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शक्तिशाली संघ के रहते ‘आपातकाल’ कैसे टिक सकता था ?' - लखेश्वर चंद्रवंशी 'लखेश'

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शक्तिशाली संघ के रहते ‘आपातकाल’ कैसे टिक सकता था?' - लखेश्वर चंद्रवंशी 'लखेश' 25 जून, 1975   की काली रात को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘आपातकाल’ (Emergency) लगाकर देश को लगभग 21 माह के लिए अराजकता और अत्याचार के घोर अंधकार में धकेल दिया। 21 मार्च, 1977 तक भारतीय लोकतंत्र ‘इंदिरा निरंकुश तंत्र’ बनकर रह गया। उस समय जिन्होंने आपातकाल की यातनाओं को सहा, उनकी वेदनाओं और अनुभवों को जब हम पढ़ते हैं या सुनते हैं तो बड़ी हैरत होती है। आपातकाल के दौरान समाचार-पत्रों पर तालाबंदी, मनमानी ढंग से जिसे चाहें उसे कैद कर लेना और उन्हें तरह-तरह की यातनाएं देना, न्यायालयों पर नियंत्रण, ‘न वकील न दलील’ जैसी स्थिति लगभग 21 माह तक बनी रही। आज की पीढ़ी ‘आपातकाल की स्थिति’ से अनभिज्ञ है, वह ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं कर सकती। क्योंकि हम लोग जो 80 के दशक के बाद पैदा हुए, हमें ‘इंदिरा के निरंकुश शासन’ के तथ्यों से दूर रखा गया। यही कारण है कि हमारी पीढ़ी ‘आपातकाल’ की जानकारी से सरोकार नहीं रख सके। हम तो बचपन से एक ही बात सुनते आए हैं कि इंदिरा गांधी बहुत सक्षम और सुदृढ़ प्रधानमंत

आपातकाल के संघर्ष को याद रखना नई पीढ़ी के लिए जरूरी है : अमित शाह

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी द्वारा आपातकाल के ४० वर्ष - लोकतंत्र का काला अध्याय विषय पर आयोजित संगोष्ठी पर दिये गये भाषण के प्रमुख अंश आपातकाल ना तो अध्यादेशों से आता है और ना ही अध्यादेशों को लाने के विचारों से आता है, आपातकाल कुत्सित मानसिकता से आता है: अमित शाह आपातकाल के संघर्ष को याद रखना नई पीढ़ी के लिए जरूरी है: अमित शाह इतना संघर्षऔर दमन होने के बावजूद न कोई टूटा और न ही कोई झुका। वास्तव में भारत के मिटटी में लोकतंत्र की खुशबू बहुत गहरी है: अमित शाह आज जो हमारा लोकतंत्र इतना मजबूत है, जो मीडिया की स्वतंत्रता बची है और लोगों की अभिव्यक्ति की जो स्वतंत्रता व्यापक हुई है वह आपातकाल के दौरान उन हज़ारों लोगों के बलिदान के फलस्वरूप ही संभव हो पाया है: अमित शाह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज दिल्ली के मावलंकर हॉल में आपातकाल के ४० वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी "लोकतंत्र का काला दिवस" को सम्बोधित किया। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुये सर्वप्रथम उनलोगों को श्रद्धा-सुमन अर्प