आंदोलन का आराजकता के लिए दुरूपयोग उजागर , विपक्ष की श्रेय हड़पने की घुड़दौड़ — अरविन्द सिसोदिया


प्रेस विज्ञप्ति

आंदोलन का आराजकता के लिए दुरूपयोग उजागर , विपक्ष की श्रेय हड़पने की घुड़दौड़ — अरविन्द सिसोदिया

कोटा 23 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया नें कथित छात्र आंदोलन को विपक्ष के कुछ नेताओं द्वारा हाइजेक कर दफन करने और उसमें अपने अपने हित साधनेँ के समानंतर संघर्ष पर टिप्पणी करते हुये कहा कि " पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर शुरू हुआ कथित आंदोलन यूँ तो प्रारंभ से ही भारतीय युवाओं से विदेशियों का छल था, देश में आराजकता उत्पन्न करने का षड्यंत्र था और जंतर मंतर की पत्थरबाजी और भारत विरोधी नारेबाजी नें पूरी तरह से असली चेहरा उजागर कर दिया है। "

सिसोदिया नें कहा कि " अब स्पष्ट तौर पर विपक्षी राजनीतिक दलों के बीच श्रेय लेने की होड़ नें इसे इंडी गठबंधन की टूट फूट का सर्कस बना दिया है। जिस आंदोलन का केंद्र छात्रों की पीड़ा और युवाओं का भविष्य होना बताया जा रहा था, उसमें सम्यवादी दलों के छात्र संगठनों की हिंदुत्व विरोधी और भारत विरोधी ढपली बज रही थी। अब यह विपक्षी दलों के अलग अलग शक्ति प्रदर्शन और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा मात्र बन गया है। "

सिसोदिया नें कहा कि " पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में कई विपक्षी दल सक्रिय हैं। उनके छात्र संगठन और कार्यकर्ता सम्मिलित हैं। इसके बीच कांग्रेस ने अपने राजकुमार राहुल गाँधी के नेतृत्व में अचानक प्रधानमंत्री आवास तक मार्च का निर्णय लिया। सांसदों को भी अंतिम समय तक इसकी जानकारी नहीं दी गई ताकि प्रदर्शन का राजनीतिक प्रभाव अधिकतम हो सके। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास का प्रदर्शन मूल छात्र आंदोलन से ध्यान भटकाने और उसका राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश था। दूसरी ओर कांग्रेस का प्रयास था कि छात्रों के मुद्दे पर लापता जैसी हालात में चल रहे राहुल गाँधी के पक्ष में इसे हड़पा जाये।"

सिसोदिया नें कहा कि " यह पूरा घटनाक्रम विपक्ष के भीतर बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा को भी उजागर करता है। एक ओर राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का केंद्रीय चेहरा बनने का प्रयास कर रहे हैं, तो दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और अन्य क्षेत्रीय दल अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखने और आंदोलनों में अपनी प्रमुख भूमिका स्थापित करने में जुटे हैं। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि विपक्ष के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक श्रेय की भी समानांतर लड़ाई चल रही है।"

सिसोदिया नें कहा कि " यूँ तो यह आंदोलन छात्र हितों का कभी था ही नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं को आराजकता हेतु उकसा कर चोर रास्ते सत्ता प्राप्ती का षड्यंत्र है। दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि इस षड्यंत्र को विपक्षी दल अच्छी तरह समझ बूझ कर भी बहती गंगा में हाथ धोने जैसे कूद पड़े हैं। युवाओं के भविष्य जैसे मूल मुद्दों पर और उनके ठोस समाधान पर कोई चर्चा नहीं है। जबकि राजनीतिक बयानबाज़ी और शक्ति प्रदर्शन और पूरा आंदोलन अपने पक्ष में खींचने का संघर्ष दिखाई दे रहा है।" 

सिसोदिया नें कहा कि " विपक्षी राजनीतिक दलों को यह स्मरण रखना चाहिए कि छात्रों के भविष्य से खेल कर सत्ता परिवर्तन या नेतृत्व स्थापित करने का चोर रास्ता कभी सफल नहीं होगा। भारत में सत्ता का गठन भारत के लोग मतदान के जरिये करते हैं। यहां नेपाल या बांग्लादेश देश एपिसोड संभव नहीं है।

भवदीय 
अरविन्द सिसोदिया
9414180151

==========

प्रेस विज्ञप्ति

छात्रों के मुद्दे दफन, विपक्ष की श्रेय हड़पने की घुड़दौड़ — अरविन्द सिसोदिया

पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक दलों के बीच श्रेय लेने की होड़ में उलझता दिखाई दे रहा है। जिस आंदोलन का केंद्र छात्रों की पीड़ा और युवाओं का भविष्य होना चाहिए था, वह अब विपक्षी दलों के शक्ति प्रदर्शन और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा का मंच बन गया है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि छात्र अब इस पूरे राजनीतिक संघर्ष में कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं।

