साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल नागरिकता' (Cyber Security & Digital Citizenship) तथा डिजिटल आत्मरक्षा "
प्रेस विज्ञप्ति
कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों को 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल आत्मरक्षा ' विषय को पाठ्यक्रम में अनिवार्यरूप से शामिल करने की मांग
प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, डिजिटल इंडिया की सुरक्षा के लिए विद्यार्थियों को डिजिटल आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने पर जोर
26 जुलाई,कोटा। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं भाजपा के कोटा संभाग मीडिया संयोजक अरविन्द सिंह सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को प्रेषित मांगपत्र द्वारा " कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल नागरिकता' (Cyber Security & Digital Citizenship) एवं डिजिटल आत्मरक्षा " विषय को अनिवार्य पाठ्यक्रम के रूप में शामिल करने की मांग की है।
सिसोदिया नें कहा कि " हालही में जो एक सोसल मीडिया पार्टी का जन्म, पेपर लीक होना और फिर छात्र आंदोलन खड़ा किया जाना, यह कोई सामन्य घटनाक्रम नहीं है। बल्कि कुछ नजर नहीं आने वाले कई एप्स के जरिये खड़ा किया गया पूरा मूमेंट था और इसमें स्वदेशी डाटा संग्रह का इस्तेमाल कर, विदेशी धन, ज्ञान सहित विदेशी षड्यंत्र तक रहा है। विदेश में बैठे व्यक्ती विदेश में पेमेंट कर, भारत में आंदोलन रत लोगों को राशियाँ,भोजन नास्ता करवा रहे थे । वास्तविकता से लाखों गुना बड़ा चढ़ा कर आराजकता उत्पन्न कर रहे थे। यह आने वाले कल के युद्ध और गृह युद्ध की नई तकनीकी का भी इशारा है। इसलिए अब न केवल संभलने से काम नहीं चलेगा बल्कि इसी स्तर की तेज तर्रार पुलिस व जनमत दोनों ही चाहिए, ताकी वे वास्तविकता को सही से समझ सकें व बहकावे में न आएं। इसलिए अब हमारी किशोरवय की शिक्षा पूरी तरह डिजिटल फ्राड के प्रति सतर्क व समर्थ होनी चाहिए। "
सिसोदिया ने अपने मांग पत्र में कहा है कि "प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने 'डिजिटल इंडिया' अभियान के माध्यम से विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति का नेतृत्व किया है। यूपीआई, 5जी नेटवर्क और इंटरनेट के व्यापक विस्तार ने देश को एक सशक्त डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। लेकिन इस डिजिटल प्रगति के साथ साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी, फर्जी सूचनाएं, डीपफेक, डेटा चोरी तथा सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसी नई चुनौतियां भी तेजी से बढ़ी हैं, वहीं इस माध्यम से देश में अस्थिरता भी फैलाने की कोशिशेँ लगातार देखी जा रहीं हैं। जिनका सबसे अधिक प्रभाव किशोर एवं नव युवा वर्ग पर पड़ रहा है।"
उन्होंने कहा कि " आज विद्यार्थियों को केवल डिजिटल उपकरणों का उपयोग करना ही नहीं, बल्कि सुरक्षित, जिम्मेदार और जागरूक डिजिटल नागरिक बनना भी सिखाना समय की आवश्यकता है। सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी प्रोफाइल, डीपफेक सामग्री और डेटा गोपनीयता से जुड़े जोखिमों के प्रति बच्चों को विद्यालय स्तर से ही शिक्षित किया जाना चाहिए।"
सिसोदिया ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि " भविष्य उन्मुख एवं कौशल-आधारित शिक्षा के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। " उन्होंने सुझाव दिया कि " केंद्र एवं राज्यों के शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल नागरिकता' विषय पर एक अतिरिक्त एवं अनिवार्य पाठ्यपुस्तक विकसित करें एवं लागू करें। "
उन्होंने प्रस्तावित पाठ्यक्रम में " फैक्ट-चेकिंग, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2 एफ ए ), सुरक्षित पासवर्ड एवं डिजिटल गोपनीयता, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का उपयोग, साइबर बुलिंग से बचाव, डीपफेक की पहचान, ऑनलाइन वित्तीय सुरक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई ) के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों को शामिल करने का सुझाव दिया है।"
