कांग्रेस बनाम हिंदुत्व
कांग्रेस सरकारों के दौरान मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर हिंदू विरोधी कृत्यों और तुष्टीकरण के आरोप लगाए जाते रहे हैं। आलोचकों और राजनीतिक दलों (विशेषकर भाजपा) द्वारा इन प्रधानमंत्रियों के काल के जिन प्रमुख कृत्यों का उल्लेख किया जाता है, उनका विवरण इस प्रकार है:
## जवाहरलाल नेहरू का कार्यकाल (1947–1964)
* सोमनाथ मंदिर का विरोध: वर्ष 1951 में गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार का नेहरू ने विरोध किया था तथा तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के वहां जाने पर भी आपत्ति जताई थी।
* हिंदू कोड बिल: नेहरू द्वारा लाए गए हिंदू विवाह और उत्तराधिकार कानूनों को पारंपरिक हिंदू मान्यताओं में हस्तक्षेप और केवल बहुसंख्यक समुदाय के पर्सनल लॉ को बदलने वाला माना गया।
## इंदिरा गांधी का कार्यकाल (1966–1977, 1980–1984)
* सांप्रदायिक संतुलन और नीतियां: आपातकाल के दौरान धार्मिक और वैचारिक संगठनों पर कार्रवाई तथा राजनीति में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की शुरुआत को लेकर उनकी नीतियों की आलोचना की जाती है।
## मनमोहन सिंह का कार्यकाल (2004–2014)
* राम सेतु हलफनामा: वर्ष 2007 में यूपीए सरकार के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया गया था जिसमें भगवान राम के ऐतिहासिक अस्तित्व पर सवाल उठाया गया था।
* भगवा आतंकवाद (Saffron Terror) का नैरेटिव: उनके कार्यकाल के दौरान मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस जैसे मामलों में 'हिंदू आतंकवाद' या 'भगवा आतंकवाद' शब्दावली को बढ़ावा देने का आरोप कांग्रेस पर लगता रहा है।
* कम्युनल वायलेंस बिल (सांप्रदायिक हिंसा विधेयक): वर्ष 2013 में प्रस्तावित इस विधेयक को लेकर यह आलोचना हुई थी कि इसके प्रावधान बहुसंख्यक (हिंदू) समुदाय को ही हर दंगे के लिए दोषी ठहराने वाले थे।
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विभिन्न राज्यों की कांग्रेस सरकारों पर भी समय-समय पर हिंदू विरोधी निर्णय लेने और तुष्टीकरण की नीति अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। विपक्षी दलों और आलोचकों द्वारा जिन प्रमुख राज्यों और निर्णयों का उल्लेख किया जाता है, उनका विवरण इस प्रकार है:## [राजस्थान] (अशोक गहलोत सरकार - विभिन्न कार्यकाल)
* रामदरबार प्रवेश द्वार का विध्वंस (2022): अलवर के सुजानगढ़ में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर भगवान राम और लक्ष्मण की मूर्तियों वाले एक ऐतिहासिक प्रवेश द्वार (रामदरबार) को बुलडोजर से ढहाए जाने की तीखी आलोचना हुई थी।
* हिंदू त्योहारों पर प्रतिबंध/धारा 144: नववर्ष, रामनवमी और हनुमान जयंती जैसे प्रमुख हिंदू त्योहारों के दौरान राज्य के कई संवेदनशील जिलों (जैसे [करौली] , [जोधपुर]) में लाउडस्पीकर, रैलियों और डीजे पर पाबंदी या धारा 144 लगाने को लेकर सरकार पर भेदभाव का आरोप लगा था।
## [कर्नाटक] (सिद्धारमैया सरकार)
* टीपू सुल्तान जयंती मनाना (2015): सिद्धारमैया सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर टीपू सुल्तान की जयंती मनाने की शुरुआत की गई थी। आलोचकों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि टीपू सुल्तान ने बड़े पैमाने पर हिंदुओं का धर्मांतरण और मंदिरों का विनाश किया था।
* मुस्लिम युवाओं के लिए लोन योजना: अल्पसंख्यकों के लिए विशेष व्यावसायिक ऋण योजनाओं (जैसे 'स्वावलंबी सारथी' योजना) को लेकर आरोप लगे कि यह बहुसंख्यक समुदाय की अनदेखी कर एकतरफा आर्थिक लाभ देने का प्रयास है।
## [महाराष्ट्र] (महाविकास अघाड़ी सरकार - कांग्रेस गठबंधन)
* पालघर साधु लिंचिंग (2020): पालघर में उग्र भीड़ द्वारा दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में तत्कालीन सरकार पर आरोपियों को बचाने और मामले की सीबीआई (CBI) जांच का विरोध करने के आरोप लगे थे।
## [आंध्र प्रदेश] (वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार - 2004-2009)
* तिरुपति देवस्थानम विवाद: तिरुमला की पहाड़ियों पर अन्य धर्मों के प्रचार-प्रसार की कथित छूट देने और मंदिर की जमीनों व संपत्तियों के प्रबंधन में गैर-हिंदू दखल बढ़ाने के प्रयासों को लेकर कांग्रेस सरकार की भारी आलोचना हुई थी।
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