गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

स्वदेशी में भारतीय संस्कृति के मूल्य प्रतिबिंबित होते हैं : कश्मीरी लाल जी

स्वदेशी जीवनशैली में भारतीय संस्कृति के मानवीय मूल्य प्रतिबिंबित होते हैं – कश्मीरी लाल जी
December 27, 2015 In: जोधपुर

जोधपुर | स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन उम्मेद स्टेडियम से गांधी मैदान तक स्वदेशी संदेश यात्रा निकाली गई. जब भी बाजार जायेंगे, माल स्वदेशी लायेंगे, स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ, आदि उद्घोषों के साथ सभी प्रदेशों से आये 2000 स्वदेशी कार्यकर्ताओं ने स्टेडियम से गांधी मैदान तक स्वदेशी संदेश यात्रा निकाली. संदेश यात्रा का जगह-जगह शिक्षक संघ राष्ट्रीय, भारतीय शिक्षण मण्डल, सोजती गेट व्यापार संघ, जालोरी गेट व्यापार संघ, परम पूज्यनीय माधव गौ विज्ञान परीक्षा समिति, भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा, शास्त्रीनगर बीजेपी मण्डल, मेडिकल एसोसिएशन आदि द्वारा स्वागत किया गया. सभी प्रान्तों से आये स्वदेशी कार्यकर्ताओं का जोश देखने वाला था. पूरा मार्ग स्वदेशी नारों से गूंज गया. सरदारपुरा पर संदेश यात्रा गांधी मैदान में हुंकार सभा में परिवर्तित हो गयी.

गांधी मैदान में स्वदेशी हुंकार सभा का आयोजन किया गया. सभा में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक अरूण ओझा ने कहा कि स्वदेशी का अर्थ मात्र घर परिवार की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं वरन् सामाजिक अर्थव्यवस्था के अंतर्गत हमारा व्यापार, वाणिज्य, हमारा सुथार, हमारा सुनार, हमारा चर्मकार सहित मध्यम व ऊंचा व्यापार सरकारी नौकरियों में अधिकारी पद से लेकर उद्योगपतियों तक की जीवन शैली को भारतीय संस्कारों में ढाल देना ही स्वदेशी है. इन विचारों को परिलक्षित करते हुए स्वदेशी जागरण मंच पिछले 24 वर्षों से लगातार भारतीय संस्कार शैली को भारत एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर तक शोभायमान करने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है.

मंच के राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल जी ने कहा कि स्वदेशी अपनाकर ही हम अपने गौरवशाली अतीत को वापस ला सकते है. जहां तक सम्भव हो अपने जीवन में पहले देशी, फिर स्वदेशी और मजबूरी में विदेशी सिद्धांत को उतारना चाहिए. स्वदेशी एक जीवन शैली है, जिसके अन्तर्गत समस्त भारतीय संस्कृति के मानवीय मूल्य प्रतिबिंबित होते है. चौबीस घण्टे की दिनचर्या अर्थात सुबह उठने से लेकर रात को सोने से पहले तक एवं सोते हुए समस्त भारतीय संस्कारों का जीवन में हृदयांगम करना, जीवन में लागू करना एवं अपने कार्य, व्यवहार से भारतीय संस्कृति मूल्य को प्रतिबिंबित करना ही स्वदेशी है. हुंकार सभा के व्यवस्था प्रमुख ज्ञानेश्वर भाटी ने सभी अतिथियों व स्वदेशी कार्यकर्ताओं का हार्दिक अभिनन्दन करते हुए सभी को धन्यवाद दिया.

सांस्कृतिक संध्या का आयोजन – राष्ट्रीय सम्मेलन में दूसरे दिन शाम को देश भर आये स्वदेशी कार्यकर्ताओं के मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया. जिसमें पधारे सभी अतिथियों के सम्मुख राजस्थानी संस्कृति और कला के रंगों को बिखेरा गया. इसमें घूमर, तेहराताली, कालबेलिया, भवाई नृत्यों का प्रदर्शन कलाकारों द्वारा किया गया. साथ में योग कला के करतब भी दिखाए गये. संध्या का संचालन गजेन्द्रसिंह परिहार, पुनित मेहता, भारती वैद्य, सवाईसिंह के दल द्वारा किया.

प्रथम सत्र में पाली सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि देश के अधिकांश लोग कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था से जुडे़ हैं. हमें गर्व है कि स्वदेशी जागरण मंच अपनी विचारधारा की सरकार होते हुए भी भूमि अधिग्रहण बिल को किसान विरोधी बताया. इसमें मजदूरों, किसानों के हितों की सुरक्षित रखने के प्रावधानों को जोड़ने की मांग की. देश की विस्तृत समृद्धि के लिए कृषि क्षेत्र में 1 से 2 प्रतिशत वृद्धि करनी पड़ेगी, जिससे गांवों का विकास तेज हो.

मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक डॉ.भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि विगत 24 वर्षों में आर्थिक सुधारों के कारण हमारा देश आयातित वस्तुओं के बाजार में बदल गया है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से हमारे देश के उत्पादक इकाई के दो तिहाई से अधिक अंश पर विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का स्वामित्व हो गया है. टिस्को सीमेन्ट, एसीसी, गुजरात अम्बुजा, केमलिन, थम्पअप्स जैसे प्रसिद्ध ब्रान्डों पर विदेशी लोगों का अधिकार हो गया है. वर्तमान में कुल वैश्विक उत्पादन में भारत का अंश मात्र 2.04 प्रतिशत ही है. जबकि चीन का अंश 23 प्रतिशत हो गया है. वर्ष 1991 में चीन व भारत का अंश लगभग बराबर था. अतः स्वदेशी जागरण मंच आह्वान करता है कि विभिन्न क्षेत्रों के स्वदेशी उद्यम संगठित होकर अपने उद्योग सहायता संघों में बदलें. जिससे मेड बाई  इण्डिया अभियान की गति बढे.

द्वितीय सत्र – मंच के दक्षिण क्षेत्र के संयोजक कुमार स्वामी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन हर बीतते वर्ष के साथ बहुत तेजी से क्रूर एवं नुकसानदेह होता जा रहा है. वर्ष 2015 के अभिलेखों के अनुसार अभी तक का सबसे गर्म वर्ष था. यदि हम गत 150 वर्षों के सबसे गर्म 15 वर्षों की सूची बनाएं तो वे समस्त 15 वर्ष सन 2000 के बाद अर्थात 21वीं शताब्दी के ही वर्ष होंगे. यह तथ्य 21वीं शताब्दी में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या की गंभीरता को दर्शाता है. भूमंडल के बढ़ते हुए तापमान से गंभीर मौसमी आपदाएं जैसे कि कुछ सीमित क्षेत्रों में तेज और भारी वर्षा, नवम्बर एवं दिसम्बर माह में चैन्नई और इसके आस पास के इलाके में देखी गयी एवं देश के बाकी हिस्सों में गंभीर सूखे की समस्या के प्रकोप में लगातार वृद्धि के आसार दिखायी दे रहे हैं. चैन्नई में आई बाढ़ ने प्रकृति के रोष के समक्ष मानव की लाचारी एवं मानवीय संस्थाओं की असफलता को हमें दृष्टिगत कराया है. अगर साल दर साल, इसी प्रकार से अनेक नगर एक साथ प्राकृतिक आपदा के कारण मुश्किल में आते हैं, तब कौन किसकी सहायता कर पायेगा? सम्पूर्ण विश्व अपनी ही गल्तियों का स्वयं ही शिकार बन चुका है.

आखिर इससे बाहर निकलने का रास्ता क्या है? वर्तमान पश्चिमी विकास एवं जीवन शैली के मॉडल से प्रतीकात्मक एवं गड्डमड्ड समझौता विश्व को बिल्कुल भी बचाने नहीं जा रहा. हमको अधिक सौम्य और अधिक स्थायी तरीके से विकास एवं जीवनशैली के तरीके में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है. विकास एवं जीवनशैली के टिकाऊपन का एक सजीव एवं प्रमाणित उदाहरण विकास का भारतीय मॉडल है, जिसे विकास एवं जीवनशैली का स्वदेशी मॉडल भी कहा जा सकता है. स्वदेशी मॉडल इस अर्थ में सम्पूर्णता लिए हुए है कि यह जीवन (धर्म एवं मौक्ष) में भौतिकता (अर्थ, काम) एवं आध्यात्मिकता को समान महत्व देता है. यह पृथ्वी मां को उसके चेतन एवं अचेतन, समस्त स्वरुपों में अत्यन्त सम्मान एवं श्रद्धा देता है.

तृतीय सत्र – मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक व अर्थशास्त्र के प्रो. अश्विनी महाजन ने कहा कि हमें गर्व है कि स्वदेशी कार्यकर्ता बिना किसी पार्टी पक्ष के सभी पर्यावरणीय विरोधी नीतियों का विरोध करता है. जीएम फसलों पर बोलते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित टेक्नीकल कमेटी ने बताया कि जीएम फसलें मानव व पर्यावरण के लिये ठीक नहीं है और इससे प्राप्त लाभ सन्दिग्ध है तो फिर क्यों केन्द्र सरकार इसके खुले परीक्षण को अनुमति देती है. विज्ञान को उस मार्ग पर बढ़ना होगा, जिस पर पर्यावरण का रक्षण भी हो. अतः मंच जीएम फूड का विरोध करता है और इससे जैव विविधता को प्रभावित करने वाला कारण बताता है.

सदन में सच का अटल स्वर : अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस (25 दिसम्बर) पर विशेष

