VHP का पत्र sit को
दिनांक: 04.07.2026
प्रति,
श्री आशुतोष तिवारी
डीएसपी, अयोध्या एवं विवेचक, एफआईआर संख्या 0090/2026
थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या, उत्तर प्रदेश
विषय: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे (चढ़ावा) की कथित चोरी की जांच के संबंध में।
महोदय,
आप थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या में दर्ज एफआईआर संख्या 0090/2026 की जांच कर रहे हैं, जो श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से संबंधित है।
हमें विभिन्न सार्वजनिक व्यक्तियों के ऐसे बयान मिले हैं, जो टीवी चैनलों, सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए हैं और इस जांच से संबंधित हैं।
इनमें निम्नलिखित व्यक्तियों के बयान शामिल हैं:
प्रो. रामगोपाल यादव – उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में लगभग ₹20,000 करोड़ का घोटाला हुआ है तथा कई लोगों की संलिप्तता होने की बात कही।
अरविंद केजरीवाल – उन्होंने कहा कि भगवान राम का धन, चांदी, सोना, आभूषण आदि की चोरी हुई है तथा लगभग ₹200 करोड़ या उससे अधिक की चोरी का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच निष्पक्ष हो तो सच्चाई सामने आ सकती है।
संजय सिंह (सांसद) – उन्होंने कहा कि मंदिर बनने के बाद से ₹200 करोड़ से अधिक की चोरी हुई है और इसमें 50 से अधिक कर्मचारियों की संलिप्तता हो सकती है।
(पत्र में यह भी उल्लेख है कि संजय सिंह एसआईटी के सामने उपस्थित होकर भूमि खरीद संबंधी कुछ दस्तावेज दे चुके हैं, इसलिए उनके उस हिस्से का उल्लेख नहीं किया जा रहा है।)
प्रियंका गांधी वाड्रा – उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या कुछ कर्मचारी सीसीटीवी बंद कर करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी कर सकते हैं, या इसके पीछे कुछ बड़े लोगों की मिलीभगत है।
पत्र का मुख्य आग्रह
पत्र में कहा गया है कि:
इन व्यक्तियों ने सार्वजनिक रूप से गंभीर और निश्चित आरोप लगाए हैं, जिनमें ₹20,000 करोड़ तक की राशि का उल्लेख किया गया है।
इससे यह प्रतीत होता है कि इनके पास मामले से संबंधित कुछ जानकारी हो सकती है।
इसलिए निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए इन लोगों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जाएं, ताकि वे:
अपने आरोपों का तथ्यात्मक आधार बताएं।
अपनी जानकारी का स्रोत बताएं।
अपने पास उपलब्ध दस्तावेज़ या अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करें।
यदि ये लोग अपने आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय सामग्री देते हैं, तो इससे जांच एजेंसी को सत्य तक पहुंचने में सहायता मिलेगी।
लेकिन यदि जांच में यह पाया जाता है कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी तथ्य या साक्ष्य के लगाए गए थे, तो यह भी जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू होगा।
यदि यह सिद्ध हो जाए कि जानबूझकर झूठे या लापरवाहीपूर्ण आरोप लगाए गए हैं, तो जांच एजेंसी कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकती है। किसी को भी ऐसे निराधार आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती जो समाज में घृणा, वैमनस्य या शत्रुता फैलाएं।
अंत में लिखा है कि ऐसी स्थिति में कानून अपना काम करेगा।
भवदीय,
आलोक कुमार
वरिष्ठ अधिवक्ता
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विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार द्वारा अयोध्या पुलिस/SIT को लिखे गए मूल पत्र की हूबहू शब्दशः (Word-to-Word) आधिकारिक कॉपी या टेक्स्ट अभी सार्वजनिक रूप से जारी नहीं हुआ है। वह पत्र जांच टीम (SIT) के पास एक आंतरिक आधिकारिक पत्राचार (Official Correspondence) के रूप में जमा है। [1, 2, 3]
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स और [पांचजन्य (Panchjanya) की रिपोर्ट](https://panchjanya.com/2026/07/05/479675/bharat/vhp-president-alok-kumar-writes-to-ayodhya-io-examine-priyanka-gandhi-arvind-kejriwal-ram-mandir-case-meta/) के अनुसार, उस पत्र में लिखी गई मुख्य कानूनी भाषा और प्रारूप (Draft) का प्रारूप इस प्रकार है:
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## पत्र का मुख्य प्रारूप (भावार्थ लिपि)
सेवा में,
श्री आशुतोष तिवारी,
पुलिस उपाधीक्षक एवं जांच अधिकारी (IO),
विशेष जांच टीम (SIT), अयोध्या (उत्तर प्रदेश)।
विषय: श्री राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा/दान राशि हेराफेरी मामले की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच के संबंध में।
महोदय,
मैं आपका ध्यान श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में चल रही वर्तमान जांच की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
विगत दिनों में कुछ सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और राजनीतिक नेताओं ने इस विषय में बेहद गंभीर और बड़े स्तर पर वित्तीय हेरफेर के सार्वजनिक दावे किए हैं। इनमें मुख्य रूप से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के नेता प्रो. रामगोपाल यादव शामिल हैं।
चूंकि इन सार्वजनिक हस्तियों ने ₹20,000 करोड़ तक के बड़े घोटालों के दावे खुलकर किए हैं, इससे स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि वे इस मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और इसके पीछे के सबूतों से भली-भांति परिचित हैं।
एक व्यापक, निष्पक्ष और तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसी (SIT) के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि:
1. कानून के सुसंगत प्रावधानों के तहत इन सभी नेताओं को समन जारी कर उनके आधिकारिक बयान दर्ज किए जाएं।
2. उनसे उनके द्वारा लगाए गए आरोपों का तथ्यात्मक आधार और जानकारी का मुख्य स्रोत (Source) पूछा जाए।
3. उनके पास मौजूद सभी सहायक दस्तावेज, साक्ष्य या अन्य सामग्रियां, जो इन आरोपों की पुष्टि करती हों, उन्हें जांच के रिकॉर्ड पर लिया जाए।
यदि ये आरोप बिना किसी ठोस आधार या सबूत के केवल जनता को गुमराह करने और मंदिर की छवि धूमिल करने के लिए लगाए गए हैं, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। कृपया इस अनुरोध को जांच के रिकॉर्ड का हिस्सा बनाएं।
भवदीय,
आलोक कुमार
अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद (VHP)
एवं वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय
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अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित हेरफेर का मामला वर्तमान में एक संवेदनशील राजनीतिक और जांच का विषय बन गया है। जहां एक ओर विपक्षी दल इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने में जुटे हैं, वहीं सत्ताधारी दल इसे आस्था को ठेस पहुंचाने वाला षड्यंत्र बताकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
इस पूरे विवाद की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
* कानूनी कार्रवाई: यूपी पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अब तक मंदिर के दान और गिनती प्रक्रिया से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की मोबाइल चैट और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
* राजनीतिक घमासान: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मुद्दे पर सरकार और मंदिर ट्रस्ट को घेरा है।
* ट्रस्ट की प्रतिक्रिया: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पारदर्शिता बनाए रखने और जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है।
* हिंदू संगठनों का रुख: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कथित हेरफेर के लिए दोषियों को कड़ी सजा की मांग की है, साथ ही राजनीतिक दलों द्वारा इस पर की जा रही बयानबाजी को हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने वाला बताया है।
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विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने विपक्षी नेताओं को अपने दावों के सबूत पेश करने की खुली चुनौती दी है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) के जांच अधिकारी को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने विपक्ष के प्रमुख नेताओं के सार्वजनिक बयानों और दावों की सत्यता जांचने की मांग की है। इस कानूनी और राजनीतिक कदम से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