लंबे समय तक कांग्रेस ने पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को मुख्यतः ट्वीट, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक बयानों तक सीमित रखा। जब छात्रों के आंदोलन ने व्यापक जनसमर्थन हासिल करना शुरू किया और अन्य विपक्षी दल भी उससे जुड़ने लगे, तब कांग्रेस ने अचानक प्रधानमंत्री आवास तक मार्च का निर्णय लिया। सांसदों को भी अंतिम समय तक इसकी जानकारी नहीं दी गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति थी। इसके बाद आम आदमी पार्टी द्वारा कांग्रेस पर आंदोलन का श्रेय हथियाने का आरोप लगाना भी विपक्ष की अंदरूनी प्रतिस्पर्धा को उजागर करता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि छात्र आंदोलन के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने प्रारंभिक चरण में आंदोलन के प्रमुख चेहरों से दूरी बनाए रखी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नहीं चाहती थी कि इस आंदोलन का राजनीतिक लाभ किसी अन्य संगठन या नेतृत्व को मिले। लेकिन जैसे-जैसे आंदोलन राष्ट्रीय विमर्श का विषय बना, कांग्रेस ने स्वयं को उसके केंद्र में स्थापित करने का प्रयास शुरू कर दिया। इससे यह धारणा और मजबूत हुई कि विपक्ष के भीतर सरकार के खिलाफ संघर्ष से अधिक नेतृत्व और राजनीतिक श्रेय की लड़ाई चल रही है।

आज की स्थिति यह संकेत देती है कि इंडी गठबंधन के भीतर भी नेतृत्व को लेकर स्पष्ट प्रतिस्पर्धा है। एक ओर राहुल गांधी स्वयं को राष्ट्रीय विपक्ष का प्रमुख चेहरा स्थापित करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव तथा अन्य क्षेत्रीय दल अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र को बनाए रखने के लिए अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं। जंतर-मंतर और प्रधानमंत्री आवास के घटनाक्रम इसी प्रतिस्पर्धा का सार्वजनिक रूप प्रतीत होते हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या छात्रों का भविष्य राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से बड़ा नहीं है? यदि आंदोलन का केंद्र छात्रों की समस्याओं के बजाय राजनीतिक दलों की तस्वीरें, बयान और श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा बन जाए, तो सबसे अधिक नुकसान उन्हीं युवाओं का होगा जिनके भविष्य की रक्षा के नाम पर यह आंदोलन शुरू हुआ था।

देश के युवाओं को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि न्याय, पारदर्शिता और समयबद्ध समाधान चाहिए। दुर्भाग्य से आज आंदोलन का मूल उद्देश्य धुंधला पड़ता दिख रहा है और विपक्ष की ऊर्जा समाधान के बजाय राजनीतिक बढ़त हासिल करने में अधिक खर्च होती दिखाई दे रही है।

— अरविन्द सिसोदिया

===========




कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से अलग राहुल गांधी PM आवास क्यों पहुंचे? समझिए इसके पीछे की रणनीति

सरकार ने राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी से बात करने और उन्हें मनाने के लिए भेजा। सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी ने शुरू में मांग की थी कि सरकार संसद में नीट के मुद्दे और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन पर चर्चा करने के लिए सहमत हो।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद तक मार्च कर रहे युवाओं को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके अगले दिन यानी मंगलवार को विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर के पास धरना देकर सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया। हालांकि, पुलिस ने तीन घंटे के भीतर ही इस विरोध-प्रदर्शन को खत्म करवा दिया और विपक्ष के बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया।


सोमवार को दिल्ली के बीचों-बीच युवाओं की भारी भीड़ जुटने के बाद कांग्रेस को लगा कि वह ऐसी धारणा नहीं बनने दे सकती कि कॉकरोच जनता पार्टी पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रही है। खासकर इसलिए भी क्योंकि गांधी कुछ समय से इन्हीं मुद्दों को उठाते रहे हैं और उन्होंने दो बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम भी किए हैं। पहला तो जून के कोटा में और दूसरा पिछले हफ्ते देहरादून में हुआ था।

मुख्य विपक्षी दल को मजबूत करनी पड़ी स्थिति
सोमवार के विरोध प्रदर्शन के बाद एक तरह से देखा जाए तो मुख्य विपक्षी दल को अपनी स्थिति मजबूत करनी पड़ी। यह तब हुआ जब कांग्रेस से इतर अधिकांश विपक्षी दल भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक और सीजेपी के समर्थन में एकजुट हो गए थे। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और आम आदमी पार्टी के चीफ अरविंद केजरीवाल मंगलवार को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे विपक्षी नेताओं में शामिल थे।

