रविवार, 29 नवंबर 2015

हिन्दू संस्कृति के पुनर्जागरण के पुरोधा : श्री अशोक सिंहल

भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के पुरोधा : श्री अशोक सिंहल
तारीख: 23 Nov 2015
- पाञ्चजन्य ब्यूरो





भारतीय संस्कृति संपूर्ण विश्व में अपने परंपरागत ज्ञान वैभव के लिए अनुकरणीय मानी जाती है। विश्वभर में आज भी संभावित वैश्विक आर्थिक शक्ति वाले भारत से ज्यादा विश्वगुरु भारत की अवधारणा पर ज्यादा चर्चा होती है। विश्वगुरु की इसी छवि को एक बार पुन: प्रभावी ढंग से स्थापित करने के लिए जीवन के पूरे 8 दशक लगाकर श्री अशोक सिंहल ने विश्व हिन्दू परिषद और उससे जुड़े कई प्रकल्पों के माध्यम से देश-विदेश में अनवरत कार्य किया।
मूलत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक व्रती स्वयंसेवक श्री अशोक सिंहल प्रचारक रूप में भी समाज और देश के गौरव एवं स्वाभिमान के लिए प्रतिबद्ध रहे। बचपन से संघ कार्य में तल्लीन अशोक जी ने आपातकाल के बाद दिल्ली और हरियाणा प्रांत में प्रांत प्रचारक रहते हुए अपने बहुआयामी बौद्धिक कौशल से संघ शक्ति को विस्तार प्रदान किया। संघ के स्वयंसेवक जानते हैं कि नियमित प्रार्थनाओं और गीतों को जब अशोक जी का मधुर और ओजपूर्ण कंठ मिलता था तो वे जीवंत प्रेरणा व जागरण के प्रतीक बन जाते थे। श्रीगुरुजी की प्रेरणा से संघ कार्य में प्रवृत्त हुए अशोक जी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से अर्जित अभियंता की उपाधि और ऐश्वर्ययुक्त जीवन को राष्ट्र के निमित्त अर्पित किया और आजीवन हिन्दू समाज को उसके परंपरागत वैभव और जीवंत दर्शन को अपनाने और जीने की सीख देते रहे। हिन्दू गौरव के प्रतीक पुरुष श्री अशोक सिंहल निरंतर पुरुषार्थ करते हुए बहुसंख्यक हिन्दू समाज की अस्मिता और पहचान के बिन्दुओं को स्थापित करने के लिए संघर्षरत रहे। एक तेजस्वी संगठनकर्ता, श्रेष्ठ वक्ता, वेदवाड्मय के ज्ञाता, भारतीय संस्कृति और परंपरा के उद्गाता श्री सिंहल को संघ शक्ति के मार्गदर्शन में संभवत: हिन्दुत्व के मुखर प्रतिनिधि के रूप में किसी दैवीय शक्ति ने भेजे थे। 1981 में हुए विराट हिन्दू सम्मेलन में संघ के शीर्ष अधिकारियों ने उनकी इसी विशेषज्ञता और नेतृत्व क्षमता को कारगर ढंग से हिन्दू समाज के उत्थान में लगाने हेतु उन्हें 1964 में स्थापित विश्व हिन्दू परिषद से जोड़ दिया। ज्ञान और बुद्धि से ज्यादा संगठन की सफलता नेतृत्व के हृदय की शुद्धता पर निर्भर करती है। इन्हीं अभूतपूर्व गुणों के कारण अशोक सिंहल जी ने विश्व हिन्दू परिषद में और उसके अन्य प्रकल्पों में अपने ही संस्कारों में पगे-बढ़े बहुआयामी व्यक्तित्व वाले असंख्य कार्यकर्ताओं को जोड़ा। संस्कृत भाषा के अनन्य अनुरागी और वेद पुराणादि प्राच्य विद्याओं के उपासक श्री अशोक सिंहल को ये संस्कार किशोरावस्था से ही प्राप्त थे। अपने दो गुरुओं- रा.स्व.संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्रीगुरुजी और रामचंद्र तिवारी से उन्होंने संगठन कौशल और आध्यात्मिक उन्नयन के गुर संस्कार रूप में ग्रहण किए थे।
संघ के प्रचारक अशोक जी को जब हिन्दू संगठन को मजबूत करने का दायित्व प्रदान किया गया तो विश्व हिन्दू परिषद और अशोक जी एक-दूसरे के पर्याय हो गए। अशोक जी ने जहां सेकुलरवादियों और भारतीयता के विरोधियों को प्रभावी आंदोलन व संगठित शक्ति के बल पर चारों खाने चित किया, वहीं देश में देववाणी संस्कृत की प्रतिष्ठा और वेद विद्याओं के प्रचार-प्रसार के लिए व्यापक भावभूमि तैयार की।
देशभर में कई विश्वविद्यालयों के साथ वामपंथियों की प्रयोगशाला रहे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तक में संस्कृत भाषा के विभाग  खुलवाने में अशोक जी की विशेष भूमिका रही। इसके साथ ही अपने व्यक्तिगत प्रयत्नों से उन्होंने गोसंवर्धन, वेद विद्या प्रतिष्ठान, सामाजिक समरसता, धर्म प्रसार इत्यादि जीवन व्यवहार के विभिन्न क्षेत्रों के लिए व्यापक कार्ययोजना बनायी, जिससे देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की तरंगें उत्पन्न होती गईं।
काशी विद्वत् परिषद के विद्वानों के साथ वेद की शिक्षा पर उन्होंने अकाट्य तर्क दिए। इस चुनौती को अशोक जी ने गंभीरता से स्वीकार कर अपने गुरुदेव पू.श्रीगुरुजी को वेद-विद्या के प्रचार-प्रसार के वचन को साकार करते हुए श्री किशोर व्यास जी के माध्यम से विहिप के केन्द्रीय कार्यालय संकटमोचन आश्रम रामकृष्णपुरम में शुक्लयजुर्वेद के वेद विद्यालय का शुभारंभ करवाया।
अशोक जी नि:संदेह आध्यात्मिक शक्ति से संचालित थे। अशोक जी ने प्रत्येक मंच पर इस बात को स्वीकार किया है कि 'मेरे जीवन में दो गुरुओं- पू. श्रीगुरुजी और गुरुदेव रामचंद्र तिवारी का सर्वाधिक योगदान है। स्वयं अशेाक जी कहते थे ईश भाव के साथ राष्ट्र भाव के जुड़ने से ही परिपूर्णता का बोध हो सकता है। यह अनेक वर्ष के संपर्क से मुझे शिक्षा मिली। संघ की हमारी नित्य प्रार्थना में यद्यपि ईश साधना के साथ ही राष्ट्र साधना जुड़ी है, इसकी गहराई श्रीगुरुदेव के सम्पर्क से ही समझ सका।'
इसी धर्म प्रवणता व आध्यात्मिक वृत्ति का परिणाम हुआ कि देशभर के संत-महात्माओं को अशोक जी ने अपने संगठन कौशल एवं मेधा के बल पर राष्ट्र के लिए एकाकार करने की कल्पना को साकार किया। उनके नेतृत्व में देश-विदेश में प्रभावी ढंग से आयोजित धर्मसंसदों और विराट हिन्दू सम्मेलनों ने 'हिन्दव: सोदरा: सर्वे' की व्यापक भावना के माध्यम से हिन्दुओं में न केवल देश के अंदर बल्कि विदेशों में भी गौरव का भाव जगाया। समूचे विश्व में हिन्दुत्व की पताका फहराकर अशोक जी ने भारतीय सनातन संस्कृति, जीवनमूल्यों और संस्कारों को वैश्विक व्याप्ति प्रदान की। विश्व के हिन्दुओं में भावनात्मक गौरव और स्वाभिमान भाव जगाने का अद्भुत कार्य संपन्न किया। विश्व हिन्दू परिषद के विभिन्न आयामों के माध्यम से देश के कई कोनों में फैले वनवासियों की शिक्षा की बात हो, चाहे समाज से गरीबी हटाने की प्रबल भावना, मातृशक्ति के सम्मान की बात हो, चाहे नवयुवकों को परंपरा और संस्कृति के संस्कार लेकर समाज में सक्रिय होने का मंत्र, अशोक जी ने समाज के बहुआयामी विकास की व्यापक भावना को अपने कर्मकौशल और श्रेष्ठ आचार-व्यवहार से साकार किया। व्यक्तिगत जीवन में एक महायोगी की तरह  प्राणिमात्र के कल्याण भाव के साथ उदात्त और निश्छल जीवन को चरितार्थ कर अशोक जी ने कार्यकर्ताओं की एक अनंत श्रृंखला खड़ी की जो अपना सर्वस्व अर्पित कर समाज-देश के लिए अहर्निश तत्पर है। श्री अशोक सिंहल एक व्यक्ति नहीं, बड़ी संस्था थे। वे सामान्य मानव नहीं देवदुर्लभ महामानव थे। सत्य, अहिंसा और प्रेम के सिद्धांतों पर डिगे रहने वाले अशोक जी एक क्रांतिकारी आंदोलनकर्ता थे जिन्होंने जो मुद्दा पकड़ा उसको समाधान की परिणति तक पहुंचाया। भारत देश ने ही नहीं अपितु समूचे विश्व ने एक हिन्दू पुरोधा को अपने बीच से भले ही खो दिया हो। लेकिन उनके द्वारा सात्विक भाव एवं सदाचरण से रोपी गयी हिन्दू संस्कृति की विशाल बेल निरंतर आगे बढ़ती रहेगी और भावी संततियों के लिए भी एक वरदान सिद्ध होगी। प्रस्तुत है सांस्कृतिक पुनर्जागरण के कालजयी पुरोधा अशोक सिंहल जी की पावन स्मृतियों को सजल श्रद्धांजलि के साथ उकेरता, उनके सहयात्रियों के भावपूर्ण विचार समेटे, यह विशिष्ट आयोजन।     

शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

असहिष्णुता के नाम पर देश में बौद्धिक आतंकवाद फैलाया जा रहा है- जे. नंद कुमार

**** बौद्धिक आतंकवाद
जयपुर, 26 नवंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे. नंदकुमार ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पहला हमला पहले संविधान संशोधन के रूप में नेहरू सरकार ने साप्ताहिक पत्रिका पर प्रतिबंध लगाकर किया था। उन्होंने बताया कि मद्रास स्टेट से रोमेश थापर की क्रास रोड्स नामक पत्रिका में नेहरू की आर्थिक एवं विदेश नीतियों के खिलाफ एक लेख लिखा गया था, जिसके फलस्वरूप इस पत्रिका को मद्रास सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया।
नंदकुमार गुरूवार को 65 वें संविधान दिवस के अवसर पर प्रेस क्लब में पत्रकारों के साथ चाय पर वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यद्यपि रोमश थापर न्यायलय में मद्रास सरकार के विरूद्ध मुकदमा जीत गए थे, तो भी 12 मई 1951 में संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटा गया। 25 मई को यह संशोधन पारित हो गया जो वर्तमान में भी है। यह उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि असहिष्णु कौन है, और इसकी शुरूआत किसने की इस पर विचार करना चाहिए।
संविधान को लोकतंत्र में ईष्वर के समान बताते हुए उन्होंने कहा कि संविधान में पंथ निरपेक्षता शब्द आने से पूर्व भी भारत में सनातन पंरपरा से सर्वपंथ समभाव का व्यवहार होता था। सेकुलरिज्म पर उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण होते समय इस शब्द को शामिल करने की जरूरत महसूस नहीं की गई थी किन्तु 1976 में आपातकाल के दौरान तत्कालीन सरकार ने इसे संविधान में शामिल किया।
देश में असहिष्णुता के लेकर छिड़ी बहस और अवार्ड वापसी के बीच उन्होंन कहा कि असहिष्णुता के नाम पर देश में बौद्धिक आतंकवाद फैलाया जा रहा है। असहिष्णुता का डर दिखाकर लोगों का एक किया जा रहा है तथा आक्रामक विरोध जताने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। देश आगे बढ़ रहा है और इसे विकास को अवरुद्ध करने के लिए यह सब साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता से शुरू हुई बहस असहिष्णुता पर आ गई है।
असहिष्णुता मामले में प्रधानमंत्री की ओर से सफाई नहीं दिए जाने के सवाल उनका कहना था कि जरूरी नहीं कि हर बात का स्पष्टीकरण प्रधानमंत्री ही दे। यह कुछ लोगों की साजिश है जो उकसा कर साध्वी प्राची और साक्षी महाराज के बयान का इंतजार कर रहें हैं।
अवार्ड वापस करने वालों पर कटाक्ष करते हुए नंदकुमार ने कहा कि वे ऐसा कर देश की जनता का अपमान कर रहें हैं। उदाहरण देेते हुए उन्होंने बताया कि नयनतारा ने सिक्ख दंगो के 18 माह बाद अवार्ड लिया था उस समय कोई विरोध दर्ज नहीं करवाया किन्तु अब वे 18 वर्ष बाद अवार्ड वापस कर रही है। अभिव्यक्ति की स्वंतत्रता पर उनका कहना था कि सबको अपने विचार प्रकट करने का अधिकार है किन्तु कानून को हाथ में लेने का नहीं। उन्होंने दादरी जैसी घटनाएं रोकने का समर्थन किया तथा कहा कि ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई होनी चाहिए। वैचारिक स्थिति के बारे में उन्होंने बताया कि जाने माने अभिनेता दिलीप कुमार और मीना कुमारी को भी अपना नाम बदलना पड़ा था, किन्तु आज सहिष्णुता का माहौल होने के कारण वे अपने मूल नाम से काम कर पा रहे है।
उन्होंन कहा कि हमारे देश में ऐसा माहौल नहीं है। पाकिस्तानी साहित्यकार और पत्रकार व कनाडा के नागरिक तारक फतह ने भी एक बयान दिया है कि अगर विश्व में मुसलमानों के रहने के लिए सबसे बेहतर माहौल है तो वह सिर्फ भारत में है। आमिर खान पर उन्होंने बताया कि भारत में उनकी पत्नी असुरक्षित महसूस करती है पर क्या वे पीके जैसी फिल्म पाकिस्तान में बना सकते थे। जब देश उनकी फिल्म को सहन कर सकता है तो वे देश में असुरक्षित कैसे हुए।

गुरुवार, 26 नवंबर 2015

26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित



26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित,
जानिए अपने संविधान की 26 खास बातें
By  एबीपी न्यूज  Wednesday, 25 November 2015 01:13 PM

नई दिल्ली : सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित किया है. इस अवसर पर गुरुवार को विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है. सरकार ने संसद के विशेष सत्र का भी आयोजन किया है. संसदीय कार्य मंत्रालय ने संविधान दिवस के दिन संसद भवन परिसर को रोशन करने का फैसला किया है.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने 26 नवंबर को अधिकारियों से संविधान की प्रस्तावना पढ़ने को कहा है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र है और इसके संविधान की कई खासियतें भी हैं. आइए जानते हैं भारतीय संविधान की खास बातें....


1. भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है. संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है. जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है.

2. संविधान को 26 नवंबर 1949 को स्वीकार किया गया था लेकिन वह 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ.

3. 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया, जो अंत तक इस पद पर बने रहें.

4. भारत संघ में ऐसे सभी क्षेत्र शामिल होंगे, जो इस समय ब्रिटिश भारत में हैं या देशी रियासतों में हैं या इन दोनों से बाहर, ऐसे क्षेत्र हैं, जो प्रभुता संपन्न भारत संघ में शामिल होना चाहते हैं.

5. भारत के नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, पद, अवसर और कानूनों की समानता, विचार, भाषण, विश्वास, व्यवसाय, संघ निर्माण और कार्य की स्वतंत्रता, कानून तथा सार्वजनिक नैतिकता के अधीन प्राप्त होगी.

6. इसमें अब 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है. परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं.

7. संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता को मंत्रिपरिषद् होगी जिसका प्रमुख पीएम होगा.

8. वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद् में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है जो वर्तमान में नरेन्द्र मोदी हैं.

9. संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे. जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे.

10. इस संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन मे कुल 114 दिन बैठक की. इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी.

11. भारत के संविधान के निर्माण में डॉ भीमराव अम्बेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्हें 'संविधान का निर्माता' कहा जाता है.


12. भारत किसी भी विदेशी और आंतरिक शक्ति के नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त सम्प्रुभतासम्पन्न राष्ट्र है. यह सीधे लोगों द्वारा चुने गए एक मुक्त सरकार द्वारा शासित है तथा यही सरकार कानून बनाकर लोगों पर शासन करती है.

13. 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया. यह सभी धर्मों की समानता और धार्मिक सहिष्णुता सुनिश्चीत करता है.

14. भारत का कोई आधिकारिक धर्म नहीं है. यह ना तो किसी धर्म को बढावा देता है, ना ही किसी से भेदभाव करता है.

15. भारत एक स्वतंत्र देश है, किसी भी जगह से वोट देने की आजादी, संसद में अनुसूचित सामाजिक समूहों और अनुसूचित जनजातियों को विशिष्ट सीटें आरक्षित की गई है.

16. स्थानीय निकाय चुनाव में महिला उम्मीदवारों के लिए एक निश्चित अनुपात में सीटें आरक्षित की जाती है.

17. राजशाही, जिसमें राज्य के प्रमुख वंशानुगत आधार पर एक जीवन भर या पदत्याग करने तक के लिए नियुक्त किया जाता है, के विपरित एक गणतांत्रिक राष्ट्र के प्रमुख एक निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होते है.

18. भारत के राष्ट्रपति पांच वर्ष की अवधि के लिए चुनावी प्रक्रिया से चुना जाता है.

19. भारतीय संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्षण है, राज्य की शक्तियां केंद्रीय तथा राज्य सरकारों मे विभाजित होती हैं. दोनों सत्ताएं एक-दूसरे के अधीन नहीं होती है, वे संविधान से उत्पन्न तथा नियंत्रित होती हैं.

20. राज्य अपना पृथक संविधान नही रख सकते है, केवल एक ही संविधान केन्द्र तथा राज्य दोनो पर लागू होता है.

21. भारत मे द्वैध नागरिकता नहीं है. केवल भारतीय नागरिकता है. जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबर का दर्जा और अवसर देता है.

22. भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित तथा विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है. प्रस्तावना के माध्यम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है.

23. संविधान की प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह 'हम भारत के लोग', इस वाक्य से प्रारम्भ होती है.

24.  प्रत्‍येक राज्‍य में एक विधान सभा है. जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में एक ऊपरी सदन है जिसे विधान परिषद् कहा जाता है. राज्‍यपाल, राज्‍य का प्रमुख है.

25. संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्‍य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है. अवशिष्‍ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं. केन्‍द्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्‍य क्षेत्र कहा जाता है.

26. 'समाजवादी' शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया. यह अपने सभी नागरिकों के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करता है.
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भारतीय संविधान का लागू होना
1. लोक सभा तथा राज्य सभा की संयुक्त बैठक कब होती है? → संसद का सत्र शुरू होने पर
2. किस व्यक्ति ने वर्ष 1922 में यह माँग की कि भारत के संविधान की संरचना हेतु गोलमेज सम्मेलन बुलाना चाहिए? → मोती लाल नेहरू
3. कांग्रेस ने किस वर्ष किसी प्रकार के बाह्य हस्तक्षेप के बिना भारतीय जनता द्वारा संविधान के निर्माण की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया था? → 1936
4. वर्ष 1938 में किस व्यक्ति ने व्यस्क मताधिकार के आधार पर संविधान सभा के गठन की मांग की? → जवाहर लाल नेहरू
5. वर्ष 1942 में किस योजना के तहत यह स्वीकार किया गया कि भारत में एक निर्वाचित संविधान सभा का गठन होगा, जो युद्धोपरान्त संविधान का निर्माण करेगी? → क्रिप्स योजना
6. राज्यसभा के लिए नामित प्रथम फ़िल्म अभिनेत्री कौन थीं? → नरगिस दत्त
7. संविधान संशोधन कितने प्रकार से किया जा सकता है? → 5
8. कैबीनेट मिशन योजना के अनुसार, संविधान सभा के कुल कितने सदस्य होने थे? → 389
9. संविधान सभा के लिए चुनाव कब निश्चित हुआ? → जुलाई 1946
10. किसी क्षेत्र को ‘अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्र’ घोषित करने का अधिकार किसे है? → राष्ट्रपति
11. संविधान सभा को किसने मूर्त रूप प्रदान किया?→  जवाहरलाल नेहरू
12. भारत में कुल कितने उच्च न्यायालय हैं? → 21
13. संविधान सभा की प्रथम बैठक कब हुई थी?→  9 दिसम्बर, 1946
14. पुनर्गठन के फलस्वरूप वर्ष 1947 में संविधान सभा के सदस्यों की संख्या कितनी रह गयी? → 299
15. संविधान सभा में किस देशी रियासत के प्रतिनिधि ने भाग नहीं लिया था? → हैदराबाद
16. भारतीय संविधान में किस अधिनियम के ढांचे को स्वीकार किया गया है? → भारत शासन अधिनियम 1935
17. राष्ट्रपति चुनाव संबंधी मामले किसके पास भेजे जाते हैं? → उच्चतम न्यायालय
18. प्रथम लोकसभा का अध्यक्ष कौन था? → जी. वी. मावलंकर
19. पहली बार राष्ट्रपति शासन कब लागू किया गया? → 20 जुलाई, 1951
20. संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकता के सम्बन्ध में संसद ने एक व्यापक नागरिकता अधिनियम कब बनाया? → 1955
21. प्रधानमंत्री बनने की न्यूनतम आयु है? → 25 वर्ष
22. जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन कब हुआ?→  सितम्बर 1946
23. मुस्लिम लीग कब अंतरिम सरकार में शामिल हुई?→  अक्टूबर 1946
24. संविधान सभा की पहली बैठक किस दिन शुरू हुई? → 9 दिसम्बर 1946
25. संविधान सभा का पहला अधिवेशन कितनी अवधि तक चला? → 9 दिसम्बर 1946 से 23 दिसम्बर 1946
26. देश के स्वतन्त्र होने के पश्चात संविधान सभा की पहली बैठक कब हुई? → 31 अक्टूबर 1947
27. संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष किसे चुना गया? → सच्चिदानन्द सिन्हा
28. संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष कौन था? → डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
29. संविधान निर्माण की दिशा में पहला कार्य ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ था 22 जनवरी 1947 को यह प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया?→  जवाहर लाल नेहरू
30. भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का चुनाव किया गया था?→  संविधान सभा द्वारा
31. भारतीय संविधान की प्रस्तावना के अनुसार, भारत के शासन की सर्वोच्च सत्ता किसमें निहित्त है? → जनता
32. भारत के प्रथम सिख प्रधानमंत्री कौन है? → मनमोहन सिंह
33. प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने वाले प्रथम व्यक्ति कौन हैं? → मोरारजी देसाई
34. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति कौन करता है? → राष्ट्रपति
35. भारतीय संविधान के किस भाग को उसकी ‘आत्मा’ की आख्या प्रदान की गयी है? → प्रस्तावना
36. केरल का उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है? → एर्नाकुलम
37. राज्यसभा के लिए प्रत्येक राज्य के प्रतिनिधियों का निर्वाचन कौन करता है? → विधानसभा के निर्वाचित सदस्य
38. 31वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या कितनी निर्धारित की गयी है? → 545
39. हरियाणा राज्य कब बना था? → 1 नवम्बर, 1966
40. दीवानी मामलों में संसद के सदस्यों को किस दौरान गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता? → संसद के सत्र के दौरान, संसद के सत्र आरम्भ होने के 40 दिन पूर्व तक, संसद के सत्र आरम्भ होने के 40 दिन बाद तक
41. संघीय मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देने वाले प्रथम मंत्री कौन थे? → श्यामा प्रसाद मुखर्जी
42. भारत के संपरीक्षा और लेखा प्रणालियों का प्रधान कौन होता है? → भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक
43. लोकसभा के अध्यक्ष को कौन चुनता है? → लोकसभा के सदस्य
44. कौन उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री बनी? → सुचेता कृपलानी
45. प्रथम लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या कितनी थी? → 1874
46. भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री कौन रहे हैं? → सरदार वल्लभ भाई पटेल
47. सबसे लम्बी अवधि तक एक ही विभाग का कार्यभार संभालने वाले केन्द्रीय मंत्री कौन थे? → राजकुमारी अमृत कौर
48. दादरा एवं नगर हवेली किस न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है? → मुम्बई उच्च न्यायालय
49. मूल संविधान में राज्यों को कितने प्रवर्गों में रखा गया? → 4
50. लोकसभा की सदस्यता के लिए उम्मीदवार को कितने वर्ष से कम नहीं होना चाहिए? → 25 वर्ष
51. भारतीय संविधान किस दिन से पूर्णत: लागू हुआ? → 26 जनवरी, 1950
52. पहली बार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कब की गई? → 26 अक्टूबर, 1962
53. डोगरी भाषा किस राज्य में बोली जाती है? → जम्मू और कश्मीर
54. भारत के नागरिकों को कितने प्रकार की नागरिकता प्राप्त है? → एक
55. भारतीय स्वाधीनता अधिनियम को किस दिन ब्रिटिश सम्राट की स्वीकृति मिली? → 21 जुलाई 1947
56. भारतीय संविधान कितने भागों में विभाजित है? → 22
57. केन्द्र और राज्य के बीच धन के बँटवारे के सम्बन्ध में कौन राय देता है? → वित्त आयोग
58. किस तरह से भारतीय नागरिकता प्राप्त की जा सकती है? → जन्म, वंशानुगत, पंजीकरण
59. भारतीय संविधान ने किस प्रकार के लोकतंत्र को अपनाया है? → लोकतांत्रिक गणतंत्र
60. मंत्रिपरिषद का अध्यक्ष कौन होता है? → प्रधानमंत्री
61. जब भारत स्वतंत्र हुआ, उस समय कांग्रेस का अध्यक्ष कौन था? → जे. बी. कृपलानी
62. मूल संविधान में राज्यों की संख्या कितनी थी? → 27
63. 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में किन शब्दों को नहीं जोड़ा गया? → गुटनिरपेक्ष
64. किस राज्य के विधान परिषद की सदस्य संख्या सबसे कम है? → जम्मू-कश्मीर
65. भारत में किस प्रकार की शासन व्यवस्था अपनायी गयी है? → ब्रिटिश संसदात्मक प्रणाली
66. भारत की संसदीय प्रणाली पर किस देश के संविधान का स्पष्ट प्रभाव है? → ब्रिटेन
67. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों की प्रेरणा किस देश के संविधान से मिली है? → आयरलैण्ड
68. भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया किस देश के संविधान से प्रभावित है? → दक्षिण अफ़्रीका
69. भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया 28वाँ राज्य कौन-सा है।→ झारखण्ड
70. हिमाचल प्रदेश को राज्य का दर्ज़ा कब प्रदान किया गया? → 1971 में
71. पहला संवैधानिक संशोधन अधिनियम कब बना? → 1951
72. राष्ट्रपति पद के निर्वाचन हेतु उम्मीदवार की अधिकतम आयु कितनी होनी चाहिए? → कोई सीमा नहीं
73. भारत का संविधान कब अंगीकर किया गया था? → 26 नवम्बर,1949
74. किस वर्ष गांधी जयंती के दिन केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना की गयी? → 1985
75. विधान परिषद को समाप्त करने वाला आखिरी राज्य कौन है? → तमिलनाडु
76. लोकसभा का सचिवालय किसकी देख-रेख में कार्य करता है? → संसदीय मामले के मंत्री
77. ‘विधान परिषद’ का सदस्य होने के लिए कम से कम कितनी आयु होनी चाहिए? → 30 वर्ष
78. “राज्यपाल सोने के पिंजरे में निवास करने वाली चिड़िया के समतुल्य है।” यह किसका कथन है? → सरोजिनी नायडू
79. देश के किस राज्य में सर्वप्रथम गैर-कांग्रेसी सरकार गठित हुई? → 1957, केरल
80. किस राज्य की विधान परिषद की सदस्य संख्या सर्वाधिक है? → उत्तर प्रदेश
81. प्रत्येक राज्य में अनुसूचित जाति और जनजातियों की सूची कौन तैयार करता है? → प्रत्येक राज्य के राज्यपाल के परामर्श से राष्ट्रपति
82. भारतीय संविधान में तीन सूचियों की व्यवस्था कहाँ से ली गयी है? → भारत शासन अधिनियम 1935 से
83. किस वर्ष सिक्किम को राज्य का दर्जा दिया गया था? → 1975 में
84. जनता पार्टी के शासन के दौरान भारत के राष्ट्रपति कौन थे? → नीलम संजीव रेड्डी
85. कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय कौन करता है? → लोकसभा का अध्यक्ष
86. दल-बदल से सम्बन्धित किसी प्रश्न या विवाद पर अंतिम निर्णय किसका होता है? → सदन के अध्यक्ष
87. 1922 में किस व्यक्ति ने मांग की थी कि भारत की जनता स्वयं अपने भविष्य का निर्धारण करेगी? → महात्मा गाँधी
88. संसद पर होने वाले ख़र्चों पर किसका नियंत्रण रहता है? → नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
89. राज्यसभा की पहली महिला महासचिव कौन हैं? → वी.एस.रमा देवी
90. संसद का कोई सदस्य अपने अध्यक्ष की पूर्वानुमति लिये बिना कितने दिनों तक सदन में अनुपस्थित रहे, तो उसका स्थान रिक्त घोषित कर दिया जाता है? → 60 दिन
91. पांडिचेरी को किस वर्ष भारतीय संघ में सम्मिलित किया गया? → 1962
92. भारत का संविधान भारत को किस प्रकार वर्णित करता है? → राज्यों का संघ
93. वह कौन सी सभा है, जिसका अध्यक्ष उस सदन का सदस्य नहीं होता है? → राज्य सभा
94. पूरे देश को कितने क्षेत्रीय परिषदों में बाँटा गया है? → 5
95. क्या पंचायतों को कर लगाने का अधिकार है? → हाँ
96. जवाहरलाल नेहरू के निधन के पश्चात किसने प्रधानमंत्री पद ग्रहण किया? → गुलज़ारीलाल नन्दा
97. राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत किस ज़िले से हुई?→  नागौर
98. किसकी सिफारिश पर संविधान सभा का गठन किया गया? → कैबिनेट मिशन योजना
99. संविधान सभा में विभिन्न प्रान्तों के लिए 296 सदस्यों का निर्वाचन होना था। इनमें से कांग्रेस के कितने प्रतिनिधि निर्वाचित होकर आए थे? → 208
100. मुस्लिम लीग ने संविधान सभा का बहिष्कार किस कारण से किया? → मुस्लिम लीग मुस्लिमों के लिये एक अलग संविधान सभा चाहता था

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बुधवार, 25 नवंबर 2015

कांग्रेस ने कितना काम किया ?