तारीख: 28 Dec 2015 11:39:48
सूर्य प्रकाश सेमवाल

सदन में सच का अटल स्वर

देश में संसद को जिस प्रकार से कुछ लोगों के लिए बना दिया गया है वह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। छह दशक से ज्यादा संसद की गरिमा बढ़ाने में अपना योगदान देने वाले लोकप्रिय नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी निश्चित रूप से इस गतिरोध से दु:खी होते। वास्तव में आज जिस प्रकार से देश की संसद में परिपक्व बौद्धिक नेताओं का अकाल दिख रहा है, खासकर विपक्ष में वह चिंताजनक है। यदि विपक्ष के पास दूरदर्शी और जनता के हितचिंतक विवेकी जनप्रतिनिधि होते तो असहिष्णुता, राजनीतिक द्वेष और सांप्रदायिकता इत्यादि के  राग न अलापे जाते।
देश की प्रबुद्ध जनता संसद के अंदर हो रही नौटंकी और स्तरहीन हो गई, चर्चा में अनायास और सायास अटल जी को तो याद करेगी ही। चाहे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ संसद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में साम्प्रदायिक आधार पर हुए चुनावों पर बहस का मुद्दा हो अथवा श्रीमती इंदिरा गांधी के समय देश में कई स्थानों पर हुए दंगों पर बेबाकी से सदन में अपनी राय रखने की बात। अटल जी ने सदैव देशहित में दूरदर्शितापूर्ण विधानों की वकालत की और वोटों के लिए तुष्टीकरण का विरोध। 70 के दशक में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उपस्थिति में ही उन्होंने सारी संसद को चेता दिया था-
'सांप्रदायिकता को वोटों का खेल बना दिया गया है। मैं राजनीतिक दलों को चेतावनी देना चाहता हूं कि मुस्लिम संप्रदाय को बढ़ावा देकर अब आपको वोट भी नहीं मिलने वाले हैं'। (14 मई, 1970 को   लोकसभा में देश में सांप्रदायिक तनाव से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा में भाग लेते हुए)।
देश में आजादी के बाद से ही दक्षिणपंथी दलों और सांस्कृतिक संगठनों पर सुनियोजित तरीके से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया जाता रहा है। जब जनसंघ पर सदन में भी ऐसे निराधार आरोपों पर चर्चा हुई तो अटल जी ने बेबाक होकर तर्क के साथ अपनी बात रखी- 'भारतीय जनसंघ एक असांप्रदायिक राज्य के आदर्श में विश्वास करता है। जिन्होंने मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन कर लिया, वे हमारे ऊपर आक्षेप करने का दु:साहस न करें। इनकी सरकार मुस्लिम लीग के भरोसे टिकी है और हमको संप्रदायवादी बताते हैं। जो चुनाव में सांप्रदायिकता के आधार पर उम्मीदवार खड़े करते हैं वे हमको संप्रदायवादी बताते हैं। जो भारत को रब्बात के सम्मेलन में ले जा करके अपमान का विषय बनाते हैं वे हमें संप्रदायवादी बताते हैं।'(14 मई,1970)
अटल बिहारी वाजपेयी सत्तारूढ़ तंत्र के समक्ष सांप्रदायिकता और तुष्टीकरण को बार-बार तर्क के साथ उठाते रहे और देशहित में सच्चाई को बयां करने से कभी नहीं चूके। वे सांप्रदायिकता से लड़ने का ढोंग करने वाले कांग्रेसियों और वामपंथियों को उसी दौर से लताड़ने लगे थे जब साठ के दशक में देश की संसद में युवा जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने प्रवेश किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू ने उन्हें भावी भारत का प्रधानमंत्री होने की घोषणा की थी। उदारमना अटल देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता के साथ हिन्दू-मुसलमान के साथ समान व्यवहार की पक्षधरता पर जोर देते रहे हैं- 'हम न भेदभाव चाहते हैं, न पक्षपात चाहते हैं। हमने संविधान की समान नागरिकता को स्वीकार किया है। भारतीय जनसंघ के दरवाजे भारत के सभी नागरिकों के लिए खुले हुए हैं। लेकिन अगर कोई मुसलमान जनसंघ में आता है तो दिल्ली में उसके खिलाफ पोस्टर लगाए जाते हैं कि वह एक काफिर हो गया है। जो भाषा मुस्लिम लीग बोलती थी मौलाना आजाद और अन्य राष्ट्रवादी मुसलमानों के खिलाफ, आज वही भाषा जनसंघ में आने वाले मुसलमानों के खिलाफ बोली जा रही है। सांप्रदायिकता से लड़ने का यह तरीका नहीं है।'(14 मई,1970)
देश की आजादी के बाद विभिन्न वैधानिक संस्थानों और सरकारी समितियों में किस प्रकार सत्ताधारी तंत्र ने हिन्दुत्ववादी विचारधारा के पोषक संगठनों और लोगों को दरकिनार करते हुए इन संस्थाओं के माध्यम से उन्हें निपटाने की योजना बनाई थी इससे बखूबी परिचित वाजपेयी जी ने राष्ट्रीय एकात्मता परिषद में शामिल लोगों पर भी प्रश्न खड़े किए जो सर्वथा उपयुक्त एवं प्रासंगिक थे-
'प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय एकात्मता परिषद का प्रारंभ किया था लेकिन उसे मेरे दल के विरुद्ध प्रचार करने का एक हथियार बनाया गया। मैं चाहता हूं कि राष्ट्रीय एकात्मता परिषद का विस्तार किया जाए।'(14 मई,1970)
अटल जी आगे सत्ताधारी तंत्र के एकाधिकार और स्वयं प्रधानमंत्री की कृपा पर बनने वाली राष्ट्रीय एकात्मता परिषद के लिए जीवन के विविध क्षेत्रों में कार्यरत शीर्ष व्यक्तित्वों को स्थान देने की वकालत करते हुए संसद में उस समय जारी व्यवधान पर बेबाकी से राय देते दिखाई पड़ते हैं। आंख मूंदकर मुस्लिम कट्टरवाद पर मौन और आत्मरक्षा में अपनी बात रखने वाले हिन्दू संगठनों को सांप्रदायिक घोषित करने की वोट बैंक नीति पर गंभीरता के साथ उन्होंने जो चेतावनी दी है वह आज भी प्रासंगिक और उतनी ही प्रभावशाली दिखाई पड़ती है-
'राष्ट्रीय एकात्मता परिषद में श्री एस.सी. छागला, श्री हमीद देसाई, डॉ. जिलानी और श्री अनवर देहलवी जैसे राष्ट्रवादी नेता लिए जाएं। प्रधानमंत्री किसको लें, यह प्रधानमंत्री की कृपा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। मैं पूछना चाहता हूं क्या प्रधानमंत्री मुस्लिम संप्रदायवादियों के बारे में कुछ कहने के लिए तैयार हैं। यह बात छिपी हुई नहीं है कि भिवंडी में तामीर-ए-मिल्लत ने वातावरण बिगाड़ा है लेकिन क्या किसी ने तामीर-ए-मिल्लत का नाम लिया है? शिवसेना की आलोचना हो रही है, होनी चाहिए... हमें भी लपेटा जा रहा है। लेकिन हम उसकी चिंता नहीं करते हैं। हम प्रधानमंत्री की कृपा से इस सदन में नहीं आए हैं उनके बावजूद आए हैं। इस राष्ट्र की जनता का हम भी प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन जब किसी मुस्लिम संप्रदायवादी संगठन का सवाल आता है तो मुंह में ताले पड़ जाते हैं, सांप सूंघ जाता है। जमाते-उल-उल्मा क्या कर रही है? जमाते-इस्लामी क्या कर रही है? तामीर-ए-मिल्लत ने भिवंडी में क्या किया? लेकिन है कोई बोलने वाला?' (14 मई,1970)
देश में बढ़ती सांप्रदायिकता के प्रासंगिक तत्व अटल जी ने उस जमाने में ही अर्थात इंदिरा जी के सत्तारूढ़ रहते, कांग्रेस के विभाजन के बाद संप्रदायवादियों और वामपंथियों से कांग्रेस के गठजोड़ में ढूंढ निकाले थे- 'क्या हर सवाल को राजनीति की कसौटी पर कसा जाएगा? जबसे कांग्रेस का विभाजन हुआ है देश में संप्रदायवादियों और साम्यवादियों का गठबंधन बढ़ गया है और उनको प्रधानमंत्री का वरदहस्त प्राप्त है। यह है संप्रदायवाद के बढ़ने का कारण?' (14 मई,1970) महाराष्ट्र के भिवंडी में हुए दंगों पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जनसंघ के अध्यक्ष और सदन के नेता अटल जी ने 14 मई, 1970 को संसद में एक लंबी चर्चा में निरुत्तर कर दिया था। आज संसद में असहिष्णुता के नाम पर मोदी सरकार को घेरने के बहाने जो काम कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने किया और दोनों ही सदनों के दो-दो सत्र होहल्ला में स्वाहा कर दिए उसकी भनक मानो अटल जी को चार दशक पूर्व से ही प्रतीत होती दिखाई पड़ रही थी। भारत के वामपंथी नेताओं और कांग्रेस पर क्षुद्र मानसिकता का पोषक होने की खुली घोषणा करते वे नहीं चूके- 'हमें देश के भीतर काम करने वाले पाकिस्तानी तत्वों पर नजर रखनी होगी और कम्युनिस्ट पार्टी के उस हिस्से पर भी नजर रखनी होगी जो चीन परस्त है और चीन परस्त होने के कारण आज पाकिस्तान परस्त हो रहा है। मुझे खेद है कि कलकत्ता के दंगों के संबंध में जो बातें कही गईं वे एक तरफा हैं और एक तरफा बातें यह बताती हैं कि हम ऐसा प्रचार करना चाहते हैं जो प्रचार न तो सत्य पर आधारित है और न राष्ट्र के हितों के लिए काम में आ सकता है। ऐसे प्रचार से हमको सावधान रहना चाहिए।'
(13 फरवरी, 1964 को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए)


भारतीय लोकतंत्र की विडंबना देखिए जहां एकतरफा बातों और दुष्प्रचार से कुछ लोगों के इशारों पर पूरे देश की संसद को बाधित कर दिया जाता है और तथाकथित अभिव्यक्ति के खतरे के साथ-साथ असहिष्णुता के माहौल को रचने में सारी ऊर्जा लगा दी जाती है। देश की जनता के हितों का हनन कर विपक्ष से जनता को छलावा और धोखा ही मिलता है। आजादी के बाद से ही शुरू हुई सत्ता में बैठे रहने की इस लालसा पर अटल जी मानों कटाक्ष करते दीखते हैं-
'हमें इन दंगों को पार्टी का चश्मा उतारकर देखना होगा और मैं चाहता हूं कि कामरेड डांगे चश्मे को उतारकर इन दंगों को देखें। मुझे खुशी है कि उन्होंने अपना चश्मा उतार लिया- दलगत स्वार्थों को अलग रखकर इस पर विचार करना होगा, वोटों की चिंता को छोड़कर राष्ट्र को बचाने की चिंता करनी होगी।' (14 मई,1970) सांप्रदायिकता को अलग-अलग रूप से व्याख्यायित करने वालों को उलाहना देते हुए अटल जी इसे भावी पीढि़यों के लिए नुकसानदायक बताते हुए सदन में जनता की अपेक्षा पर खरी उतरने वाली भूमिका निभाने का आह्वान करते हैं- क्या 'हम देश की एकता का विचार करके नहीं चल सकते? यह विवाद इस बात को स्वीकार करेगा कि यह सदन, इस सदन में जिन दलों को प्रतिनिधित्व मिला है वे दल और उन दलों के प्रवक्ता इस महत्वपूर्ण समस्या पर कैसा दृष्टिकोण अपनाते हैं। हमें सच्चाई का सामना करना होगा। सच्चाई कितनी भी कठोर हो, कितनी भी भयानक हो, उसका उद्घाटन करना पड़ेगा। आज लाग-लपेट से काम नहीं चलेगा, किसी के पाप के ऊपर पर्दा डालने की आवश्यकता नहीं है।'(14 मई,1970)

कुल मिलाकर देश की संसद के अंदर और जनता के हृदय में छह दशक से ज्यादा राज करने वाले लोकप्रिय नेता पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बखूबी समझते थे। पं. नेहरू से लेकर इंदिरा, राजीव और सोनिया गांधी की कांग्रेस तक के कालखण्ड में 60 वर्ष तक विपक्ष के नायक रहने वाले अटल जी का आचरण, उनका व्यवहार और उनके भाषण एवं विचार एक दीर्घकालिक लोकतांत्रिक दर्शन का जीवंत उदस्तावेज कहे जा सकते हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के संसद की महत्ता को प्रमाणित करने, गरिमा बढ़ाने वाले इन विचारों को यदि आज का विपक्ष थोड़ा भी आत्मसात कर ले तो देश की जनता का भी भला होगा और इन सत्तालोलुप दलों को अपने पुराने कृत्यों के पश्चाताप का अवसर भी मिल जाएगा।  

बुधवार, 30 दिसंबर 2015

भारतीय चिन्तन हराने में नहीं, मन जीतने में विश्वास रखता है – सरकार्यवाह माननीय जोशी जी

भारतीय चिन्तन हराने में नहीं,मन जीतने में विश्वास रखता है – सुरेश भय्या जी जोशी


  
इंदौर ।

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विश्व के अन्य देशों में कार्यरत शाखा हिन्दू स्वयंसेवक संघ के पांच दिवसीय विश्व संघ शिविर-2015 का शुभारंभ 29 दिसंबर को इंदौर के एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल में हुआ. शिविर का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह माननीय सुरेश भय्या जी जोशी तथा लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया. विश्व संघ शिविर में विश्व के 45 देशों से 750 शिविरार्थी भाग ले रहे हैं.

शुभारंभ अवसर पर सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी ने कहा कि हम में से कई कार्यकर्ता भारत में पहली बार आए हैं, किन्तु रक्त, मन, मस्तिष्क में स्थापित विचार कभी दुर्बल नहीं होते. भिन्न प्रकार का चिन्तन लेकर हम विश्व में खड़े हैं. हमने विश्व को एक परिवार माना है. हम विश्व को अपने चिन्तन से प्रभावित करना चाहते हैं. हिन्दू जगे तो विश्व जगेगा. विश्व में सभी संघर्षों को समाप्त करने हेतु चिन्तन हिन्दू समाज ही दे सकता है. हम हिन्दू हैं, यह अहंकार नहीं, स्वाभिमान है. विश्व तभी जगेगा, जब हिन्दू जगेगा. हमारा (हिन्दू समाज) जगना प्रारंभ हुआ है, विश्व भी जगेगा, यह हमारा विश्वास है. इसी में मानव जीवन की स्वतंत्रता की गारंटी है. विश्व का जगना, मनुष्य का जगना है.

उन्होंने कहा कि हमने देवासुर संग्राम देखा है. सत्य के साथ असत्य, न्याय के साथ अन्याय, धर्म के साथ अधर्म, तथा देवों के साथ असुर संग्राम हुआ है. जिसमें हमेशा सत्य, न्याय, धर्म व देवों की विजय ही हुई है. यह तत्वज्ञान बहुमत से सिद्ध नहीं किया जा सकता. यह विश्व कल्याण का मार्ग है, शान्ति का मार्ग है. हिन्दुत्व का तत्वज्ञान भारतीय मनीषियों ने रखा है, यह स्नेह से ही प्राप्त किया जा सकता है. हम इस संस्कृति के प्रतिनिधि हैं.
सरकार्यवाह जी ने कहा कि बलिदान से अधिक त्याग का महत्व है. आद्य सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार जी ने कहा है कि देश समाज के लिये मरने नहीं, जीने वाले लोग चाहिए. यह अहंकार नहीं सिद्धांत की भाषा है. इसे स्वयं से आरंभ करना है, और वयं (हम सब) तक जाना है. हम भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि हैं, हमें स्वयं से ही प्रारंभ करना होगा. हम जगेंगे, तो विश्व भी उस मार्ग पर चलेगा. भारत से हजारों लोग विश्व के अनेक देशों में गए, हम किसी को हराने या लूटने नहीं गए. भारत में देने की परंपरा है, लेने की नहीं. हम शास्त्र व मूल्य लेकर गए, शस्त्र नहीं. भारतीय चिन्तन हराने में नहीं, मन जीतने में विश्वास रखता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या हिन्दू स्वयंसेवक संघ का कार्य इस यात्रा का दर्शन करवाना है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी को उद्घृत करते हुए कहा कि धर्म, कर्तव्य, मूल्य भारत में समाप्त हो जाएंगे तो विश्व में कहीं भी देखने को नहीं मिलेंगे. हम मानवीय दृष्टिकोण से कार्य करें, भविष्य के स्वप्न को हमें साकार करना है.
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और हमारे संस्कारों के सच्चे राजदूत विश्व में फैले हुए भारतीय ही हैं. जो भारत की विरासत को इतने वर्षों से विश्व में फैलाने का कार्य कर रहे हैं. हमारे मानबिन्दु संपूर्ण विश्व को जीवन जीवन दर्शन देते हैं. जैसे भारतीय संस्कृति के अनुसार हम पेड़-पौधों की पूजा, पक्षियों को दाना देने आदि का कार्य करते हैं. ये संस्कार आधारित जीवन दर्शन है. हम संपूर्ण जीव जगत को अपने परिवार का सदस्य मानते हैं. हम सभी भारतीय संस्कृति के राजदूत हैं. आज विश्व के कई देशों में दीपावली, गणेश उत्सव आदि त्यौहार बड़े पैमाने पर उत्साह से मनाए जाते हैं. भारतीय जिस देश में भी गए, बड़े भवन संपत्ति के स्थान पर उन्होंने मंदिर बनाने को प्राथमिकता दी. संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रसार किया.

