प्रेस विज्ञप्ति
प्रेस विज्ञप्ति
तुष्टिकरणवादी दलों द्वारा "चढ़ावा हेरफेर" को तिल का ताड़ बनाना, हिंदुत्व को बाँटने का सुनियोजित षड्यंत्र – अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 6 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी अरविन्द सिसोदिया ने अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा हेरफेर प्रकरण को लेकर विपक्षी दलों द्वारा मचाए जा रहे राजनीतिक हो-हल्ले को " हिंदू आस्था को बदनाम करने, हिन्दुओं को विभाजित कर, राजनीतिक रोटियां सेंकने का सुनियोजित षड्यंत्र बताया है।" उन्होंने कहा कि " भारत में धर्मस्थलों पर अनियमितताओं की पहले भी अनेकों घटनायें घटित हुई हैँ, किन्तु विपक्ष हमेशा मौन रहा है, जबकि चढ़ावा चोरी की बहुत छोटी घटना से बिना किसी सबूत के निर्दोषों को आरोपित किया जा रहा है। जो स्वयं ही संदिग्धता प्रगट कर रही है। "
सिसोदिया नें कहा कि "संपूर्ण राष्ट्र में जो फर्जी हो-हल्ला मचाया गया है, उससे इरादे साफ़ तौर पर हिंदू विभाजन कर राजनैतिक लाभ उठाना हैं।" उन्होंनें कहा कि " जो रामभक्ति का पाठ पढ़ाने की बात कर रहे हैं, उन्होंने रामभक्तों पर गोलियां चलाईं। रामभक्ति के विरोध में काम करने वाले दलों के दिलों में अचानक जो "झूठा ज्वार " दिखाई दे रहा है, इसका मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को बांटना है और वोट काटना मात्र है।"
सिसोदिया नें कहा कि " हिन्दुओं के सदियों के संघर्षों के पश्चात यह मंदिर बना। लोगों ने इसके लिए अपने प्राणों, परिवारों और करियर की चिंता नहीं की। तब यह अस्तित्व में आया है। जो दल इसकी राह में कांटे बिछा रहे थे, वे ही अब गेरजिम्मेदाराना हुल्लड से हिंदू आस्था को चोट पहुंचाने की कोशिश में है।"
सिसोदिया नें कहा कि "श्रीराम जन्मभूमि मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल को लेकर बिना प्रमाण झूठे, मनगढ़ंत और भ्रामक आरोप लगाकर देश में भ्रम फैलाना केवल राजनीतिक अवसरवाद नहीं, बल्कि सनातन आस्था और हिंदुत्व को आघात पहुँचाने का सुनियोजित षड्यंत्र है।"
अरविन्द सिसोदिया ने कहा, "यदि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के पास किसी भी प्रकार के ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें जांच कर रही एसआईटी को तत्काल उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई हो सके। लेकिन बिना किसी प्रमाण के सार्वजनिक मंचों से झूठे आरोप उछालना केवल राजनीतिक नौटंकी है, जिसका उद्देश्य समाज को भ्रमित करना और हिंदू समाज की आस्था को ठेस पहुँचाना है।"
उन्होंने कहा, "संपूर्ण देश में जिस प्रकार का शोर-शराबा खड़ा किया गया, उससे विपक्ष की मंशा स्वतः स्पष्ट हो जाती है। जो लोग आज रामभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने का प्रयास कर रहे हैं, इतिहास गवाह है कि उनकी राजनीति रामभक्तों के सम्मान के साथ कभी खड़ी नहीं रही। आज उनका यह अचानक उमड़ा हुआ प्रेम स्वाभाविक नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित दिखाई देता है। इसका वास्तविक उद्देश्य हिंदू समाज को भ्रमित और विभाजित करना है।"
अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं द्वारा लगाए गए गंभीर आर्थिक आरोपों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि उनके पास तथ्य, दस्तावेज और प्रमाण हैं तो वे जांच एजेंसियों को सौंपें, अन्यथा निराधार आरोप लगाकर समाज को गुमराह करने वालों के विरुद्ध भी उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बार-बार सनातन आस्था, हिंदू धार्मिक संस्थाओं और श्रद्धा के प्रतीकों को राजनीतिक निशाना बनाना अब एक स्थापित राजनीतिक प्रवृत्ति बनती जा रही है, जिसे देश की जनता भली-भांति समझ रही है। आस्था को चुनावी हथियार बनाकर विवाद खड़ा करना लोकतंत्र की स्वस्थ परंपराओं के विरुद्ध है।
