श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की घोषणा
भाग–1
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र
प्रेस विज्ञप्ति
जुलाई ६, २०२6
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के न्यासियों की बैठक आज आषाढ़ कृष्ण पक्ष, २०८२, सोमवार, ६ जुलाई, २०२6 को अयोध्या में सम्पन्न हुई। इसमें प्रमुख रूप से दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना की प्रक्रिया में अनियमितता, उसकी जाँच और कार्यवाही, महामंत्री और एक न्यासी के न्यासी पद से त्यागपत्रों, मीडिया में चल रही चर्चाओं, भावी अंतरिम व्यवस्थाओं आदि विषयों पर विचार हुआ।
२०२० में ट्रस्ट की स्थापना के पश्चात ६ वर्ष से कम के अल्पकाल में प्रभु श्री रामलला के भव्य और अप्रतिम मंदिर के निर्माण का ऐतिहासिक कार्य सम्पूर्ण हुआ। इसी अवधि में मुख्य मंदिर एवं परकोटे में बने समस्त मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण और श्रीराम यंत्र की स्थापना के महती कार्य प्रभु कृपा से शास्त्रोक्त एवं शास्त्रीय विधि-विधान से सम्पन्न हुए। न्यास इस सांस्कृतिक धरोहर के निर्माण और अनेक धार्मिक उत्सवों में सहयोगी सम्पूर्ण हिन्दू समाज, श्रमिकों, अभियंताओं, शिल्पकारों, वास्तुविदों और केन्द्र एवं राज्य सरकारों का हार्दिक आभार मानता है।
निधि समर्पण अभियान एवं कॉर्पस दान के माध्यम से प्राप्त कुल राशि ३,२४६ करोड़ रुपये में से २,३८० करोड़ रुपये निर्माण एवं पूँजीगत व्यय में उपयोग की गई है। प्रारम्भ से लेकर ३१ मार्च, २०२6 तक कुल चढ़ावा ४८२ करोड़ रुपये प्राप्त हुआ, जिसमें से ३९२ करोड़ रुपये की राशि संचालन व्यय में उपयोग की गई। शेष राशियाँ बैंक खातों में उपलब्ध हैं। ये समस्त वित्तीय सूचनाएँ समय-समय पर ट्रस्ट ने मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की हैं।
चढ़ावे की राशि की गणना प्रक्रिया में अनियमितता से न्यासीगण आहत एवं चिंतित हैं और इस दुर्भाग्यकारी प्रकरण पर गंभीर खेद व्यक्त करते हैं।
इस प्रकरण की जानकारी प्राप्त होने पर पाया है कि ट्रस्ट के अधिकारियों ने अनियमितता के संज्ञान में आने पर प्रारम्भिक जानकारी एकत्र करने के बाद उत्तर प्रदेश शासन से निष्पक्ष जाँच का आग्रह किया। ट्रस्ट के अनुरोध पर शासन ने तत्काल उच्च स्तरीय जाँच दल (एस आई टी) का गठन किया, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष, व्यापक और तथ्यपरक जाँच हो सके। किसकी क्या भूमिका रही, किन लोगों की संलिप्तता है तथा किसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना चाहिए—इन सभी प्रश्नों का उत्तर केवल जाँच के आधार पर ही सम्भव था। इसी उद्देश्य से ऐसे जाँच दल के गठन के अनुरोध की पहल की गई।
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भाग–2
एस आई टी की प्रारम्भिक रिपोर्ट में ८ लोगों के नाम सामने आए। जिनके विरुद्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले, उनके विरुद्ध ट्रस्ट ने मुकदमा दर्ज कराया और गिरफ्तारियाँ भी हुईं। अब पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा है। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि जो भी दोषी हो, उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही होकर कठोरतम दंड मिलना चाहिए। इस एस आई टी का कार्यक्षेत्र सिर्फ जाँच तक ही सीमित नहीं है, अपितु यह सुझाव देना भी है कि ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में क्या आवश्यक सुधार करने चाहिए जिससे व्यवस्था और अधिक सुदृढ़, मजबूत एवं पारदर्शी हो सके।
एस आई टी की प्रारम्भिक रिपोर्ट आने के बाद महामंत्री श्री चंपत राय और एक ट्रस्टी श्री अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर त्यागपत्र दिया है, जिन्हें आज ट्रस्ट की बैठक में विचारार्थ प्रस्तुत किया गया। ट्रस्ट ने निष्पक्ष जाँच हेतु नैतिक आधार पर दिए दोनों के त्यागपत्रों को स्वीकार किया है। साथ ही ट्रस्ट ने श्री गोपाल नगरकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटाने का निर्णय किया है। ट्रस्ट का मानना है कि जाँच की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर सत्य प्रकाशित होगा और तब तक किसी भी व्यक्ति पर दोषारोपण करना उचित नहीं है।