कार्यक्रम के दौरान स्मारिका तथा ध्वनि चित्र मुद्रिका का विमोचन भी अतिथियों ने किया. हिन्दू स्वयंसेवक संघ के संयोजक सौमित्र गोखले जी ने विश्व में संघ द्वारा किए जा रहे कार्यों का वृत्त प्रस्तुत किया. स्मारिका के संपादक डॉ. सुब्रतो गुहा ने प्रस्तावना, धात्री त्रिपाठी ने गणेश वंदना प्रस्तुत की. कार्यक्रम का संचालन केन्या की अनिता पटेल ने किया. अतिथियों के स्वागत के साथ ही परिचय शिविर कार्यवाह डॉ. मुकेश मोढ़ ने करवाया.

मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

जांबाजी से भरा हुआ है कतरा कतरा मोदी का - कवि गौरव चौहान



मोदी की बिना योजना लाहौर यात्रा का विरोध करने वालों को एक कवी का जवाब
रचनाकार- कवि गौरव चौहान (इटावा उ.प्र.) 9557062060

जिसकी आँखों में भारत की उन्नति का उजियारा है,
जिसकी गलबहियां करने को व्याकुल भी जग सारा है,
🌻
अमरीका जापान चीन इंग्लैंण्ड साथ में बोले हैं,
घूम घूम कर जिसने दरवाजे विकास के खोले हैं,
🌻🌻🌻

जिसके सभी विदेशी दौरे सफल कहानी छोड़ गए,
बड़े बड़े तुर्रम खां तक भी हाथ सामने जोड़ गए,
🌻🌻🌻

यूरेनियम दिया सिडनी ने,रूस मिसाइल देता है,
बंगलादेश सरहदों पर चुपचाप सुलह कर लेता है,
🌻
उन्ही विदेशी दौरों की अब खिल्ली आज उड़ाते हैं?
देश लूटने वाले उसको कूटनीति सिखलाते हैं,
🌻
कायम था ग्यारह वर्षों से,वो वनवास बदल डाला,
मोदी ने लाहौर पहुंचकर सब इतिहास बदल डाला,
🌻
जिस धरती पर हिन्द विरोधी नारे छाये रहते हैं,
जिस धरती पर नाग विषैले मुहँ फैलाये रहते हैं,
🌻
जिस धरती पर हाफ़िज़ जैसे लेकर बैठे आरी हों,
और हमारे मोदी जी की देते रोज सुपारी हों,
🌻
जहाँ सुसाइड बम फटते हैं रोज गली चौराहों में,
बारूदी कालीन बिछी है जहाँ सियासी राहों में,
🌻
जहाँ होलियाँ बच्चों के संग खेली खूनी जाती हों,
बेनजीर सी नेता भी गोली से भूनी जाती हों,
🌻
उसी पाक में पहुंचे मोदी,शोर मचाया संसद ने,
सभा बीच रावण की देखो पैर जमाया अंगद ने,
🌻
बिना सुरक्षा बिना योजना जाना एक दिलेरी है,
लगता है उलझन सुलझाने में कुछ पल की देरी है,
🌻
लाहौरी दरबार समूचा ही अंगुली पर नाचा है,
पड़ा मणीशंकर के गालों पर भी एक तमाचा है,
🌻

अंगारों को ठंडा करदे,उसे पसीना कहते है,
इसको ही तो प्यारे छप्पन इंची सीना कहते हैं,🌻🌻

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जिसकी आँखों में भारत की उन्नति का उजियारा है,
जिसकी गलबहियां करने को व्याकुल भी जग सारा है,
अमरीका जापान चीन इंग्लैंण्ड साथ में बोले हैं,
घूम घूम कर जिसने दरवाजे विकास के खोले हैं,

जिसके सभी विदेशी दौरे सफल कहानी छोड़ गए,
बड़े बड़े तुर्रम खां तक भी हाथ सामने जोड़ गए,

यूरेनियम दिया सिडनी ने, रूस मिसाइल देता है,
बंगलादेश सरहदों पर चुपचाप सुलह कर लेता है,
उन्ही विदेशी दौरों की अब खिल्ली आज उड़ाते हैं?
देश लूटने वाले उसको कूटनीति सिखलाते हैं,

कायम था ग्यारह वर्षों से, वो वनवास बदल डाला,
मोदी ने लाहौर पहुंचकर सब इतिहास बदल डाला,
जिस धरती पर हिन्द विरोधी नारे छाये रहते हैं,
जिस धरती पर नाग विषैले मुहँ फैलाये रहते हैं,
जिस धरती पर हाफ़िज़ जैसे लेकर बैठे आरी हों,
और हमारे मोदी जी की देते रोज सुपारी हों,
जहाँ सुसाइड बम फटते हैं रोज गली चौराहों में,
बारूदी कालीन बिछी है जहाँ सियासी राहों में,
जहाँ होलियाँ बच्चों के संग खेली खूनी जाती हों,
बेनजीर सी नेता भी गोली से भूनी जाती हों,
उसी पाक में पहुंचे मोदी, शोर मचाया संसद ने,
सभा बीच रावण की देखो पैर जमाया अंगद ने,
बिना सुरक्षा बिना योजना जाना एक दिलेरी है,
लगता है उलझन सुलझाने में कुछ पल की देरी है,
लाहौरी दरबार समूचा ही अंगुली पर नाचा है,
पड़ा मणीशंकर के गालों पर भी एक तमाचा है,

ये गौरव चौहान कहे अब देखो जिगरा मोदी का,
जांबाजी से भरा हुआ है कतरा कतरा मोदी का,
अंगारों को ठंडा करदे, उसे पसीना कहते है,
इसको ही तो प्यारे छप्पन इंची सीना कहते हैं,

रचनाकार- कवि गौरव चौहान (इटावा उ.प्र.)
9557062060
(कृपया मूलरूप में ही शेयर करें, कटिंग, पेस्टिंग और जरा सी भी एडिटिंग न करें)
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सोमवार, 28 दिसंबर 2015

विश्व के कुछ देशों में बलात्कार की सजा



With Thanks from Pramod Goswami ji's wall
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�� विश्व के कुछ देशों में बलात्कार की सजा ��
��अमेरिका :
पीड़िता की उम्र और क्रूरता को देखकर उम्रकैद या 30 साल की सजा दी जाती है।
�� रूस :-
20 साल की कठोर सजा.
��चीन -
No Trial, मेडिकल जांच मे प्रमाणित होने के बाद मृत्यु दंड.
�� पोलेंड -
सुवरो से कटवा कर मौत Death thrown to Pigs
�� इराक -
पत्थरो से मार कर हत्या .Death by stone till last breath
�� ईरान -
24 घंटे के अंदर पत्थरो से मार दिया जाता है या फांसी
��दक्षिण अफ्रीका :
20 साल की जेल
�� सऊदी अरब :
फांसी या यौनांगों को काटने की सजा
�� मंगोलिया -
परिवार द्वारा बदले स्वरुप मृत्यु Death as revenge by family
��नीदरलैंड- :
ेंयौन अपराधों के लिए अलग-अलग सजा बताई गई है।
�� कतर -
हाथ,पैर,यौनांग काट कर पत्थर मार कर हत्या
��अफ़गिनिस्तान -
4 दिनो भीतर सर मे गोली मार दिया जाता है.
�� मलेसिया -
मृत्यु दंड Death Penalty
�� कुवैत -
सात दिनो के अंदर मौत की सजा.
��INDIA -
प्रदर्शन
धर्ना
जांच आयोग
समझौता
रिस्वत
लडकी की आलोचना
मिडिया ट्रायल
राजनीतिकरन
जातिकरन
जमानत
सालो बाद चार्जशिट
सालो तक मुकदमा
अपमान एवं जलालत
और
अंत मे दोषी का बच निकलना.
यदि आप सहमत है तो Share करे और आपके क्या लगता है क्या सजा होनी चाहिये इन दरिन्दो की... ?
एक रेड लाईट एरिया मे क्या खूब बात लिखी पाई गई..
"यहाँ सिर्फ जिस्म बिकता है,
ईमान खरीदना हो तो अगले चौक पर 'पुलिस स्टेशन' हैं |"..
आप चाहते हैं,
कि आपकी तानाशाही चले और कोई आपका विरोध न करे..
तो आप भारत में न्यायाधीश बन जाइये,..
आप चाहते हैं,
कि आप लोगों को बेवजह पीटें लेकिन कोई आपको कुछ न बोले..
तो आप पुलिस वाला बन जाइये,..
आप चाहते हैं,
कि आप एक से बढ़कर एक झूठ बोलें अदालत में,
लेकिन कोई आपको सजा न दे,
तो आप वकील बन जाइये,
..
आप चाहते हैं,
कि आप खूब लूट मार करें,
लेकिन कोई आपको डाकू न बोले,
तो आप भारत में राजनेता बन जाइये,
..
आप चाहते हैं,
कि आप दुनिया के हर सुख मांस, मदिरा, स्त्री
इत्यादि का आनंद लें,
लेकिन कोई आपको भोगी न कहे,
तो किसी भी धर्म के धर्मगुरु बन जाओ.
..
आप चाहते हैं,
कि आप किसी को भी बदनाम कर दें,
लेकिन आप पर कोई मुकदमा न हो,
तो मीडिया में रिपोर्टर बन जाइये,
....
यकीन मानिये..
कोई आप का बाल भी बाँका नहीं कर पाएगा.
भारत में,
हर 'गंदे' काम के लिए एक वैधानिक पद उपलब्ध हैं !
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बलात्कार

एक ऐसा अपराध जो ना सिर्फ शरीर को चोट पहुंचता है अपितु आत्मा को भी तार तार कर देता है. पिछले कुछ वर्षों में बलात्कार के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुयी है.

खासकर हमारे देश को पूरे विश्व में बलात्कार का गढ़ कहकर प्रचारित किया जा रहा है. क्या ये एक तथ्य है या सिर्फ एक बनायीं हुयी खबर? और अगर ये तथ्य है तो और कौन कौन से ऐसे देश है जहाँ ये जघन्य अपराध रुकने का नाम ही नहीं ले रहा.

आपको बताते है दुनिया के देश जो है बलात्कार के मामलों में सबसे आगे और सबसे आश्चर्य की बात ये है की इन देशों में दुनिया के कुछ सबसे विकसित देश भी शामिल है.



इथोपिया andrea

औरत के साथ अपराध के मामले में इथोपिया बहुत आगे है, एक सर्वे के अनुसार 60% इथोपियन महिलाये शारीरिक शोषण का शिकार होती है

.इस देश में बलात्कार की दर बहुत ज्यादा है यहाँ की आबादी के अनुसार. इथोपिया में अफर्ण कर शादी करना भी आम बात है, इसमें अपहर्ता लड़की का अपहरण कर उसका तब तक बलात्कार करता है जब तक की वो गर्भवती नहीं हो जातीऔर ऐसा होने के बाद उस लड़की को अपहर्ता से शादी के लिए मजबूर होना पड़ता है.





श्री लंका sri lanka


बलात्कार सिर्फ महिलाओं का ही नहीं होता, पुरुषों का भी होता है. श्रीलंका में एक बड़ी संख्या में पुरुषों का बलात्कार होता है.

बलात्कार के शिकार अक्सर विद्रोही या आतंकी होने के संदेही पुरुष होते है और बलात्कार किया जाता है सेना के जवानों के द्वारा. एक रिपोर्ट के अनुसार बलत्कार के शिकार 96.5% पुरुष रिपोर्ट नहीं करवाते.

65% बलात्कारियों को बलात्कार करने के बाद किसी तरह का अफ़सोस नहीं होता और तकरीबन 11प्रतिशत ऐसे भी है जिन्होंने 4 या ज्यादा महिलाओं का बलात्कार किया है. है ना ये खौफनाक आंकड़े हमारे पडोसी देश के.




कनाडा canada

नाम सुनकर चौंक गए. एक विकसित देश होकर भी बलात्कार के मामले में इतना आगे.

कनाडा में रिपोर्ट्स के अनुसार 2,516,918 बलात्कार होते है जो कि असल बलात्कार का केवल 6% है. कनाडा की एक तिहाई महिलाएं कभी ना कभी शारीरिक शोषण या बलात्कार का शिकार हुयी है.

कोर्ट के अनुसार हर 17 में से एक लड़की का बलात्कार होता है.





फ्रांस france

प्यार के देश के नाम से मशहूर इस देश का नाम सुनकर मत चौंकिए बलात्कार के मामलों में आगे होने के अलावा एक और चौंका देने वाली बात फ्रांस के बारे में ये है 1980 तक फ्रांस में बलात्कार को अपराध नहीं माना जाता था.

बलात्कार और शोषण के विरुद्ध कानून बने भी ज्यादा समय नहीं बीता है. इस सन्दर्भ में पहला कानून 1992 में बना था और सबसे ताजा कानून करीबन 1-2 वर्ष पूर्व ही बना है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार फ्रांस में हर साल करीब 75000 बलात्कार होते है. जिनमे से केवल 10% की ही रिपोर्ट दर्ज होती है. महिलाओं के साथ कुल 3,771,850 अपराध होते है .





जर्मनी Germany

फ्रांस कनाडा और अब जर्मनी, जितने ज्यादा विकसित देश उतने ही मानवता रहित.

जर्मनी में बलात्कार की दर पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा बढ़ी है. आंकड़ो के अनुसार पिछले कुछ सालों में करीब ढाई लाख बलात्कार पीड़ित मर चुकी है.

बलात्कार का सालाना आंकड़ा छ लाख के करीब है. दिनों दिन जर्मनी में ये समस्या बढती ही जा रही है.





