2900 क्रिमिनल जंतर मंतर में
Delhi Police Ai Surveillance Facial Recognition System Antar Mantar Protest Found 2,900 People With Criminal Records
जंतर-मंतर पर भीड़ के बीच थे 2900 क्रिमिनल, दिल्ली पुलिस ने चेहरा स्कैन करके AI से खोजा
हाल ही में जब जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था, तब दिल्ली पुलिस ने भीड़ पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस स्मार्ट कैमरे लगाए थे। इन कैमरों को फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कहते हैं। इनके जरिए कई भीड़ में मौजूद कई आरोपियों की पहचान की जा सकी।
28 Jul 2026
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वाले फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया था। पुलिस के अनुसार, इस सिस्टम ने आपराधिक रिकॉर्ड वाले लगभग 2,900 लोगों की पहचान की। इनमें हत्या, डकैती, रेप और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों के आरोपी भी शामिल थे। ऐसा प्रदर्शन वाली लोकेशन के आस-पास लगे फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों की मदद से किया गया। CNN-News18 के अनुसार, पुलिस ने बताया कि इस टेक्नोलॉजी ने प्रदर्शन में शामिल लोगों के चेहरों की तुलना पहले से मौजूद क्रिमिनल डेटाबेस से की, ताकि पुराने रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान की जा सके।
पुलिस ने बताया कि AI सिस्टम ने प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और उसके आस-पास मौजूद हजारों लोगों को स्कैन किया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लगभग 2,900 लोगों की पहचान ऐसे लोगों के तौर पर की गई, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड था। 2,873 लोगों की ज्यादा बारीकी से जांच करने पर पुलिस को पता चला कि 989 लोगों पर पहले से आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या, डकैती, रेप और अपहरण जैसे आरोप शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस काम का मकसद सुरक्षा का जायजा लेना था, ताकि भीड़भाड़ वाले समय में होने वाले खतरों या गड़बड़ी की पहचान पहले से की जा सके।
सुरक्षा बनाए रखना था मकसद
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सिस्टम द्वारा पहचान किए जाने का मतलब दोषी ठहराया जाना या प्रदर्शन के दौरान किसी अपराध में शामिल होना नहीं है। पहचान मौजूदा पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी, जिसमें जांच या पुराने मामले शामिल हो सकते हैं। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने कहा कि इस टेक्नोलॉजी का मकसद वॉन्टेड लोगों, अपराधियों की पहचान करना था। साथ ही इससे अधिकारियों को बड़ी भीड़ पर बेहतर ढंग से नजर रखने में भी मदद मिली।
टेक्नोलॉजी पर बढ़ रही निर्भरता
AI आधारित निगरानी का इस्तेमाल यह दिखाता है कि बड़ी सभाओं के दौरान भीड़ को संभालने और लोगों की सुरक्षा के लिए टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिस्टम मैन्युअल वेरिफिकेशन के मुकाबले तेजी से पहचान करने में मदद करता है और उपायों में मददगार है।
लेकिन चेहरा पहचानने वाली तकनीक के इस्तेमाल से लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वालों की चिंता फिर बढ़ गई है। उनका कहना है कि इससे लोगों की प्राइवेसी और शांति से विरोध करने की आजादी पर असर पड़ता है। आलोचकों का मानना है कि आम जनता के प्रदर्शनों पर ऐसी बायोमेट्रिक नजर रखने के लिए कड़े कानून, पूरी पारदर्शिता और किसी स्वतंत्र संस्था की देखरेख बहुत जरूरी है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ सुरक्षा के मकसद से और प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए किया गया था।
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