असहिष्णुता केवल सियासी मुद्दा : चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर


असहिष्णुता केवल सियासी मुद्दा : चीफ जस्टिस

http://www.datelineindia.com



नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा है कि देश में असहिष्णुता नहीं है.यह केवल सियासी मुद्दा है। उन्होंने कहा कि जब तक देश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट है, किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि इस देश में कई धर्मों के लोग रहते हैं. दूसरे धर्मों के लोग यहां आए और फले-फूले. यह हमारी विरासत है. बाकी सब धारणा की बात है.

सीजेआई ठाकुर ने कहा कि मैं एक ऐसे संस्थान का नेतृत्व कर रहा हूं जो कानून का शासन सुनिश्चित करता है. जब तक कानून है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता है, तब तक मुझे लगता है कि हम समाज के हर तबके के हर शख्स के अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम हैं.

सीजेआई ने लोगों से एक अपील भी की. कहा- ‘मैं आप लोगों से अपील करता हूं कि आपस में एक-दूसरे के लिए प्रेम रखें.‘ उन्होंने समाज में वैर भाव कम करने और हर समय सबको मिलजुल रहने का संदेश दिया.

जस्टिस ठाकुर ने केजरीवाल सरकार के प्रदूषण कम करने के नए फार्मूले पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों को कार पूलिंग सिस्टम से चलना चाहिए. इससे लोगों में सही संदेश जाएगा. यह कोई त्याग नहीं है, बल्कि लोगों को प्रोत्साहित करने का एक प्रयास है.
-----------------
असहिष्णुता राजनीतिक दलों के लिए

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने आज कहा कि असहिष्णुता राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण विषय हो सकता है, लेकिन लोगों को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि शीर्ष अदालत कानून के शासन के लिए मौजूद है।  

न्यायमूर्ति ठाकुर ने यहां मीडियाकर्मियों के साथ चाय पर चर्चा के दौरान कहा कि देश में असहिष्णुता को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है, लेकिन इसे लेकर देशवासियों को तब तक डरने की कोई जरूरत नहीं है, जब तक उच्चतम न्यायालय मौजूद है और कानून के शासन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता भी।  

उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का काम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना है और देश में जब तक यह कोर्ट है तब तक कानून का शासन मौजूद रहेगा और देशवासियों को डरने की कोई जरूरत नहीं है।’ गत तीन दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेने के बाद न्यायमूर्ति ठाकुर की मीडियाकर्मियों से यह पहली बातचीत थी।  

गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से असहिष्णुता को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है और इसके मद्देनजर 50 से अधिक साहित्यकारों, कलाकारों, वैज्ञानिकों और फिल्मकारों ने अपने पुरस्कार लौटाये हैं। इन सभी का आरोप है कि केन्द्र सरकार जानबूझकर दक्षिणपंथी ताकतों को बढ़ावा दे रही है। हालांकि केन्द्र सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है।
--------------------
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने असहिष्णुता को बताया सियासी मुद्दा,- बोले, 'किसी को डरने की जरूरत नहीं'
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस  टीएस ठाकुर ने असहिष्णुता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में असहिष्णुता नहीं है और ये केवल एक सियासी मुद्दा है। देश में कानून का राज है इसलिए किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीफ जस्टिस ने कहा कि इस देश में कई धर्मों के लोग रहते हैं। कई संस्कृतियां यहां विकसित हुई है, यही हमारी विरासत है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि असहिष्णुता सियासी बहस के आयाम हो सकते हैं, लेकिन देश में जब तक कानून व्यवस्था बनाए रखने  के लिए सुप्रीम कोर्ट है जब तक किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।

ठाकुन ने कहा कि जब तक कानून है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता है, तब तक मुझे लगता है कि हम समाज के हर तबके के हर शख्स के अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम हैं।

चीफ जस्टिस लोगों ने अपील करते हुए कहा कि आपस में एक-दूसरे के लिए प्रेम रखें, उन्होंने समाज में वैर भाव कम करने और हर समय सबको मिलजुलकर रहने का संदेश दिया।

टिप्पणियाँ

इन्हे भी पढे़....

सेंगर राजपूतों का इतिहास एवं विकास

आन बान और शान का पर्व भुजरिया

कण कण सूं गूंजे, जय जय राजस्थान

अर्द्धनारिश्वर स्त्री, समान अस्तित्व का सम्मान

कविता - रक्षाबंधन पर्व नहीं, कर्तव्य है बहन के प्रति

Instead of Opposing the RSS, Intolerant Americans Should Look Within — Arvind Sisodia

जनसेवा, जनसंपर्क और जनआशीर्वाद के बल पर भाजपा बनाएगी निकायों में बोर्ड - अरविन्द सिसोदिया

तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।

हिंदुत्व ही सबसे ज्यादा महिला सम्मान देता है - अरविन्द सिसोदिया

RTI द्वितीय अपील