सिसोदिया का कहना है कि " डिजिटल सुरक्षा आज केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और भविष्य की पीढ़ी के मानसिक एवं बौद्धिक विकास से जुड़ा विषय बन चुका है। यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही डिजिटल आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे न केवल साइबर अपराधों से स्वयं को सुरक्षित रख सकेंगे, बल्कि जिम्मेदार डिजिटल नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।"
उन्होंने " प्रधानमंत्री से इस विषय को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानते हुए शिक्षा मंत्रालयों एवं एनसीईआरटी को आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है, ताकि देश की नई पीढ़ी डिजिटल युग की चुनौतियों का सुरक्षित, जागरूक और जिम्मेदारी के साथ सामना कर सके।"
भवदीय,
[अरविन्द सिंह सिसोदिया ]
मोबाईल - 9414180151
सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री जी,
भारत सरकार,
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO),
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली - 110011
विषय: 'डिजिटल इंडिया' की सुरक्षा हेतु कक्षा 6 से 12 तक के पाठ्यक्रम में 'साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल आत्मरक्षा' को अनिवार्य पाठ्यपुस्तक के रूप में सिलेबस में सम्मिलित करने के संबंध में।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
सादर प्रणाम।
आपके यशस्वी और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने 'डिजिटल इंडिया' अभियान के माध्यम से विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति का सूत्रपात किया है। यूपीआई (UPI), 5 जी (5G) नेटवर्क का विस्तार और सुदूर गांवों तक इंटरनेट की पहुंच ने देश का कायाकल्प कर दिया है। आज हमारा देश एक सशक्त डिजिटल अर्थव्यवस्था बन चुका है।
किंतु, इस तीव्र तकनीकी प्रगति के समानांतर भारत के सामने एक नया, अदृश्य और अत्यंत संवेदनशील खतरा भी खड़ा हो गया है। हमारी इस अभूतपूर्व प्रगति को बाधित करने के लिए विदेशी शक्तियों और वैश्विक साइबर अपराधियों द्वारा भारतीय समाज पर 'कॉग्निटिव वॉरफेयर' (Cognitive Warfare) यानी मानसिक व डिजिटल आक्रमण किया जा रहा है। इस युद्ध का सबसे आसान और पहला शिकार देश की तरुण और युवा पीढ़ी (कक्षा 6 से 12 तक के छात्र) बन रही है, जो अपना अधिकांश समय स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर बिताती है।
आज देश के युवा अनजाने में जिन गंभीर विदेशी षड्यंत्रों, तकनीकी अपराधों और मनोवैज्ञानिक खतरों का सामना कर रहे हैं, वे निम्नलिखित हैं:-
1. विदेशी टूलकिट और नैरेटिव हेरफेर (Narrative Manipulation): भारत विरोधी विदेशी ताकतें सोशल मीडिया और एल्गोरिदम के माध्यम से देश में आंतरिक असंतोष, जातिगत-धार्मिक विद्वेष फैलाने के लिए 'फर्जी नैरेटिव' और टूलकिट का उपयोग कर रही हैं। अपरिपक्व छात्र इनके बहकावे में आकर देशविरोधी दुष्प्रचार का हिस्सा बन जाते हैं।
2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक (Deepfake) का खतरा: वर्तमान समय में एआई तकनीकों के दुरुपयोग से किसी की भी छवि को खराब करने वाले डीपफेक वीडियो/ऑडियो बनाना बेहद आसान हो गया है। इसके कारण स्कूली छात्रों में साइबर बुलिंग, मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग के मामले तेजी से बढ़े हैं।
3. साइबर हनीट्रैप और राष्ट्रविरोधी जासूसी: विदेशी खुफिया एजेंसियां फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स के माध्यम से देश के युवाओं और संवेदनशील परिवारों के बच्चों को जाल में फंसाकर देश की सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां निकालने का प्रयास कर रही हैं।
4. डेटा माइनिंग और साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग: विदेशी ऐप्स और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स हमारे बच्चों के व्यक्तिगत डेटा की चोरी कर रहे हैं। इस डेटा का उपयोग करके उनकी मानसिक पसंद-नापसंद की प्रोफाइलिंग की जा रही है, ताकि भविष्य में उनकी विचारधारा को देश के खिलाफ मोड़ा जा सके।
5. वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध लोन/सट्टा ऐप्स: चीनी और अन्य विदेशी सट्टेबाजी तथा त्वरित लोन ऐप्स के जाल में फंसकर हर साल हजारों युवा कर्ज और ब्लैकमेलिंग के दलदल में फंस रहे हैं, जिससे कई बार वे आत्मघाती कदम तक उठा लेते हैं।
महोदय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) में शिक्षा को भविष्य के अनुकूल और कौशल-आधारित बनाने पर विशेष बल दिया गया है। इस विज़न को धरातल पर उतारने का अब सही समय आ गया है। जिस प्रकार भौतिक दुनिया में सुरक्षा के लिए यातायात के नियम या आत्मरक्षा सिखाई जाती है, उसी प्रकार आज डिजिटल दुनिया में 'डिजिटल आत्मरक्षा' (Digital Self-Defense) सिखाना राष्ट्र निर्माण की पहली आवश्यकता बन चुका है।
अतः आपसे विनम्र और सादर प्रार्थना है कि शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) और एनसीईआरटी (NCERT) को निर्देशित कर कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 'साइबर सुरक्षा और डिजिटल नागरिकता' (Cyber Security & Digital Citizenship) नामक एक अतिरिक्त और अनिवार्य पाठ्यपुस्तक को मूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए।
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों को:
* फैक्ट-चेकिंग (सत्यता जांचने) की कला,
* टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जैसे सुरक्षित डिजिटल अभ्यास,
* 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' (cybercrime.gov.in) का उपयोग,
* और एआई (AI) के नैतिक उपयोग के बारे में प्राथमिक स्तर से ही प्रशिक्षित किया जा सकेगा।
यह कदम न केवल हमारी आने वाली पीढ़ी के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि देश के खिलाफ चलाए जा रहे हर डिजिटल आक्रमण को विफल करने के लिए करोड़ों 'साइबर वॉरियर्स' की एक फौज भी तैयार कर देगा।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि देश की आंतरिक सुरक्षा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय को आपका सर्वोच्च प्राथमिकता वाला संरक्षण प्राप्त होगा।
राष्ट्र सेवा में सदैव समर्पित। सादर।
भवदीय,
[अरविन्द सिंह सिसोदिया ]
राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल,
( शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी ) जयपुर
- कोटा संभाग मीडिया संयोजक भाजपा
पता - बेकरी के सामने, राधाकृष्ण मंदिर रोड़,
ड़डवाड़ा, कोटा जंक्शन, कोटा, राजस्थान।
पिनकोड - 324002
मोबाईल - 9414180151
इस खतरे से देश के नागरिकों को सावधान करने के लिए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर अभियान प्रारंभ होने चाहिए:
1. फेक न्यूज और फैक्ट-चेकिंग (Fact-Checking)सत्यापन की आदत: नागरिकों को सिखाएं कि किसी भी भड़काऊ संदेश को बिना जांचे आगे न भेजें।स्रोतों की पहचान: केवल अधिकृत मीडिया या सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करने के लिए प्रेरित करें।फैक्ट-चेक टूल्स: आम जनता को 'पीआईबी फैक्ट चेक' (PIB Fact Check) जैसे मंचों का उपयोग करना सिखाएं।
2. नैरेटिव हेरफेर (Narrative Manipulation) को समझनासांस्कृतिक गौरव: भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर खराब करने वाले टूलकिट और नैरेटिव (जैसे- भारत विरोधी दुष्प्रचार) के प्रति लोगों को जागरूक करें।विभाजनकारी एजेंडा: जाति, धर्म या क्षेत्र के नाम पर समाज को बांटने वाले विदेशी बॉट्स (Bots) और फेक प्रोफाइल्स की कार्यप्रणाली को उजागर करें।
3. एल्गोरिदम और ध्यान भटकाना (Algorithmic Warfare)क्लिकबेट से बचाव: सनसनीखेज खबरों के पीछे छिपे विदेशी एजेंडे को समझने की ट्रेनिंग दें।स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण: सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से होने वाले मानसिक प्रभाव और प्रोपेगैंडा के जाल से युवाओं को बचाएं।
4. डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता (Data Sovereignty)डेटा की चोरी: विदेशी ऐप्स द्वारा भारतीयों का डेटा चुराकर उसका इस्तेमाल देश के खिलाफ ही करने (Psychological Profiling) के खतरों को समझाएं।सुरक्षित डिजिटल आदतें: मजबूत पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) लगाने और निजी जानकारी सार्वजनिक न करने का अभियान चलाएं।