सही बात है, मोदी जी ने कुछ काम नही किया है |

देखो हर साल कांग्रेस कितना काम करती थी, खोदकर लाया हूँ उनके सारे कारनामे |



1987 - बोफोर्स तोप घोटाला, 960 करोड़

1992 - शेयर घोटाला, 5,000 करोड़।।

1994 - चीनी घोटाला, 650 करोड़

1995 - प्रेफ्रेंशल अलॉटमेंट घोटाला, 5,000 करोड़

1995 - कस्टम टैक्स घोटाला, 43 करोड़

1995 - कॉबलर घोटाला, 1,000 करोड़

1995 - दीनार / हवाला घोटाला, 400 करोड़

1995 - मेघालय वन घोटाला, 300 करोड़

1996 - उर्वरक आयत घोटाला, 1,300 करोड़

1996 - चारा घोटाला, 950 करोड़

1996 - यूरिया घोटाला, 133 करोड

1997 - बिहार भूमि घोटाला, 400 करोड़

1997 - म्यूच्यूअल फण्ड घोटाला, 1,200 करोड़

1997 - सुखराम टेलिकॉम घोटाला, 1,500 करोड़

1997 - SNC पॉवेर प्रोजेक्ट घोटाला, 374 करोड़

1998 - उदय गोयल कृषि उपज घोटाला, 210 करोड़

1998 - टीक पौध घोटाला, 8,000 करोड़

2001 - डालमिया शेयर घोटाला, 595 करोड़

2001 - UTI घोटाला, 32 करोड़

2001 - केतन पारिख प्रतिभूति घोटाला, 1,000 करोड़

2002 - संजय अग्रवाल गृह निवेश घोटाला, 600 करोड़

2002 - कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज घोटाला, 120 करोड़

2003 - स्टाम्प घोटाला, 20,000 करोड़

2005 - आई पि ओ कॉरिडोर घोटाला, 1,000 करोड़

2005 - बिहार बाढ़ आपदा घोटाला, 17 करोड़

2005 - सौरपियन पनडुब्बी घोटाला, 18,978 करोड़

2006 - ताज कॉरिडोर घोटाला, 175 करोड़

2006 - पंजाब सिटी सेंटर घोटाला, 1,500 करोड़

2008 - काला धन, 2,10,000 करोड

2008 - सत्यम घोटाला, 8,000 करोड

2008 - सैन्य राशन घोटाला, 5,000 करोड़

2008 - स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र, 95 करोड़

2008 - हसन् अली हवाला घोटाला, 39,120 करोड़

2009 - उड़ीसा खदान घोटाला, 7,000 करोड़

2009 - चावल निर्यात घोटाला, 2,500 करोड़

2009 - झारखण्ड खदान घोटाला, 4,000करोड़

2009 - झारखण्ड मेडिकल उपकरण घोटाला, 130 करोड़

2010 - आदर्श घर घोटाला, 900 करोड़

2010 - खाद्यान घोटाला, 35,000 करोड़

2010 S - बैंड स्पेक्ट्रम घोटाला, 2,00,000 करोड़

2011 - 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, 1,76,000 करोड़

2011 - कॉमन वेल्थ घोटाला, 70,000 करोड़

सालो राम मंदिर और पेट्रोल पर रो रहे हो, इनमे से 5 के नाम भी पता थे क्या |

वो बेचारा अकेला इतनी मेहनत कर रहा है, पर तुम्हारी आदत है न हर चीज में डंडा करने की | अगर ये तंग आकर हट गया न तो, तुम्हे फिर यही कांग्रेस मिलेगी | जितने भी उसके बाहर घूमने से परेशान है, वो बाहर हनीमून नही मना रहा है | सुरक्षा मजबूत कर रहा है अपने देश की | आज तुम सबको को किसान दिख रहे, हैं और जब यूरिया और खाद घोटाला हुये तो, कुछ नही दिखा |

अगर दिल में अभी भी थोडीसी भी सच्ची जीवित हैं, तो इस पोस्ट को शेअर करो और लोगों को भी निंद से जगाओ |

मोदीजी को प्रधानमंत्री बने, 1 वर्ष भी नहीं हुआ की, अच्छे दिन का ताना मारने लगे हैं कुछ लोग | वो लोग जर इनका भी कार्य काल देखो, और इन्होने क्या क्या किया हैं सोचो |

1. जवाहरलाल नेहरु, 16 वर्ष 286 दिन

2. इंदिरा गाँधी, 15 वर्ष 91 दिन

3. राजीव गाँधी, 5 वर्ष 32 दिन

4. मनमोहन सिंह, 10 वर्ष 4 दिन

कुल मिला कर 47 वर्ष 48 दिन में अच्छे दिन को ढूंढ नहीं सके और 1 वर्ष में हीं अच्छे दिन चाहिए |

ये कैसा न्याय है ???
ये कैसी राष्ट्रभक्ति है ???

मेरी भारतवासियों से यही नम्र विनंती हैं कि, अच्छे दिन चाहिये तो थोडा सब्र करो, धैर्य रखो |

फल खाणे है तो, पेड़ को बड़ा तो होने दो |

क्योंकि, सब्र का फल हमेशा मीठा हि होता हैं ||

 धन्यवाद 

मंगलवार, 17 नवंबर 2015

40 देशों से हो रही है IS को फंडिंग - राष्ट्रपति पुतिन



रूसी राष्ट्रपति पुतिन का सनसनीखेज दावा,
'40 देशों से हो रही है IS को फंडिंग, जी-20 के देश भी शामिल'
Tuesday, November 17, 2015
ज़ी मीडिया ब्यूरो


नई दिल्ली: आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के पेरिस पर हुए हमले को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सनसनीखेज दावा किया है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि आतंकी संगठन आईएस को कुछ देशों से पैसा पहुंच रहा है, जिसमें जी-20 से जुड़े देश भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि आईएस को फंडिंग करने की इस लिस्ट में कुल 40 देशों का नाम है। जिन देशों से पैसा पहुंच रहा है, उसे लेकर पुतिन ने खुफिया जानकारियां भी साझा कीं। पुतिन ने साथ ही कहा कि आईएस तेल का गैरकानूनी कारोबार करता है। इसे भी खत्म करने की जरूरत है।

पुतिन के मुताबिक आईएसआईएस पेट्रोलियम प्रॉडक्‍ट्स का बिजनेस करता है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि कई देश आईएस के साथ तेल का अवैध व्यापार भी का करते हैं और उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना होगा।  सम्मेलन के बाद पुतिन ने कहा कि मैंने उदाहरणों के साथ बताया कि कैसे आईएस तक कुछ मुल्कों से पैसा पहुंच रहा है और इसमें हमारे साथी देश भी शामिल हैं। साथ ही कहा कि आईएस तेल का गैरकानूनी कारोबार करता है। इसे भी तुरंत प्रभाव से खत्म करने की जरूरत है।

इस बीच फ्रांस ने पेरिस हमलों के बाद रातभर में 128 छापे मारे है। फ्रांस के युद्धक विमानों ने उत्तरी सीरिया में इस्लामिक स्टेट के गढ रक्का में रात में फिर से हमले किए और एक कमांड सेंटर और प्रशिक्षण केंद्र को नष्ट कर दिया।  फ्रांसीसी सेना ने 24 घंटों में दूसरी बार सीरिया के रक्का में दाएश के खिलाफ हवाई हमले किए। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 10 रफेल और मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने जीएमटी के अनुसार रात साढे बारह बजे 16 बम गिराए। इससे पहले रविवार को भी रक्का में जिहादी स्थल पर 10 युद्धक विमानों ने 20 बम गिराए थे। अमेरिका और फ्रांस ने भी हमलों का निशाना बनाए जाने वाले संभावित ठिकानों के संबंध में खुफिया सूचना का आदान प्रदान बढाने का निर्णय लिया है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)
ज़ी मीडिया ब्‍यूरो 

रविवार, 15 नवंबर 2015

शत्रुघ्न सिन्हा : संघ के अधिकारियों का मिलने से इंकार


शत्रुघ्न सिन्हा पहुंचे संघ मुख्यालय, 

संघ के अधिकारियों का मिलने से इंकार


नागपुर : भाजपा के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा अपने बागी रूख पर कायम है. बिहार चुनाव की हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेताओं की कड़ी आलोचना कर चुके शत्रुघ्न सिन्हा अपनी शिकायत लेकर संघ मुख्यालय नागपुर पहुंचे. लेकिन, नागपुर में संघ ने उनकी बात सुनने या उनसे मुलाकात करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

प्राप्त जानकारी के अनुसार शत्रुघ्न सिन्हा शुक्रवार को नागपुर पहुंचे थे, नागपुर में उन्हें न केवल संघ की तरफ से बल्कि बीजेपी के स्थानीय नेताओं की ओर से भी बेहद ठंडी बेहद प्रतिक्रिया मिली. शत्रुघ्न सिन्हा सरसंघ चालक मोहन भागवत और सचिव भैया जी जोशी से मिलने गये थे. हालांकि मोहन भागवत और भैया जी जोशी नागपुर से बाहर गये हुए है. सूत्रों के मुताबिक संघ के किसी भी जूनियर अधिकारियों ने भी शत्रुघ्न सिन्हा से मिलने में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

भाजपा नेता शत्रुघ्न सिन्हा नागपुर से भाजपा सांसद नितिन गडकरी से मिलने की भी इच्छा जतायी. लेकिन ,नितिन गडकरी ने भी शत्रुघ्न सिन्हा से मिलने में दिलचस्पी नहीं दिखाई.गौरतलब है कि शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी के उन बागी नेताओं में शामिल है जो खुलेआम पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की आलोचना करते है. बिहार चुनाव प्रचार के दौरान उनके बागी तेवर से पार्टी को मुसीबतों का सामना करना पड़ी. 

शनिवार, 14 नवंबर 2015

ब्रिटिश संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन



ब्रिटिश संसद में बोले PM मोदी- भारत और ब्रिटेन एक साथ चलें तो कमाल हो जाएगा
aajtak.in [Edited By: स्वपनल सोनल] | लंदन, 12 नवम्बर 2015

लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ साझा बयान के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने असहिष्णुता के सवाल पर चुप्पी तोड़ी है. पीएम ने कहा कि भारत गांधी और बुद्ध की धरती है और भारत ऐसी किसी भी बात को स्वीकार नहीं करता है. उन्होंने कहा, 'देश के किसी भी कोने में हुई हर घटना हमारे लिए गंभीर है. कानून कठोरता से काम करेगा. हर नागरिक के विचार की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है.'
साझा बयान के बाद एक सवाल का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'अगर देश के किसी भी कोने में ऐसी कोई घटना घटती है तो हमारे लिए हर घटना गंभीर है. देश के हर नागरिक की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है. हर किसी के विचारों की रक्षा के लिए हम वचनबद्ध हैं. ऐसी किसी भी घटना पर कानूनी कार्रवाई होगी.'

प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन दिन की ब्रिटेन यात्रा पर गुरुवार को लंदन पहुंचे. इससे पहले किंग चार्ल्स स्ट्रीट पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ पीएम का आध‍िकारिक स्वागत किया गया. इस दौरान ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन भी मोदी के साथ थे. दोनों नेताओं के बीच 10 डाउनिंग स्ट्रीट में द्वि‍पक्षीय बातचीत हुई, जिसके बाद दोनों ने साझा बयान जारी किया.

बातचीत शुरू करने से पहले कैमरन ने गर्मजोशी के साथ प्रधानमंत्री मोदी का हाथ मिलाकर स्वागत किया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कैमरन से कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि आपके नेतृत्व में भारत और ब्रिटेन के संबंध और मजबूत होंगे.'

साझा बयान के दौरान पीएम मोदी ने कहा-
-आपने भारत और ब्रिटेन के संबंध को सशक्त बनाने में अहम योगदान दिया है.
-आपके निमंत्रण, आदर सत्कार और गर्मजोशी से स्वागत के लिए मैं आभारी हूं.
-ऐतिहासिक तौर पर हम एक-दूसरे से परिचित हैं. हमारे मूल्य एक समान हैं.
-हर क्षेत्र में हमारी साझेदारी वायब्रेंट है और हमारे संबंधों में निरंतर विस्तार हो रहा है.
-शि‍क्षा और विज्ञान, तकनीक, क्लीन एनर्जी, कला-संस्कृति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम साझेदारी कर रहे हैं.
-आज हमने निर्णय लिया है कि हम साझा मूल्यों के आधार पर विश्व के अन्य क्षेत्रों में भी विकास के लिए साझेदारी करेंगे.
-सिविल न्यूक्लि‍यर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया है.
-यूके के साथ रक्षा और सुरक्षा को हम मूल्यवान मानते हैं. हम निश्चय ही नियमित तौर पर द्वि‍पक्षीय बातचीत करेंगे.

अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रितानी संसद को भी संबोधित किया. भारत यूके को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद की 1500 करोड़ की संपत्ति पर डोजियर भी सौंपेगा. पीएम के लंदन पहुंचते ही जेम्स कोर्ट होटल के बाहर फैंस ने 'मोदी मोदी' के नारों से उनका स्वागत किया.

ब्रिटिश संसद में मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश संसद की रॉयल गैलरी से भाषण दिया. उन्होंने संबोधन शुरू करते हुए कहा कि मुझे मालूम है कि यह संसद का सत्र नहीं है और उनकी बात सुनकर यहां मौजूद सब हंस पड़े. उन्होंने कहा कि उनके लिए ब्रिटेन की संसद में बोलना बहुत सम्मान की बात है. प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत और ब्रिटेन दोनों कई क्षेत्रों में मिलकर काम काम रहे हैं. दोनों देशों की सेनाएं साझा युद्धाभ्यास कर रही हैं. भारत संभावनाओं से भरा देश है. ब्रिटेन भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक देश है.'

ब्रिटिश करोबारियों से की मुलाकात
प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश कारोबारियों से भी मुलाकात की. उन्होंने कारोबारियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा, 'भारत को व्यापार करने के लिहाज से आसान और सरल स्थान बनाने के लिए सरकार ने बहुत आक्रामकता के साथ काम किया है. हालिया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति के बाद भारत विदेशी निवेश के लिए सबसे अधिक खुले देशों में शामिल हो गया है.'

पीमए ने आगे कहा, 'हम लोगों ने स्पष्ट तौर पर यह बता दिया है कि हम पीछे की तारीख से कराधान का सहारा नहीं लेंगे और कई प्रकार से इस रुख को साबित किया है.' पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि 2016 में जीएसटी का काम पूरा हो जाएगा.

मोदी के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह
लंदन में होटल के बाहर फैंस के उत्साह को देखते हुए प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी से पैदल चलकर सैकड़ों समर्थकों से मुलाकात की. इस यात्रा से यूके और भारत के बीच रक्षा क्षेत्र और व्यापार से जुड़ी कई समझौतों की उम्मीद है. यह करीब 9 साल बाद ब्रिटेन में किसी भारतीय पीएम का दौरा है. हीथ्रो एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद जब पीएम होटल पहुंचे तो वहां उनके प्रशंसकों ने मोदी सरकार की योजनाओं के नाम से भी नारे लगाए. वहां भारतीयों का उत्साह इस कदर रहा कि पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए भीड़ को काबू करना चुनौती बन गई.

भारतीयों से मुलाकात
अपनी यात्रा के पहले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने लंदन में रह रहे पंजाबी समुदाय के लोगों से मुलाकात की. वह वहां बिजनेस फोरम मीट में भी शामिल होंगे. इसके अलावा प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ से भी मुलाकात शामिल है, जो शुक्रवार को होगी. इसके बाद वेम्बले स्टेडियम में भारतीय समुदाय के बीच मोदी के ग्रैंड इवेंट की तैयारियां चल रही हैं. वहां 60 हजार से ज्यादा लोगों को प्रधानमंत्री संबोधि‍त करेंगे.

दाऊद पर कसेगा शिकंजा
मोदी के यूके दौरे के साथ ही अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पर शि‍कंजा और कसेगा. सूत्रों के मुताबिक भारत इस यात्रा के दौरान यूके को दाऊद की संपत्तियों से जुड़ा डोजियर सौंपेगा. 'आज तक' के पास यूके को सौंपे जाने वाले डोजियर की एक्सक्लूसिव जानकारी है. एनएसए अजीत डोभाल ब्रिटिश अधिकारियों को यह डोजियर सौंपेंगे. सूत्रों के मुताबिक यूके में दाऊद की करीब डेढ़ हजार करोड़ की संपत्ति है. भारत ब्रिटिश सरकार से दाऊद की संपत्तियों को सील करने की मांग करेगा.

दाऊद के लिए दूसरा बड़ा झटका
यूके में डोजियर सौंपने के साथ ही दाऊद को दूसरा बड़ा झटका लग सकता है. इससे पहले दुबई में दाऊद की संपत्तियों पर भी भारत ने डोजियर सौंपी थी. दुबई में डॉन की संपत्ति‍ को सीज करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है.

खालिस्तान पर भी यूके को डोजियर
दाऊद इब्राहिम के साथ ही भारत खालिस्तान पर भी यूके को डोजियर सौंपेगा. इसमें आईएसआई पर खालिस्तान समर्थित आतंक को भड़काने का आरोप है. डोजियर के मुताबिक बीकेआई, आईएसवाईएफ, केसीएफ और केजेडएफ जैसी संस्थाओं को आतंक भड़काने के लिए आईएसआई फंड देता है. एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, भारत के डोजियर में आईएसआई के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं. इसमें यूके के कुछ टीवी चैनलों और रेडियो पर भी आतंक भड़काने का आरोप है.

कांग्रेस ने छेड़ा अलग राग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के साथ ही कांग्रेस ने देश में नया राग छेड़ा है. कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री अपनी इस यात्रा के दौरान पूर्व आईपीएल चीफ ललित मोदी के प्रत्यर्पण की बात कर सकते हैं. जाहिर तौर पर विपक्ष के लिए आगामी संसद सत्र में भी यह मुद्दा बनने वाला है. कांग्रेस ने पीएम मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को यात्रा से लौटने के बाद देश को जानकारी देनी चाहिए कि उनकी यात्रा से देश को क्या हासिल हुआ है.
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प्रधानमंत्री मोदी जब लंदन के वेंबले फुटबॉल स्टेडियम पहुंचे तो ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन और उनकी पत्नी ने पीएम मोदी का स्वागत किया.
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वेंबले स्टेडियम पहुंचने पर ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन और उनकी पत्नी ने पीएम मोदी का स्वागत किया. मोदी के स्टेज पर पहुंचने के बाद राष्ट्रगान हुआ.
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पीएम मोदी के स्टेडियम पहुंचने पर वंदे मातरम और कथक की प्रस्तुति दी गई. ये बच्चे राष्ट्रगान में शामिल रहे.
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लंदन के वेंबले फुटबॉल स्टेडियम में पीएम मोदी को सुनने के लिए 60 हजार से ज्यादा ब्रिटिश भारतीय जुटे.
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पीएम मोदी और कैमरन ने स्टेज पर पहुंचे बच्चों से बात की. कैमरन ने एक बच्चे से उसका पसंदीदा विषय पूछा तो उसने ड्रामा बताया.
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मोदी ने कहा भारतीय जहां भी गया, वहां जीने का संस्कार लेकर गया. पूरी दुनिया आज भारत के प्रति बड़ी उम्मीदों से देख रही है. भारत के प्रति दुनिया का नजरिया आज बदला है.
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लंदन के वेंबले फुटबॉल स्टेडियम में मोदी को सुनने के लिए लोगों में भारी उत्साह दिखाई दिया.
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मोदी ने कहा विविधता हमारी आन-बान-शान, हमारी शक्ति है. दो महान देशों के रिश्तों का आज खास दिन है. आज का दिन ऐतिहासिक है.
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वेंबले स्टेडियम में मोदी का मेगा शो शुरू होने से पहले बारिश हुई लेकिन लोगों में मौसम की खराबी के बावजूद उत्साह कम नहीं हुआ.
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पाकिस्तानः ' एक भी हिंदू न बचे '

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की आठवीं वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट 2011 की है, जिसे हाल ही में जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक "पाकिस्तान में 1947 में कुल आबादी का 25 प्रतिशत हिंदू थे। अभी इनकी जनसंख्या कुल आबादी का मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई है।" वहां गैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है। 24 मार्च, 2005 को पाकिस्तान में नए पासपोर्ट में धर्म की पहचान को अनिवार्य कर दिया गया। स्कूलों में इस्लाम की शिक्षा दी जाती है। गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं के साथ असहिष्णु व्यवहार किया जाता है। जनजातीय बहुल इलाकों में अत्याचार ज्यादा है। इन क्षेत्रों में इस्लामिक कानून लागू करने का भारी दबाव है। हिंदू युवतियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म, अपहरण की घटनाएं आम हैं। उन्हें इस्लामिक मदरसों में रखकर जबरन मतांतरण का दबाव डाला जाता है। गरीब हिंदू तबका बंधुआ मजदूर की तरह जीने को मजबूर है।

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http://www.bbc.com/hindi

पाकिस्तानः 'वो दिन दूर नहीं जब एक भी हिंदू न बचे'

  • 5 अगस्त 2015
हिंदू मंदिर
पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को अक्सर यह शिकायत रही है कि उनके धर्म स्थलों को पाकिस्तान सरकार की ओर से सुरक्षा नहीं है.
ऐसी कई शिकायतें रिकॉर्ड होने और धार्मिक स्थलों को नुक़सान पहुंचाए जाने की कई घटनाओं के सामने आने के बावजूद अब तक कोई सुनवाई नहीं है.
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पिछले पचास वर्षों में पाकिस्तान में बसे नब्बे प्रतिशत हिंदू देश छोड़ चुके हैं और अब उनके पूजा स्थल और प्राचीन मंदिर भी तेज़ी से ग़ायब हो रहे हैं.
ऐसा ही एक मामला, पिछले बीस साल से चल रहा है और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद इस पर कोई अमल नहीं हुआ.
बात है, पाकिस्तान के प्रांत ख़ैबर पख्तूनख़्वा ज़िले में कर्क के एक छोटे से गांव टेरी में स्थित एक समाधि की.

पढ़ें विस्तार से

पेशावर में हिंदू
यहां किसी ज़माने में, कृष्ण द्वार नामक एक मंदिर भी मौजूद था. मगर अब इसके नामो निशान कहीं नहीं हैं.
समाधि मौजूद है, लेकिन इसके चारों ओर एक मकान बन चुका है और यहां तक कि वहां तक पहुचंने के सारे रास्ते बंद हैं.
मकान में रहने वाले मुफ़्ती इफ़्तिख़ारुद्दीन का दावा है कि 1961 में पाकिस्तान सरकार ने एक योजना (1975) लागू की थी, जिससे तत्कालीन पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान में स्थानीय प्रमुख लोगों को ऐसी ग्रामीण संपत्ति मुफ़्त में दी गईं, जिनकी क़ीमत दस हज़ार रुपए से कम थी.
इसी योजना के तहत उन्हें भी जगह का मालिकाना अधिकार मिल गया और 1998 में उन्होंने इस मकान का निर्माण किया.
हिंदुओं के नेता परम हंस जी महाराज का 1929 में निधन हो गया था.
उन्हें श्रद्धांजलि देने दुनिया भर से कई हिंदू पाकिस्तान के क्षेत्र टेरी में स्थित उनकी इस समाधि पर आया करते थे.
1998 में यह मामला तब सामने आया जब कुछ हिंदू यहां पहुंचे तो पता चला कि समाधि को तोड़ने की कोशिश की गई.

समाधि कहां ले जाएं?

पाकिस्तानी दलित
इसके बाद बात पाकिस्तान हिन्दू परिषद तक पहुंची और परिषद ने इस मामले का बीड़ा उठाया.
परिषद के अध्यक्ष और नेशनल असेंबली के सदस्य डॉक्टर रमेश वांकोआनी ने बताया कि पिछले बीस साल के दौरान वे सभी राजनीतिक लोगों से प्रांतीय और संघीय स्तर पर बात कर चुके हैं मगर किसी ने नहीं सुना, अंततः उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में सभी परिस्थितियों को देखते हुए, ख़ैबर पख़्तूनख़्वा की प्रांतीय सरकार को आदेश दिया कि वह इस समाधि में होने वाले तोड़फोड़ को रोके और हिंदुओं को उनकी जगह वापस दिलाए. मगर आज तक उस पर कोई अमल नहीं हुआ.
डॉक्टर रमेश कहते हैं, “तीर्थ स्थल तो ऐतिहासिक होते हैं, यह कोई मंदिर तो है नहीं कि क़ानून-व्यवस्था की स्थिति ख़राब होने के नाम पर मैं इसे कहीं और स्थानांतरित कर दूँ, यह तो समाधि है. एक ऐसी हस्ती का मंदिर जिसके करोड़ों श्रद्धालु हैं.”
मगर टेरी में यही अकेली समाधि या मंदिर नहीं है, जो बंद है.
पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के मुताबिक़, इस समय देश भर में सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के ऐसे 1,400 से अधिक पवित्र स्थान हैं जिन तक उनकी पहुंच नहीं है.
या फिर उन्हें समाप्त कर वहां दुकानें, खाद्य गोदाम, पशु बाड़ों में बदला जा रहा है.

मंदिर तो है, पर रास्ता नहीं

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर
ऐसा ही एक मंदिर, रावलपिंडी के एक व्यस्त बाज़ार में मौजूद है जिसे यमुना देवी मंदिर कहा जाता है और यह 1929 में बनाया गया था.
चारों ओर छोटी दुकानों में धंसा यह मंदिर केवल अपने एक बचे हुए मीनार के कारण अब भी सांसें ले रहा है.
उसके अंदर प्रवेश से पहले छतों से बातें करती ऊँची क़तारों में चावल, दाल और चीनी से भरी बोरियों से होकर गुज़रना पड़ता है.
वक़्फ़ विभाग के अध्यक्ष सिद्दीकुलफ़ारुख़ का कहना है कि, “जो योजना 1975 की है, मैं उसके बारे में जानता हूँ और इससे पहले क्या था, उसकी जानकारी मुझे नहीं है. संसद के बने इस योजना के तहत, इबादतगाह कोई भी हो, वह किराए पर नहीं दिया जा सकता, लेकिन इससे सटी भूमि को किराए पर दिया जा सकता है.”
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की अनदेखी और ग़लत नीतियों के कारण देश में सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से हैं, जिन्हें पिछड़े होने के कारण हमेशा नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है.

सरकारी उदासीनता

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू मंदिर.
Image captionपाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू मंदिर.
उपमहाद्वीप के बंटवारे के समय, पश्चिमी पाकिस्तान या मौजूदा पाकिस्तान में, 15 प्रतिशत हिंदू रहते थे.
1998 में देश में की गई अंतिम जनगणना के अनुसार, उनकी संख्या मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई और देश छोड़ने की एक बड़ी वजह असुरक्षा थी.
शोधकर्ता रीमा अब्बासी के अनुसार, “पिछले कुछ वर्षों में लाहौर जैसी जगह पर एक हज़ार से अधिक मंदिर ख़त्म कर दिए गए हैं. पंजाब में ऐसे लोगों को भी देखा है जो नाम बदल कर रहने को मजबूर हैं.”
वो कहती हैं, “इन सभी बातों की बड़ी वजह क़ब्ज़ा माफ़िया तो हैं, मगर साथ ही बेघरों के लिए सुरक्षा की कमी भी है, जो आतंकवाद के कारण अपना घर-बार छोड़कर पाकिस्तान के अन्य ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो रहे हैं, जहां उनके धर्म स्थल क़रीब हैं.”
पाकिस्तान हिंदू धर्मस्थल
Image captionपेशावर में स्थित एक मंदिर.
उनके मुताबिक़, “मगर उन्हें वहाँ से डरा-धमका कर निकाल दिया जाता है ताकि वहां पहले से रह रहे लोगों को कोई कठिनाई न हो.”
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान से पलायन कर गई हिंदुओं की नब्बे प्रतिशत आबादी का कारण बढ़ती असहिष्णुता और सरकार की उदासीनता है.
पाकिस्तान के वक़्फ़ विभाग में पुजारी की नौकरी करने वाले जयराम के अनुसार, “1971 के बाद देश में हिंदू संस्कृति ही समाप्त हो गई. कहीं भी अब शास्त्रों को नहीं पढ़ाया जाता, संस्कृत नहीं पढ़ाई जाती, यहाँ तक कि सिंध सरकार से एक बिल पास करवाने की कोशिश हुई कि सिंध में पाठ्यक्रम में संस्कृत को शामिल किया जाए, हिंदू बच्चों के लिए एक हिंदी शिक्षक दिया जाए, मगर वह विधेयक पारित नहीं हुआ. तो यदि इस प्रकार का क़ानून नहीं बन सकता तो वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान में एक भी हिंदू नहीं रहेगा.”

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अल्पसंख्यक हिंदुओं की त्रासदी

सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुंबकम को जीवन का आधार मानने वाले हिंदुओं की स्थिति उन देशों में काफी बदतर है जहां वे अल्पसंख्यक हैं। भारत से बाहर रह रहे हिंदुओं की आबादी लगभग 20 करोड़ है।सबसे ज्यादा खराब स्थिति दक्षिण एशिया के देशों में रह रहे हिंदुओं की है। दक्षिण एशियाई देशों- बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान और श्रीलंका के साथ-साथ फिजी, मलेशिया, त्रिनिदाद-टौबेगो में हाल के वर्षों में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार के मामले बढ़े हैं। इनमें जबरन मतांतरण, यौन उत्पीड़न, धार्मिक स्थलों पर आक्रमण, सामाजिक भेदभाव, संपत्ति हड़पना आदि शामिल है। कुछ देशों में राजनीतिक स्तर पर भी हिंदुओं के साथ भेदभाव की शिकायतें सामने आई है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की आठवीं वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। यह रिपोर्ट 2011 की है, जिसे हाल ही में जारी किया गया है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक "पाकिस्तान में 1947 में कुल आबादी का 25 प्रतिशत हिंदू थे। अभी इनकी जनसंख्या कुल आबादी का मात्र 1.6 प्रतिशत रह गई है।" वहां गैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है। 24 मार्च, 2005 को पाकिस्तान में नए पासपोर्ट में धर्म की पहचान को अनिवार्य कर दिया गया। स्कूलों में इस्लाम की शिक्षा दी जाती है। गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं के साथ असहिष्णु व्यवहार किया जाता है। जनजातीय बहुल इलाकों में अत्याचार ज्यादा है। इन क्षेत्रों में इस्लामिक कानून लागू करने का भारी दबाव है। हिंदू युवतियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म, अपहरण की घटनाएं आम हैं। उन्हें इस्लामिक मदरसों में रखकर जबरन मतांतरण का दबाव डाला जाता है। गरीब हिंदू तबका बंधुआ मजदूर की तरह जीने को मजबूर है। 
  • इसी तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर अत्याचार के मामले तेजी से बढ़े हैं। बांग्लादेश ने "वेस्टेड प्रापर्टीज रिटर्न (एमेंडमेंट) बिल 2011"को लागू किया है, जिसमें जब्त की गई या मुसलमानों द्वारा कब्जा की गई हिंदुओं की जमीन को वापस लेने के लिए क्लेम करने का अधिकार नहीं है। इस बिल के पारित होने के बाद हिंदुओं की जमीन कब्जा करने की प्रवृति बढ़ी है और इसे सरकारी संरक्षण भी मिल रहा है। इसका विरोध करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों पर भी जुल्म ढाए जाते हैं। इसके अलावा हिंदू इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर भी हैं। उनके साथ मारपीट, दुष्कर्म, अपहरण, जबरन मतांतरण, मंदिरों में तोडफोड़ और शारीरिक उत्पीड़न आम बात है। अगर यह जारी रहा तो अगले 25 वर्षों में बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी ही समाप्त हो जाएगी। 
  • बहु-धार्मिक, बहु-सांस्कृतिक और बहुभाषी देश कहे जाने वाले भूटान में भी हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार हो रहा है। 1990 के दशक में दक्षिण और पूर्वी इलाके से एक लाख हिंदू अल्पसंख्यकों और नियंगमापा बौद्धों को बेदखल कर दिया गया। 
  • ईसाई बहुल देश फिजी में हिंदुओं की आबादी 34 प्रतिशत है। स्थानीय लोग यहां रहने वाले हिंदुओं को घृणा की दृष्टि से देखते हैं। 2008 में यहां कई हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया। 2009 में ये हमले बंद हुए। फिजी के मेथोडिस्ट चर्च ने लगातार इसे इसाई देश घोषित करने की मांग की, लेकिन बैमानिरामा के प्रधानमंत्रित्व में गठित अंतरिम सरकार ने इसे खारिज कर दिया और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के संरक्षण की बात कही।
  • मलेशिया घोषित इस्लामी देश है, इसलिए वहां की हिंदू आबादी को अकसर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थानों को अक्सर निशाना बनाया जाता है। सरकार मस्जिदों को सरकारी जमीन और मदद मुहैया कराती है, लेकिन हिंदू धार्मिक स्थानों के साथ इस नीति को अमल में नहीं लाती। हिंदू कार्यकर्ताओं पर तरह-तरह के जुल्म किए जाते हैं और उन्हें कानूनी मामलों में जबरन फंसाया जाता है। उन्हें शरीयत अदालतों में पेश किया जाता है। 
  • सिंहली बहुल श्रीलंका में भी हिंदुओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है। पिछले कई दशकों से हिंदुओं और तमिलों पर हमले हो रहे हैं। हिंसा के कारण उन्हें लगातार पलायन का दंश झेलना पड़ रहा है। हिंदू संस्थानों को सरकारी संरक्षण नहीं मिलता है।
  • त्रिनिदाद-टोबैगो में भारतीय मूल की 'कमला परसाद बिसेसर' के सत्ता संभालने के बाद आशा बंधी है कि हिंदुओं के साथ साठ सालों से हो रहा अत्याचार समाप्त होगा। इंडो-त्रिनिदादियंस समूह सरकारी नौकरियों और अन्य सरकारी सहायता से वंचित है। हिंदू संस्थाओं के साथ और हिंदू त्यौहारों के दौरान हिंसा होती है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की आठवीं वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार का भी जिक्र है। पाकिस्तान ने कश्मीर के 35 फीसदी भू-भाग पर अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है। 1980 के दशक से यहां पाकिस्तान समर्थित आतंकी सक्रिय हैं। कश्मीर घाटी से अधिकांश हिंदू आबादी का पलायन हो चुका है। तीन लाख से ज्यादा कश्मीरी हिंदू अपने ही देश में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं। कश्मीरी पंडित रिफ्यूजी कैंप में बदतर स्थिति में रहने को मजबूर हैं। यह चिंता की बात है कि दक्षिण एशिया में रह रहे हिंदुओं पर अत्याचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन चंद मानवाधिकार संगठनों की बात छोड़ दें तो वहां रह रहे हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। जिस तरह से श्रीलंका में तमिलों के मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर अमेरिका, फ्रांस और नार्वे ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में प्रस्ताव रखा और तमिल राजनीतिक दलों के दबाव में ही सही भारत को प्रस्ताव के पक्ष में वोट डालना पड़ा उसी तरह की पहल भारत को भी दक्षेस के मंच पर तो करनी ही चाहिए।

कमलेश रघुवंशी
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)   

कांग्रेस का गद्दार चेहरा फिर उजागर - अरविन्द सिसोदिया

कांग्रेस का गद्दार चेहरा फिर उजागर 
कांग्रेस पार्टी जब भी सत्ता से बहज आती हे , सामान्य शिष्टाचार भी भूल जाती है । अपने देश के आंतरिक मामले दूसरे के घर में  जाकर नही उठाये जाते !! मगर कांग्रेस नेता सलमान खुरदीश ने एक गद्दार की तरह पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले  में क्लीनचिट दी और चुनी हुई देश की सरकार की आलोचना की !! शेम शेम !!! कांग्रेस को देश से गद्दारी के लिए क्षमा मांगनी चाहिए !! यूं तो सब जानते हैं की कांग्रेस ने यह सोच समझी चाल के अंतरगर्त किया है ! मुस्लिम वोटों को ठगने के लिए !! 
इससे पहले जब अटलजी की सरकार नें परमाणु परिक्षण किता था तब सोनिया गांधी जी ने विदेशों के घूम घूम कर अटलजी सरकार की निंदा की थी !!
- अरविन्द सिसोदिया , जिला महामंत्री भाजपा कोटा राजस्थान 

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इस्लामाबाद में सलमान खुर्शीद ने की बीजेपी की आलोचना, पाक  मीडिया में सुर्खियों में आए
dainikbhaskar.comNov 13, 2015

इस्लामाबाद. कांग्रेस के सीनियर लीडर और भारत के पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद इस्लामाबाद में अपने बयानों को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियों में आ गए। खुर्शीद ने भारत-पाक रिश्तों पर बीजेपी के रवैये को गलत ठहराया। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के अमन के पैगाम का बीजेपी की अगुआई वाली सरकार ने सही जवाब नहीं दिया।" वहीं, उन्होंने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाकिस्तान आर्मी की तारीफ की।
कहां दिए खुर्शीद ने ये बयान?
खुर्शीद गुरुवार शाम इस्लामाबाद के जिन्ना इंस्टीट्यूट में स्पीच दे रहे थे। जिन्ना इंस्टीट्यूट हर साल अलग-अलग टॉपिक पर सेमिनार कराता है। इस बार बतौर स्पीकर खुर्शीद को न्योता दिया गया था। खुर्शीद के स्पीच के वक्त वहां कई देशों के एंबेसडर मौजूद थे।
पाकिस्तानी मीडिया में कैसे छा गए खुर्शीद?

- पाकिस्तानी न्यूज साइट द डॉन ने लिखा- अमन के लिए पाकिस्तान की कोशिशों को नजरअंदाज करने के लिए भारत के ही पूर्व मंत्री ने बीजेपी की आलोचना है।
- पाक ट्रिब्यून ने खुर्शीद के हवाले से लिखा कि मोदी अब भी सीख ही रहे हैं कि अच्छा नेता कैसे बना जाए।
- डेली टाइम्स और पाकिस्तान टुडे ने लिखा कि सलमान खुर्शीद की मानें तो भारत सरकार को कोई अंदाजा ही नहीं है कि उसे पाकिस्तान को लेकर क्या पॉलिसी अपनानी है।
खुर्शीद ने कहा क्या?
> खुर्शीद ने कहा कि पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ की यह दूर की सोच थी कि वे मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान से दिल्ली आए। नवाज का यह बेबाक फैसला उनकी हिम्मत को दिखाता है। मोदी सरकार को यह समझना था।
> खुर्शीद ने कहा, “कांग्रेस जब सरकार में थी, तब भी बीजेपी इस बात के लिए दबाव बनाती थी कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य न रहें।”
> बीजेपी ने पाकिस्तान को लेकर सख्त रवैया अपनाया है।
> भारत ने साउथ एशिया में शांति के लिए पाकिस्तान की कोशिशों का उस तरह से जवाब नहीं दिया, जिस तरह से देना चाहिए था। बीजेपी की अगुआई वाली भारत सरकार ने पाकिस्तान के अमन के पैगाम का भी वाजिब तरीके से जवाब नहीं दिया।
> पीएम मोदी अब भी स्टेट्समैन बनने के गुर सीख ही रहे हैं। मोदी सरकार को इस बात का साफ तौर पर अंदाजा नहीं है कि उसे पाकिस्तान या बाकी किसी देश के साथ कैसे रिश्ते रखने हैं?
> हैरानी की बात यह है कि इस मौके पर सलमान ने आतंकवाद से निपटने के तरीके को लेकर पाकिस्तान सरकार और सेना की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सेना कबायली इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ बेहद मुश्किल लड़ाई लड़ रही है।
भारत-पाकिस्तान नहीं सुलझा पाए अपने विवाद
कांग्रेस लीडर ने कहा कि 1947 के बाद दुनिया में कई विवाद हुए और उन्हें सुलझा भी लिया गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान के हाल वही हैं। उनमें झगड़ा खत्म नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि अगर भारत पाकिस्तान से बातचीत चाहता है, तो उसे इस बात का ध्यान रखना होगा कि पाकिस्तान में डेमोक्रेसी को नुकसान न हो। उन्होंने कहा, “एक कामयाब और स्थिर पाकिस्तान ही भारत के लिए बेहतर है।”
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सलमान खुर्शीद ने इस्लामाबाद में की मोदी सरकार की आलोचना, पाक मीडिया में छाए
इस्लामाबाद : कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने पाकिस्‍तान यात्रा के दौरान मोदी सरकार की जमकर खिंचाई की। उन्‍होंने इस्‍लामाबाद में कहा, ‘भारत सरकार ने दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए पाकिस्‍तान के अमन के पैगाम का उचित जवाब नहीं दिया।’

पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्राइब्यून’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामाबाद में गुरुवार को इस्लामाबाद स्थित जिन्ना इंस्टिट्यूट में दिए एक लेक्चर के दौरान सलमान खुर्शीद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शरीक होकर नवाज शरीफ ने दूरदर्शिता का परिचय दिया था।

‘द एक्सप्रेस ट्राइब्यून’ अखबार सलमान खुर्शीद के हवाले से लिखता है कि भारत में BJP के नेतृत्व वाली सरकार पाकिस्तान के शांति संदेश का माकूल जवाब देने में नाकाम रही। खुर्शीद ने कहा कि साल 1947 के बाद से ही दुनिया ने तमाम तरह के विवादों और संघर्षों का समाधान निकाला है लेकिन भारत-पाकिस्तान के हालात नहीं बदले।

खुर्शीद ने कहा कि पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ की यह दूर की सोच थी कि वे मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान से दिल्ली आए। नवाज का यह बेबाक फैसला उनकी हिम्मत को दिखाता है। मोदी सरकार को यह समझना था। खुर्शीद ने कहा, कांग्रेस जब सरकार में थी तब भी बीजेपी इस बात के लिए दबाव बनाती थी कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य न रहें। बीजेपी ने पाकिस्तान को लेकर सख्त रवैया अपनाया है।

पीएम मोदी अब भी स्टेट्समैन बनने के गुर सीख ही रहे हैं। मोदी सरकार को इस बात का साफ तौर पर अंदाजा नहीं है कि उसे पाकिस्तान या बाकी किसी देश के साथ कैसे रिश्ते रखने हैं? एक कामयाब और स्थिर पाकिस्तान ही भारत के लिए बेहतर है।

इस मौके पर हैरान करने वाली बात यह थी कि खुर्शीद ने आतंकवाद से निपटने के तरीके को लेकर पाकिस्तान सरकार और सेना की तारीफ की। खुर्शीद ने कहा कि पाकिस्तान की सेना कबायली इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ बेहद मुश्किल लड़ाई लड़ रही है।

शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

सरकारी अस्पतालों के डाक्टरों को जैनरिक से परहेज क्यों ?



जैनरिक से परहेज, ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं डॉक्टर
Bhaskar News NetworkJun 10, 2015
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जिला अस्पताल में दवाओं के नाम पर मरीजों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की पर्ची पर दवा का सॉल्ट लिखा होना चाहिए। दवा का ब्रांड नेम नहीं लिखा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज लगातार गरीब मरीजों को बेहतर सुविधा दिलाने का दावा करते हैं। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीजों को महंगे ब्रांड की दवा लिखने की रस्म शुरू कर दी है।

पैसों के अभाव में लोग सुबह सात बजे से ही सामान्य अस्पताल में लाइन में लग जाते हैं। इसके बाद आठ बजे रजिस्ट्रेशन कराने के बाद डॉक्टर को दिखाते हैं। लेकिन डॉक्टर जैनरिक दवाओं के स्थान पर ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।

दैनिक भास्कर ने सुबह 8 बजे से 11 बजे तक करीब 50 मरीजों के पर्चे चेक किए। इनपर डॉक्टरों ने मरीजों को दवा का सॉल्ट लिखकर दवा का ब्रांड नाम लिखा था। इसमें भी करीब 90 प्रतिशत दवाएं मरीज को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।

नहींहै सस्ता इलाज : रामनगर निवासी प्रभा जैन ने डॉ. जागीर नैन को दिखाया। प्रभा, निजी अस्पताल में इलाज करा चुकी हैं। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने सामान्य अस्पताल में इलाज कराना उचित समझा। लेकिन यहां भी डॉक्टर ने 250 रुपए से लेकर 300 रुपए तक के ब्रान्डेड दवाओं की लिस्ट थमा दी। प्रभा ने बताया कि अगले महीने उसकी शादी है, जिसके चलते इलाज जरूरी है, लेकिन दवा महंगी होने के कारण इलाज नहीं हो पा रहा है।

नहींलिखी जैनरिक दवा : झारखंडनिवासी लल्लन चौधरी पैसों की तंगी के चलते जिला अस्पताल में इलाज के लिए आए। डॉक्टर पंकज अग्रवाल ने ब्रांडेड दवा का लंबा पर्चा लिख दिया। इसमें डी जैन नाम की दवा शामिल है, जबकि उसका जैनरिक वर्जन भी बाजार में है।

बाहरसे लेनी पड़ी दवा : नाहरपुरनिवासी रुक्साना ठाकुर एक सप्ताह से जिला अस्पताल में इलाज करा रही हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में कुछ दवाएं तो मिल गई थीं, लेकिन बाकी बाहर से लेनी पड़ीं। डॉक्टर ने उसे अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। लेकिन यहां डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करने से मना कर रहे हैं, जबकि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा है।

ग्राहकों के इंतजार में

जैनरिक स्टोर

सीएमओपुष्पा बिश्नोई का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहल कर शहर में 89 जैनरिक मेडिकल स्टोर खोले गए हैं। जहां पर सस्ती दवाएं उपलब्ध रहेंगी। दूसरी तरफ कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का दावा है कि इस समय केवल 51 जैनरिक मेडिकल स्टोर खोले गए हैं। इन स्टोर मालिकों का कहना है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर जैनरिक दवा लिखते ही नहीं हैं, जिससे लोगों का धंधा चौपट हो गया है। कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन का आरोप है कि ब्रांडेड दवा कंपनियों की एमआर द्वारा डॉक्टरों से सांठ-गांठ रहती है जिसके चलते डॉक्टर जैनरिक दवा नहीं लिखते हैं।

^अगर कोई मेडिकल स्टोर मालिक कस्टमर को जैनरिक दवा देने से मना करता है, तब उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर जैनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं, जिसके चलते मरीज जैनरिक दवा नहीं खरीदते। अमनदीपचौहान, ड्रग कंट्रोलर, गुड़गांव

^जैनरिकदवाओं के प्रोत्साहन के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टर मरीजों को जैनेरिक दवा नहीं लिखते हैं। ही इसके बारे में मरीजों को बताया जाता है। शरदमेहरोत्रा, अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन गुड़गांव

^डाक्टरोंको स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जो दवा स्टोर में नहीं है उस दवा को ब्रांड के नाम से ही बल्कि सॉल्ट के नाम से मरीज के पर्ची पर लिखे जाएं। ताकि मरीज अपनी मर्जी से जैनरिक या ब्रांडेड दवा ले सकें। इसके लिए डॉक्टरों को एक बार फिर लिखित निर्देश जारी किया जाएगा। डॉ.पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन, गुड़गांव

^अगर कोई मेडिकल स्टोर मालिक कस्टमर को जैनरिक दवा देने से मना करता है, तब उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर जैनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं, जिसके चलते मरीज जैनरिक दवा नहीं खरीदते। अमनदीपचौहान, ड्रग कंट्रोलर, गुड़गांव

^जैनरिकदवाओं के प्रोत्साहन के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टर मरीजों को जैनेरिक दवा नहीं लिखते हैं। ही इसके बारे में मरीजों को बताया जाता है। शरदमेहरोत्रा, अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन गुड़गांव

^डाक्टरोंको स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जो दवा स्टोर में नहीं है उस दवा को ब्रांड के नाम से ही बल्कि सॉल्ट के नाम से मरीज के पर्ची पर लिखे जाएं। ताकि मरीज अपनी मर्जी से जैनरिक या ब्रांडेड दवा ले सकें। इसके लिए डॉक्टरों को एक बार फिर लिखित निर्देश जारी किया जाएगा। डॉ.पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन, गुड़गांव

^अगर कोई मेडिकल स्टोर मालिक कस्टमर को जैनरिक दवा देने से मना करता है, तब उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर जैनरिक दवाएं नहीं लिखते हैं, जिसके चलते मरीज जैनरिक दवा नहीं खरीदते। अमनदीपचौहान, ड्रग कंट्रोलर, गुड़गांव

^जैनरिकदवाओं के प्रोत्साहन के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टर मरीजों को जैनेरिक दवा नहीं लिखते हैं। ही इसके बारे में मरीजों को बताया जाता है। शरदमेहरोत्रा, अध्यक्ष, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन गुड़गांव

^डाक्टरोंको स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, जो दवा स्टोर में नहीं है उस दवा को ब्रांड के नाम से ही बल्कि सॉल्ट के नाम से मरीज के पर्ची पर लिखे जाएं। ताकि मरीज अपनी मर्जी से जैनरिक या ब्रांडेड दवा ले सकें। इसके लिए डॉक्टरों को एक बार फिर लिखित निर्देश जारी किया जाएगा। डॉ.पुष्पा बिश्नोई, सिविल सर्जन, गुड़गांव

गुड़गांव. सिविल हॉस्पिटल में डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयों की एक पर्ची। 

मंगलवार, 10 नवंबर 2015

राहुल गांधी की लोकतंत्र विरोधी एवं असहिष्णु मानसिकता



कांग्रेस व नेहरू परिवार पं. नेहरू के समय से ही संघ के विषय में तिरस्कार, असहिष्णुता का भाव रखते आये हैं – डॉ. मनमोहन वैद्य


नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि राहुल गांधी की “संघ को पराजित ही नहीं, नष्ट करेंगे” यह भाषा ही उनकी लोकतंत्र विरोधी एवं असहिष्णु मानसिकता प्रदर्शित करती है. लोकतंत्र में विश्वास रखने वाली एवं सभी समझदार शक्तियों को इसका विरोध करना चाहिए.

कांग्रेस और नेहरु परिवार पंडित नेहरु के समय से ही संघ के विषय में तिरस्कार एवं असहिष्णुता का भाव रखते आये हैं. अपनी राजकीय सत्ता का प्रयोग करने के बाद भी कांग्रेस संघ की प्रगति को रोकने में ना सफल हुई है, ना ही वह संघ की लोकप्रियता में कोई सेंध लगा पायी है. अभी संघ का समाज में समर्थन एवं जनाधार अनेक गुना बढ़ा है, बढ़ रहा है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कांग्रेस के ऐसे अलोकतांत्रिक रवैये, असभ्य भाषा एवं असहिष्णु मानसिकता की घोर भर्त्सना करता है.

रविवार, 1 नवंबर 2015

समान जनसंख्या नीति का पुनर्निधारण हो - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

कार्यकारी मंडल की बैठक में जनसंख्या वृद्धि दर में असंतुलन की चुनौती पर प्रस्ताव पारित
प्रस्ताव क्रमांक – एक

रांची. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने रांची  में चल रही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के दूसरे दिन जनसंख्या असंतुलन को लेकर अहम प्रस्ताव पारित किया. बैठक में चर्चा के पश्चात जनसंख्या वृद्धि दर में असंतुलन की चुनौती पर प्रस्ताव पारित किया गया तथा सरकार से आग्रह किया कि जनसंख्या नीति का पुनर्निधारण कर सब पर समान रूप से लागू किया  जाए.

जनसंख्या वृद्धि दर में असंतुलन की चुनौती

देश में जनसंख्या नियंत्रण हेतु किए विविध उपायों से पिछले दशक में जनसंख्या वृद्धि दर में पर्याप्त कमी आयी है. लेकिन, इस सम्बन्ध में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल का मानना है कि 2011 की जनगणना के पांथिक आधार पर किये गये विश्लेषण से विविध संप्रदायों की जनसंख्या के अनुपात में जो परिवर्तन सामने आया है, उसे देखते हुए जनसंख्या नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता प्रतीत होती है. विविध सम्प्रदायों की जनसंख्या वृद्धि दर में भारी अन्तर, अनवरत विदेशी घुसपैठ व मतांतरण के कारण देश की समग्र जनसंख्या विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात में बढ़ रहा असंतुलन देश की एकता, अखंडता व सांस्कृतिक पहचान के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकता है.

विश्व में भारत उन अग्रणी देशों में से था, जिसने वर्ष 1952 में ही जनसंख्या नियंत्रण के उपायों की घोषणा की थी, परन्तु सन् 2000 में जाकर ही वह एक समग्र जनसंख्या नीति का निर्माण और जनसंख्या आयोग का गठन कर सका. इस नीति का उद्देश्य 2.1 की ‘सकल प्रजनन-दर’ की आदर्श स्थिति को 2045 तक प्राप्त कर स्थिर व स्वस्थ जनसंख्या के लक्ष्य को प्राप्त करना था. ऐसी अपेक्षा थी कि अपने राष्ट्रीय संसाधनों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रजनन-दर का यह लक्ष्य समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होगा. परन्तु 2005-06 का राष्ट्रीय प्रजनन एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण और सन् 2011 की जनगणना के 0-6 आयु वर्ग के पांथिक आधार पर प्राप्त आंकड़ों से ‘असमान’ सकल प्रजनन दर एवं बाल जनसंख्या अनुपात का संकेत मिलता है. यह इस तथ्य में से भी प्रकट होता है कि वर्ष 1951 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर में भारी अन्तर के कारण देश की जनसंख्या में जहां भारत में उत्पन्न मतपंथों के अनुयायिओं का अनुपात 88 प्रतिशत से घटकर 83.8 प्रतिशत रह गया है, वहीं मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 9.8 प्रतिशत से बढ़ कर 14.23 प्रतिशत हो गया है.

इसके अतिरिक्त, देश के सीमावर्ती प्रदेशों यथा असम, पश्चिम बंगाल व बिहार के सीमावर्ती जिलों में तो मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है, जो स्पष्ट रूप से बंगलादेश से अनवरत घुसपैठ का संकेत देता है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त उपमन्यु हजारिका आयोग के प्रतिवेदन एवं समय-समय पर आये न्यायिक निर्णयों में भी इन तथ्यों की पुष्टि की गयी है. यह भी एक सत्य है कि अवैध घुसपैठिये राज्य के नागरिकों के अधिकार हड़प रहे हैं तथा इन राज्यों के सीमित संसाधनों पर भारी बोझ बन सामाजिक-सांस्कृतिक, राजनैतिक तथा आर्थिक तनावों का कारण बन रहे हैं.

पूर्वोत्तर के राज्यों में पांथिक आधार पर हो रहा जनसांख्यिकीय असंतुलन और भी गंभीर रूप ले चुका है. अरुणाचल प्रदेश में भारत में उत्पन्न मत-पंथों को मानने वाले जहां 1951 में 99.21 प्रतिशत थे, वे 2001 में 81.3 प्रतिशत व 2011 में 67 प्रतिशत ही रह गये हैं. केवल एक दशक में ही अरूणाचल प्रदेश में ईसाई जनसंख्या में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसी प्रकार मणिपुर की जनसंख्या में इनका अनुपात 1951 में जहां 80 प्रतिशत से अधिक था, वह 2011 की जनगणना में 50 प्रतिशत ही रह गया है. उपरोक्त उदाहरण तथा देश के अनेक जिलों में ईसाईयों की अस्वाभाविक वृद्धि दर कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा एक संगठित एवं लक्षित मतांतरण की गतिविधि का ही संकेत देती है.

अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल इन सभी जनसांख्यिकीय असंतुलनों पर गम्भीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से आग्रह करता है कि -

देश में उपलब्ध संसाधनों, भविष्य की आवश्यकताओं एवं जनसांख्यिकीय असंतुलन की समस्या को ध्यान में रखते हुए देश की जनसंख्या नीति का पुनर्निर्धारण कर उसे सब पर समान रूप से लागू किया जाए.
सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाया जाए. राष्ट्रीय नागरिक पंजिका का निर्माण कर इन घुसपैठियों को नागरिकता के अधिकारों से तथा भूमि खरीद के अधिकार से वंचित किया जाए.
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल सभी स्वयंसेवकों सहित देशवासियों का आवाहन करता है कि वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर जनसंख्या में असंतुलन उत्पन्न कर रहे सभी कारणों की पहचान करते हुए जन-जागरण द्वारा देश को जनसांख्यिकीय असंतुलन से बचाने के सभी विधि सम्मत प्रयास करें