यूनाइटेड किंगडम UnitedKingdom


विश्व के सबसे पुराने और सबसे विकसित देशों में से एक और साथ ही साथ अपराध के मामलों में भी अग्रणी. कमाल की बात है जिस देश पर रानी का राज है वहीँ पर महिलाएं सुरक्षित नहीं.

सरकारी अंडों के अनुसार पिछले वर्ष इंग्लैंड और वेल्स में करीब 85000 महिलाओं का बलात्कार हुआ और हर साल करीब चार लाख महिलाये शारीरिक शोषण का शिकार होती है और 5 में से 1 महिला 16 वर्ष की उम्र से शारीरिक रूप से शोषण का शिकार बनती है.

ये आंकड़े बताते है की बलात्कार को रोक पाने  में ब्रिटेन किस प्रकार नाकाम रहा है.




भारत india

बहुत से लोग इंतज़ार कर रहे थे अपने देश का नाम आने का, इंतज़ार करें भी तो क्यों नहीं जब पूरे विश्व में बलात्कार का गढ़ बताया जा रहा है इस देश को.

बलात्कार की समस्या भारत में बहुत तेज़ी से बढ़ी है खासकर पिछले पांच सालों में.2012 में करीब 25000 बलात्कार के मालों की रिपोर्ट हुयी थी

पर असली आंकडा इस से कहीं ज्यादा है. सरकारी सूत्रों का माने तो ये संख्या बलात्कार के मामलों की मात्र 2 प्रतिशत है. भारत में होने वाले अधिकतर बलात्कार के मामलों में बलात्कारी महिला का जान पहचान वाला ही होता है जैसे की परिवार का सदस्य, रिश्तेदार.

दोस्त , सहकर्मी या पडोसी. भारत में हर 22 मिनिट में एक बलात्कार होता है, ये एक गहन चिंता का विषय है और कड़े कानून और लड़के लड़कियों में जागरूकता लाकर ही इस पर लगाम कासी जा सकती है.





स्वीडन Sweden

स्वीडन को सबसे सुरक्षित देशों में से एक माना जाता है पर जहाँ बात महिलाओं की सुरक्षा की बात आती है तो ये देश बलात्कार के मामलों  में यूरोप में सबसे आगे और विश्व में भी चोटी के तीन देशों में आता है.

हर एक लाख पर 63 महिलाएं बलात्कार का शिकार होती है. पिछले दस सालों में इस देश में बलात्कार की दर 58% तक बढ़ी है.





साउथ अफ्रीका southafrica

ये देश बलात्कार के मामलों में बहुत आगे है, विश्व में सबसे अधिक बलात्कार यहीं होते है सिर्फ एक देश है जो अफ्रीका से आगे है.

एक सर्वे के मुताबिक हर तीन में से एक लड़की/महिला बलात्कार की शिकार होती है और तकरीबन 25% पुरुष है जिन्होंने कभी ना कभी किसी का बलात्कार किया है और इनमें से आधे ऐसे भी है जिन्होंने एक से अधिक महिला का बलात्कार किया है.

दक्षिण अफ्रीका बच्चों के बलात्कार के मामलों में दुनिया में सबसे आगे है और सबसे बुरी बात ये है कि बलात्कार के आरोप में पकडे जाने पर केवल दो साल की सजा का प्रावधान है .





अमेरिका (USA)

विश्व शक्ति, दुनिया का सबसे शक्तिशाली और विकसित देश. कोई सोच सकता है की इस सूचि में भी ये देश सबसे ऊपर होगा.

हाँ यकीन करना मुश्किल है पर अमेरिका बलात्कार के मामलों में सबसे आगे है. बलात्कार के पीड़ितों में 91% महिलाएं होती है और करीब 9% पुरुष. सरकारी सर्वे के अनुसार 6 में से 1 अमेरिकी महिला और 33 में से 1 अमेरिकी पुरुष अपने जीवनकाल में कभी ना कभी शारीरिक शोषण या बलात्कार का शिकार होता है.

USA

नए सर्वेक्षणों के अनुसार अफ्रीका ने बलात्कार के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है.

बलात्कार के  मामलों में कुछ हद तक काबू पाकर अब अमेरिका, अफ्रीका और स्वीडन के बाद तीसरे स्थान पर है.

देखा किस प्रकार दुनिया के अविकसित, विकासशील और विकसित सभी प्रक्कर के देश इस अपराध की रोकथाम करने में नाकाम रहे है. बलात्कार की समस्या किसी देश किआर्थिक हालत या सांस्कृतिक सोच पर निर्भर नहीं करती. बलात्कार एक कुंठित और घिनौनी मानसिकता से पीड़ित व्यक्ति द्वारा किया गया अपराध है.

और इसे रोकने का एक ही तरीका हो सकता है कठोर कानून और लोगों में जागरूकता जगाना और विश्वास दिलाना की इस अपराध को करने वालों को बक्शा नहीं जायेगा.



रविवार, 27 दिसंबर 2015

कर्म करने की प्रेरणा देती है भगवद्गीता ::: जे. नंदकुमार

कर्म करने की प्रेरणा देती है भगवद्गीता
Posted by: December 03, 2015 I
(21 दिसंबर, गीता जयन्ती पर विशेष)
लेखक – जे. नंदकुमार, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

“जब शंकाएं मुझ पर हावी होती हैं, और निराशाएं मुझे घूरती हैं, जब दिगंत में कोई आशा की किरण मुझे नजर नहीं आती, तब मैं गीता की ओर देखता हूं.” – महात्मा गांधी.

संसार का सबसे पुराना दर्शन ग्रन्थ है भगवद्गीता. साथ ही साथ विवेक, ज्ञान एवं प्रबोधन के क्षेत्र में गीता का स्थान सबसे आगे है. यह केवल एक धार्मिक ग्रन्थ नहीं है, अपितु एक महानतम प्रयोग शास्त्र भी है. केवल पूजा घर में रखकर श्रद्धाभाव से आराधना करने का नहीं, अपितु हाथ में लेकर युद्धभूमि में लड़कर जीत हासिल करने का सहायक ग्रन्थ है. महाभारत युद्ध के प्रारम्भ में कर्ममूढ़ होकर युद्ध से निवृत होने की इच्छा व्यक्त करने वाले अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने गीतोपदेश के द्वारा ही कर्म पूर्ण करने की प्रेरणा दी. अर्जुन ऐसा कहते हैं कि युद्ध करने से भी अच्छा अर्थात विहित कर्म करने से भी श्रेष्ठ युद्ध भूमि छोड़कर जाना है. वह तर्क देते हैं कि युद्ध के कारण बहने वाले खून की नदी पार करके विजयी बनने से भी अच्छा भिखारी बनना है. भगवान श्रीकृष्ण उनको पुरुषार्थ का महत्व बताते हैं. अपना कर्म छोड़ने की प्रवृति नीच और अनार्य है, ऐसा ज्ञान गीता देती है. द्वितीय अध्याय के दूसरे एवं तीसरे श्लोकों में भगवान पूछते हैं –

कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितं

अनार्यजुष्टमस्वगर्यमकीर्तिकरमर्जुन

हे अर्जुन, तुझे इस दुःखदाई समय में मोह किस हेतु से प्राप्त हुआ. क्योंकि यह अश्रेष्ठ पुरुषों का चरित है. यह स्वर्ग को देने वाला नहीं है और अपकीर्ति को करने वाला ही है. उतना मात्र नहीं, अगले श्लोक में और जोर से भगवान प्रहार करते है -

कलैव्यं मा स्म गमः पार्थ नैनत्वय्युपपद्यते.

क्षुद्रं ह्रदयदौर्बल्यं त्यक्तोत्तिष्ठ परन्तप.

भगवान का मत ऐसा है कि धर्म छोड़ना यानि कलीवता अथवा नपुंसकता है. उसको मत प्राप्त हो. क्योंकि तुम्हारे में यह उचित नहीं है. इसलिए हृदय की दुर्बलता को त्यागकर अपना कर्तव्य निभाने के लिए (युद्ध के लिए) खड़े हो जाओ.

यह भगवदगीता के महत्वपूर्ण उपदेश हैं. यह बात केवल युद्ध सम्बंधित नहीं है. जीवन के सब क्षेत्रों में यह लागू होती है. प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपना धर्म होगा. चाहे वह अध्यापक होगा या विद्यार्थी, मजदूर या अधिकारी कुछ भी हो अपने लिए मिले हुए धर्म को अवश्य मनःपूर्वक सफलतापूर्वक पूर्ण करना चाहिए. उसको ध्यानपूर्वक निपुणता के साथ करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है. उसके प्रति अनदेखी करके व्यवहार करना हीनता है.

आज के युग में यह सन्देश सर्वदा प्रासंगिक है. अपने निजी धर्म, संस्कृति को छोड़कर बाकि चमकने वाले अन्य आदर्शों के पीछे दौड़ने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. स्वदेशी का सन्देश रखते हुए महात्मा गांधीजी ने इसी बात का विस्तार से प्रतिपादन किया है. उन्होंने बताया है कि स्वदेशी याने स्वधर्म और उसके साथ स्वभाषा और स्वभूषा भी है. स्वदेशी कल्पना को गांधीजी ने व्यापक अर्थ में दिया है. वह ‘स्व’ से जुड़े हुए सब है. धर्म (Religion) के बारे में गांधीजी कहते हैं. हमारी  परम्परा एवं परिसर में विद्यमान धर्म छोड़ना महापाप है. इसी प्रकार हमारी मातृभाषा एवं अपनी संस्कृति एवं सदाचार मूल्यों के साथ मेल खाने वाली नागरिक जीवन शैली भी होनी चाहिए.

महात्माजी को इस तरीके का मार्ग एवं सिद्धांत अपनाने की प्रेरणा भगवदगीता से मिली. उन्होंने कई बार यह बात प्रस्तुत भी की थी. भगवदगीता को मन जैसा मानकर अनुसरण करने से संकटों से पार पा सकते हैं. गांधी जी को भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन का नेतृत्व करने की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन भगवद्गीता ने दी. अंततोगत्वा गीता प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म सम्बंधित ज्ञान देती है. और  किसी भी स्थिति में धर्म पालन का अनुसरण और आवश्यकता पड़ने पर रक्षा करने के लिए रणभूमि में उतरने की ताकत भी देती है. इस बात को गहराई से समझकर उसका क्रियान्वयन करने वालों में केवल गांधीजी ही नहीं थे. सही अर्थ में स्वातंतत्र्य का सामान्य समाज में भाव बनाने वाले लोकमान्य तिलक जी के पूरे क्रियाकलापों का सैद्धांतिक अधिष्ठान भी गीता दर्शन से ही बना. महर्षि अरबिंदो ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर राष्ट्रबोध की आग लगाने के लिए भगवद्गीता का भाष्य लिखा. ‘जय हिन्द’ का नारा लगाकर भारत मुक्ति के लिए अथक परिश्रम करने वाले महान देशभक्त नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिन्द फ़ौज के सदस्यों को पढ़ने के लिए भगवद्गीता दी थी. लाखों करोड़ों देशवासियों के अन्दर देशभक्ति का ज्वार इसलिए जला और स्वातंत्र्य आन्दोलन के कठिनतम मार्ग में वे कूद पड़े. यह सब इसलिए संभव हो पाया क्योंकि भगवदगीता अपने इस देश के स्वत्व को ही प्रगटित करती है. स्वाभाविक है, सच्चे देशभक्तों को उससे प्रेरणा मिली. स्वधर्म पालन के रास्ते में चलने पर यदि मृत्यु भी प्राप्त हो गई तो भी परवाह नहीं. ऐसी सुव्यक्त जीवन दिशा भी उस निमित उन्हें मिली. गीता के तीसरे अध्याय का 35वां श्लोक इस दृष्टि पर उल्लेखनीय है –

“श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः पर धर्मात्स्व नुष्ठितात.

स्वधर्मे निधनं श्रेयःपरधर्मो भयावह.”

अपना स्वधर्म चाहे परधर्मों के साथ तुलना करने के समय थोडा बहुत कम होगा, कम चमकने वाला  होगा, लेकिन उसको छोड़ना नहीं. परधर्म अपनाना नहीं. वह भयावह है. इसलिए स्वधर्म में तो मरना भी श्रेयस्कर है. भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों द्वारा सूली पर चढ़ने के समय भी भगवद्गीता हाथ में रखने का कारण और दूसरा कुछ भी नहीं था.

आज भी स्थिति एक प्रकार से समान है. परधर्म अभी भी चमकने वाली वेशभूषा पहनकर देश में अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद है. स्वत्व बोध के आभाव के कारण बहुत सारे लोग भ्रमित होकर परधर्म के पीछे जाते हैं. शिक्षा से लेकर आर्थिक क्षेत्र तक, संस्कृति से लेकर धार्मिक मोर्चा तक सब दूर स्थिति गंभीर है. यह बात ठीक है कि राष्ट्रीय आदर्शों का प्रभाव भी बढ़ रहा है, लेकिन उसकी गति बढ़ाने की जरूरत है. इस बीच हमको प्रेरणा देने की ताकत अपने राष्ट्र ग्रन्थ भगवद्गीता में है. फिर से एक बार गीता मां के पीछे चलकर स्वधर्म रक्षा के लिए सबको तैयार होना चाहिए –

अंब त्वामनुसंदधामी भगवद्गीते भवद्वेशीनीं.