ट्रस्ट ने प्रबंधन एवं संचालन की पद्धति और प्रणाली की कमजोरियों को दूर करने और उन्हें सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है तथा एस आई टी से अपेक्षित अनुशंसाओं के अतिरिक्त विशेषज्ञों से भी स्वतंत्र परामर्श लेने का सुझाव दिया है, जिससे मंदिर प्रबंधन की एक आदर्श, कुशल और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित हो सके, जो इस क्षेत्र में अनुकरणीय उदाहरण बने।
कुछ लोग इस दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण को श्रीरामलला मंदिर, श्रीराम जन्मभूमि, हिन्दू समाज और व्यापक हिन्दू आस्था को कमजोर करने के अवसर के रूप में उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। आधारहीन आरोप जनमानस के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य सत्य सामने लाना नहीं, बल्कि निरंतर भ्रम फैलाना है।
नकद राशि के अतिरिक्त अनेक श्रद्धालुओं ने वस्तु के रूप में प्रभु श्रीरामलला को भेंट अर्पित की हैं। ऐसी कुल २,१२६ भेंटें प्राप्त हुई हैं, जो समस्त तिथि अनुसार, सम्पूर्ण विवरण के साथ रजिस्टर में दर्ज हैं और उनका भौतिक सत्यापन एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा आंतरिक लेखापरीक्षक के नाते प्रति वर्ष किया जाता है।
काउंटर पर ऐसी भेंट देने वाले समस्त श्रद्धालुओं को रसीद दी गई है और काउंटर के अतिरिक्त दी गई भेंट हेतु भी उन समस्त श्रद्धालुओं को रसीद दी गई है जिन्होंने दानदाता का विवरण दिया। समस्त श्रद्धालुओं से निवेदन है कि जो भी अपनी दी हुई भेंट का उपयोग जानना अथवा सत्यापन करना चाहें, वे कभी भी ट्रस्ट के अधिकारी से तिथि एवं समय निश्चित कर अयोध्या पधारें और प्रभु श्रीरामलला के दर्शन के साथ अपनी भेंट का सत्यापन कर सकते हैं।
चाँदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल (मिंट) में गलाकर छड़ें बनाई गई हैं, जिनके मूल स्वरूप का विवरण फोटो व वजन सहित उपलब्ध है। गलाने के पश्चात चाँदी की शुद्धता और कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध हैं।
भाग–3 (अंतिम भाग)
ट्रस्ट का आग्रह है कि यदि किसी व्यक्ति, संस्था या पत्रकार के पास मंदिर से सम्बद्ध किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध अनियमितता के ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय इस एसआईटी अथवा संबंधित जाँच एजेंसी को उपलब्ध कराया जाए। जाँच एजेंसियाँ प्रमाणों के आधार पर अवश्य कार्यवाही करेंगी, ट्रस्ट का मानना है।
न्यास की बैठक में नए महामंत्री की नियुक्ति होने तक ट्रस्टी श्री कृष्ण मोहन जी को महामंत्री के कार्यों का निष्पादन करने को कहा गया है, जिसे उन्होंने स्वीकार किया है।
न्यास ने एक उपयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का चयन करने के निमित्त तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो ट्रस्ट को उपयुक्त नामों की अनुशंसा करेगी। समिति में निम्न सदस्य होंगे—
न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) श्री प्रमोद कोहली
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) श्री विष्णुकांत चतुर्वेदी
श्री सुरेश हावरे
तमाम विवादों और दुष्प्रचार के बावजूद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या एवं श्रद्धा में कमी नहीं आई है। मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन पूर्ववत् निरंतर जारी है। यह इस बात का प्रमाण है कि आधारहीन व भ्रामक आरोपों के बाद भी करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास अडिग है।
— समाप्त —
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