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हिन्दू हिन्दू एक रहें : प.पू. सरसंघचालक भागवत जी

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सरसंघचालक डॉ श्री मोहन जी भागवत द्वारा विजयादशमी उत्सव (गुरुवार दिनांक 22 अक्तुबर 2015) के अवसर पर दिये गये उद्बोधन का सारांश कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि आदरणीय डॉ. वी. के. सारस्वत जी अन्य निमंत्रित अतिथि गण, उपस्थित नागरिक सज्जन, माता भगिनी तथा आत्मीय स्वयंसेवक बन्धु:- श्री विजयादशमी के प्रतिवर्ष संपन्न होनेवाले पर्व के निमित्त आज हम यहाँ एकत्रित हैं। संघ कार्य प्रारम्भ होकर आज 90 वर्ष पूर्ण हुए। यह वर्ष भारतरत्न डॉ. भीमराव रामजी उपाख्य बाबासाहेब आम्बेडकर की जन्मजयंती का 125 वाँ वर्ष है। सम्पूर्ण देश में सामाजिक विषमता की अन्यायी कुरीति को चुनौति देते हुए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया। स्वतंत्र भारत के संविधान में आर्थिक व राजनीतिक दृष्टि से उस विषमता को निर्मूल कर समता के मूल्यों की प्रतिष्ठापना करनेवाले प्रावधान कर वे गये। संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी के शब्दों में आचार्य शंकर की प्रखर बुद्धि व तथागत बुद्ध की असीम करुणा का संगम उनकी प्रतिभा में था। गत वर्ष संघ के संस्थापक पू. डॉ. हेडगेवार जी की जयंती का भी 125 वाँ वर्ष था। समतायुक्त शोषणमुक्त हिन्दू समाज के सामूहि