लेखक – जे. नंदकुमार, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

संगठन में धन से अधिक महत्व महापुरुषों के जीवन का अनुसरण है – परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. भागवत जी



संगठन में धन से अधिक महत्व महापुरुषों के जीवन का अनुसरण है – डॉ. मोहन भागवत जी

Posted by: December 20, 2015


नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संघ के ज्येष्ठ प्रचारक सरदार चिरंजीव सिंह जी का अभिनंदन करते हुए कहा कि दीपक की तरह संघ के प्रचारक दूसरों के लिए जल कर राह दिखाते हैं. सम्मान आदि से प्रचारक दूर रहना ही पसंद करते हैं. संघ में व्यक्ति के सम्मान की परंपरा नहीं है, किंतु संगठन के लाभ के लिए न चाहते हुए भी सम्मान अर्जित करना पड़ता है. सरसंघचालक जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं वर्तमान में राष्ट्रीय सिख संगत के मुख्य संरक्षक सरदार चिरंजीव सिंह जी के  85 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नई दिल्ली स्थित मावलंकर सभागार में आयोजित सत्कार समारोह में सिख संगत के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि जीवन का आदर्श अपने जीवन से खड़ा करना यह सतत तपस्या संघ के प्रचारक करते हैं. इसके लिए वह स्वयं को ठीक रखने की कोशिश जीवन पर्यन्त करते है. महापुरुषों के जीवन का अनुसरण करते रहने वाले साथी मिलते रहें, यह अधिक महत्त्वपूर्ण है. धन से ज्यादा,  संगठन का फायदा इसमें है कि जो रास्ता संगठन दिखाता है, उस रास्ते पर चलने की हिम्मत समाज में बने. संघ में प्रचारक निकाले नहीं जाते वह अपने मन से बनते हैं. जिसको परपीड़ा नहीं मालूम होती, वह कैसे मनुष्य हो सकता है. मनुष्य को मनुष्य होने का साहस करना होता है, संघ स्वयंसेवकों को ऐसा वातावरण देता है. सरदार चिरंजीव सिंह जी के जीवन से ऐसा उदाहरण देख लिया है. अब हम लोगों के ऊपर है कि हम कैसे उनके जीवन के अनुसार चल सकते हैं. अपनी शक्ति बढ़ाते चलो, अपना संगठन मजबूत करते चलो, सरदार चिरंजीव सिंह जी ने ऐसा कर के दिखाया. अगर यह परंपरा आगे चलाने की कोशिश हम सभी करें तो किसी भी धन प्राप्ति से ज्यादा खुशी उनको होगी.
राष्ट्रीय सिख संगत के संरक्षक सरदार चिरंजीव सिंह जी ने कहा कि संघ में प्रचारक बनने के लिए किसी घटना की आवश्यकता नहीं होती, जैसे परिवार का काम करते हो वैसे समाज का काम करो. सहज और स्वभाविक रूप से आप समाज के लिए काम करो. उन्होंने डॉ. हेडगेवार जी का संदर्भ दिया कि उन्होंने केवल 5 बच्चों को साथ लेकर संघ की स्थापना की. यही एक घटना हो सकती है, हम सभी के संघ में आने के लिए. संघ का काम यही है कि देश के प्रति एक आग उत्पन्न कर देना, अब उस व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है कि वह प्रचारक जीवन अपनाता है या फिर अन्य मार्ग से देश की सेवा करता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एकमात्र संगठन है, जिसमें व्यक्ति सिर्फ देने ही आता है, अपने लिए कुछ नहीं मांगता. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिख गुरुओं का हृदय से बहुत आदर करता है. गुरु गोविंद सिंह जी ने जिन लोगों के लिए सब कुछ किया, जब उन लोगों ने कुछ नहीं किया तो उन्होंने उनके लिए कुछ बुरा नहीं कहा.  आज हम अपनी कमजोरियों की जिम्मेदारी दूसरों पर डालना चाहते हैं, भारतवर्ष के पतन का यह बहुत बड़ा कारण है, क्योंकि हम दूसरों को ही बुरा ठहराने की कोशिश करते हैं. उन्होंने गुरुवाणी के आधार पर सारे समाज को जागृत करने को कहा कि सिख धर्म वास्तव में क्या है. गुरुओं के उपदेश के अनुसार सिखों से  आचरण करने को कहा.

सरदार चिरंजीव सिंह जी का सिख संगत के कार्य को आगे बढ़ाने में अभूतपूर्व योगदान है. उन्होंने वर्ष 1953 में स्नातक शिक्षा पूर्ण कर 62 वर्ष से संघ के प्रचारक के रूप में विभिन्न संगठनों, विहिप, पंजाब कल्याण फोरम, संघ के विभिन्न दायित्व व राष्ट्रीय सिख संगत के 12 वर्ष तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहकर और वर्तमान में मुख्य संरक्षक, अपना सम्पूर्ण जीवन माँ भारती को समर्पित किया हुआ है.

3-राष्ट्रीय सिख संगत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार गुरचरन सिंह गिल जी द्वारा कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत की गई. उन्होंने कहा कि सरदार चिरंजीव सिंह का जन्म माता जोगेन्दर कौर व पिता सरदार हरकरण सिंह के गृह शहर पटियाला में अश्विन शुक्ल नवमी, वि.सं. 1987 ई. तद्नुसार 1 अक्टूबर 1930 को हुआ. उनकी प्रारम्भिक शिक्षा सनातन धर्म इंग्लिश हाई स्कूल पटियाला में हुई. वे सातवीं कक्षा से संघ के सम्पर्क में आये तथा तब से सदा के लिए संघ के होकर रह गये. वर्ष 1948 में मैट्रिक करने के बाद उन्होंने अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र व दर्शनशास्त्र से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. इसी बीच जब संघ पर प्रतिबंध लगा तो वे सत्याग्रह कर जेल गए. परिवार के स्वप्न थे कि चिरंजीव सिंह जी किसी बड़ी नौकरी में जा कर धन व यश कमायें, पर संघ शाखा से मिले संस्कार उन्हें अपना जीवन, अपनी पवित्र मातृभूमि व देश पर बलिदान करने की ओर ले जा रहे थे. वह 14 जून 1953 को आजीवन देश सेवा के लिए संघ के प्रचारक हो गए. वह विभिन्न जिलों के प्रचारक, बाद में लुधियाना के विभाग प्रचारक व पंजाब के सह-प्रचारक रहे. आपात्काल में लोकशाही की पुनः प्रस्थापना के जनसंघर्ष में सक्रिय रहे. भूमिगत रहकर सैंकड़ों बंधुओं को संघर्ष में सहभागी होने की प्रेरणा दी.

पंजाब में उग्रवाद के दिनों में जब सामाजिक समरसता की बात कहना दुस्साहस ही था, तब उन्होंने पंजाब कल्याण फोरम बनाकर इसके संयोजक का महत्वपूर्ण दायित्व निभाया. वे जान हथेली पर रखकर सांझीवालता की सोच रखने वाले सिख विद्वानों, गुरुसिख संतों व प्रमुख हस्तियों से निरंतर संवाद बनाये रहे तथा उग्रवाद से पीड़ित परिवारों को संवेदना व सहयोग प्राप्त करवाते रहे. उन्होंने गुरुसिख व सनातन परम्परा के संतों से संवाद बनाकर, समाज में आत्मीयता, प्रेम, सौहार्द व सांझीवालता का सन्देश सब जगह पहुंचाने के लिए “ब्रह्मकुण्ड से अमृतकुंड” नाम से, एक विशाल यात्रा हरिद्वार से अमृतसर तक निकाली, जिसमें लगभग एक हजार संतों की भागीदारी रही.

1970 व 80 के दशक में पंजाब के तनावपूर्ण वातावरण तथा 1984 में इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दिल्ली, कानपुर, बोकारो इत्यादि में सिखों के नरसंहार के कारण जब भाईचारे की परम्परागत कड़ियां तनाव महसूस करने लगीं, तब चिरंजीव सिंह जी ने सिख नेताओं और संतों के साथ मिलकर राष्ट्रीय सिख संगत की स्थापना की. वर्ष 1990 में वह इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. खालसा सिरजना के 300 वर्ष पूरे होने पर सांझीवालता का सन्देश देने के लिए भारत के विभिन्न मत सम्प्रदायों के संतों से सम्पर्क कर, श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज के जन्मस्थल पटना साहिब से राजगीर बोधगया, काशी, अयोध्या से होती हुई 300 संतों की यात्रा निकाली. यह यात्रा 24 मार्च 1999 से शुरु होकर 10 अप्रैल को श्री आनंदपुर साहिब के मुख्य आयोजन, संत समागम, में सम्मिलित हुई. इस यात्रा का हरिमंदिर साहिब, दमदमा साहब, केशगढ़ साहिब जैसे सभी प्रमुख गुरुद्वारों में सम्मान सत्कार हुआ. सरदार जी ने सन् 2000 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित मिलेनियम-2, विश्व धर्म सम्मेलन में भागीदारी की व संगठन के विस्तार के लिए इंग्लैंड व अमेरिका की यात्रा की.

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारम्भ गुरुतेगबहादुर पब्लिक स्कूल मॉडल टाउन दिल्ली के छात्रों द्वारा शबद गायन ‘देहि शिवा वर मोहि इहे’ द्वारा किया गया. इस अवसर पर सरदार चिरंजीव सिंह जी द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया गया. उनको सम्मान स्वरुप 85 लाख रुपये की राशि प्रदान की गयी जो उन्होंने सिख इतिहास में शोध कार्य के लिए केशव स्मारक समिति को धरोहर स्वरूप सौंपी. जो बाद में भाई मनि सिंह गुरुमत शोध एंड अध्ययन संस्थान ट्रस्ट को हस्तांतरित कर दी गयी. इस अवसर पर संत बाबा निर्मल सिंह जी (बुड्ढा बाबा के वंशज), उत्तर क्षेत्र संघचालक डॉ. बजरंग लाल गुप्त, दिल्ली प्रान्त संघचालक भी उनके साथ मंचस्थ थे. मंच संचालन दिल्ली प्रान्त सह संघचालक आलोक जी ने किया.

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण नाम और नम्बर

राजस्थान राज्य के 25 सांसदों के नाम संसदीय

क्षेत्र का नाम व मोबाइल नम्बर
1.सुखबीर जी जौनपुरिया
    सवाई माधोपुर
    09811026447
2.सुमेधानन्द जी
    सीकर
    09928470131
3.निहाल चन्द जी मेघवाल
    गंगानगर
    09414090050
4.राम चरण जी बोहरा
    जयपुर शहर
    09829066531
5.राज्यवर्धन सिंह जी राठौड़
   जयपुर ग्रामीण
   09460996611
6.देव जी पटेल
   जालोर
   09414158488
7.संतोष अहलावत
    झुन्झुनू            
  09549477777, 09929900000
8.गजेंद्र सिंह जी शेखावत
   जोधपुर
   09672000555
9.मनोज जी राजोरिया
   धौलपुर-करौली
    09414389585
10.ओम जी बिडला
      कोटा        
     9783977701,9829037200
11.सी.आर.चौधरी
     नागौर 9829122837,9166355505
12.पी.पी.चौधरी
      पाली
      9414135735
13.हरिओम सिंह जी
      राजसमंद
      9414172267
14.दुष्यंत सिंह जी
      झालावाड़      9414027979, 9414194009,
     09810896886
15.सावँरलाल जी जाट
     अजमेर
     9829612667
16.चाँद नाथ जी
     अलवर
     09215312333
17.मानशंकर जी निनामा
     बांसवाडा डूंगरपुर
    9928116783
18.कर्नल सोनाराम जी
     बाडमेर 9828999900,09868180900
19.बहादुर सिंह जी कोली
     भरतपुर 9414315320,9636325690
20.सुभाष जी बहेरिया
     भीलवाड़ा 9829046344
21.अर्जुन जी मेघवाल बीकानेर           9414075910
22.सी.पी.जोशी
     चित्तौड़गढ
    9414111371
23.राहुल जी कस्वाँ
      चूरू 9560111599
24.हरीश चन्द्र जी मी
      दौसा 9929884441
25.अर्जुनलाल जी मीणा
      उदयपुर
       9414161766
*****************************
 ये हैं मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री

1. राजनाथ सिंह (BJP UP-Lucknow)
गृह मंत्रालय
+911123353881

2. सुषमा स्वराज (BJP MP-Vidisha)
विदेश मंत्रालय, विदेश मामले मंत्रालय
+919868181930

3. अरुण जेटली (BJP)
वित्त मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामले, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय


4. एम वेंकैया नायडू (BJP KRNTK)
शहरी विकास मंत्रालय, आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन, संसदीय मामले
+919868181988

5. नितिन गडकरी (BJP MH-Nagpur)
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग मंत्रालय
+917122727145

6. मनोहर पर्रिकर (BJP Goa)
रक्षा मंत्रालय
+919822131213

7. सुरेश प्रभु (BJP MH)
रेल मंत्रालय
+919821589555

8. डीवी सदानंद गौड़ा (BJP KRNTK-Udupi Chikmanglur)
कानून एवं न्‍याय मंत्रालय
+919448123249

9. उमा भारती (BJP UP-Jhansi)
जलसंसाधन मंत्रालय, नदी विकास तथा गंगा पुनरुद्धार
+919953813664

10. डॉ. नजमा ए हेपतुल्ला (BJP MP)
अल्पसंख्यक मंत्रालय
+919868181974

11. रामविलास पासवान (LJP BHR-Hajipur)
उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
+911123017681

12. कलराज मिश्रा (BJP UP-Deoria)
लघु उद्योग मंत्रालय (सूक्ष्‍म, लघु तथा मझोले उद्योग)
+919818700040

13. मेनका संजय गांधी (BJP UP-Pilibhit)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
+919013180192

14. अनंत कुमार (BJP KRNTK-Bangluru)
उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय
+919868180337

15. रविशंकर प्रसाद (BJP BHR)
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी
+919868181730

16. जगत प्रकाश नड्डा (BJP Himachal)
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
+918800633377

17. अशोक गजपति राजू पशुपति (TDP AP-Vizianagaram)
नागरिक उड्डयन मंत्रालय
+919440822599

18. अनंत गीते (SS MH-Raigarh)
भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता मंत्रालय
+919868180319

19. हरसिमरत कौर बादल (SAD PNB-Bathinda)
खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग
+919013180440

20. नरेंद्र सिंह तोमर (BJP MP-Gwalior)
खनन एवं इस्पात मंत्रालय
+919013180134
+919425110500

21. चौधरी बीरेंदर सिंह (BJP HR)
ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय
+919013181818

22. जुएल उरांव (BJP Odissa-Subdrrgarh)
जनजातीय मामले
+919868180206

23. राधा मोहन सिंह (BJP BHR-Poorvi Champaran)
कृषि मंत्रालय
+919013180251
+919431233001
+919431815551

24. थावरचंद गहलोत (BJP MP) सामाजिक न्‍याय तथा अधिकारिता मंत्रालय
+919711949789
+919425091516
+919868180049

25. स्मृति ईरानी (BJP)
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
+919820075198

26. डॉ. हर्षवर्धन (BJP Delhi-Chandi chawk)
विज्ञान एवं तकनीकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
+919810115311

मोदी सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री

27. जनरल वीके सिंह (BJP UP-Ghaziabad)
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन (स्‍वतंत्र प्रभार), विदेशी मामले, प्रवासी मामले

28. राव इंद्रजीत सिंह (BJP HR-Gurgaon)
आयोजना (स्‍वतंत्र प्रभार), रक्षा
+919013180525

29. संतोष कुमार गंगवार (BJP UP-Baraiky)
कपड़ा (स्‍वतंत्र प्रभार)

30. बंडारू दत्तात्रेय (BJP Telangana-Secundarabad)
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार)
+919440585999

31. राजीव प्रताप रूडी (BJP BHR-Saran)
कौशल विकास, उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार), संसदीय मामले
+919811119257

32. श्रीपद येस्‍सो नाइक (BJP Goa North)
आयुष (स्वतंत्र प्रभार), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
+919822122440
+919868180630

33. धर्मेंद्र प्रधान (BJP)
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (स्वतंत्र प्रभार)

34. सर्बानंदा सोनवाल (BJP Assam-Lakhimpur)
युवा मामले और खेल (स्‍वतंत्र प्रभार)
+919435531147

35. प्रकाश जावड़ेकर (BJP MH)
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार)
+919899331117

36. पीयूष गोयल (BJP MH)
ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार), कोयला (स्वतंत्र प्रभार), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (स्‍वतंत्र प्रभार)

37. डॉ. जितेंद्र सिंह (BJP J&K-Udhampur)
पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग
+919419192900

38. निर्मला सीतारमण(BJP AP)
वाणिज्‍य एवं उद्योग (स्‍वतंत्र प्रभार)
+919910020595

39. डॉ. महेश शर्मा (BJP UP-Gautambudhnagar, Noida)
संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार), पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार), नागरिक उड्डयन
+919873444255

40. मुख्तार अब्बास नकवी (BJP-UP)
अल्पसंख्य मामले, संसदीय मामले
+919899331115

41. राम कृपाल यादव (BJP BHR-Patliputra)
पेयजल एवं स्वच्छता
+919431800966

42. हरिभाई पार्थीभाई चौधरी(BJP GJ-Banaskantha)
गृह मामले
+919426502727

43. सांवर लाल जाट (BJP RJ-Ajmer)
जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरुद्धार

44. मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंडारिया (BJP GJ-Rajkot)
कृषि
+919825005386

45. गिरिराज सिंह (BJP BHR-Nawada)
सूक्ष्‍म, लघु तथा मझोले उद्योग
+919431018799

46. हंसराज गंगाराम अहीर (BJP MH-Chandrapur)
रसायन एवं उर्वरक
+919868180489

47. जीएम सिद्धेश्वर (BJP KRNTK-Devanagere)
भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता
+919868180264

48. मनोज सिन्हा (BJP UP-Ghazipur)
रेल
+919415209958
+918826611111

49. निहालचंद (BJP RJ-Ganganagar)
पंचायती राज
+919414090050

50. उपेंद्र कुश्वाहा (RLSP BHR-Karakat)
मानव संसाधन विकास
+919431026399

51. राधाकृष्णन पी- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग

52. किरण रिजिजू (BJP Arunachal West)
गृह मामले
+919436460000

53. कृष्णन पाल- सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता

54. डॉ. संजीव कुमार बाल्यान (BJP UP-Muzaffarnagar)
कृषि
+919219583103

55. मनसुखभाई धानजीभाई वसावा (BJP GJ-Bharuch)
जनजातीय मामले
+919868180050

56. रावसाहेब दादाराव दानवे(BJP MH-Jalna)
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण
+919868180280

57. विष्णु देव साई (BJP CHH Raigarh)
खनन एवं इस्पात
+919425251933


58. सुदर्शन भगत (BJP JHR- Lohardaga)
ग्रामीण विकास
+919013180273

59. प्रो. राम शंकर कठेरिया (BJP UP Agra)
मानव संसाधन विकास
+919412750008
+919013180116

60. वाईएस चौधरी- विज्ञान एवं तकनीकी, पृथ्वी विज्ञान

61. जयंत सिन्हा (BJP JHR-Hazaribagh)
वित्त
+919811716444

62. कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर(BJP RJ-Jaipur Rular) सूचना एवं प्रसारण
+919460996611

63. बाबुल सुप्रियो (BJP WB -Asansol)
शहरी विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन
+919821333300
+919920033330

64. साध्वी निरंजन ज्योति (BJP UP-Fatehpur)
खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग
+919415532346

65. विजय सांपला (BJP PNB-Hoshiyarpur)
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
+919876099143

: सरकारने विभिन्न ऑनलाईन सेवा शुरु की है 🔘
जिसे आप
 http://www.india.gov.in/howdo
पेज पर जाकर अपने जरूरत की केटेगरी में चुन सकते हैं,

 🔘 उदाहरन के लिए कुछ इस प्रकार हैं🔘

* प्राप्त करे:
🔴1. जन्म प्रमाण
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=1

🔴2. जाति प्रमाण
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=4

🔴3. टोली प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=8

🔴4. अधिवास प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=5

🔴5. वाहन चालक प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=6

🔴6. विवाह प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=3

🔴7. मृत्यू प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=2

अर्ज करें :
🔴1. पॅन कार्ड
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=15

🔴2. Tan कार्ड
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=3

🔴3. रेशन कार्ड
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=7

🔴4. पासपोर्ट
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=2

🔴5. मतदाता सूची में नामंकन
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=10

रजिस्ट्रेशन:
🔴1. जमीन / मालमत्ता
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=9

🔴2. वाहन
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=13

🔴3. राज्य रोजगार एक्सचेंज
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=12

🔴4. नियोक्ता
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=17

🔴5. कंपनी
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=19

🔴6. .IN डोमेन
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=18

🔴7. GOV.IN डोमेन
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=25

चेक / ट्रॅक:
🔴1. केंद्र सरकार गृहनिर्माण प्रतीक्षा सूची स्थिती
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=9

🔴2. चोरी गये वाहन की स्थिती
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=1

🔴3. भूमि अभिलेख
http://www.india.gov.in/landrecords/index.php

🔴4. भारतीय न्यायालय
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=7

🔴5. न्यायालयों के आदेश (JUDIS)
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=24

🔴6. दैनिक कोर्ट ऑर्डर / प्रकरण स्थिती
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=21

🔴7. भारतीय संसद नियम
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=13

🔴8. परिक्षा परिणाम
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=16

🔴9. स्पीडपोस्ट स्थिती
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=10

🔴10. ऑनलाइन खेती बाजार भाव
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=6

पुस्तक / चित्र / लॉज:
🔴1. ऑनलाईन रेल्वे टिकट
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=5

🔴2. ऑनलाईन टिकट
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=4

🔴3. आयकर
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=12

🔴4. केंद्रीय दक्षता आयोग शिकायत (CVC हा)
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=14

योगदान:
🔴1. प्रधानमंत्री सहयोग निधी
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=11

एनी:
🔴1. इलेक्ट्रॉनिक पत्र
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php?service=20

ग्लोबल नेव्हिगेशन
🔴1. नागरिक
http://www.india.gov.in/citizen.php

🔴2. व्यवसाय)
http://business.gov.in/

🔴3. ओव्हरसीज
http://www.india.gov.in/overseas.php

🔴4. सरकार
http://www.india.gov.in/govtphp

🔴5. भारत को जानें
http://www.india.gov.in/knowindia.php

🔴6. क्षेत्र
http://www.india.gov.in/sector.php

🔴7. संचयीका
http://www.india.gov.in/directories.php

🔴8. दस्तऐवज
http://www.india.gov.in/documents.php

🔴9. अर्ज
http://www.india.gov.in/forms/forms.php

🔴10. कायदे
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🔴11. नियम
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किसी को भी कभी भी जरूरत पड़
सकती है।

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2015

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 5 कविताएं


अटल बिहारी वाजपेयी की 5 कविताएं


नई दिल्ली. साल 2014 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जैसे ही यह सूचना साझा की गई, उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज उनका 91 वां जन्मदिन मनाया जा रहा है।

अटल भारत में दक्षिणपंथी राजनीति के उदारवादी चेहरा रहे और एक लोकप्रिय जननेता के तौर पर पहचाने गए। लेकिन उनकी एक छवि उनके साहित्यिक पक्ष से भी जुड़ी है। अटल बिहारी वाजपेयी एक माने हुए कवि भी हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में कई कविताएं लिखीं और समय-दर-समय उन्हें संसद और दूसरे मंचों से पढ़ा भी। उनका कविता संग्रह 'मेरी इक्वावन कविताएं' उनके समर्थकों में खासा लोकप्रिय है। इस मौके पर पेश हैं, उनकी चुनिंदा कविताएं.....

1. क़दम मिला कर चलना होगा

बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में,
अगर असंख्यक बलिदानों में,
उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,
उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढ़लना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

कुछ काँटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।
क़दम मिलाकर चलना होगा।

---------------------


ठन गई! मौत से ठन गई!  
जूझने का मेरा इरादा न था, 
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,  
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, 
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।  
मौत की उमर क्या है? 
दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, 
आज कल की नहीं।  
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ, 
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ? 
तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ, 
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।  
मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र, 
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।  
बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं, 
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।  
प्यार इतना परायों से मुझको मिला, 
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।  
हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये, 
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।  
आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है, 
नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।  
पार पाने का क़ायम मगर हौसला, 
देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई। 
मौत से ठन गई।
---------------------



ख़ून क्यों सफ़ेद हो गया?
भेद में अभेद खो गया।बँट गये शहीद, 
गीत कट गए,कलेजे में कटार दड़ गई।
दूध में दरार पड़ गई। 
खेतों में बारूदी गंध,
टूट गये नानक के छंदसतलुज सहम उठी, 
व्यथित सी बितस्ता है।
वसंत से बहार झड़ गई 
दूध में दरार पड़ गई। 
अपनी ही छाया से बैर,
गले लगने लगे हैं ग़ैर,ख़ुदकुशी का रास्ता, 
तुम्हें वतन का वास्ता।
बात बनाएँ, बिगड़ गई।
दूध में दरार पड़ गई।
-------------

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, 
भारत जमीन का टुकड़ा नहीं,
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है।
हिमालय मस्तक है, 
कश्मीर किरीट है,
पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं।
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं।
कन्याकुमारी इसके चरण हैं, 
सागर इसके पग पखारता है।
यह चन्दन की भूमि है, 
अभिनन्दन की भूमि है,
यह तर्पण की भूमि है, 
यह अर्पण की भूमि है।
इसका कंकर-कंकर शंकर है,
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है।
हम जियेंगे तो इसके लिये

मरेंगे तो इसके लिये।

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, 
भारत जमीन का टुकड़ा नहीं,
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है।
हिमालय मस्तक है, 
कश्मीर किरीट है,
पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं।
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं।
कन्याकुमारी इसके चरण हैं, 
सागर इसके पग पखारता है।
यह चन्दन की भूमि है, 
अभिनन्दन की भूमि है,
यह तर्पण की भूमि है, 
यह अर्पण की भूमि है।
इसका कंकर-कंकर शंकर है,
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है।
हम जियेंगे तो इसके लिये
मरेंगे तो इसके लिये।


गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

केजरीवाल : डी डी सी ए बहाना है, असली मकसद राजेन्द्र कुमार बचाना हे।




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आआपा का झूठ तार-तार
तारीख: 21 Dec 2015
- प्रतिनिधि


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी के बाद इसे बदले की राजनीति बताते हुए हाय तौबा कर राजनैतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में जुटे केजरीवाल ने अपने 49 दिनों के कार्यकाल में भी उन्हें प्रधान सचिव बनाया था। वह केजरीवाल के कितने करीब हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाना चाहिए। राजेंद्र कुमार दिल्ली सरकार में परिवहन और माध्यमिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में काम कर चुके हैं। वह दिल्ली सरकार में ऊर्जा सचिव भी रहे हैं।
करीबी ने किया कबाड़ा
जानकारी के अनुसार कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी और पसंदीदा अधिकारियों में रहे दिल्ली संवाद आयोग के पूर्व सचिव आशीष जोशी की शिकायत पर ही राजेंद्र कुमार के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इस मामले की शुरुआत तब से हुई जब जोशी को केंद्र सरकार से प्रतिनियुक्ति द्वारा ‘दिल्ली अरबन शेल्टर इंपू्रवमेंट बोर्ड’ के वित्त विभाग में बतौर सदस्य नियुक्त किया गया था। फरवरी में जब केजरीवाल दोबारा सत्ता में आए तो जोशी को केजरीवाल की टीम में बुद्धिजीवी के तौर पर उनका सबसे करीब माना जाने लगा था। दिल्ली संवाद आयोग की नौ सदस्यों की कमेटी में अरविंद केजरीवाल अध्यक्ष और आशीष खेतान उपाध्यक्ष बने।
इसके बाद आशीष खेतान और जोशी के बीच विवाद होने पर जोशी ने अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि आआपा के कार्यकर्ता और उच्च पदों पर बैठे हुए कई नेता उन्हें परेशान कर रहे हैं। अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करने की आदत के चलते आआपा ने जोशी के इस दावे को एक सिरे से खारिज कर दिया। इस वर्ष जून में जोशी ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए राजेंद्र कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा से शिकायत की थी। आशीष जोशी ने राजेंद्र कुमार पर शिक्षा और आईटी विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान बेनामी कंपनियां बनाकर वित्तीय धांधली किए जाने का आरोप लगाया था। गत 16 नवंबर को राजेंद्र कुमार पर सीबीआई की छापेमारी को लेकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेसवार्ता की लेकिन जब मीडिया ने उनसे पूछा कि राजेंद्र कुमार को लेकर ‘ट्रांसपरेसी इंटरनेशनल’ ने गत मई में मुख्यमंत्री केजरीवाल को पत्र लिखा था तो आपने इसकी जांच क्यों नहीं कराई थी? इस पर वे प्रेसवार्ता बीच में छोड़कर चले गए। वहीं सीबीआई ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय की फाइलें जब्त करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस मामले में सीबीआई प्रवक्ता देवप्रीत सिंह ने कहा है कि ऐसी एक भी फाइल जब्त नहीं की गई है, जो मामले से संबंधित नहीं हैं। छापे के दौरान स्वतंत्र गवाह मौके पर मौजूद थे और उनके सामने ही सभी दस्तावेज जब्त किए गए हैं। छापे में नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया है। जब्त सभी दस्तावेजों की सूची जल्द ही न्यायालय को सौंप दी जाएगी। उन्होंने सीबीआई द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय और आसपास के कमरों में न जाने देने के आरोपों को भी खारिज किया है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट कहा है कि छापा केवल मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार और उनके निजी सहयोगी के कमरे तक सीमित था और केवल उन्हीं दो कमरों में लोगों के आने-जाने पर रोक थी। मुख्यमंत्री के कार्यालय समेत सभी जगहों पर आने-जाने की पूरी आजादी थी।
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CBI ने प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार से 5 ऑडियो क्लिप बरामद किए  

Last Update: 24 Dec 2015
http://www.ibc24.in/Story.aspx?vid=6590
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार पर सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. उनके व्यक्तिगत ईमेल आईडी से पांच ऑडियो क्लिप बरामद हुई है. इसमें कथित सौदों को लेकर बातचीत होने का शक है. सीबीआई इस ऑडियो क्लिप की जांच करा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, बरामद की गई ऑडियो क्लिप 2012 से 2013 के बीच की हैं. इसमें वह अपने सहयोगियों को एक निजी कंपनी एंडेवर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में हेरफेर करने के बारे में कथित निर्देश दे रहे हैं. उन्होंने अपने अधिकतर निर्देश ऑडियो क्लिप के जरिए ही भेजा था.
सीबीआई ईमेल आईडी से बरामद ऑडियो क्लिप से राजेंद्र कुमार की आवाज की जांच करा रही है. इसमें अभी फाइनल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों की माने तो आवाज पूरी तरह राजेंद्र कुमार की आवाज से मैच कर रही है, जो कि उनके लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकती है.

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केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के 

खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा सकती है सीबीआई

Reported by Bhasha , Last Updated: गुरुवार दिसम्बर 24, 2015
http://khabar.ndtv.com/news

नई दिल्‍ली: सीबीआई ने ऐसे दस्तावेज मिलने का गुरुवार को दावा किया जो आईसीएसआईएल के जरिए दिल्ली सरकार में की गयी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की ओर संकेत करते हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाने पर वह विचार कर रही है।

एजेंसी सूत्रों ने कहा कि उन्हें दिल्ली सरकार में भर्ती के संबंध में चार फाइलें मिली हैं। एक फाइल डाटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती से संबंधित है और इसमें कई पन्ने गायब मिले हैं। इस वजह ने एजेंसी को भर्ती प्रक्रिया में गहन जांच के लिए प्रेरित किया।

कुमार के खिलाफ सीबीआई अभी पांच मामलों में जांच कर रही है। ये मामले 2009 से 2014 के बीच के हैं। इस दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार में विभिन्न पदों पर काम किया।

सूत्रों ने कहा कि जांच का विस्तार किया जा सकता है और इसमें और अधिकारियों और भर्ती प्रक्रियाओं को शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि किसी भी बात को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और आगे की कोई भी कार्रवाई कुमार से आगे पूछताछ के दौरान सामने आने वाले ब्यौरे पर निर्भर करेगी।

उन्होंने कहा कि कुमार को एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा क्योंकि एजेंसी को पांच ऑडियो क्लि‍पिंग मिले हैं, जिनमें वह कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों को ठेके के करारों में कथित रूप से गड़बडी के लिए मौखिक निर्देश दे रहे हैं। सूत्रों ने दावा किया कि कथित क्लि‍पिंग कुमार के ईमेल एकाउंट से मिले हैं और ये उन अधिकारियों पर उनके प्रभाव का संकेत देते हैं जिनके नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं किए गए हैं तथा उन्हें आरोपपत्र में शामिल किया जा सकता है।

सीबीआई ने कहा कि उसने कुमार तथा अन्य के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। अधिकारी के खिलाफ आरोप हैं कि उन्होंने ‘पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिल्ली सरकार के विभागों से ठेके दिलाने में एक खास कंपनी को लाभ पहुंचाया।’ एक निजी कंपिनी को 2007 से 2009 के दौरान पांच ठेकों में कथित तौर पर 9.5 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाने के आरोप में कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक षडयंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सीबीआई ने मामला दर्ज करने के बाद अपने बयान में कहा था कि आरोपी ने आईसीएसआईएल (इंटेलिजेंट कम्यूनिकेशन सिस्टम्स इंडिया लि.) के जरिए कंपनी को कथित तौर पर करीब 9.50 करोड़ रुपये के ठेके दिलाने में मदद की।
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कौन हैं राजेन्द्र कुमार? क्या-क्या हैं भ्रष्टाचार के आरोप?

By: मनोज मलयानिल, वरिष्ठ पत्रकार | 
Last Updated: Tuesday, 15 December 2015 
नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. केजरीवाल ने राजेन्द्र कुमार को अपने 49 दिन के पहले कार्यकाल के दौरान भी प्रधान सचिव बनाया था. राजेंद्र कुमार अरविंद केजरीवाल के कितने करीब हैं इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इसी साल दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने मुख्य सचिव अनिंदो मजुमदार के ऑफिस में ताला डालकर उसे सील कर दिया था और दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर की अनदेखी करते हुए राजेन्द्र कुमार को अपना प्रधान सचिव बनाया था.
राजेन्द्र कुमार दिल्ली सरकार में परिवहन और माध्यमिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में रह चुके हैं. दिल्ली में ऊर्जा सचिव रहते हुए उन्होंने बिजली कंपनियों की मनमानी रोकने को लेकर कई कदम उठाया था. सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधन के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री एक्सलेंसी अवार्ड भी मिल चुका है.

एक तरफ राजेन्द्र कुमार की ईमानदार अधिकारियों के रूप में गिनती होती है वहीं दूसरी तरफ राजेन्द्र कुमार भ्रष्टाचार के कई आरोपों से भी घिरे हैं.

इसी साल 15 जून का मामला है. राजेन्द्र कुमार के खिलाफ दिल्ली डायलॉग के पूर्व सचिव आशीष जोशी ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उनकी शिकायत एंट्री करप्शन ब्रांच से की थी. आशीष जोशी ने एसीबी को पत्र लिखकर राजेन्दर कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे जिसमें राजेन्द्र पर शिक्षा और आईटी विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान बेनामी कंपनियां बनाकर वित्तीय धांधली किये जाने की बात कही गई थी.
जोशी ने शिकायत में लिखा है कि ‘मेरे डीयूएसआईबी का चीफ डिजिटाइलेशन ऑफिसर रहने के दौरान मुझे आईटी विभाग से जुड़े राजेन्द्र कुमार की भ्रष्ट गतिविधियों का पता चला. मुझे दिल्ली सरकार द्वार डीओपीटी के साल 2010 के आदेशों का उल्लंघन करते हुए एकाएक अपने पद से हटा दिया गया. बाद में मैंने राजेन्द्र कुमार और दूसरे लोगों के खिलाफ संसद मार्ग और आईपी एस्टेट पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी’.

आशीष जोशी ने अपने पत्र में लिखा है कि राजेन्द्र कुमार 10 मई 2002 से लेकर 10 फरवरी 2005 तक निदेशक (शिक्षा) रहे. इस दौरान उन्होंने तिमारपुर में कंप्यूटर लैब बनाते हुए अशोक कुमार नाम के शख्स को इसका इंचार्ज नियुक्त किया. बाद में राजेन्द्र कुमार ने दिनेश कुमार गुप्ता और संदीप कुमार के साथ मिलकर एंडीवर्स सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई. गुप्ता शिक्षा विभाग को स्टेशनरी के सामान की सप्लाई करते थे. संपीप कुमार, अशोक कुमार से जुड़े हुए हैं. खास बात ये है कि अशोक कुमार ने 2009 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. अशोक कुमार डीएएसएस कैडर से हैं और उन्होंने राजेन्द्र कुमार के साथ लंबे समय तक काम किया है.
आशीष जोशी के पत्र के मुताबिक साल 2007 में राजेन्द्र कुमार दिल्ली सरकार के आईटी सेक्रेटरी बने और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एंडीवर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ कंपनी को एक पीएसयू यानी सार्वजनिक क्षेत्र की उपक्रम के साथ इंपैनल करा लिया जिससे कि उनकी कंपनी बिना किसी टेंडर के ही सरकारी विभागों के साथ डील कर सके. आरोप है कि बिना टेंडर काम आवंटित किये जान से दिल्ली सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ. जोशी ने मामले में राजेन्द्र कुमार और बाकी लोगों और इसमें शामिल कंपनियों के गठजोड़ की जांच करने की मांग की थी.

राजेंद्र कुमार के खिलाफ दूसरा मामला सीएनजी फिटनेस घोटाले का है. दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) कमर्शियल वाहनों के लिए फिटनेस टेस्ट के दौरान कथित अनियमितता के मामले में आईएएस राजेंद्र कुमार से पहले ही पूछताछ कर चुकी है. दिलचस्प है कि जिस अधिकारी एमके मीणा को निगरानी विभाग का प्रमुख बनने से केजरीवाल ने रोकने की भरपूर कोशिश की थी, उसी अधिकारी ने राजेंद्र कुमार से पूछताछ की थी. बताया जा रहा है कि उनसे इस बारे में पूछताछ हुई है कि उन्होंने सीएनजी फिटनेस घोटाला मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की थी. कहा जा रहा है कि परिवहन सचिव रहते राजेंद्र कुमार ने कार्रवाई नहीं की थी.

क्या है सीएनजी फिटनेस घोटाला ? 
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में सीएनजी किट लगाने के लिए दो कंपनियों को ठेका दिया गया था. आरोप है कि इसमें 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिल्ली सरकार को उठाना पड़ा था. 

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के समय सीएनजी किट लगाने ठेका एक कंपनी को दिया गया था. इसमें कई खामियां मिलीं थी. बिना टेंडर का ठेका दिया गया था. इसमें खर्च सरकार कर रही थी और आमदनी कंपनी ले रही थी. फर्जी फिटनेस टेस्ट करके पैसा लिया जा रहा था. जांच में पाया गया कि 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान दिल्ली सरकार को उठाना पड़ा था .

अरविंद के केजरीवाल के सबसे प्रिय नौकरशाह कहे जाने वाले राजेन्द्र कुमार मूलत: बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं. 48 साल के राजेन्द्र कुमार दिल्ली आईआईटी से बीटेक हैं. राजेन्द्र कुमार झारखंड के नेतरहाट विद्यालय में वर्ष 1979 से लेकर 1984 तक पढ़ाई की है.