कांग्रेस सेवा दल ने मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को खाने और पानी देने के लिए अपने वॉलटियर को भेजा। बाद में दिन में कांग्रेस ने अपनी कानूनी टीम को चल रहे प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार, हिरासत में लिए गए और जिन पर हमला किया गया है, उन सभी युवाओं को हर संभव मदद देने का निर्देश दिया। कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने संपर्क किए जाने वाले लोगों के डिटेल शेयर करने की जानकारी दी।

आप ने कांग्रेस पर बोला हमला
आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनका धरना सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश थी। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया, “सीजेपी के धरने को कमजोर करने के लिए मोदी जी ने राहुल गांधी को अपने घर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत दी है।”

कांग्रेस ने इसकी योजना कैसे बनाई?
पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया, उनमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल थे। सरकार का दावा था कि वह संसद में पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करने की गांधी की मांग मान गई थी, लेकिन आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता अपनी बात से मुकर गए और इस बात पर अड़े रहे कि प्रधान को भी इस्तीफा देना होगा।

दोपहर में राहुल और प्रियंका के आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मिलने के कुछ घंटों बाद कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का एक मैसेज मिला, “कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों से अनुरोध है कि वे आज दोपहर 3 बजे 10, राजाजी मार्ग, नई दिल्ली पहुंचें, ताकि कांग्रेस अध्यक्ष को उनके जन्मदिन पर औपचारिक रूप से बधाई दी जा सके।”

कुछ सांसद रह गए हैरान
जब वे खड़गे के घर पहुंचे, तो उन्हें पीएम के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास तक मार्च करने के बारे में बताया गया। इससे कुछ सांसद हैरान रह गए, उनमें से एक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि लीडरशिप ने उन्हें धरने के बारे में पहले से नहीं बताया था ताकि पुलिस को इसकी भनक न लगे।

सांसद ने कहा, “हम सभी को (कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन) खड़गे जी के घर उनके जन्मदिन की बधाई देने के लिए बुलाया गया था। वहां हमें बताया गया कि पीएम के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहा है और हम सभी को वहां जाना है। यह हमारे लिए भी अचानक हुआ।” केरल के सीएम वी.डी. सतीशन केरल हाउस में थे, तभी उन्हें धरने के बारे में पता चला और वे अपने साथियों के साथ शामिल हो गए। हालांकि, कुछ समय बाद वे वहां से चले गए।

अखिलेश और सुप्रिया सुले भी विरोध प्रदर्शन में हुए शामिल
पीएम के घर के बाहर, गांधी को अपनी पार्टी के साथियों को जिप-टाई बांटते हुए देखा गया, ताकि वे अपनी कलाइयां बांध सकें और पुलिस के लिए उन्हें घसीटकर ले जाना मुश्किल हो जाए। विरोध प्रदर्शन वाली जगह से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है। प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।” उनकी अपील के बाद, सुले और अखिलेश भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए।

राहुल गांधी से जितेंद्र सिंह ने की थी बात
सरकार ने राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी से बात करने और उन्हें मनाने के लिए भेजा। सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी ने शुरू में मांग की थी कि सरकार संसद में नीट के मुद्दे और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन पर चर्चा करने के लिए सहमत हो। जितेंद्र सिंह ने एक्स पर लिखा, “कुछ ही पलों में, सरकार के शीर्ष नेतृत्व से अनुमति लेने के बाद, राहुल गांधी को भरोसा दिलाया गया कि उनकी मांग मान ली गई है और सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है।”

हालांकि, मंत्री ने दावा किया कि जब विपक्ष के नेता को इस बारे में बताया गया, तो वे अपने वादे से मुकर गए और प्रधान के इस्तीफे पर आश्वासन मांगा। जितेंद्र सिंह ने कहा, “जब उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाने की कोशिश की गई कि उनके जैसे वरिष्ठ नेता का इतनी जल्दी अपने वादे से मुकर जाना उन्हें शोभा नहीं देता, तो उन्होंने कहा कि यह उनका अधिकार है। जब गृह सचिव ने समझाने की कोशिश की कि यह जगह धरने के लिए उपयुक्त नहीं है, तो उनका जवाब था कि जहां चाहें वहां बैठना भी उनका अधिकार है।”


टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

भारतीय संस्कृति के अजर अमर अष्ट-चिरंजीवी

राजस्थान के व्याबर जिले में देवमाली गांव,कैंसर का 'झाड़ा'

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए हिंदुत्व में विभाजन के षड्यंत्र — अरविन्द सिसोदिया

छत्रपति शिवाजी : सिसोदिया राजपूत वंश

हिन्दु भूमि की हम संतान नित्य करेंगे उसका ध्यान

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

महारानी कर्णावती का जौहर ही इस्लामी अत्याचार का सत्य Queen Karnavati

देश में पत्रकारिता के लिए एक ठोस नियामक ढांचा हो - हाईकोर्ट