही होगा। उन्होंने संसदीय मर्यादा, अनुशासन और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सदन के संचालन की नई कार्यसंस्कृति विकसित की। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करते हुए सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले।
विशेष रूप से पहली बार चुने गए सांसदों, युवा सांसदों और महिला सांसदों को अधिकाधिक अवसर प्रदान करने की उनकी पहल व्यापक रूप से सराही गई। आवश्यकता पड़ने पर सदन को देर रात तक चलाकर भी अधिकाधिक सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।
डिजिटल संसद और आधुनिक व्यवस्थाओं की दिशा में बड़ा कदम
ओम बिरला के नेतृत्व में संसद ने डिजिटल परिवर्तन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की। डिजिटल संसद ऐप की शुरुआत, बजट एवं अन्य संसदीय दस्तावेजों का डिजिटलीकरण तथा संसद को पेपरलेस बनाने की दिशा में उठाए गए कदम प्रशासनिक आधुनिकीकरण के महत्वपूर्ण उदाहरण बने। नए सांसदों की सहायता के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तथा ट्रांजिट आवासों के आवंटन को पूरी तरह सॉफ्टवेयर आधारित एवं पारदर्शी बनाना भी उनकी प्रशासनिक दक्षता का परिचायक है।
उन्होंने संसदीय स्थायी समितियों को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने का प्रयास किया, ताकि विधेयकों की गहन समीक्षा और गुणवत्तापूर्ण कानून निर्माण सुनिश्चित हो सके। वर्ष 2025 में संसद के भीतर ‘डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर’ जैसी अभिनव पहल भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विधायी सोच विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी गई।
नए संसद भवन से नई परंपराओं तक
ओम बिरला देश के पहले ऐसे लोकसभा अध्यक्ष बने जिन्होंने पुराने और नए—दोनों संसद भवनों में सदन का संचालन किया। नए संसद भवन में लोकतंत्र के नए अध्याय की शुरुआत भी उनके नेतृत्व में हुई, जहाँ नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसा ऐतिहासिक कानून पारित हुआ।
संसदीय कार्यवाही में भारतीय भाषाओं और भारतीयता को बढ़ावा देने की उनकी पहल भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने ‘यस-नो’ के स्थान पर ‘हाँ-नहीं’, ‘ज़ीरो आवर’ के स्थान पर ‘शून्य काल’ तथा ‘ऑनरेबल एमपी’ के स्थान पर ‘माननीय सदस्यगण’ जैसे भारतीय भाषाई प्रयोगों को प्रोत्साहित किया, जिससे संसद की कार्यवाही अधिक भारतीय परिवेश के अनुरूप दिखाई देने लगी।
वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता
संसदीय प्रशासन में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन स्थापित करना भी उनके नेतृत्व की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। प्रथम कार्यकाल में लोकसभा सचिवालय द्वारा लगभग 801 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई, जबकि दूसरे कार्यकाल के वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी लगभग 165 करोड़ 54 लाख रुपये की प्रशासनिक बचत सुनिश्चित की गई। यह दर्शाता है कि उन्होंने संसदीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को भी समान महत्व दिया।
18वीं लोकसभा में नए कीर्तिमान
दूसरे कार्यकाल (2024–वर्तमान) में भी लोकसभा की कार्यक्षमता निरंतर उच्च स्तर पर बनी रही। पहले वर्ष के चार सत्रों की औसत उत्पादकता 103.17 प्रतिशत रही तथा सांसदों ने निर्धारित समय से 108 घंटे से अधिक अतिरिक्त बैठकर कार्य किया। 3 अप्रैल 2025 को शून्य काल के दौरान एक ही दिन में 204 जनहित के विषय उठाए जाने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना, जिसने संसद की सक्रियता और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता को नई ऊँचाई दी।
इसी अवधि में संसदीय प्रक्रियाओं को अधिक सहज बनाने के लिए ‘मैटर्स ऑफ अर्जेंट पब्लिक इंपोर्टेंस’ का नाम बदलकर ‘मैटर्स ऑफ पब्लिक इंपोर्टेंस’ किया गया, जिससे संसदीय कार्यवाही अधिक सरल और जनसुलभ बनी।
लोकसभा अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला का कार्यकाल केवल उच्च उत्पादकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भारतीय संसद को अधिक आधुनिक, डिजिटल, अनुशासित, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने का व्यापक प्रयास किया। ऐतिहासिक विधेयकों के पारित होने से लेकर संसदीय परंपराओं के संरक्षण, डिजिटल नवाचार, वित्तीय अनुशासन, भारतीय भाषाओं के सम्मान, नए सांसदों को प्रोत्साहन और भविष्य उन्मुख संसदीय सुधारों तक, उनके नेतृत्व ने संसद की कार्यशैली को नई दिशा प्रदान की है।
उनका कार्यकाल इस बात का उदाहरण है कि यदि संसदीय नेतृत्व दूरदर्शी, संतुलित और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध हो, तो संसद केवल कानून बनाने वाली संस्था नहीं रहती, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे प्रभावशाली शक्ति बन जाती है।
- अरविन्द सिसोदिया
शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी
राजस्थान राज्यपाल पुस्तक मंडल जयपुर
मोबाईल - 9414180151
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