      

भारतरत्न अटलजी : ‘‘सु-शासन दिवस’’ : भाषण हेतु बिन्दू

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वापपेयी जन्मदिवस 25 दिसम्बर,(जन्म तिथि 25 दिसम्बर 1924) 


  1. अटल बिहारी वाजपेयी (जन्म: २५ दिसंबर, १९२४)  भारत के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। वे पहले १६ मई से १ जून १९९६ तथा फिर १९ मार्च १९९८ से २२ मई २००४ तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।[1] वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक हैं और १९६८ से १९७३ तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे। कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता का पता चलता है।
  2. सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके हैं और नई दिल्ली में ६-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते हैं।
  3. कोटि - कोटि नमन् श्रद्धेय श्री अटल जी को ।।


‘‘सु-शासन दिवस’’

- डाॅ. बीरूसिंह राठौड 
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भाषण हेतु बिन्दू -

भाजपा ने 1998 का चुनाव सुशासन एवं विकास के एजेंडे पर लड़ा। 1998 से 2004 तक वाजपेयी सरकार ने देष को सुषासन का माडल दिया। अटल जी के 6 वर्षीय शासन का निष्पक्ष आंकलन करेंगे तो उसे स्वीकारना ही होगा। श्री अटल जी का शासन उपलब्धियों से भरा था। 6 वर्षीय शासन, सुषासन, विकास और गठबंधन का माडल बना। वाजपेयी सरकार ने पचास वर्षो की कांग्रेस शासन की जड़ता को तोड़कर भारत को शक्ति और प्रगति के सोपान पर जिस तेज गति से आगे बढ़ाया वह सच तो है पर भारत के आमजन को आश्र्चजनक लगता है। भारत को विकास के पथ पर अग्रसर एवं शक्तिशाली और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में ‘‘महत्वपूर्ण देश’’ के रूप में स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य वाजपेयी सरकार ने किया।
सभी बाधाओं के बावजूद राष्ट्र शक्ति का प्रतीक परमाणु बम का विस्फोट किया गया।
अकाल, बाढ़ व पानी की समस्या के स्थाई निदान हेतु 4,70,000 करोड़ रूपयों की नदियों को जोड़ने की योजना चालू की गई।
सरकार के विरूद्ध भ्रष्टाचार की कोई चर्चा तक नहीं थी।
आर्थिक क्षेत्र में सरकार ने आधारभूत ढांचे, राजमार्गों, ग्रामीण सड़कों, सिचांई, ऊर्जा पर ध्यान केन्द्रित किया।
कम्प्यूटर साॅफटवेयर में भारत को सुपर पाॅवर बनाया।
मुद्रास्फिति पर सफलता पूर्वक नियंत्रण रखा। रूपया बहुत मजबूत था, मंहगाई नियंत्रित थी। काला बाजारी खत्म हो गई थी।
कोल्ड स्टोरेज और गोदामों की क्षमता बढ़ गई। ई-गवर्नेंस का पहला प्रयोग सफल रहा।
50 वर्षों में केवल एक करोड़ छियासी लाख (1,86,00,000) टेलीफोन कनेक्शन स्वीकृत किये गये थे। पांच वर्षो में तीन करोड़ से भी अधिक टेलीफोन कनेक्शन दिए।
पांच वर्षो के दौरान तीन करोड़ पचास लाख (3,50,00,000) गैस कनेक्शन जारी किए गये जबकि 40 वर्षो में केवल तीन करोड़ सैंतीस लाख (3,37,00,000) कनेक्शन ही जारी किये गए थे।
2 वर्षों में दो करोड़ सत्तर लाख (2,70,00,000) किसानों को ‘‘क्रेडिट कार्ड’’ जारी किये गए। जिनके द्वारा उन्हें 50,000 करोड़ रूपये से अधिक का ऋण वितरित किया गया।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार जो 1998 में 32.5 बिलियन अमरीकी डाॅलर था, वह 90 बिलियन अमेरिकी डाॅलर से अधिक हुआ।
रोजाना पांच किलोमीटर लंबाई की दर से चार और छह लेन वाली 14,846 किलोमीटर लंबी सड़कों का राष्ट्रीय राजमार्ग निर्मित किया जा रहा था, जबकि 50 वर्षो के दौरान चार लेने वाली सिर्फ 556 किलोमीटर लंबी सड़कों का राष्ट्रीय राजमार्ग निर्मित हुआ था।
‘‘हुडको’’ द्वारा कुल 10,390 करोड़ रूपये आवास निर्माण हेतु स्वीकृत किये गये। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद गरीबों हेतु 70 लाख अतिरिक्त आवास के निर्माण के लिए ऋणों की स्वीकृति की।
भाजपा सरकार द्वारा चलाई जा रही अन्त्योदय अन्न योजना गरीबों के लिए विश्व का सबसे बड़ा अनाज सुरक्षा कार्यक्रम था, जिससे 1.5 करोड़ परिवार लाभांवित हुए है।
श्री अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए भाजपा ने 2014 का चुनाव श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सुषासन एवं विकास के एजेंडे पर लड़ा। भारत की जनता को हमारा वादा सरकार पर भरोसा वापस लाने का था। हमारे पहले वर्ष में भारत सरकार ने यह विष्वास दिलाया कि व्यवस्था परिणाम दे सकती है। यह परिवर्तन कल्याण, सुरक्षा और सम्मान के तीन स्तंभों पर आधारित है।
कल्याण - वंचितों, पिछड़ों एवं गरीबों की सरकार, जो उनके कल्याण के लिए अंत्योदय पर दृढ़ विष्वास के साथ कृत संकल्प हैं।
सुरक्षा - सुरक्षा के प्रति कड़ा रूख, चाहे महिला सुरक्षा का विषय हो या राष्ट्र के समक्ष किसी चुनौती का, डटकर जवाब देना।
सम्मान - हर व्यक्ति एवं राष्ट्र में सम्मान का भाव, भारत का विष्व में आषा एवं विष्वास की किरण का उभरना।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सही कहा है -
‘‘सरकार वो है, जो गरीबों के बारे में सोचे, गरीबों की सुने और गरीबों के लिए हो।
इसलिए, यह सरकार, करोंड़ों युवाओं, गरीबों, माताओं, बहनों और जो अपने स्वाभिमान एवं सम्मान के लिए संघर्षरत हैं, उनको समर्पित है।
इस देष के जो गरीब, किसान, जनजातीय, दलित, शोषित एवं पीडि़त - यह सरकार उनके लिए, उनकी आकांक्षाओं के लिए हैं और यह हम सब का दायित्व है। ’’
सबका साथ, सबका विकास
जनजातियाॅं के सर्वांगीण विकास के लिए बनबंधु कल्याण योजना
अनुसूचित जातियों के उद्यमियों को 2 नई योजनाओं के माध्यम से आसान वित्तीय उपलब्धता
डाॅ. बाबा साहेब अम्बेडकर स्मारक के लिए मुम्बई में जमीन आवंटित
श्रमिकों को लाभ-ईपीएस के अन्तर्गत एक हजार रूपये की पेंशन की गारंटी तथा यूनिवर्सल एकाउंट नम्बर
कन्या सशक्तिकरण के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम
सुकन्या समृद्धि योजना के अन्तर्गत 9.2 प्रतिशत कर रहित ब्याज पर विशेष बचत खाता 43 लाख खाते खुले
स्वच्छ - स्वस्थ- षिक्षित भारत
मिशन इन्द्रधनुष -35 लाख शिशुओं का इसके अन्तर्गत टीकाकरण
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित
एक समर्पित मंत्रालय के माध्यम से उत्कृष्ट योजनाओं द्वारा स्किल इंडिया के लक्ष्य की ओर अग्रसर। छात्रों के लिए प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी कार्यक्रम
राष्ट्रीय स्वच्छ भारत मिशन तथा नमामि गंगे मिशन
गरीबी के विरूद्ध लड़ाई - गरीबों का सषक्तीकरण
प्रधानमंत्री जन धन योजना, जीवन एवं दुर्घटना बीमा, अटल पेंशन योजना, अटल इनोवेशन मिशन,
रोजगार निर्माण हेतु मेक इन इंडिया
भारत अब विश्व की सबसे तेज वाली अर्थव्यवस्था

अन्नदाता मुक्ती भव - किसानों का कल्याण
प्राकृतिक आपदा - जरूरत के समय राहत, हर खेत को पानी, नीम कोटेड यूरिया, नई यूरिया नीति
मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान टीवी, राष्ट्रीय गोवंश मिशन, आसान ऋण उपलब्धता
आधारभूत संरचना-राष्ट्र के आधार का निर्माण
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 24ग्7 बिजली उपलब्ध कराने के लिए समर्पित योजना प्रक्रियाधीन
कोयला उत्पादन,ऊर्जा और ट्रांसमिशन क्षमता में अतिरिक्त बढ़ोतरी
सड़क सुरक्षा, सड़क निर्माण, स्मार्ट सिटी मिषन, बंदरगाह विकास, शहरी विकास,
स्वच्छ, पारदर्षी एवं भ्रष्टाचार मुक्त सरकार
व्यवस्था में सुधार - टीम इंडिया, नीति आयोग,
सुराज संकल्प व सुषासन को पूरा करने के लिए वर्तमान वसुंधरा सरकार प्रतिबद्ध है। इसी पवित्र उद्देष्य को ध्यान में रखते हुए हमने 13 दिसम्बर, 2013 को जनसेवा का अवसर मिलने के साथ ही सर्वप्रथम सुराज संकल्प पत्र को नीति पत्र के रूप में स्वीकार किया। इसी के आधार पर हमने राज्य की विकास नीतियों, कल्याणकारी कार्यक्रमों को बनाने का फैसला किया।
राजस्थान के नवनिर्माण की परिकल्पना के साथ हमारी सरकार राजस्थान विजन-2020 तैयार कर इस दिषा में निरन्तर आगे बढ़ रही है। हमारा लक्ष्य विकास के सभी मापदण्डों की प्राथमिकताओं को तय करते हुए विकास दर में वृद्धि करने, मातृ-मृत्यू दर में कमी लाने, स्कूलों में नामांकित बच्चों को स्कूल छोड़ने से रोकने जैसी अनेक चुनौतियों का मुकाबला करते हुए राज्य का चहुंमुखी विकास करना है।
राज्य सरकार ने दो वर्ष के दौरान प्रदेष के समग्र विकास की दृष्टि से आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ बनाने के साथ ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई, सड़क विकास, पेयजल, जल संसाधन, नगरीय विकास, षिक्षा, चिकित्सा तथा सामाजिक सुरक्षा आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेष में निवेष को बढ़ावा देने के लिए नई निवेष नीति तथा नई सौर ऊर्जा नीति लागू की गई है। 15 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देष्य से कौषल विकास का वृहद विकास कार्यक्रम लागू किया है।
हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी के मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस के दृष्टिकोण के अनुरूप हमारी सरकार सुषासन की दिषा में कदम बढ़ा रही है। जनता से सीधा सम्पर्क स्थापित करने के उद्देष्य से संभाग स्तर पर ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम शुरू किया है। भरतपुर, बीकानेर तथा उदयपुर संभाग में गांव-गांव जाकर सरकार आमजन की समस्याओं से रूबरू हुई और उनके समाधान के प्रयास किए। राजकीय सेवाओं की बेहतर डिलिवरी तथा महिला सषक्तीकरण की दृष्टि से भामाषाह योजना को पुनः शुरू किया गया। श्रम कानूनों में ऐतिहासिक संषोधन किए गए, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना की जा रही है। स्वच्छ राजस्थान - स्वच्छ भारत के मिषन को सभी के सहयोग से पूरा करने के लिए हम दृढ़ संकल्पित हैं।
विकास व सुषासन ही सरकार का मूल मंत्र है। प्रदेष की 36 की 36 कौमों के विकास के लिए हम वचनबद्ध हैं। दो वर्ष के दौरान पिछड़े एवं कमजोर वर्गों, युवाओं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति-जनजाति, किसानों, पषुपालकों के उत्थान के लिए नीतियों और कार्यक्रमों को नया मोड़ दिया गया है। आधुनिक और प्रगतिषील राजस्थान के नवनिर्माण की दिषा में हमारी सरकार प्राण-प्रण से जुटी हुई है।


श्रीमती वसुंधरा राजे सरकार के सुशासन के दो वर्ष


राजस्थान सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल में दूरदर्शी सोच के साथ कई पहल और बदलाव किये जिससे लोगों को उनका हक मिला, सुविधाएं बढ़ी, महिलाएं सशक्त हुई, युवा प्रशिक्षित हुए और राज्य में रोजगार के नये अवसर पैदा हुए। हर क्षेत्र और हर वर्ग के विकास के साथ राजस्थान आज उन्नति की राह पर अग्रसर है...
1 सरकार आपके द्वार - में सरकार ने आम जन तक पहुंच कर 3 लाख परिवेदनाएं निस्तारित की ।
2 न्याय आपके द्वार- से लाखों लोगों को मुकदमों से छुटकारा 21.43 लाख राजस्व प्रकरण निस्तारित।
3 35,000 ई-मित्र/सीएससी पर अब 80 विभागों की 200 सेवाएं घर के पास उपलब्ध ।
4 80,868 कृषि एवं 31,561 कुटी ज्योति कनेक्शन जारी।
5 भामाशाह योजना- 1 करोड़ से ज्यादा महिलाएं बनी ‘‘परिवार की मुखिया’’ 3.40 करोड से ज्यादा लोगों का नामांकन।
6 स्वच्छ भारत-स्वच्छ राजस्थान: 22.18 लाख शौचालय निर्मित और 1128 ग्राम पंचायतें खुले में शौच से मुक्त।
7 भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना -लागू की जा रही है। रू.30,000 से 3 लाख तक का इलाज, 1 करोड़ परिवारों को होगा लाभ।
8 71 स्वामी विवेकानंद माॅडल स्कूल प्रारंभ, हर ग्राम पंचायत पर होगा आदर्श विद्यालय।
9 5 लाख छात्राओं को साईकिल वितरण।
10 रोजगार- 60 हजार नियुक्तियां, 1 लाख नियुक्तियां प्रक्रिया में, 3 लाख युवा प्रशिक्षित।
11 रिसर्जेंट राजस्थान- से 3.21 लाख करोड़ रूपये का निवेश प्रस्तावित, 2 लाख 50 हजार नए रोजगार के अवसर।
12 नई सौर ऊर्जा नीति- किसान अपनी जमीन सीधे लीज पर दे सकते हैं।
13 ग्रामीण गौरव पथ- ग्राम पंचायतों में ग्रामीण गौरव पथ -1185 कार्य पूर्ण
14 भाजपा प्रदेश कार्यालय में मंत्रीमंडल के सदस्यों द्वारा हफ्ते में चार दिन कार्यकर्ता जनसुनवाई।