* नेताओं से पूछताछ की मांग: वीएचपी प्रमुख ने मुख्य रूप से प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस), अरविंद केजरीवाल (AAP), संजय सिंह (AAP), और प्रो. राम गोपाल यादव (SP) जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं के बयानों को जांच के दायरे में लाने की मांग की है।
* सबूत सौंपने की चुनौती: वीएचपी का तर्क है कि चूंकि इन नेताओं ने घोटाले और हेरफेर को लेकर सार्वजनिक रूप से विशिष्ट आंकड़े और दावे पेश किए हैं, इसलिए वे निश्चित रूप से इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से वाकिफ हैं। उन्हें ये सबूत SIT को सौंपकर जांच में मदद करनी चाहिए।
* कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी समाज में नफरत या दुर्भावना फैलाने वाले बेबुनियाद आरोप लगाकर बच निकलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर वे सबूत नहीं दे पाते हैं, तो कानून अपना काम करेगा।
* विपक्ष का पलटवार: इस चुनौती के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने वीएचपी पर निशाना साधते हुए कहा कि चोरी एक पक्ष करे और सबूत विपक्ष से मांगा जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन हिंदू समाज को भावनात्मक रूप से गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार द्वारा अयोध्या पुलिस/SIT के जांच अधिकारी (IO) आशुतोष तिवारी को लिखे गए दो पन्नों के पत्र में विपक्षी नेताओं के सार्वजनिक बयानों की जांच करने और उनसे सबूत मांगने की मुख्य मांग की गई है।
इस पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें लिखी गई हैं:
* तथ्यों की जानकारी होने का तर्क: पत्र में कहा गया है कि चूंकि विपक्षी नेताओं ने चढ़ावे और आभूषणों की चोरी को लेकर सार्वजनिक रूप से बहुत ही विशिष्ट दावे, आंकड़े और गंभीर आरोप लगाए हैं, इसलिए यह मानने का पूरा आधार है कि वे इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से पूरी तरह वाकिफ (acquainted) हैं।
* बयान दर्ज करने और सबूत लेने की मांग: जांच अधिकारी से अनुरोध किया गया है कि वे इन सभी नेताओं को तलब करें, उनके आधिकारिक बयान दर्ज करें, और उनके दावों का तथ्यात्मक आधार, सूचना के स्रोत (sources) तथा उनके पास मौजूद दस्तावेजी सबूतों को जांच के दायरे में लें।
* नेताओं के विशिष्ट दावों का उल्लेख: पत्र में प्रमुख नेताओं द्वारा दिए गए बयानों को बकायदा उद्धृत (quote) किया गया है:
* प्रियंका गांधी वाड्रा: उनके उस बयान का जिक्र है जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या छोटे कर्मचारी अकेले सीसीटीवी बंद करके हजारों करोड़ का चढ़ावा हेरफेर कर सकते हैं या इसके पीछे बड़े लोगों की मिलीभगत है।
* अरविंद केजरीवाल: उनके इस दावे का हवाला दिया गया है कि भगवान राम का हार, चरण पादुकाएं, हीरे, आभूषण, चांदी की ईंटें, दीपक और भारी मात्रा में कैश चोरी हुआ है। केजरीवाल के उस बयान को भी लिखा गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो सरकार गिर जाएगी।
* प्रो. राम गोपाल यादव: उनके उस आरोप का जिक्र है जिसमें उन्होंने ₹20,000 करोड़ के बड़े घोटाले की बात कही थी और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता का दावा किया था।
* संजय सिंह: उनके उस बयान को शामिल किया गया है जिसमें उन्होंने दान पेटियों से ₹200 करोड़ से अधिक की चोरी होने और इसमें 50 से अधिक कर्मचारियों के शामिल होने का आरोप लगाया था।
* झूठे आरोपों पर कार्रवाई की मांग: वीएचपी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि ये नेता जांच अधिकारी के सामने अपने दावों के पक्ष में कोई ठोस सबूत या दस्तावेज पेश करने में असमर्थ रहते हैं, तो उनके खिलाफ बेबुनियाद अफवाहें फैलाने और समाज में दुर्भावना पैदा करने के लिए कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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