कविता - फिर से कहता हूँ, मोदी जी, आपका कोटि-कोटि बंदन है।

कविता - फिर से कहता हूँ, मोदी जी,
कोटि-कोटि अभिनंदन है
फिर से कहता हूँ, मोदी जी, आपका कोटि-कोटि बंदन है।
जिस "वन्दे मातरम्" पर था तुष्टिकरण का पहरा ,
उसकी आजादी पर आपका अभिनंदन है।
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याद करो वे अमर कहानी,
जब हँसकर फाँसी चूमी थी।
"वन्दे मातरम्" कहते-कहते,
वीरों ने जीवन बलिदानों को सोंपी थी।
====2====
सीने पर गोलियाँ खाकर भी,
जयघोष नहीं रुक पाया था।
भारत माँ की जय बोल-बोल कर ,
हर बलिदानी गर्व से मुस्काया था।
====3====
जब-जब रण में शंख बजे,
जब-जब सीमाएँ ललकार उठीं।
"वन्दे मातरम्" के स्वर से ही,
भारत की सेनाओं के अपनी धार तेज करी ।
====4====
यह केवल दो शब्द नहीं,
यह राष्ट्र-प्राण का नारा है।
इसमें भगतसिंह का रक्त बसा,
इसमें आज़ाद का हमारा है।
====5====
इसमें मंगल की हुंकारें,
इसमें बिस्मिल का बलिदान।
इसमें लाखों माताओं के,
अश्रु, तपस्या और सम्मान।
====6====
दशकों तक जो मौन रहा,
वह स्वाभिमान आज जागा है।
भारत माता के मस्तक पर,
फिर स्वाभिमान का मुकुट सजा है।
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इसलिए फिर कहता हूँ,
कोटि-कोटि अभिनंदन है।
जिस "वन्दे मातरम्" पर पहरा था,
उसका आज उसका पूरा बंदन  है।
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भारत माता की जय!
वन्दे मातरम्! जय हिन्द!

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