कविता - दुनिया जिसको मोदीजी कहती, वह अपना राष्ट्र स्वाभिमान
कविता - जनकल्याण – राष्ट्र स्वाभिमान
मातृभूमि का चिंतन करता, रात-दिन अविराम,
दुनिया जिसको मोदीजी कहती, वह अपना राष्ट्र स्वाभिमान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====1=====
सेवा जिसका धर्म बना है, जनहित जिसका काम,
गरीब, किसान, युवा, नारी को देता नया मुकाम।
विकास की गंगा बहती है, गूँजे भारत नाम,
विश्व पटल पर ऊँचा होता भारत का सम्मान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====2=====
सीमा पर सजग जवान हैं, भीतर जागा मान,
आतंकों को उत्तर मिलता, दृढ़ होता अभियान।
नक्सलमुक्ति की राह पकड़कर बढ़ता हिंदुस्तान,
सुरक्षित, सक्षम, आत्मनिर्भर बनता अपना देश महान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====3=====
काशी, अयोध्या, महाकाल की फिर लौटी पहचान,
विरासत का गौरव जगमग, बढ़ा संस्कृति का मान।
रामलला के दिव्य धाम से पुलकित हुआ जहान,
श्रद्धा और विकास साथ हैं, यही नया प्रतिमान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====4=====
चंद्रयान की उड़ती आशा, गगन छूता विज्ञान,
युवा शक्ति के नव सपनों को मिलता नया आयाम ।
रेल, सड़क, बंदरगाहों से जुड़ता हिन्दुस्तान,
हर गाँव, हर जन तक पहुँचा विकास का अभियान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====5=====
जनकल्याण का दीप जले जब, मिटे निराशा-ग्राम,
राष्ट्र प्रथम का मंत्र सुनाए भारत का नेतृत्वधाम।
माँ भारती के चरणों में अर्पित तन-मन-प्राण,
विश्वगुरु बनने को बढ़ता अपना हिन्दुस्तान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
=====6=====
विकास, विश्वास और सेवा का यह पावन आयाम,
जन-जन के मन में बसता भारत का स्वाभिमान।
मातृभूमि का चिंतन करता, रात-दिन अविराम,
दुनिया जिसको मोदीजी कहती, वह अपना राष्ट्र स्वाभिमान।
जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम॥
===== समाप्त =====
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें