कविता - दुनिया जिसको मोदीजी कहती, वह है राष्ट्र स्वाभिमान
कविता -
दुनिया जिसको मोदीजी कहती, वह है राष्ट्र स्वाभिमान
- अरविन्द सिसोदिया
मातृभूमि का चिंतन करता, रात-दिन अविराम,
दुनिया जिसको मोदीजी कहती, वह है राष्ट्र स्वाभिमान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====1=====
सेवा जिसका धर्म बना है, जनहित जिसका काम,
गरीब, किसान, युवा, नारी को देता नया मुकाम।
विकास की गंगा बहती,सभी तरफ का भारत नाम,
विश्व पटल पर ऊँचा होता भारत का सम्मान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====2=====
सीमा पर है सजग प्रहरी, भीतर जगाया स्वाभिमान,
आतंक का हुआ सफाया,नक्सलमुक्ति का सफल हुआ अभियान।
छप्पन इंची सीना ताने खड़ा हुआ है हिंदुस्तान,
सुरक्षित, सक्षम, आत्मनिर्भर बनता अपना देश महान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====3=====
काशी, अयोध्या, महाकाल की फिर लौटी पहचान,
विरासत का गौरव जगमग, बढ़ा संस्कृति का मान।
रामलला के दिव्य धाम से पुलकित हुआ जहान,
श्रद्धा और विकास साथ हैं, यही नया प्रतिमान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====4=====
चंद्रयान में उड़ती आशा, गगन छूता विज्ञान,
युवा शक्ति के नव सपनों को मिलता नया आयाम ।
रेल, सड़क, बंदरगाहों से जुड़ता अपना हिन्दुस्तान,
हर गाँव, हर जन तक पहुँचा विकास का अभियान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====5=====
जनकल्याण का दीप जले जब, मिता निराशा नाम ,
राष्ट्र प्रथम का मंत्र सुनाए भारत का नेतृत्वधाम।
माँ भारती के चरणों में अर्पित तन-मन-धन और प्राण,
विश्वगुरु बनने को बढ़ रहा अपना हिन्दुस्तान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====6=====
विकास, विश्वास और सेवा का यह पावन आयाम,
जन-जन के मन में बसता भारत का स्वाभिमान।
मातृभूमि का चिंतन करता, रात-दिन अविराम,
दुनिया जिसको मोदीजी कहती, वह है राष्ट्र स्वाभिमान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
===== समाप्त =====
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