अरविन्द सिसोदिया ने विश्वास व्यक्त किया कि देश की जनता सत्य, पारदर्शिता और कानून के शासन पर भरोसा करती है। दुष्प्रचार, भ्रम और राजनीतिक षड्यंत्रों का अंतिम उत्तर लोकतांत्रिक जनमत ही देगा।
— जारीकर्ता
अरविन्द सिसोदिया
9414180151
प्रेस विज्ञप्ति
तुष्टिकरणवादी दलों द्वारा "चढ़ावा हेरफेर" को तिल का ताड़ बनाना, हिंदुत्व को क्षति पहुँचाने का षड्यंत्र – अरविन्द सिसोदिया
कोटा 6 जुलाई। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे को लेकर विपक्षी दलों के कुछ नेताओं द्वारा लगाए गए झूठे और मनमाने आरोपों ने देश में अनावश्यक भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न कर हिंदू आस्था पर बड़ी चोट पंचाई है। करोड़ों करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को, सोची समझी राजनीतिक के तहत तिल का ताड़ बना कर, हिंदुत्व को क्षति पहुंचाने के षड्यंत्र न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह देश के सामाजिक सद्भाव और जनभावनाओं पर आक्रमण है।
अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि " यदि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के पास किसी प्रकार के ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें जाँच कर रही एस आई टी को सौंपना चाहिए, ताकी अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो सके। " उन्होंने कहा कि "राजनैतिक लाभ के लिए सार्वजनिक मंचों पर झूठे आरोप लगाना हिंदुत्व को शत्रुतापूर्ण क्षति पहुंचाना है, जिसे समाज कभी माफ नहीं करेगा।"
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी को लेकर कहा गया कि "संपूर्ण राष्ट्र में जो हो-हल्ला मचाया गया है उससे इरादे साफ़ नहीं हैं, जो राम भक्ति का पाठ पढ़ाने की बात कर रहे हैं, उन्होंने राम भक्तों पर गोलियां चलाईं. राम भक्ति के विरोध में काम करने वाले लोगों के दिलों में जो झूठा ज्वार दिखावे के लिए दिखा है वो साधारण नहीं है, इसका मुख्य उद्देश्य हिंदुओं को बांटना है."
"कई संघर्षों के पश्चात ये मंदिर बना, लोगों ने इसके लिए अपने प्राणों, परिवारों और करियर की चिंता नहीं की. चढ़ावा चोरी का काम गिनती के समय हुआ है, उससे हम दुखी हैं. चोरी छोटी हुई या बड़ी हुई, ये बात बाद में आती है लेकिन जिस तरह का वातावरण बना वो चिंता की बात है."
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं द्वारा अत्यंत गंभीर आर्थिक आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में यदि उनके पास इन आरोपों के समर्थन में तथ्य, दस्तावेज या अन्य प्रमाण हैं, तो उन्हें निष्पक्ष जांच में सहयोग करना चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं, तो ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि बार-बार सनातन आस्था के प्रतीकों और हिंदू धार्मिक संस्थाओं को राजनीतिक निशाना बनाने का प्रयास जनता देख रही है। आस्था के विषयों को चुनावी लाभ के लिए विवादों में घसीटना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश की जनता सत्य, पारदर्शिता और कानून के शासन में विश्वास रखती है। किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार, भ्रम या राजनीतिक षड्यंत्र का अंतिम उत्तर लोकतांत्रिक जनमत ही देगा।
उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को चाहिए कि वे जांच प्रक्रिया का सम्मान करें, कानून का पालन करें और समाज में अनावश्यक तनाव उत्पन्न करने वाले अपुष्ट दावों से बचें। सत्य तथ्यों और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही सामने आएगा और जनता उसी के आधार पर अपना निर्णय करेगी।
— जारीकर्ता
अरविन्द सिसोदिया
9414180151
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें