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जम्मू - कश्मीर को फिर से भारत से अलग करने का षडयंत्र

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विशेषज्ञ सलाहकारों की सलाह की ओट से, जम्मू - कश्मीर को फिर से भारत से अलग करने का षडयंत्र कश्मीरी अलगाववादी गुलाम नबी फई प्रकरण के प्रकाश में आने के बाद उसके निमंत्रण पर जाने वाले वार्ताकारों की काफी किरकिरी हो चुकी है। इस कारण त्रि-सदस्यीय पैनल की देश के प्रति निष्ठा भी संदिग्ध मानी जाने लगी है। फई वॉशिंगटन स्थित कश्मीरी अमेरिक...न कौंसिल (केएसी) का प्रमुख है। वह 1990 अमेरिका में रह रहा है। उसको कश्मीर मसले पर लाबिंग और पाकिस्तान सरकार व उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने के आरोप में एफबीआई ने 19 जुलाई को वर्जीनिया में गिरफ्तार किया था। फिलहाल अमेरिकी अदालत ने फई को गहन निगरानी में रखने का आदेश सुनाते हुए 27 जुलाई को जमानत दे दी।        पडगांवकर और प्रो. कुमार पर आरोप लगा था कि उन्होंने फई द्वारा विदेशों में कश्मीर मसले पर आयोजित कई सम्मेलनों में हिस्सा लिया और पाकिस्तान के पक्ष में अपने विचार व्यक्त किये। हालांकि पडगांवकर और प्रो. कुमार के अलावा इस श्रेणी में कई और भारतीय बुद्धिजीवी भी हैं, जिन्होंने समय-समय पर भारत की कश्मीर नीति के खिलाफ बोला। कश्मीर मसले पर फई

देश का बड़ा भू भाग बचाने वाले : डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी

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देश का बड़ा भू भाग बचाने वाले डा. मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून एवं जयन्ति 6 जुलाई पर विशेष स्वतंत्र भारत में राष्ट्रहित के प्रथम राजनैतिक बलिदानी अरविन्द सीसौदिया देश की आजादी का दम भरते कांग्रेसी नेता नहीं थकते हैं, जबकि सच यह है कि कांग्रेस की सत्ता लोलुपता ने ही देश को खण्डित किया है। जो लोग भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं, वे सीना ठोक कर कह सकते हैं कि भारत का एक बड़ा भूभाग पाकिस्तान में जाने से बचाने वाले महानायक डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष थे और हमारे आदर्श हैं। उनके ही कारण आज आधा बंगाल, आधा पंजाब और पूरा कश्मीर भारत का अंग है। 23 जून उनका बलिदान दिवस है एवं 6 जुलाई उनकी जयन्ति हे। हम सभी देशवासी उन्हे श्रृद्धापूर्वक नमन करते हैं। पाक से बड़े भू भाग को छीन लेने वाले: डा. मुखर्जी इन्हीं डा. मुखर्जी के नेतृत्व में कश्मीर को दी गई विशेष अस्थायी धारा 370 को हटाने तथा उस वक्त मौजूद व्यवस्था में कश्मीर से प्रधानमंत्री पद खत्म करने, कश्मीर का अलग झण्डा और अलग विधान समाप्त करने के लिए संघर्ष किया गया, जिसके लिए उन्होंने नारा दिया था ‘एक देश मे

संघ और कांग्रेस

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संघ  और  से कांग्रेस की जंग किसलिए ? राघवेन्द्र सिंह नई दिल्ली। जो अखण्ड भारत की मांग, स्वदेशी अपनाने पर बल, अपने पूर्वजों को नमन, भगवा ध्वज को गुरू, भारतवर्ष को भूमि का टुकड़ा न मानते हुये माँ का स्थान देता है और घुसपैठ, आतंकवाद, अलगाववाद एवं जबरन धर्मान्तरण का स्पष्ट विरोध करता है, जो राष्ट्रीय चरित्र जागरण और राष्ट्रीय साहित्य का सृजन कर वितरण भी करता है, एक तरफ मैकाले की मानसिक दासता की मुक्ति की बात और दूसरी तरफ समाज को एक करने के लिये सेवा कार्य भी करता है जो गरीबी, अशिक्षा, छुआ-छूत, बेईमानी समाप्त करने की बात करता है, जिसके मूल में स्पष्ट राष्ट्रवाद है, जिसका मानना है कि शुद्ध सात्विक प्रेम के मर्यादित रूप से अपनी बात कहने से ही किसी समस्या का समाधान हो सकता है वह ही राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ है। यह एक ऐसा सांस्कृतिक राष्ट्रवादी संगठन है, जिसकी न तो कहीं सदस्यता होती है और न किसी प्रकार का पंजीकरण। इनके स्वंयसेवको की विधिवत कहीं भी सूची नहीं बनती। जो व्यक्ति एक बार ध्वज प्रणाम कर लेता है, वह उसी का हो जाता है। इसमें धर्म, जाति, उम्र और लिंग का कोई बंधन नहीं। यह एक स्पष्ट प