5. हनीट्रैप और वित्तीय घोटाले (Cyber Frauds)फर्जी प्रोफाइल से सावधानी: रक्षा कर्मियों, युवाओं और संवेदनशील पदों पर बैठे लोगों को निशाना बनाने वाले विदेशी 'हनीट्रैप' और जासूसी नेटवर्क के प्रति सचेत करें।क्रिप्टो और अवैध लोन ऐप्स: चीनी और अन्य विदेशी सट्टेबाजी या लोन ऐप्स के जरिए देश से बाहर भेजे जा रहे धन और ब्लैकमेलिंग के विरुद्ध अभियान चलाएं।
6. युवाओं और छात्रों का उन्मुखीकरण (Youth Orientation)पाठ्यक्रम में शामिल करना: स्कूलों और कॉलेजों में 'डिजिटल नागरिकता और सुरक्षा' (Digital Citizenship) विषय पर कार्यशालाएं आयोजित करें।
साइबर वॉरियर्स: युवाओं को देश के खिलाफ चल रहे डिजिटल प्रोपेगैंडा का तार्किक और तथ्यात्मक जवाब देने के लिए तैयार करें।
इस जनजागरण अभियान को सफल बनाने के लिए स्थानीय भाषाओं में लघु फिल्में, नुक्कड़ नाटक, मीम्स (Memes) और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मदद ली जानी चाहिए ताकि संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
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भारत में स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए पाठ्यक्रम (Curriculum) और नीतियां निर्धारित करने वाली तीन मुख्य राष्ट्रीय संस्थाएं हैं। इनके नाम और आधिकारिक पते नीचे दिए गए हैं:
## 1. एनसीईआरटी (NCERT - राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद)
यह भारत सरकार की मुख्य संस्था है जो पूरे देश के स्कूलों के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) और पाठ्यक्रम का ढांचा तैयार करती है। इसी के आधार पर देश में सीबीएसई और अन्य राज्य बोर्ड अपनी किताबें और सिलेबस तय करते हैं।
* पता: [नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT)](https://ncert.nic.in/), श्री अरविंदो मार्ग, अधचिनी, ब्लॉक सी, नई दिल्ली - 110016
## 2. सीबीएसई (CBSE - केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड)
यह भारत का सबसे प्रमुख राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड है। यह एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम को अपने से संबद्ध (Affiliated) देशभर के स्कूलों में लागू करवाता है और परीक्षाएं आयोजित करता है।
* मुख्यालय का पता: [केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE Head Office), शिक्षा केंद्र, 2 कम्युनिटी सेंटर, प्रीत विहार, दिल्ली - 110092
* एकीकृत कार्यालय (नया पता): सीबीएसई एकीकृत कार्यालय परिसर, सेक्टर-23, फेज-1, द्वारका, नई दिल्ली - 110077
## 3. एनआईओएस (NIOS - राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान)
यह दुनिया का सबसे बड़ा ओपन स्कूलिंग बोर्ड है, जो उन छात्रों के लिए पाठ्यक्रम निर्धारित और संचालित करता है जो नियमित स्कूल नहीं जा पाते। इसका पाठ्यक्रम भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्य होता है।
* मुख्यालय का पता: [राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS Headquarters)] , ए-24-25, इंस्टीट्यूशनल एरिया, ब्लॉक ए, सेक्टर 62, नोएडा, उत्तर प्रदेश - 201309
## 4.. यूजीसी मुख्य कार्यालय (Head Office)पता: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC Main Office), बहादुर शाह जफर मार्ग, नई दिल्ली - 110002।
मुख्य कार्य: विश्वविद्यालय शिक्षा के मानकों का निर्धारण, नीति निर्माण और केंद्रीय विश्वविद्यालयों को फंड जारी करना।फ़ोन नंबर: 011-23604200, 011-23604446।2.
अन्य महत्वपूर्ण ब्यूरो कार्यालय (दिल्ली में)यूजीसी के कुछ विशेष विभाग दिल्ली के इन पतों से काम करते हैं:
दूरी शिक्षा ब्यूरो (DEB Office): डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो, 35, फीरोजशाह रोड, नई दिल्ली - 110001। (यह ओपन और ऑनलाइन लर्निंग से जुड़े काम देखता है)।
यूजीसी नेट ब्यूरो (NET Bureau): यूजीसी नेट कार्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय का साउथ कैंपस, बेनिटो जुआरेज मार्ग, नई दिल्ली - 110021। (यह राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा से जुड़े काम संभालता है)।
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